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'विवाद से विश्वास योजना' क्या है, जिसके जरिए मोदी सरकार एक तीर से दो निशाने लगा रही है

विवाद से विश्वास योजना बिल, 2020. लोकसभा में पास हो गया है. 4 मार्च को. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 फरवरी, 2020 को लोकसभा में ये बिल पेश किया था. सरकार इस बिल के जरिए डायरेक्ट टैक्स के बकाया मामलों के निपटारे की उम्मीद कर रही है. ये मामले नौ लाख करोड़ रुपयों से ज्यादा के हैं. हरियाणा के इस साल के बजट का नौ गुना. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने 28 फरवरी को एक लाख 42 हज़ार 343 करोड़ का बजट पेश किया था.

सरकार का मानना है कि मामले समाप्त होने से उसके खजाने में मोटा पैसा आएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बिल के जरिए सरकार एक तीर से दो निशाने लगाना चाह रही है. वो खजाने में पैसे लाने के साथ ही टैक्स के पुराने मामलों को भी खत्म करना चाहती है. आइए जानते हैं इस बिल की पूरी ABCD-

# क्या है ‘विवाद से विश्वास योजना बिल 2020’

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को बजट पेश किया था. बजट में इस बिल को लेकर ऐलान किया था. कहा था कि ये ‘सबका विश्वास योजना’ का एक्सटेंडेड रूप है. तो पहले संक्षेप में जान लेते हैं कि ‘सबका विश्वास योजना’ क्या थी.

ये योजना इनडायरेक्ट टैक्स को लेकर थी. यानी ऐसा टैक्स, जो सीधे जनता से नहीं लिया जाता, बल्कि उत्पादन, आयात (बाहर से सामान मंगाने), निर्यात (बाहर सामान भेजने) पर लगता है. जैसे- GST, बिक्री कर (Sales Tax), सर्विस टैक्स (Service Tax), उत्पाद कर (Excise Duty), वैट (VAT) आदि. ज्यादातर चीज़ों पर अब ग्राहकों को सिर्फ GST देना होता है.

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में कहा गया कि ‘सबका विश्वास योजना’ से सरकार के खजाने में 39,500 करोड़ रुपये आने का अनुमान है. सरकार के पास 15 जनवरी तक 1.90 लाख करोड़ एप्लीकेशन आई थीं. ये एप्लीकेशन 90 हजार करोड़ रुपये के बकाया टैक्स से जुड़ी हैं.

इस योजना की बड़ी कामयाबियों में से एक मॉन्डलेज इंडिया फूड्स प्राइवेट लिमिटेड का केस था. कैडबरी बनाने वाली मोंडलेज इंडिया ने ‘सबका विश्वास योजना’ के तहत 439 करोड़ रुपये टैक्स के रूप में चुकाए थे. उस पर 580 करोड़ रुपये का टैक्स और पेनल्टी बकाया थी. ये मामला लंबे समय से चल रहा था.

# निर्मला सीतारमण ने 5 फरवरी को ‘विवाद से विश्वास योजना’ बिल को संसद में रखते हुए कहा था-

हमारी पिछली सरकार ने टैक्स से जुड़े मामलों में कमी लाने के लिए कई कदम उठाए. पिछले बजट में इनडायरेक्ट टैक्स के मामलों को निपटाने के लिए ‘सबका विश्वास स्कीम’ लाई गई थी. इससे 1.89 लाख केस निपटाए गए थे. वर्तमान में देश के अलग-अलग जगहों पर 4.83 लाख डायरेक्ट टैक्स के मामले पेंडिंग हैं. ये मामले कमिश्नर से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक चल रहे हैं.

अब जानते हैं कि इस बिल में कौन-से मामले होंगे, कैसे काम करेगा और पेमेंट कैसे होगा.

# कौन-कौन से मामले होंगे शामिल

– बकाया टैक्स का मामला
– टैक्स पर बकाया ब्याज का मामला
– TDS और TCS  से जुड़े मामले
– नोटबंदी के समय के मामले
– कमिश्नर, इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे टैक्स के मामले

शर्त यह है कि ये सभी मामले 31 जनवरी, 2020 तक के ही होने चाहिए. 

सरकार टैक्स के मामलों को निपटाने के साथ ही खजाने को भरना चाहती है. (Photo: India Today)

सरकार टैक्स के मामलों को निपटाने के साथ ही खजाने को भरना चाहती है. (Photo: India Today)

# कैसे काम करेगा यह बिल

बिल पास होने के बाद :

– इनकम टैक्स विभाग एक अथॉरिटी बनाएगा
– अथॉरिटी में टैक्सपेयर को मामले का डिक्लेरेशन देना होगा
– अथॉरिटी टैक्स, पेनल्टी और ब्याज देनदारी तय करेगी
– अथॉरिटी ने जो रकम तय की होगी उसे चुनौती नहीं दी जा सकेगी

# कितना पेमेंट करना होगा

– 31 मार्च, 2020 तक बकाया टैक्स की पूरी रकम जमा करानी होगी.
– 30 जून, 2020 तक पेमेंट करने पर बकाया टैक्स के साथ ही 10 प्रतिशत रकम या टैक्स का ब्याज और जुर्माना- इनमें से जो भी रकम कम हो.

इसे ऐसे समझिए. आप पर 10 हजार रुपये टैक्स बकाया है, तो 31 मार्च तक आप इतनी रकम जमाकर मामला खत्म कर सकते हैं. 31 मार्च के बाद 30 जून तक 10 हजार के साथ ही 1000 रुपये एक्स्ट्रा देने होंगे. अब इसमें ब्याज और जुर्माना 1000 रुपये से जो कम हो, वो देनी होगी.

– अगर ब्याज और पेनल्टी बकाया है, तो 31 मार्च, 2020 तक 25 प्रतिशत रकम देकर केस खत्म कर सकते हैं.
– 31 मार्च के बाद 30 जून तक ब्याज और पेनल्टी का 30 प्रतिशत भुगतान करना होगा.

– इनकम टैक्स छापे के मामले में 31 मार्च तक टैक्स के साथ ही 25 प्रतिशत एक्स्ट्रा रकम देनी होगी.
– 30 जून तक टैक्स के साथ ही 35 प्रतिशत एक्स्ट्रा रकम देनी होगी.

अगर अपीलैट ट्रिब्यूनल में फैसला करदाता के पक्ष में आ चुका है, तो उसे केवल 50 फीसदी ही रकम देनी होगी.


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