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क्या सूरत से चली मजदूरों की ट्रेन को सीवान पहुंचने में नौ दिन लग गए?

देश के अलग-अलग राज्यों में फंसे मजदूरों के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं. लेकिन जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ा, रेलवे और उसकी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे. खबरें आईं कि रेलगाड़ियां कई घंटे लेट चल रही हैं. दावे किए गए कि रेलगाड़ियां रास्ता भटक गईं. इसी बीच एक खबर आई कि सूरत से बिहार के एक सीवान के लिए एक ट्रेन चली. ट्रेन को दो दिन में पहुंचना था, लेकिन यह आठ दिन बाद सीवान पहुंची. इसके बाद हंगामा हो गया. सोशल मीडिया यूजर रेलवे पर बरस पड़े. इस पर रेलवे की ओर से जवाब आया. उसने खबर को झूठा करार दिया.

आइए जानते हैं यह मामला क्या है.

कहां से शुरू हुआ मामला

26 मई को ‘दैनिक भास्कर’ ने श्रमिक ट्रेन को लेकर एक खबर छापी. इसकी हेडिंग थी, ‘दो दिन के बदले नौ दिन में पहुंच रहीं श्रमिक ट्रेनें, भूख प्यास से एक दिन में सात मौतें.’ इसमें अंदर लिखा कि गुजरात के सूरत से 16 मई को सीवान के लिए निकलीं दो ट्रेनें क्रमश: उड़ीसा के राउरकेला और कर्नाटक के बेंगलुरु पहुंच गई. खबर में लिखा है कि वाराणसी रेल मंडल की खोजबीन के बाद ट्रेन का पता चला. जिस ट्रेन को 18 मई को सीवान पहुंचना था, वह नौ दिन के बाद सोमवार, 25 मई को पहुंची. ट्रेन को गोरखपुर के रास्ते सीवान आना था, लेकिन छपरा होकर सोमवार को 2.22 बजे आई. साथ ही इसमें यात्रियों की मौतों के बारे में लिखा था.

2 दिन की जगह 9 दिन में ट्रेन पहुंचने के दावे वाली खबर पर रेलवे प्रवक्ता के ट्वीट का स्क्रीनशॉट. इसमें खबर की फोटो भी लगी है.
2 दिन की जगह 9 दिन में ट्रेन पहुंचने के दावे वाली खबर पर रेलवे प्रवक्ता के ट्वीट का स्क्रीनशॉट. इसमें खबर की फोटो भी लगी है.

रेलवे ने खबर को झूठा बताया

जैसे ही यह खबर आई, रेलवे निशाने पर आ गया. इसके चलते रेलवे ने ट्वीट किया और खबर को गलत बताया. रेलवे प्रवक्ता ने इस खबर की फोटो को पोस्ट करते हुए लिखा,

इस खबर में कई गलतियां हैं और आधा सच लिखा है. सूरत से रवाना हुईं दो ट्रेनें दो दिन में 25 तारीख को सीवान पहुंच गई. इन्होंने नौ दिन का समय नहीं लिया. जिस बच्चे की मौत हुई, वह बीमार था और इलाज के बाद दिल्ली से आ रहा था. मौत की वजह पोस्टमॉर्टम के बिना पता नहीं चल सकती.

रेल मंत्री पीयूष गोयल का भी इस बारे में बयान आया. उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि ट्रेनों के सात और नौ दिन लेने की रिपोर्ट आधारहीन, झूठी और रेलवे कर्मचारियों के प्रयासों को नुकसान पहुंचाने वाली हैं. रेलवे कर्मचारी बिना सोए दिन-रात श्रमिकों को भेजने के लिए काम कर रहे हैं.

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने भी 29 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस खबर पर बात की. कहा कि एक मीडिया रिपोर्ट में सूरत से ट्रेन के नौ दिन में सीवान पहुंचने की बात छपी है. यह फेक न्यूज है. ट्रेन दो दिन के समय में गंतव्य तक पहुंच गई थी. 3840 ट्रेनों में से केवल चार ट्रेनों ने ही गंतव्य तक पहुंचने में 72 घंटे से ज्यादा समय लिया.

खबर में कुछ बदलाव हुए

इधर, भास्कर ने अपनी वेबसाइट पर अभी भी खबर को लगा रखा है. हालांकि इसमें अब ट्रेन के सूरत से रवाना होने की तारीख 16 मई की जगह 17 मई लिखी है. साथ ही ट्रेन के पहुंचने का समय भी नौ दिन से घटकर आठ हो गया है.

श्रमिक ट्रेनों के लगातार लेट और बदले हुए रूटों पर चलने से रेलवे निशाने पर है. (Photo: PTI)
श्रमिक ट्रेनों के लगातार लेट और बदले हुए रूटों पर चलने से रेलवे निशाने पर है. (Photo: PTI)

The Lallantop ने सीवान में ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार चंदन कुमार से बात की. उन्होंने बताया कि उस समय काफी ट्रेनें गुजरात और महाराष्ट्र से आई थीं. इनमें से कुछ ट्रेन लेट थीं. लेकिन नौ दिन लेट आने की जानकारी नहीं है. यहां पर रेलवे और प्रशासन से भी बात की गई. लेकिन किसी ने भी ट्रेन के नौ दिन देरी से आने की पुष्टि नहीं की. उन्होंने बताया कि रेलवे के कुछ सूत्रों ने यह जरूर बताया कि एक ट्रेन लेट थी. वह 24 तारीख को आई थी. उसके यात्री खाने-पीने को लेकर नाराज थे. साथ ही वे लेट होने की शिकायत कर रहे थे.

सूरत से 16 को कोई ट्रेन नहीं चली

ऐसे में सूरत में भी हमने पता किया. ‘इंडिया टुडे’ से जुड़े संजय राठौड़ ने बताया कि सूरत से सीवान के लिए 16 मई को कोई ट्रेन नहीं गई. 17 मई को एक ट्रेन गई. फिर 21 मई को दो ट्रेन गई थीं. इनमें से एक सूरत और दूसरी पास ही के उधना स्टेशन से गई. एक अलसुबह 2.30 बजे और दूसरी सुबह 4 बजे रवाना हुई थी. इनमें से एक ट्रेन 24 को पहुंची थी.

वेस्टर्न रेलवे के पीआरओ सीएनके डेविड ने भी कहा कि 16 मई को कोई ट्रेन सूरत से सीवान नहीं गई. बाकी जो गईं, उनके समय से पहुंचने की जानकारी है.

ईस्ट सेंट्रल रेलवे के सीपीआरओ ने अखबार से जवाब मांगा

ट्रेनों के लेट होने की खबर पटना से छपी थी. ऐसे में पटना में रेलवे अधिकारियों से भी बात की. पटना ईस्ट सेंट्रल रेलवे (ECR) जोन में आता है. इसके सीपीआरओ राजेश कुमार ने कहा कि उन्हें समझ ही नहीं आ रहा कि कोई ऐसी खबर कैसे छाप सकता है. उन्होंने कहा,

सूरत से सीवान के लिए 17 मई को जो ट्रेन चली, वह 18 को ही आ गई थी. 23 मई को रवाना हुई ट्रेन 25 को आ गई. ऐसे में पता नहीं नौ दिन लगने की बात क्यों लिखी गई. ऐसा लगता है कि किसी ने बेडरूम में बैठकर खबर लिख दी. उन्होंने इस खबर के बारे में अखबार को रिजॉइंडर भी भेजा है. लेकिन अभी तक उन्हें इसका जवाब नहीं मिला है.

 

Shramik Special Trains
फोटो: पीटीआई

उत्तर पूर्व रेलवे ने कहा- दो दिन में ही पहुंची ट्रेन

सीवान उत्तर पूर्व रेलवे (NER) के वाराणसी डिवीजन में आता है. ऐसे में NER के सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह से बात की गई. उन्होंने भी ट्रेन के नौ दिन में पहुंचने की खबर को बेबुनियाद बताया. उन्होंने कहा कि 17 मई को जो ट्रेन सूरत से रवाना हुई, वह 18 मई को रात में सीवान पहुंच गई. इसी तरह 21 को रवाना हुईं दो ट्रेनों में से एक 23 को पहुंची और दूसरी 24 को आई.

ऐसे में सूरत से किसी ट्रेन के आठ-नौ दिन में सीवान पहुंचने की खबर की पुष्टि नहीं हुई.


Video: लॉकडाउन में मजदूरों के लिए चली श्रमिक ट्रेन के लेट होने का कारण रेलवे ने बता दिया

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