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बाइडन और पुतिन मिलने को मजबूर क्यों हुए?

आज की शुरुआत थोड़ी रूहानी है. आज हम आपको सुनाएंगे एक आत्मा का क़िस्सा.

ये प्रसंग है एक मशहूर मीटिंग का. दो राष्ट्रपति आमने-सामने बैठे थे. उनमें से एक ने सामने वाले की आंखों में झांककर देखा. क्या दिखा उन्हें? उन्हें दिखी एक आत्मा. जी, आत्मा. ऐसा ख़ुद उन राष्ट्रपति ने कहा था.

ये बात है साल 2001 की. कोल्ड वॉर ख़त्म हुए एक दशक बीत चुका था. इस वक़्त तक पूर्व KGB एजेंट व्लादीमिर पुतिन को रूस की कमान संभाले तीन बरस हो चुके थे. अमेरिका अब रूस के साथ रिश्ते सुधारना चाहता था. इसी सिलसिले में जून 2001 में आयोजित हुआ स्लोवेनिया सम्मेलन. यहां तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश की मुलाकात हुई पुतिन से. और इस मीटिंग के बाद बुश ने पुतिन के बारे में बोलते हुए कहा-

मैंने उनकी आंखों में देखा और मुझे उनकी आत्मा नज़र आई. मुझे वो बहुत स्पष्टवादी और भरोसेमंद लगे. मुझे समझ आया कि वो अपने देश और उसके हितों के प्रति बेहद प्रतिबद्ध हैं.

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन. (तस्वीर: एएफपी)
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन. (तस्वीर: एएफपी)

ये तो था इस आत्मा प्रकरण का पार्ट-वन. इसका एक पार्ट-टू भी है. अमेरिका के ही एक और राष्ट्रपति ने दोबारा पुतिन की आत्मा टटोलने की कोशिश की. क्या दिखा उन्हें? उन्हें आत्मा ही नहीं दिखी. इस बारे में बताते हुए राष्ट्रपति महोदय ने पुतिन से हुई एक मुलाकात का वाकया कुछ यूं सुनाया-

मैं पुतिन के दफ़्तर में था. वहां केवल हम दोनों ही थे. मैंने पुतिन से कहा कि मैंने उनकी आंखों में झांककर देखा है. और मुझे लगता है कि आपके भीतर आत्मा है ही नहीं. मेरे ये कहने पर पुतिन ने मेरी तरफ़ देखा और बोले, हम दोनों एक-दूसरे को समझते हैं.

किसने कही ये बात?

ये बयान दिया अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन ने. इस एक स्टेटमेंट से आपको बाइडन और पुतिन के रिश्तों का अंदाज़ा हो गया होगा. दोनों लीडर्स एक-दूसरे को नापसंद करते हैं. दोनों एक-दूसरे को सार्वजनिक तौर पर कई बार धमका भी चुके हैं.

लेकिन इस खुन्नस के बावजूद दोनों लीडर्स एक-दूसरे से मिलने के लिए राज़ी हुए. 16 जून यानी आज के दिन बतौर राष्ट्रपति बाइडन की पुतिन से पहली मुलाकात हुई. इस तारीख़ में एक ख़ास बात है. आपको बुश का दिया वो आत्मा वाला बयान याद है? वो बात बुश ने पुतिन के साथ हुई एक मीटिंग के बाद कही थी. उस मीटिंग की तारीख़ थी 16 जून, 2001. यानी आज से ठीक 20 साल पहले. जानते हैं, पुतिन ने बतौर राष्ट्राध्यक्ष अब तक कितने अमेरिकी राष्ट्रपतियों का कार्यकाल देख लिया है? जबाव है, पांच. बिल क्लिंटन, जॉर्ज बुश, बराक ओबामा, डॉनल्ड ट्रंप और मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन.

Joe Biden
अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन. (तस्वीर: एपी)

बाइडन और पुतिन की इस मीटिंग का अजेंडा क्या है?

16 जून की मीटिंग पर आने से पहले हम थोड़ा अतीत में चलते हैं. आपको सुनाते हैं तीन महीने पहले का एक वाकया. तारीख़ थी 16 मार्च, 2021. ऑस्ट्रेलिया का एक चैनल है, ABC. उसने प्रेज़िडेंट बाइडन का इंटरव्यू लिया. इसमें ऐंकर ने पुतिन के बारे में दो सवाल पूछे. पूछा कि क्या बाइडन पुतिन को जानते हैं? क्या उन्हें लगता है कि पुतिन हत्यारे हैं? इसपर बाइडन बोले-

Hmm, I do

मतलब- हां, मुझे लगता है. इस जवाब का मतलब था कि बाइडन दोनों सवालों पर हामी भर रहे हैं. वो कह रहे हैं कि हां, मैं पुतिन को जानता हूं. और, ये भी मानता हूं कि वो हत्यारे हैं. इस इंटरव्यू में एक और बड़ी चीज हुई. इसमें बाइडन ने पुतिन को दो बार धमकाया.

इस धमकी का संदर्भ जुड़ा है अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से. पुतिन पर आरोप है कि उन्होंने अमेरिकी चुनावों में दखलंदाज़ी की कोशिश की. इल्ज़ाम है कि 2016 में ट्रंप को जिताने के लिए उन्होंने अमेरिकी चुनाव में सेंधमारी की. डेमोक्रैटिक पार्टी और उसकी उम्मीदवार हेलरी क्लिंटन के ईमेल्स लीक करवाए. इसी तरह 2020 में भी बाइडन को हराने के लिए उन्होंने अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने का जतन किया. ABC के इंटरव्यू में बाइडन इन्हीं आरोपों का ज़िक्र कर रहे थे. उन्होंने कहा कि पुतिन को अपने किए का अंजाम भुगतना होगा. इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि पुतिन हत्यारे हैं. उन्हें इसकी भी सज़ा मिलेगी.

Vladimir Putin
रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन. (तस्वीर: एपी)

इसके जवाब में रूस ने क्या किया?

उसने अमेरिका में नियुक्त अपने राजदूत को वापस बुला लिया. साथ ही, अपने यहां नियुक्त अमेरिकी राजदूत को भी रूस से निकाल दिया. बाइडन के बयान पर पुतिन की भी प्रतिक्रिया आई. मुन्नाभाई के ‘गेट वेल सून’ स्टाइल में पुतिन बोले-

मेरे अमेरिकन समकक्ष ने एक बयान दिया है. इसपर मैं क्या बोलूं? मैं बस इतना ही कहूंगा कि वो जल्द स्वस्थ हो जाएं. मैं व्यंग्य नहीं कर रहा. ये मज़ाक नहीं है. मैं सच में उनके अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करता हूं.

पुतिन ने ये बात मुस्कुराते हुए कही थी. जानकारों ने कहा, उनकी मुस्कान में ताना छुपा था. कैसा ताना? दरअसल अमेरिकी चुनाव के ही समय से रूस की सरकारी मीडिया एक नरैटिव गढ़ने में जुटी थी. उनका दावा था कि बाइडन बीमार हैं. उन्हें डिमेंशिया, यानी भूलने वाली बीमारी है. बाइडन 77 साल के हैं. उनकी उम्र और फ़िटनेस पर भी सवाल उठाए जाने लगे. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बाइडन के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए पुतिन ने दरअसल यही दांव खेला था. वो हाइलाइट करना चाहते थे कि बाइडन दिमागी तौर पर बीमार हैं. दया के पात्र हैं.

नापसंदगी का यही सार्वजनिक इज़हार बाइडन और पुतिन के इक्वेशन की ख़ासियत है. जियो-पॉलिटिक्स में हर देश के अपने दोस्त और दुश्मन होते हैं. किससे दोस्ती है, किससे दुश्मनी, ये जगज़ाहिर होता है. लेकिन इसके बावजूद राष्ट्राध्यक्ष दूसरे देश के लीडर्स पर खुलेआम छींटाकशी करने से बचते हैं. फिर चाहे वो दुश्मन देश का लीडर ही क्यों न हो. मगर बाइडन और पुतिन का केस अलग है. दोनों एक-दूसरे की आलोचना करते हुए कोई कसर नहीं रखते.

एक बार फिर लौटते हैं पुतिन के ‘गेट वेल सून’ वाले बयान पर

इस स्वास्थ्य कामना वाले व्यंग्य के बाद पुतिन का एक और बयान आया. ‘रशिया 24’ टीवी चैनल से बात करते हुए उन्होंने बाइडन को न्योता दिया. कहा कि आओ, बात करते हैं. इस बातचीत के लिए पुतिन ने कुछ शर्तें भी रखीं.

मसलन, बातचीत ऑनलाइन मोड में हो. लाइव हो. पुतिन बोले कि वो वीकेंड पर छुट्टी मनाने जा रहे हैं. उसी छुट्टी के दौरान बाइडन चाहें, तो पुतिन उन्हें बातचीत का समय दे सकते हैं. पुतिन का ये आमंत्रण ललकारने की शैली में आया था. मानो वो कह रहे हों, चलो खुलकर खेलते हैं. पत्रकारों ने पुतिन के इस प्रस्ताव पर बाइडन की राय पूछी. बाइडन ने सीधे से न्योता तो नहीं स्वीकारा. हां, इतना ज़रूर बोले कि कभी-न-कभी तो बात होगी ही.

इतनी तल्ख़ियों और सार्वजनिक छींटाकशी के बाद आख़िरकार 16 जून को पुतिन और बाइडन की मुलाकात हो रही है. कहां हो रही है ये मीटिंग? स्विट्ज़रलैंड में जिनीवा नाम का एक शहर है. यहां लेक जिनीवा नाम की एक झील है. इसके किनारे करीब 300 साल पुरानी एक इमारत है- विला ला ग्रैनीज़. यहीं पर दोनों वर्ल्ड लीडर्स को मिलना है. शुरुआत में स्विट्ज़रलैंड के राष्ट्रपति गाय पारमेलिन इन दोनों का अभिवादन करेंगे. कुछ देर तक बाइडन, पुतिन और पारमेलिन की साझा मीटिंग होगी. फिर पारमेलिन वहां से चले जाएंगे और पुतिन और बाइडन अपनी अलग मीटिंग करेंगे. ख़बरों के मुताबिक, ये मीटिंग चार से पांच घंटे तक चल सकती है.

Guy Parmelin And Joe Biden
स्विट्ज़रलैंड के राष्ट्रपति गाय पारमेलिन के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन. (तस्वीर: एपी)

इस मीटिंग से क्या हासिल होने की उम्मीद है?

ये एपिसोड लिखे जाने तक मीटिंग शुरू नहीं हुई थी. इसलिए कई ब्योरे हम आज नहीं बता सकेंगे. हां, मीटिंग का अजेंडा क्या था? इसे लेकर एक आम राय ज़रूर है. इसी आधार पर हम पांच बड़े संभावित मुद्दों के बारे में ब्रीफ़ में बता देते हैं आपको.

1. न्यू स्टार्ट ट्रीटी: इस समझौते का पूरा नाम है- न्यू स्ट्रैटज़िक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी. शॉर्ट में इसे कहते हैं, न्यू स्टार्ट. ये 1991 में हुई स्टार्ट वन ट्रीटी का नया संस्करण है. फरवरी 2021 में अमेरिका और रूस इसे पांच साल तक बढ़ाने के लिए राज़ी हुए थे. ये ट्रीटी दोनों देशों के बीच हथियारों की होड़ कम करने संबंधी आख़िरी बचा समझौता है. इसके तहत दोनों देश न्यूक्लियर मिसाइलों की डिप्लॉयमेंट की संख्या सीमित करने पर राज़ी हुए थे. उम्मीद है कि जिनीवा मीटिंग के दौरान बाइडन और पुतिन इस समझौते के भविष्य पर विमर्श करें.

2. साइबर हैकिंग: अमेरिका का इल्ज़ाम है कि रूस उसके सरकारी संस्थानों और प्राइवेट कंपनियों पर साइबर अटैक प्रायोजित करवाता है. इनमें हाल ही में अमेरिकी कंपनियों पर हुए रैनसमवेअर अटैक भी शामिल हैं. रैनसमवेअर अटैक मतलब, सिस्टम हैक करके फ़िरौती वसूलना. उम्मीद है कि बाइडन पुतिन से कहें कि रूस इस तरह के आपराधिक हैकर्स को प्रश्रय देना बंद करे. वरना अंजाम के लिए तैयार रहे.

3. अलेक्सी नवल्नी केस: नवल्नी रूस के मुख्य विपक्षी नेता हैं. पिछले साल उनपर केमिकल अटैक हुआ था. इस हमले का इल्ज़ाम सीधे पुतिन पर है. जर्मनी में चले लंबे इलाज के बाद जब नवल्नी रूस लौटे, तो उन्हें अरेस्ट कर लिया गया. आरोप है कि उनपर लगाए गए इल्ज़ाम फर्ज़ी हैं. इस मसले को लेकर बाइडन पहले भी कई बार पुतिन की सार्वजनिक आलोचना कर चुके हैं. जिनीवा बैठक से दो दिन पहले, यानी 14 जून को भी बाइडन ने इसपर बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि अगर नवल्नी की मौत हुई, तो पुतिन के साथ उनके रिश्ते और बिगड़ जाएंगे. ऐसे में तगड़ी उम्मीद है कि बाइडन इस बैठक में नवल्नी का मुद्दा भी उठाएंगे.

Alexei Navalny
अलेक्सी नवल्नी रूस के मुख्य विपक्षी नेता हैं. (तस्वीर: एपी)

4. क़ैदियों की अदलाबदली: ये मुद्दा दोनों पक्षों के अजेंडे में है. अमेरिका के एक पूर्व मरीन पॉल वेलान जासूसी के आरोप में रूस के भीतर 16 साल जेल की सज़ा काट रहे हैं. इसके अलावा ट्रेवर रीड नाम के एक अमेरिकी नागरिक पर शराब पीकर एक रूसी पुलिसकर्मी के साथ मारपीट करने का केस भी है. इस मामले में ट्रेवर नौ साल क़ैद की सज़ा काट रहा है. अमेरिका अपने इन नागरिकों की रिहाई चाहता है. बदले में रूस भी अमेरिकी जेलों में बंद अपने कुछ लोगों को छुड़वाना चाहता है. इसमें कुख़्यात रशियन आर्म्स डीलर विक्टर बाउट और ड्रग तस्कर कॉन्स्टैनटिन यारोशेनको शामिल है.

5. आर्थिक प्रतिबंध: रूस की अर्थव्यवस्था चौपट है. मॉस्को चाहेगा कि पश्चिमी देशों ने उसपर जो सेंक्शन्स लगाए हैं, वो ख़त्म हों. मगर इसके एवज़ में अमेरिका और नाटो मुल्क सीरिया, लीबिया और यूक्रेन के मामलों में जो कमिटमेंट चाहते हैं, वो देने के लिए रूस तैयार नहीं दिखता.

Paul Whelan
अमेरिका के एक पूर्व मरीन पॉल वेलान जासूसी के आरोप में रूस के भीतर 16 साल जेल की सज़ा काट रहे हैं. (तस्वीर: एएफपी)

अब बात करते हैं रिज़ल्ट की?

क्या इस बैठक से कुछ ठोस निकलने की उम्मीद है? जवाब है, नहीं. बाइडन को कार्यभार संभाले अभी 6 महीने भी पूरे नहीं हुए. मगर इतने कम समय में ही रूस और अमेरिका का डिप्लोमैटिक तनाव चरम पर पहुंच गया है. हर महीने कुछ-न-कुछ बड़ा हो रहा है. हमने आपको बताया था कि मार्च 2021 में बाइडन ने पुतिन को हत्यारा कहा था. इसके बाद रूस ने अमेरिका से अपने राजदूत को वापस बुला लिया था.

इसके बाद अप्रैल 2021 में बाइडन प्रशासन ने साइबर हैकिंग को लेकर रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए. उस वक़्त अमेरिका ने रूस के 10 राजनयिकों को भी बर्ख़ास्त कर दिया था. मॉस्को ने भी जवाबी कार्रवाई की. मई 2021 में रूस एक कदम और आगे बढ़ गया. उसने अमेरिका को ‘अनफ्रेंडली स्टेट’ की सूची में डाल दिया. मॉस्को की इस लिस्ट में मात्र दो देश हैं. एक, अमेरिका. दूसरा, चेक रिपब्लिक. इस प्रसंग से आप समझ सकते हैं कि दोनों देशों के बीच कड़वाहट कितनी बढ़ गई है.

इन परिस्थितियों में जिनीवा बैठक से बहुत सार्थक नतीजे निकलने की उम्मीद नहीं दिखती. दोनों देशों के लीडर्स एक-दूसरे को सार्वजनिक तौर पर सम्मान तक नहीं देते. पुतिन को शिकायत है कि बाइडन सरेआम उन्हें हत्यारा कहते हैं. मगर बाइडन उनकी आपत्तियों का लोड नहीं लेते. दोनों लीडर्स के बीच इतनी खुन्नस है कि वो औपचारिकता निभाने की भी परवाह नहीं कर रहे हैं.

इसकी एक मिसाल बताएं?

आधिकारिक प्रोग्राम के मुताबिक, जिनीवा बैठक 4-5 घंटे से ज़्यादा भी चल सकती है. इतनी लंबी बैठक में खाने-पीने का प्रोग्राम होना स्वाभाविक था. ऐसी मुलाकातों में इंटरनैशनल लीडर्स के साथ खाने को अच्छे रिश्तों का प्रतीक माना जाता है. मगर जिनीवा बैठक में ऐसा कोई प्रोग्राम नहीं. पहले से ही बता दिया गया है कि ‘ब्रेकिंग ऑफ़ ब्रेड’ का कोई इरादा नहीं है. ये जान-बूझकर किया गया है. ताकि संदेश जाए कि दोनों एक-दूसरे से कितने नाख़ुश हैं.

वाइट हाउस इस मीटिंग से पहले ही कह चुका है कि उसे इस बैठक से बहुत ज़्यादा कुछ हासिल होने की उम्मीद नहीं. ऐसे में सवाल उठता है कि उम्मीद नहीं है, तो मिल ही क्यों रहे हैं? इसलिए मिल रहे हैं ताकि डायलॉग हो. आगे के विमर्श की राह निकले. लाख शिकायतों के बावजूद अमेरिका और रूस जानते हैं कि वो एक-दूसरे को बायकॉट नहीं कर सकते. इतनी कड़वाहट के बाद भी दोनों पक्ष मिलने के लिए राज़ी हुए, ये अच्छी ख़बर है.


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