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एग्ज़ाम का पेपर सामने आते ही हम पढ़ी हुई चीजें भी क्यों भूल जाते हैं?

पीएम नरेंद्र मोदी ने बच्चों से एक बेहद जरूरी मसले पर चर्चा की- परीक्षा पे चर्चा. इसमें कई जरूरी चीजों के साथ-साथ इस बात पर भी चर्चा हुई कि बच्चे एग्जाम के वक्त अजीब किस्म का तनाव क्योंं महसूस करते हैं? पढ़ी हुई बातें परीक्षा में भूलते क्यों हैं? ऐसा नहीं है कि मोदी ने पहली बार ऐसा कुछ ट्राय किया है. उन्होंने परीक्षा पर एक किताब भी लिखी है- एग्ज़ाम वॉरियर्स. वॉरियर से एक छोटी-सी कहानी याद आ गई.

महाभारत में कर्ण नाम का एक कैरेक्टर है. कर्ण टैलेंटेड लड़का था. बस ज़रूरत थी तो एक टीचर की. टीचरों के टीचर थे परशुराम. लेकिन परशुराम की क्लास में सिर्फ ब्राह्मणों को एडमिशन मिलता था. और कर्ण थे सूतपुत्र. कर्ण ने झूठ बोला कि मैं भी ब्राह्मण हूं. और मिल गया एडमिशन.

कर्ण ने परशुराम से बहुत-कुछ सीखा. खूब पढ़ाई की. खूब प्रैक्टिस की. कोर्स खत्म होने में कुछ ही दिन बचे थे. लेकिन उससे पहले परशुराम को पता चल गया. कर्ण ब्राह्मण नहीं, सूतपुत्र है. परशुराम ने कर्ण को श्राप दे डाला – जब तुम्हें अपने ज्ञान की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होगी, तुम वो भूल जाओगे.

मरने से पहले कर्ण के रथ का पहिया फंस गया था.(सोर्स - विकिमीडिया)
मरने से पहले कर्ण के रथ का पहिया फंस गया था. (फोटो सोर्स – विकिमीडिया)

बस, ऐसा ही कुछ श्राप दुनिया के बहुत सारे स्टूडेंट को मिला है. बच्चे खूब तैयारी करते हैं. एग्ज़ाम से पहले तख्ती, पेंसिल, शार्पनर, रबर सब तैयार. सीखने वाली चीज़ें सीख लेते हैं. याद करने वाली चीज़ें याद करते हैं. लेकिन टेस्ट पेपर सामने आते ही सब गोल भूगोल.

पढ़ाई की, तो डरना क्या?

दुनियाभर के बच्चे इस दिक्कत से वाकिफ हैं. एग्ज़ाम के दौरान उन्हें अजीब-सी फीलिंग आती है. और इस फीलिंग के कारण उनका परफॉर्मेंस बिगड़ जाता है. शास्त्रों में इस कंडीशन को टेस्ट एंग्ज़ाइटी कहा गया है. एंग्ज़ाइटी मतलब घबराहट. टेस्ट एंग्ज़ाइटी मतलब परीक्षा से होने वाली घबराहट. लेकिन हमें ये घबराहट आखिर होती क्यों है?

हमें किसी भी तरह की घबराहट तब होती है, जब हमें लगता है कि हम जो कर रहे हैं, वो बहुत ज़रूरी है.

पढ़ते-पढ़ते ब्रेक लेना बहुत ज़रूरी है.
पढ़ते-पढ़ते ब्रेक लेना बहुत ज़रूरी है.

थोड़ा-बहुत स्ट्रेस (तनाव) और एंग्ज़ाइटी (घबराहट) काम की चीज़ें हैं. इनसे हमारे दिमाग को फोकस करने में मदद मिलती है. हमारा परफॉर्मेंस बेहतर होता है. लेकिन तब गड़बड़ हो जाती है, जब ये एक लिमिट से ज़्यादा हो जाए. स्ट्रेस और एंग्ज़ाइटी आग माफिक हैं. सही मात्रा में हों, तो खाना पकेगा. ज़्यादा हो गईं, तो जल जाएगा. और यही हमारे साथ टेस्ट एंग्ज़ाइटी में होता है.

टेस्ट एंग्ज़ाइटी के पीछे कई चीज़ें हो सकती हैं. कुछ कॉमन बातें :

फेल होने का डर – ये डर एग्ज़ाम के दिन से पहले हो, तो बेहतर है. लेकिन एग्ज़ाम के दिन ये डर सारा खेल बिगाड़ सकता है.

पुराने टेस्ट के नतीजे – आपको वो पुराने टेस्ट याद आते हैं, जिनमें आपने बुरा परफॉर्म किया था. ये यादें घबराहट बढ़ा देती हैं.

घरवालों का प्रेशर – अमूमन बच्चों पर घरवालों का बहुत प्रेशर होता है. 99 पर्सेंट मार्क्स लाओगे, तो घड़ी, वरना छड़ी.

एग्ज़ाम पेपर का सरप्राइज़ – एग्ज़ाम साल में कम ही बार होता है. और हर बार का एग्ज़ाम पिछली बार से अगल होता है. ये पेपर कैसा होगा वाला फैक्टर भी हमारी घबराहट को बढ़ा देता है.

कभी-कभी पेपर देखकर ऐसा लगता है कि ये किसी और क्लास का पेपर पकड़ा दिया क्या?
कभी-कभी पेपर देखकर ऐसा लगता है कि ये किसी और क्लास का पेपर पकड़ा दिया क्या?

लेकिन ये सारे कारण जानकर आपको क्या फायदा? आप कहेंगे, हमें काम की बात बताओ. इस टेस्ट एंग्ज़ाइटी से छुटाकारा कैसे पाएं?

टिप्स एंड ट्रिक्स

जब मैं स्टूडेंट था, तो हमारे सर ने हमें इससे निबटने के कुछ तरीके बताए थे. लेकिन ये तरीके तभी काम आएंगे, जब आपने पढ़ाई ढंग से की हो.

# टेस्ट से पहले पूरी नींद लेनी चाहिए. (कम से कम 7 घंटे)

# खाना-पीना दुरुस्त होना चाहिए. हो सके तो फल और ड्राय फ्रूट्स खाएं. अगर पेट सही नहीं होगा, तो दिमाग का आधा ध्यान वही खा जाएगा.

# स्टे हाइड्रेटेड. थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें. एग्ज़ाम के बीच में एकाध बार सूसू जाने से कुछ नहीं बिगड़ता. आपके दिमाग को थोड़ा ब्रेक भी मिल जाता है.

# हल्की एक्सरसाइज़ मददगार साबित हो सकती है. ज़्यादा कुछ नहीं. थोड़ी-बहुत स्ट्रेचिंग. छोटी-सी वॉक. डंबल उठाकर कसरत मत करने लग जाइएगा. पता चला एग्ज़ाम में हाथ-पैर सुजाए बैठे हैं.

पढ़ते वक्त ज़रूरी न हो तो मोबाइल लैपटॉप और मनोरंजन के दूसरे साधनों को दूसरे कमरे में छोड़ देना चाहिए.
पढ़ते वक्त ज़रूरी न हो तो मोबाइल, लैपटॉप और मनोरंजन के दूसरे साधनों को दूसरे कमरे में छोड़ देना चाहिए.

# अगर आपकी ठीक-ठाक तैयारी गई है, तो सैंपल पेपर सॉल्व करें. ऐसे नहीं कि बिस्तर पर लेटे-लेटे मोबाइल की स्क्रीन देखकर दिमाग में पेपर सॉल्व कर रहे हैं. ढंग से प्रिंटआउट लेकर. प्रॉपर कुर्सी-टेबल पर बैठकर. फिक्स टाइम लिमिट लगाकर. जैसे असली एग्ज़ाम देते हैं. ऐसा करने से एग्ज़ाम वाला सीन आपके लिए नया नहीं होगा.

# एग्ज़ाम सेंटर में टाइम से थोड़ा पहले पहुंचें और आराम से सेटल हो जाएं. कुछ लोग पहले पहुंचकर नोटबुक में मुंडी घुसा लेते हैं. ऐसा नहीं करना चाहिए. हंसी-ठिठोली, मजाक मस्ती करनी चाहिए. ऐसी चीज़ें जो आपको रिलैक्स करें. रिलैक्स होने का सबसे आसान तरीका है गहरी सांस लेना और उसे धीरे-धीरे छोड़ना.

# हो सकता है आपने कम पढ़ा हो. इस केस में पहले आप वही सवाल सॉल्व करें, जो आपको आते हैं. इससे आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा. साथ ही आपका परफॉर्मेंस बेहतर होगा.

हमेशा ध्यान रखें कि एक एग्ज़ाम ही सबकुछ नहीं है. उस वक्त जो आप सबसे बेहतर कर सकते हैं, उस पर ध्यान दें. क्योंकि यही किया जा सकता है.


वीडियो – शिखा से सीखें हमेशा बेस्ट होने का स्ट्रेस कैसे हैंडल करें

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