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कांग्रेस नेता अहमद पटेल से किस घोटाले में ताबड़तोड़ पूछताछ हो रही है?

अहमद पटेल. कांग्रेस के सीनियर नेता. गुजरात से राज्यसभा सांसद. सोनिया गांधी के करीबी. आजकल ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय उनके घर के चक्कर लगा रही है. 10-10 घंटे पूछताछ कर रही है. गुरुवार, 2 जुलाई को ईडी ने 10 घंटे में 128 सवाल पूछे. इससे पहले 27 जून और 30 जून को ईडी ने पटेल से आठ-आठ घंटे पूछताछ की थी. ईडी की टीम ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (PMLA) के तहत उनका बयान रिकॉर्ड किया है. पटेल से पूछताछ संदेसरा ब्रदर्स बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है. अहमद पटेल ने मीडिया को बताया कि ईडी ने उनसे कहा है कि पूछताछ पूरी हो गई है.

इस खबर में हम इस पर बात करेंगे कि संदेसरा ब्रदर्स बैंक फ्रॉड है क्या. क्यों ईडी इस मामले में अहमद पटेल से पूछताछ कर रही है? उनका इस फ्राड ने नाम क्यों जुड़ रहा है?

14,500 करोड़ा का घोटाला?

जून 2019 में ईडी ने दावा किया था कि संदेसरा भाइयों का फ्रॉड नीरव मोदी के फ्रॉड से भी बड़ा है. ईडी की जांच में पता चला कि स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड (एसबीएल)/संदेसरा ग्रुप और इसके मुख्य प्रमोटरों- नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा और दीप्ति संदेसरा ने भारतीय बैंकों के साथ लगभग 14,500 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया. जबकि नीरव मोदी पर पंजाब नैशनल बैंक से 11,400 करोड़ रुपये के फ्रॉड का आरोप है.

ये घोटाला है क्या?

घोटाला जानने से पहले ये जानना पड़ेगा कि स्टर्लिंग बायोटेक क्या है? गुजरात के वडोदरा में एक दवाई बनाने वाली कंपनी है स्टर्लिंग बायोटेक. 1985 में यह कंपनी बनी थी. इसका काम है जिलेटिन का प्रॉडक्शन करना. जिलेटिन का सबसे ज्यादा इस्तेमाल दवाइयों के कैप्सूल बनाने में होता है. यह संदेसरा ग्रुप की बस एक कंपनी है. इसके अलावा तेल, इंफ्रास्ट्रक्चर, इंजिनियरिंग में भी संदेसरा ग्रुप का काम है. OPEC देशों में तेल उत्पादन करने वाली एकमात्र भारतीय कंपनी है.

गुजरात के वडोदरा में दवाई बनाने वाली कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक. (फाइल फोटो)
गुजरात के वडोदरा में दवाई बनाने वाली कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक. (फाइल फोटो)

घोटाले की शुरुआत कहां से?

2011 में संदेसरा ग्रुप जांच एजेंसियों के रडार पर आया. CBI यानी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन का छापा पड़ा, जिसमें एक डायरी मिली. इस डायरी में कई अधिकारियों, नेताओं और बैंक कर्मचारियों को रिश्वत देने की बातें लिखी हुई थीं. सीबीआई ने तीन कमिश्नर लेवल के इनकम टैक्स अधिकारियों के ऊपर एफआईआर दर्ज की. यहीं से सांदेसरा ग्रुप घेरे में आ गया.

CBI को एक डायरी मिली थी. इस डायरी में कई अधिकारियों, नेताओं और बैंक कर्मचारियों को रिश्वत देने की बातें लिखी हुई थीं.
CBI को एक डायरी मिली थी. इस डायरी में कई अधिकारियों, नेताओं और बैंक कर्मचारियों को रिश्वत देने की बातें लिखी हुई थीं.

बैंक लोन फ्रॉड का मामला कहां से आया?

2016 में आंध्रा बैंक के साथ कई सारे बैंकों ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड (SBL) के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई. शिकायत थी कि इन बैंकों से लिया गया करीब 5,383 करोड़ का लोन एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग असेट) हो गया है. एनपीए मतलब ऐसा लोन, जो अब वापस नहीं आएगा. इसके बाद सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की. केस दर्ज किया गया. इसमें संदेसरा परिवार के चेतन संदेसरा, नितिन संदेसरा, दीप्ति संदेसरा, राजभूषण संदेसरा, विलास जोशी के साथ CA हेमंत हाथी और आंध्रा बैंक के डायरेक्टर अनूप प्रकाश गर्ग के नाम शामिल थे. मामला मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला के जरिए लेन-देन का भी था. ऐसे में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने भी अपनी जांच शुरू की.

स्टर्लिंग बायोटेक

आगे बढ़ने से पहले इनके बारे में जान लेते हैं. चीजों को समझने में आसानी होगी.

#नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल– भारतीय कंपनियों के विवादों का निपटारा करने के लिए बनाया गया प्राधिकरण.
#मनी लॉन्ड्रिंग– गलत तरीके से कमाए गए पैसे को वैध बनाने की कोशिश या कालेधन को सफेद करना.
#हवाला– टैक्स से बचने के लिए बिना सरकार की नजर में आए अवैध तरीके से किया गया लेन-देन.
#शेल कंपनी– वो कंपनियां जो बस कागज पर होती हैं असली में नहीं. इन कंपनियों के जरिए अवैध ट्रांजेक्शन किए जाते हैं.

शेल कंपनियों में पैसा लगाया

जांच में पाया गया कि संदेसरा बंधुओं ने गलत कागजात पेश कर लोन लिए. करीब सौ फर्जी कंपनियां (शेल कंपनियां) बनाईं. ये सब कंपनियां एक ही पते पर रजिस्टर्ड थीं. इनके एक ठिकाने पर सीबीआई के छापे में 100 से ज्यादा कंपनियों के एक ही पते के रबर स्टैंप मिले थे. साथ ही, संदेसरा ब्रदर्स ने इंपोर्ट-एक्सपोर्ट के फर्जी बिल लगाए. ये सब कागजात उन्होंने बैंकों में दिए, जिसके आधार पर इन्हें लोन मिला. इस पैसे से इन्होंने कई बेनामी संपत्तियां भी खरीदीं. पैसा बेनामी कंपनियों के नाम पर बने खातों में भी ट्रांसफर किया. साथ ही कई सारी लग्जरी कारें भी खरीदीं. इस सब के लिए कई अधिकारियों और नेताओं को रिश्वत भी दी.

संदेसरा ब्रदर्स के बारे में किसी को नहीं पता कि वो फिलहाल कहां हैं. (फाइल फोटो)
संदेसरा ब्रदर्स के बारे में किसी को नहीं पता कि वो फिलहाल कहां हैं. (फाइल फोटो)

8,000 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप 

ED ने चार्जशीट में संदेसरा परिवार पर 174 शेल कंपनियों के जरिए 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया था. ED ने 195 लोगों पर आरोप लगाए थे. जांच में पता चला कि एसबीएल ग्रुप भारतीय बैंकों से रुपये के साथ-साथ विदेशी मुद्रा में भी लोन लिए थे. ग्रुप को आंध्र बैंक, यूको बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई), इलाहाबाद बैंक और बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) की अगुवाई वाले बैंकों के कंसोर्शियम ने लोन पास किया. जांच के दौरान यह भी पता चला कि जिसके लिए लोन लिया गया था, उस काम में लोन का इस्तेमाल न होकर दूसरे कामों में इस्तेमाल किया गया. कुछ रकम फर्जी देसी-विदेशी संस्थानों के जरिए इधर से उधर ट्रांसफर किए. मुख्य प्रमोटरों ने कर्ज की रकम न केवल नाइजीरिया में अपने तेल के कारोबार में लगाई, बल्कि इसका निजी मकसदों में भी इस्तेमाल किया.

9,778 करोड़ संपत्ति जब्त

ईडी ने जून 2019 में एसबीएल/संदेसरा ग्रुप के 9,778 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी. इनमें नाइजीरिया में ऑयल रिग्स, लंदन में एक जेट और आलीशान फ्लैट शामिल हैं. दो साल पहले खबर आई थी कि संदेसरा अपने भाई चेतन और भाभी दीप्तिबेन संदेसरा के साथ नाइजीरिया में है. नाइजीरिया के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि नहीं है. ऐसे में इस परिवार को वापस देश लाना मुश्किल है. संदेसरा परिवार ने अफ्रीका में निवेश के जरिए नाइजीरिया में मजबूत राजनीतिक संबंध स्थापित कर लिए हैं. इस वजह से उनका प्रत्यर्पण और अधिक मुश्किल है.

अहमद पटेल से पूछताछ क्यों हो रही है?

संदेसरा ब्रदर्स पर अहमद पटेल के करीबी होने के आरोप लगते रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संदेसरा ग्रुप के एग्जीक्यूटिव सुनील यादव ने ईडी को दिए गए लिखित बयान में आरोप लगाया था कि इस ग्रुप के मालिक चेतन संदेसरा और उनके सहयोगी गगन धवन ने अहमद पटेल के दामाद इरफान सिद्दीकी को काफी कैश दिया था. यादव ने ईडी को यह भी बताया था कि उन्होंने अहमद पटेल के बेटे फैसल पटेल के ड्राइवर को कैश दिया था और इसकी डिलिवरी चेतन संदेसरा की तरफ से अहमद पटेल के बेटे को की जानी थी.

Patel

सुनील यादव ने आरोप लगाया था कि अहमद पटेल के दामाद इरफ़ान सिद्दीकी चेतन संदेसरा के दिल्ली स्थित ऑफ़िस में अक्सर आते थे. चेतन भी उनके दिल्ली स्थित वसंत विहार वाले घर पर जाता था. यादव ने आरोप लगाया गया था कि चेतन इरफ़ान को मोटी नक़दी देता था. सुनील ने आरोप लगाया था कि अहमद पटेल के घर का इस्तेमाल भी बैठकों के लिए होता था. ईडी इसी कनेक्शन की जांच कर रही है.


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