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रीफ़ेस ऐप क्या है, जिसका इस्तेमाल करके लोग धड़ाधड़ वीडियो बना रहे हैं

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐप की धूम मची हुई है. नाम है रीफेस ऐप. इस ऐप के ज़रिए आप किसी सेलेब्रिटी के शरीर पर अपना चेहरा लगा सकते हैं.

एक उदाहरण आप ये देख सकते हैं:

क्या होता है इस ऐप में?

इस ऐप में कुछ क्लिप्स पहले से दी गई हैं. जैसे शकीरा का डांस करते हुए वीडियो या ‘टाइटेनिक’ फिल्म में जैक और रोज का एक सीन. इनमें आप अपने चेहरे की तस्वीर डाल कर ऐप के ज़रिए ऐसा दिखा सकते हैं कि नाच रही शकीरा का चेहरा आपका है. या फिर जैक और रोज के सीन में रोज की शक्ल की जगह आपकी शक्ल है.

लोग ऐसे कई वीडियो शेयर करते हुए दिख रहे हैं अपने सोशल मीडिया पर. लेकिन इस ऐप के पीछे की कहानी क्या है? क्यों बनाया गया इसे? क्या चिंताएं हैं इस तरह की तकनीक को लेकर? आइये समझते हैं.

पहले आते हैं ऐप पर

इसमें जिस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, उसे ‘डीपफेक’ कहते हैं. पिछले कुछ साल में ये तकनीक काफी ज्यादा डेवेलप हुई है. दिखने वाले चेहरे ज्यादा रियलिस्टिक होते जा रहे हैं. इसे ऐसे समझिए कि पहले एनीमेशन की क्वालिटी उतनी बढ़िया नहीं हुआ करती थी, लेकिन समय के साथ वो बेहतर होता गया. दिखने वाले सीन और ज्यादा रियल लगने लगे. कुछ-कुछ वैसा ही. ऐप को बनाने वाली टीम के लीग यूक्रेनियन हैं. लेकिन पूरा काम अमेरिका में हुआ है ऐप का. पहले इसका नाम Doublicat हुआ करता था. और पहले इस पर सिर्फ gifs में अपना चेहरा लगाने का ऑप्शन होता था. इस साल जून में वीडियो जोड़े गए. अभी तक दो करोड़ लोग इसे डाउनलोड कर चुके हैं.

Reface App Play Store
ऐप का लोगो. (तस्वीर: प्ले स्टोर)

इसके पीछे का आइडिया क्या है?

ऐप को बनाने वाली टीम के CEO रोमन मोगिल्न्यी का कहना है कि इस ऐप के ज़रिए लोग अलग-अलग तरह की जिंदगियां जी सकते हैं. टेक्नोलॉजी के मामलों में स्पेश्लाइज करने वाली साइट ‘टेकक्रंच’ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि रीफेस ऐप पर लोग अपना कॉन्टेंट बनाकर खुद को उस कॉन्टेंट में महसूस कर सकेंगे. रोमन ने कहा,

‘मैं स्कूल में बास्केटबॉल खेला करता था, लेकिन एक चोट की वजह से उसमें करियर नहीं बना पाया. मुझे नहीं पता कि अगर मैं प्रो बास्केटबॉल खिलाड़ी होता, तो मेरी जिंदगी कैसी होती. लेकिन इस प्लेटफॉर्म पर मेरे पास ये मौका होगा कि मैं देख सकूं कि मेरा बास्केटबॉल करियर कैसा होता. मैं कॉन्टेंट को महसूस कर पाऊंगा और वो जिंदगी जी पाऊंगा’.

ऐप को लेकर चिंताएं क्या हैं?

इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि ऐसे विश्वसनीय फेक वीडियो खतरनाक साबित हो सकते हैं. इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है. ऐसे मामले पहले भी देखने में आ चुके हैं, जब किसी महिला का चेहरा किसी पॉर्न स्टार के शरीर पर लगाकर वीडियो चला दिया गया. जर्नलिस्ट राणा अय्यूब के साथ ऐसा मामला कुछ समय पहले सामने आया था. इस तरह के वीडियो पहले बिना तकनीकी एक्सपर्टीज के बनाना मुश्किल था. लेकिन अगर ऐप के ज़रिए ये तकनीक आसान बना दी गई, तो इसका गलत इस्तेमाल होने के चांसेज भी बढ़ सकते हैं.

प्राइवेसी एक्सपर्ट अपूर्वा सिंह ने ‘VICE इंडिया’ को दिए गए इंटरव्यू में कहा,

‘ये ऐप डीपफेक्स को नॉर्मलाइज करता है, और हर कोई इससे उपजने वाली चिंताएं नहीं समझता. क्योंकि हर किसी के पास इतनी समझ नहीं है डिजिटल की कि वो अंतर कर सकें कि क्या असली है और क्या नकली. सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि डीपफेक को पहचानना हर किसी के लिए आसान नहीं है. कई लोग ये मान लेते हैं कि अगर वीडियो क्वालिटी कम है, या फिर वीडियोज़ में कुछ ब्लर हिस्सा दिखता है, तो वो इंटरनेट कनेक्टिविटी की दिक्कत की वजह से है’.

लोगों की चिंता ये भी है कि ऐप का इस्तेमाल कहीं डेटा चुराने के लिए तो नहीं किया जाएगा. अभी रीफेस ऐप किसी व्यक्ति की सेल्फी से उसके चेहरे को मैप करता है, और उस चेहरे को दूसरे वीडियोज़ में लगाता है.

आशंकाओं पर ऐप वाले लोग क्या कह रहे हैं?

इस पर ऐप बनाने वालों का ये कहना है कि अभी इस ऐप पर यूजर अपने खुद के वीडियो नहीं डाल सकते हैं. अभी जो वीडियो बन रहे हैं, वो पहले से मौजूद सेलेब्रिटी वीडियो का इस्तेमाल करके बन रहे हैं. इन्हें असली मानने की गलती नहीं करेंगे लोग. लेकिन जल्द ही इस ऐप में यूजर्स के पास भी अपने वीडियो अपलोड करने का ऑप्शन मिलेगा. उससे पहले ऐप बनाने वाले क्रिएटर्स ऐसी तकनीक बनाना चाहते हैं, जो ऐसे डीपफेक वीडियोज की पहचान कर सकें. रोमान ने इंटरव्यू में कहा कि ये तकनीक पब्लिक के लिए तब ओपन की जाएगी, जब वो ये श्योर किया जा सके कि फेक वीडियोज़ की पहचान आसानी से की जा सकती है.

यही नहीं ‘द इंडिपेंडेंट’ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, रीफेस की प्राइवेसी पॉलिसी में लिखा है,

‘रीफेस ऐप आपके फ़ोटोज़ और चेहरे के फीचर्स का इस्तेमाल नहीं करता, सिवाय फेस स्वैपिंग फीचर का फंक्शन इस्तेमाल करने के लिए.’

ये तस्वीरें वीडियो एडिटिंग के बाद 24 घंटे तक रीफेस ऐप के पास रहते हैं. उसके बाद डिलीट कर दिए जाते हैं. पॉलिसी के अनुसार आपके चेहरे के फीचर्स का जो डेटा है, वो भी 30 दिन तक ऐप पर रखा जाता है और उसके बाद डिलीट कर दिया जाता है.

ऐप के प्रवक्ता ने कहा,

‘हमलोगों के चेहरे का इस्तेमाल विज्ञापनों को सॉर्ट करने के लिए नहीं किया जाता. रीफेस AI के लिए डेटा प्रोटेक्शन एक महत्वपूर्ण सामाजिक ज़िम्मेदारी है. डेटा का इस्तेमाल सिवाए चेहरे की अदल-बदल के, कहीं और इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. ऐप किसी तीसरी पार्टी को भी यूजर की जानकारी नहीं देता.’

ऐप के मुताबिक़, इसमें फेशियल रिकग्निशन का इस्तेमाल नहीं होता. केवल सेल्फी के सहारे वीडियो बनाए जाते हैं.


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