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यूपी का पीलीभीत मॉडल क्या है, जहां DM और SP ने मिलकर कोरोना को निपटा दिया?

कोरोना वायरस उर्फ Covid 19 के प्रकोप के बीच एक अच्छी खबर आई है. उत्तर प्रदेश से. कोरोना से लड़ने का एक नया मॉडल उभरकर सामने आया है. पीलीभीत मॉडल. पीलीभीत इसलिए क्योंकि इस जिले ने कोरोना को हरा दिया है. यूपी का पहला जिला बन गया है जो कोरोना फ्री हो गया है. और इस जीत के हीरो रहे हैं पीलीभीत के डीएम वैभव श्रीवास्तव. और उनका साथ दिया जिले के एसपी अभिषेक दीक्षित ने. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी इसे देखते हुए पीलीभीत के प्रशासनिक अमले को बधाई दी है. साथ ही अन्य जिलों को पीलीभीत से सीख लेने को कहा. अब आपके मन में सवाल होगा कैसे जीती गई ये जंग और क्या है ये पीलीभीत मॉडल. सब आपको इस खबर में बताएंगे.

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पीलीभीत प्रशासन के काम की तारीफ आईएएस असोसिएशन ने भी की.

दो केस और तहलका

तारीख 20 मार्च. पीलीभीत प्रशासन तक खबर पहुंची कि सउदी अरब से करीब 37 लोग उमरा करके जिले के अमरिया गांव में लौटे हैं. और उनका टेस्ट नहीं हुआ है. प्रशासन ने बिना देरी दो घंटे के अंदर सभी को क्वॉरंटाइन किया. सबकी टेस्टिंग करवाई गई. 22 मार्च को लखनऊ से इन टेस्ट्स की रिपोर्ट आई तो शफीला और उनके बेटे मेराज कोरोना पॉजिटिव निकले. खबर से पूरे पीलीभीत में तहलका मच गया.

डीएम वैभव श्रीवास्तव ने इस रिपोर्ट पर सख्ती और नर्मी दोनों तरह से निपटने का फैसला किया. नर्मी ऐसे कि पीड़ित मां और बेटे को तुरंत आइसोलेशन वॉर्ड में भर्ती करवाया. रातों रात इनकी फैमिली के लोगों को आइसोलेशन में लिया गया. और सख्ती यूं कि बचे 35 लोगों के खिलाफ एफआईआर करवाई गई.

फोर लेयर रिस्पॉन्स 

डीएम वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि हमने इस घटना के बाद फोर लेयर रिस्पॉन्स की नीति के तहत काम किया.

1. इमीडिएट मेडिकल रिस्पॉन्स – जैसे अमरिया गांव में हुआ. जहां लोगों को फौरन क्वॉरंटाइन किया गया. अमरिया गांव के आसपास के दो दर्जन से ज्यादा गांवों को सैनेटाइज कराने का आदेश दिया. घर-घर जाकर चेकिंग हुई. प्रधानों को लूप में लिया गया. उनको बताया गया कि क्या करना है, क्या नहीं. नतीजा वो इस लड़ाई में खुद को शामिल मानने लगे और अमरिया जैसे लोगों की सूचना प्रशासन को देने लगे. जिससे कोरोना पैर नहीं पसार सका.

2. एडमिनिस्ट्रेशन – जिसमें डीएम ने अगले ही दिन मीटिंग की. पुलिस, मेडिकल विभाग और अन्य सभी विभागों के बीच काम बांटे. पूरा खाका तैयार किया और उसे लागू कराने पर जोर दिया.

3. लॉकडाउन – जिसमें बॉर्डर सील करवाए गए. नेपाल बॉर्डर पर खास सख्ती की गई. जिले के संवेदनशील 15 बैरियर्स पर 30 मैजिस्ट्रेट तैनात किए गए. लोगों को समझाया गया कि लॉकडाउन क्यों जरूरी है. जो फिर भी नहीं माने, उन पर कार्रवाई की गई.

4. वेलफेयर – इसमें लोगों को डोर टू डोर जरूरी डेली यूज की चीजें पहुंचाईं गईं. गरीब लोग भूखे न रहें, इसके लिए कम्युनिटी किचन चलाया गया. जनप्रतिनिधियों और समाजसेवी संस्थाओं की हेल्प ली गई.

नतीजा ये हुआ कि पीड़ित दोनों मां-बेटे भी ठीक होकर घर पहुंच गए हैं. और फिलहाल पीलीभीत में एक भी एक्टिव केस नहीं है. कोरोना कंट्रोल में है.

पुलिस ने चलाया मिशन SPARSH :

पीलीभीत में कोरोना को कंट्रोल करने में एसपी अभिषेक दीक्षित का रोल भी अहम रहा. इसके लिए पुलिस ने SPARSH योजना चलाई. एसपी अभिषेक ने हमें इसके बारे में बताया. इसका फुल फॉर्म समझाया. आप भी समझ लीजिए –

S – एस का मतलब संवाद – पहले पुलिस ने आम लोगों, जनप्रतिनिधियों और सभी जरूरी लोगों से बातचीत की. उनकी राय मांगी.

P – पी का मतलब प्रचार – इसमें पुलिस ने पूरे पीलीभीत में कोरोना वायरस के बारे में प्रचार किया. एसपी से लेकर थानाध्यक्ष तक ने गली-गली जाकर लोगों को इसके खतरे के बारे में समझाया. लॉकडाउन क्यों जरूरी, ये समझाया.

A – ए का मतलब आधारभूत सुविधाएं – इसमें पुलिस ने लोगों को आधारभूत सुविधाएं पहुंचाने में मदद की. राशन और जरूरी चीजों की कमी ना हो, इसका खाका तैयार किया.

Sparsh

R – आर का मतलब रोकथाम – इसमें कोरोना की रोकथाम के लिए बॉर्डर सील किए गए. 42 नाके लगाए गए. लोगों को सख्त हिदायत दी गई कि घरों में ही रहना है.

S – एस का मतलब सैनिटाइजेशन – इसमें कई एरिया, बस्तियों को सैनिटाइज करवाया गया. फोर्स सुरक्षित रहे इसलिए उनके घरों को सैनिटाइज करवाया गया. पुलिस वालों और आम लोगों को भी सैनिटाइजर, मास्क बांटे गए. पब्लिक प्लेसेज को सैनिटाइज करवाया गया. तबलीगी वाला मामला आने के बाद मस्जिदों और मदरसों को सैनिटाइज करवाया गया. नगर पालिका की भी इसमें मदद ली गई.

H – एच का मतलब हथकड़ी – इसमें जो नहीं लॉकडाउन के नियमों को मान रहा था. उनके खिलाफ कार्रवाई की गई. मुनाफाखोरी करने वालों पर, अवैध तरीके से शराब बेचने वालों पर, गाड़िया निकालने वालों पर कार्रवाई की गई.

एसपी अभिषेक ने SPARSH के अलावा बताया कि हमने इसके अलावा एक ‘कोई भूखा न रह जाए’ नाम की भी मुहिम चलाई. इसमें पुलिस लाइन और सभी थानों की मेस में जरूरतमंदों के लिए खाने के पैकेट बने. तमाम समाजसेवी संस्थाओं को भी इसमें जोड़ा गया. डायल 112 पर भी जिसने मदद मांगी. खाने की हो चाहे कोई और जरूरी सामान की. हमने उसमें भी मदद की.

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अभिषेक ने आगे कहा कि अभी हमारा काम खत्म नहीं हुआ है. अभी पीलीभीत में सिर्फ कोरोना पॉजिटिव केस खत्म हुए हैं. कोरोना नहीं खत्म हुआ है. इसलिए लोगों को अभी भी ये समझा के रखना है कि अभी पीलीभीत कोरोना फ्री नहीं हुआ है. आगे भी ये सारे काम चलाते रहने होंगे. ताकि और केस ना आएं. जिला सुरक्षित रहे.


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