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क्या है फ़िलिपींस का वॉर ऑन ड्रग्स, जिसमें 30 हज़ार हत्याओं की बात सामने आ रही है?

‘अगर मैं राष्ट्रपति बना तो मैं वही करूंगा, जो मैंने मेयर के तौर पर किया था. नशा बेचने वालों अपराधियों को मैं चेतावनी देता हूं. जल्दी से ये देश छोड़ दो, वर्ना मैं तुम्हारी जान ले लूंगा.’

9 मई 2016 की शाम तीन लाख लोगों की भीड़ के सामने खड़े होकर एक शख़्स ने ये बातें कहीं थी. कुछ समय बाद उसकी कही हर एक बात सच साबित हुई. वो शख़्स देश का राष्ट्रपति बना. उसने सबसे पहले पुलिस को खुली छूट दे दी. यही काम उसने मेयर रहते हुए भी किया था. राष्ट्रपति बनने के बाद उसने ड्रग्स के ख़िलाफ़ हिंसक कैंपेन शुरू किया. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस कैंपेन के दौरान अब तक आठ हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. स्वतंत्र रिपोर्ट्स में ये आंकड़ा तीस हज़ार हत्याओं तक जाता है. इनमें से अधिकतर को बस शक के आधार पर मारा गया था. मरने वालों में बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल थे. पुलिस अपने बचाव में अक्सर कहती कि उसने गोलियां आत्म-रक्षा में चलाई.

लेकिन जब सैकड़ों की संख्या में पीड़ित परिवार मरने वालों की बेगुनाही का सबूत लेकर सामने आए तो कहानी पेचीदा होने लगी. मानवाधिकार संगठनों ने सरकार पर मानवता के ख़िलाफ़ अपराध और बेगुनाह लोगों की हत्या के आरोप लगाए. लेकिन सरकार अपने कहे पर कायम रही. उसने हत्या का सिलसिला नहीं रोका. इस देश में तीन चीज़ें अभी भी बरकरार हैं – ड्रग्स की समस्या, राष्ट्रपति की ज़िद और निरपराध हत्याओं का सिलसिला. ये कहानी फ़िलिपींस, वॉर ऑन ड्रग्स और राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतर्ते की है.

किशोर की मौत और पुलिस की थ्योरी

अगस्त 2017 की एक घटना सुनिए. राजधानी मनीला की एक बस्ती में पुलिस ने छापा मारा. छापे के दौरान गोलीबारी हुई. इसमें 17 साल का एक लड़के की मौत हो गई. उसकी लाश बाद में सुअर के बाड़े में मिली. उस लड़के का नाम था, कियान लॉयड डेलोस सेंटोस. कियान 11वीं का स्टूडेंट था. जब लड़के की हत्या पर बवाल हुआ तो पुलिस ने अपनी थ्योरी पेश की. पुलिस की रिपोर्ट क्या था? बकौल रिपोर्ट, कियान ने जैसे ही पुलिस को अपनी तरफ़ आते देखा, वो तेज़ी से भागने लगा. जब पुलिसवालों ने उसका पीछा किया तो उसने बंदूक निकालकर फ़ायरिंग शुरू कर दी. पुलिस को आत्म-रक्षा में गोली चलानी पड़ी. इसमें कियान की मौत हो गई.

ये तो हुई पुलिस की थ्योरी. असलियत क्या थी? मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि तीन पुलिसवाले आए. उन्होंने ज़बरदस्ती कियान को बंदूक पकड़ाई और उसे फ़ायर कर भागने के लिए कहा. लोगों ने नाबालिग लड़के की मौत पर सवाल खड़े किए तो जांच बिठाई गई. जांच में पता चला कि कियान को तब मारा गया, जब वो ज़मीन पर लेटा हुआ था. पुलिसवालों ने उसको अपने क़ब्ज़े में कर रखा था. जांच अधिकारियों को एक सीसीटीवी फुटेज भी मिली. इसमें दो लोगों को कियान की लाश ले जाते हुए देखा गया. बाद में लाश उसी जगह पर मिली, जहां सीसीटीवी में देखा गया था. तब जाकर घटना में शामिल तीन पुलिसवालों पर हत्या का केस शुरू हुआ.

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कियान लॉयड डेलोस सेंटोस की मौत के बाद तमाम प्रदर्शन हुए.

फिर 15 साल के बच्चे पर हमला

ये 15 साल के एक लड़के की कहानी है. उसका नाम मान लेते हैं, जॉन. जॉन के दो मुख्य काम थे – स्कूल जाना और घर के पास वाली गली में सिगरेट बेचते हुए दोस्तों के साथ खेलना. एक दिन की बात है. जॉन गली में खेल रहा था. तभी उसके पास एक मोटरसाइकिल आकर रुकी. बाइक पर सवार एक व्यक्ति ने बंदूक निकाली और जॉन पर गोली चला दी. उसके बाद बाइक वहां नज़र नहीं आई. आनन-फानन में जॉन को अस्पताल ले जाया गया. वहां उसकी जान तो बच गई. लेकिन उम्र भर के लिए ये सदमा उसके मन-मस्तिष्क पर हावी हो गया. हमलावरों की न तो कभी पहचान हो पाई और ना ही उन्हें कभी पकड़ा जा सका.

इन दोनों घटनाओं में कई चीज़ें कॉमन हैं. मसलन, फ़िलिपींस, ड्रग्स, बच्चों पर हमला और अधिकारियों द्वारा दोषियों का बचाव. ये दो घटनाएं अपने आप में वीभत्स हैं. लेकिन ये यहीं तक सीमित नहीं हैं. ऐसी कहानियों की संख्या हज़ारों में है.

ड्रग्स की तस्करी और अपराध पर लगाम लगाने का वादा कर रोड्रिगो दुतर्ते फ़िलिपींस के राष्ट्रपति बन गए. 30 जून 2016 को उन्होंने पद धारण कर लिया. राष्ट्रपति बनने के फौरन बाद उन्होंने ड्रग्स की तस्करी के ख़िलाफ़ कैंपेन शुरू किया. शुरुआती चार दिन के भीतर राजधानी मनीला और आस-पास के इलाकों में 45 लोगों को मारा गया. ये सभी पुलिस की कार्रवाई में मारे गए थे. धीरे-धीरे ये आंकड़ा बढ़ता गया. शुरुआत में तो इसमें ड्रग गैंग्स पर कार्रवाई की गई. संदिग्धों को चुन-चुनकर मारा जाने लगा. फिर पुलिस ने हिसाब रखना छोड़ दिया. जो कोई सामने दिखता, उसकी हत्या कर दी जाती. भले ही उनका संबंध ड्रग्स की तस्करी से ना हो. जानकार बताते हैं कि अधिकारी ख़ुद को राष्ट्रपति की नज़र में लाने के लिए ऐसा करते थे. लेकिन राष्ट्रपति ने कभी उन लोगों पर लगाम लगाने की कोशिश नहीं की.

ड्रग्स के नाम पर ‘हत्याएं’!

राष्ट्रपति का शह पाकर बेलगाम प्रशासन ख़ुद अपराध में लिप्त हो गया. क़ोटा पूरा करने के लिए बच्चों तक को निशाना बनाया जाने लगा. अभी तक प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, वॉर ऑन ड्रग्स के दौरान कम-से-कम 73 नाबालिगों की हत्या हुई है. जब कैथोलिक चर्च ने इसकी आलोचना की तो सरकार ने कह दिया कि चर्च अपने काम से मतलब रखे. जब बच्चों की हत्या का सवाल उठा तो दुतर्ते ने जवाब दिया, ये तो कोलैटरल डैमेज है. दुतर्ते ने ये भी कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो और हत्याएं होंगी.

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ड्रग्स की तस्करी और अपराध पर लगाम लगाने का वादा कर रोड्रिगो दुतर्ते फ़िलिपींस के राष्ट्रपति बने. लेकिन फिर हालात बिगड़ने लगे.

आज वॉर ऑन ड्रग्स की चर्चा क्यों?

दरअसल, ICC ने राष्ट्रपति दुतर्ते के ख़िलाफ़ आधिकारिक जांच का आदेश दे दिया है. अदालत ने कहा कि उसके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि ड्रग्स के ख़िलाफ़ लड़ाई के नाम पर आम नागरिकों को निशाना बनाया गया. अदालत ने ये भी कहा कि फ़िलिपींस सरकार के पास एंटी-ड्रग्स अभियान चलाने का पूरा अधिकार है. लेकिन ‘वॉर ऑन ड्रग्स’ कैंपेन और इसके नाम पर हो रही हत्याओं को जायज नहीं ठहराया जा सकता. अदालत ने कहा कि ये आदेश 204 पीड़ितों की ओर से पेश किए गए सबूतों पर ग़ौर करने के बाद सुनाया गया. इस दौरान ये बात भी सामने आई कि फ़िलिपींस सरकार ने इन हत्याओं की कोई जांच नहीं की. इसके उलट, कई मामलों में साज़िशकर्ताओं को ईनाम और प्रमोशन भी दिए.

जून 2021 में ICC की चीफ़ प्रॉसीक्यूटर फ़ाटु बेनसोडा ने दुतर्ते के ख़िलाफ़ जांच के लिए अपील दायर की थी. इससे खफ़ा दुतर्ते ने कहा था कि वो ICC के जजों को थप्पड़ मारना चाहते हैं. बेनसोडा जून में ही रिटायर हो गईं. अब उनके पद पर करीम ख़ान आए हैं. वो ही इस मामले की जांच का काम देखेंगे.

दुतर्ते का रुख़ क्या है?

सरकारी प्रवक्ता ने आदेश पर बयान देते हुए कहा कि फ़िलिपींस सरकार ICC की जांच में सहयोग नहीं करेगी. उनका कहना था कि फ़िलिपींस में न्यायपालिका काम कर रही है. अगर किसी को सरकार से दिक़्क़त है तो वो फ़िलिपींस की कोर्ट में मुकदमा दायर कर सकता है. राष्ट्रपति के वकील ने तो यहां तक कह दिया कि ICC के अधिकारियों को फ़िलिपींस में घुसने भी नहीं दिया जाएगा. मतलब, ये साफ़ है कि दुतर्ते अपने अड़ियल रवैये पर कायम रहेंगे. इंटरनैशनल क्रिमिनल कोर्ट की स्थापना साल 2002 में हुई थी. इसका उद्देश्य था, अगर कोई सदस्य देश युद्ध अपराध, नरसंहार या मानवता के ख़िलाफ़ अपराध जैसे मामलों में जांच या अदालती कार्रवाई करने से इनकार करता है या उसके पास साधन की कमी होती है, तो ऐसी स्थिति में ICC पीड़ितों की मदद करेगी.

जब पहली बार 2018 में अंतरराष्ट्रीय अदालत में दुतर्ते के ख़िलाफ़ मुकदमे की सुगबुगाहट तेज़ हुई, तब फ़िलिपींस ने ICC की सदस्यता छोड़ दी थी. जजों ने अपने आदेश में कहा कि जब तक फ़िलिपींस ICC का सदस्य था, तब तक के अपराधों की जांच तो की ही जा सकती है. ICC, 2011 से 2016 के बीच डावो शहर में हुई 385 एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल हत्याओं की भी जांच करेगी. इस अवधि में दुतर्ते डावो के मेयर थे. जिन हत्याओं की जांच होगी, उन्हें ‘डावो डेथ स्क़्वाड’ नामक गुट ने अंज़ाम दिया था.

ICC का कहना है कि डावो में हुए मर्डर्स में जो तरीके अपनाए गए थे, दुतर्ते के राष्ट्रपति बनने के बाद वैसा ही पूरे फ़िलिपींस में हुआ. रोड्रिगो दुतर्ते अगले साल राष्ट्रपति नहीं रहेंगे. उनका कार्यकाल खत्म होने जा रहा है. उन्होंने ऐलान किया है कि वो उप-राष्ट्रपति के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगे. दुतर्ते की बेटी सारा दुतर्ते-कार्पियो राष्ट्रपति चुनाव में खड़ी होंगी. जानकारों का कहना है कि अगले चुनाव में बाप-बेटी की जीत ही उन्हें बचा पाएगी. अगर नई सरकार सत्ता में आती है तो वो शायद उनके गुनाहों के प्रति इतनी उदारता न बरते.


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