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NRC और NPR में क्या संबंध है, इन्हें लेकर जनता की चिंता कितनी जायज़ है?

CAA-NRC पर सरकार के तर्कों और प्रदर्शनों को एक तरफ रख दें तो एक दूसरी बात सुनाई में आती है. लोग पूछ रहे हैं. कि क्या सरकार अब हाथ घुमाकर कान पकड़ना चाहती है? इशारा था नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर माने NPR की तरफ. 24 दिसंबर की दोपहर टीवी पर फ्लैश चल भी गया कि NPR को केंद्रीय कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई है. पॉपुलेशन रजिस्टर क्या है और क्या इसका संबंध राष्ट्रव्यापी NRC से हो सकता है, ये समझने के लिए हमें जानना होगा कि NPR दरअसल है क्या.

देसी-विदेशी, सबका एक रजिस्टर

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर माने देश की पॉपुलेशन में जो भी हैं, उन सब का रजिस्टर. NPR भारत के Usual Residents यानी सामान्य रहवासियों को दर्ज करता है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, सामान्य रहवासी हर उस शख्स को माना जाएगा जो किसी एक जगह पर छह महीने से रह रहा हो, या आने वाले छह महीनों तक वहां रहना चाहता हो. ध्यान दीजिए, यहां बात रहवासियों की है, न कि नागरिकों की. NPR रहवासियों की गिनती करेगा. तो इसमें नागरिक भी शामिल होंगे और भारत में रह रहे विदेशी भी.

NPR के लिए नियम और प्रक्रियाएं दो कानूनों के आधार पर बनाए गए हैं –
1.Citizenship Act 1955
2.Citizenship (Registration of Citizens and issue of National Identity Cards) Rules, 2003

NPR एक अनिवार्य प्रक्रिया है. सादी भाषा में, आप चाहें न चाहें, नियमों के मुताबिक, आपको NPR में जानकारी दर्ज करानी ही होगी. चाहें आप नागरिक हों या न हों.

NPR की कवायद हर स्तर पर होगी. मुहल्ला, विकासखंड या ब्लॉक, ज़िला, राज्य और फिर राष्ट्रीय स्तर पर जानकारी इकट्ठा की जाएगी. इसकी ज़िम्मेदारी रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया माने RGI को दी गई है. RGI केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करेंगे. RGI का दफ्तर 2021 की जनगणना की तैयारी में लगा हुआ है. इसका पहला चरण होता है हाउस लिस्टिंग. इसमें देश में मौजूद हर इमारत और ढांचे की सूची बनती है. साथ में ये भी दर्ज होता है कि इमारत किस काम आती है, रहने के या फिर काम-धंधे के. हाउस लिस्टिंग के दौरान इमारत में दी गई सुविधाएं जैसे टॉयलेट, पानी और इमारत में मौजूद सामान मसलन फ्रिज वगैरह को भी दर्ज किया जाता है. अप्रैल, 2020 में 2021 की जनगणना की हाउसलिस्टिंग शुरू हो जाएगी. इसी के साथ-साथ NPR के लिए जानकारी दर्ज कर ली जाएगी.

NPR के लिए पायलट प्रोजेक्ट पहले से चल रहा है. इसमें 1200 गांवों और 40 छोटे-बड़े शहरों के 5 हज़ार 218 ब्लॉक्स में जानकारी इकट्ठा की जा रही है. सितंबर, 2020 तक NPR के लिए पूरा डाटा इकट्ठा कर लिया जाएगा. असम में हाल ही में NRC बना है, इसलिए NPR में असम को शामिल नहीं किया जाएगा.

राजीव गांधी ने 1985 में असम में एनआरसी अपडेट करने का वादा किया था.
राजीव गांधी ने 1985 में असम में एनआरसी अपडेट करने का वादा किया था.

NPR है किसका आइडिया?

एक कांग्रेस नेता का. राजीव गांधी ने 1985 में असम में NRC को अपडेट करने का वादा किया था. 2009 में पी चिदंबरम ने NPR के लिए माहौल बनाना शुरू किया. केंद्रीय गृह मंत्रालय चाहता था कि आम लोगों तक सरकारी फायदा मसलन सब्सिडी पहुंचाने के लिए NPR का इस्तेमाल हो. क्योंकि NPR में रहवासी के साथ-साथ उसके घर की जानकारी भी दर्ज होती. 2011 की जनगणना के लिए 2010 में हाउस-लिस्टिंग हुई तो NPR के लिए पहली बार जानकारी इकट्ठा की गई. NPR में दर्ज कुछ लोगों को एक कार्ड भी बांटा गया जिसमें ये लिखा था कि आपकी जानकारी NPR में दर्ज कर ली गई है. लेकिन उन्हीं दिनों UIDAI पर काम शुरू हो गया था. UIDAI ने ही हमारे-आपके आधार कार्ड बनाए. पहले UPA और फिर नरेंद्र मोदी की NDA सरकार ने NPR पर आधार को तरज़ीह दी. डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर माने सीधे खाते में सब्सिडी के लिए भी आधार को चुना गया. तो NPR नेपथ्य में चला गया.

NPR को बक्से से निकाला किसने?

मोदी सरकार ने. 2010 में इकट्ठा जानकारी को अपडेट करने के लिए 2015 में घर-घर जाकर एक सर्वे किया गया. इसके बाद मामला शांत हो गया. लेकिन 3 अगस्त, 2019 को RGI के दफ्तर से जारी हुई एक नई अधिसूचना ने NPR को ज़िंदा कर दिया. सरकार 2015 में इकट्ठा की जानकारी को अपडेट करने जा रही है. जितनी जानकारी जमा है, उसे डिजिटाइज़ किया जा चुका है. माने पूरा डेटा एक क्लिक पर हासिल किया जा सकता है.

एनपीआर अपडेट करने के पीछे सरकार का तर्क है कि किसी भी देश के पास वहां रहने वाले लोगों का डेटा होना चाहिए.
एनपीआर अपडेट करने के पीछे सरकार का तर्क है कि किसी भी देश के पास वहां रहने वाले लोगों का डेटा होना चाहिए. फोटो- पीटीआई

NPR में कौन-कौनसी जानकारी इकट्ठा की जाएगी?

दो तरह की जानकारियां –
1. डेमोग्राफिक या जनसांख्यिकीय जानकारी
इसके तहत नाम, जन्म की जगह, पढ़ाई, पेशा वगैरह पूछा जाएगा.
2. बायोमैट्रिक माने शरीर के अंगों की जानकारी – मसलन आंख की पुतली का पैटर्न, उंगलियों के निशान वगैरह. सरकार के पास ये जानकारियां पहले से हैं. आधार के डेटाबेस में. तो NPR के लिए बायोमैट्रिक जानकारी वहां से भी ली जा सकती है.

2010 में NPR के लिए सिर्फ डेमोग्राफिक जानकारियां इकट्ठा की गई थीं. 2015 में सरकार ने लोगों का मोबाइल नंबर, आधार नंबर और राशन कार्ड नंबर मांगा. अगले साल तैयार होने वाले NPR में राशन कार्ड नंबर नहीं मांगा जाएगा. लेकिन इसकी जगह दूसरे कॉलम जोड़े गए हैं. अभी जो पायलट चल रहा है, उसमें पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी और पासपोर्ट की डीटेल भी मांगी जाएगी. इंडियन एक्सप्रेस अखबार की वेबसाइट पर 27 सितंबर, 2019 को ‘Explained: The National Population Register, and the controversy around it’ टाइटल से एक रिपोर्ट छपी थी. इसमें गृह मंत्रालय के सूत्रों के आधार पर ये बताया गया था कि भले NPR में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो, लेकिन मोबाइल नंबर, पैन, आधार और वोटर आईडी की जानकारी देना अनिवार्य नहीं होगा.

सरकार इतनी जानकारी का करेगी क्या?

सरकार के पास पहले से ही कई डेटाबेस में लोगों की जानकारी दर्ज है. मिसाल के लिए वोटर आईडी और आधार का डेटा. बावजूद इसके सरकार NPR के लिए डेटा इकट्ठा करना चाहती है और इसके समर्थन में ये तर्क दे रही है –

1. दुनिया की हर सरकार के पास अपने यहां रह रहे लोगों की जानकारी का एक डेटाबेस होना चाहिए जिसमें डेमोग्राफिक डीटेल हो

2. इससे ज़्यादा बारीकी के साथ सरकार अपनी नीतियां बना पाएगी, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में ये जानकारी काम आएगी

3. अलग-अलग दस्तावेज़ों में कई बार एक ही जानकारी अलग-अलग तरह से दर्ज हो जाती है. मसलन वोटर आईडी और दसवीं की मार्कशीट में अलग-अलग जन्म तारीख होना. सरकार का तर्क है कि NPR के आने के बाद अलग-अलग दस्तावेज़ जमा नहीं करने होंगे. इससे कागज़ी कार्रवाई कम होगी, लाल फीताशाही रुकेगी.

4. 24 दिसंबर की दोपहर को सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर प्रेस के सामने आए. बताया कि कैबिनेट ने NPR को स्वीकृति दे दी है. साथ में कहा कि योजना हमारी नहीं है, ये तो यूपीए का शुरू किया एक अच्छा काम है, जिसका प्रेस ने स्वागत किया था. हम उसी को पूरा करने जा रहे हैं. जावड़ेकर ने ये भी कहा कि NPR के बनने के बाद इसके डेटा का इस्तेमाल उज्जवला, सौभाग्य और दूसरी जन कल्याणकारी योजनाओं में सीधा फायदा पहुंचाने के लिए होगा. उन्होंने अलग-अलग राज्यों में चल रही उन योजनाओं के नाम भी बताए जिनमें NPR का इस्तेमाल हो रहा है – जैसे राजस्थान में चल रही भामाशाह योजना. जावड़ेकर ने ये भी बताया कि सरकार ने NPR के लिए 3 हज़ार 941 करोड़ का बजट रखा है. जावड़ेकर ने ये भी साफ किया कि NPR के लिए किसी तरह के दस्तावेज़ सबूत के तौर पर नहीं मांगे जाएंगे और न बायोमैट्रिक जानकारी ली जाएगी. तो डरने की ज़रूरत नहीं है.

सरकार कह रही है कि NPR को सेंसस 2021 की तैयारी की तरह देखा जाए. फाइल फोटो
सरकार कह रही है कि NPR को सेंसस 2021 की तैयारी की तरह देखा जाए. फाइल फोटो

NPR और NRC में क्या फर्क है?

असम में जब NRC को अपडेट किया गया, तो लोगों से आवेदन मांगे गए थे. तो NRC में शामिल होना या न होना ऐच्छिक था. NPR अनिवार्य है और इसके लिए सरकारी अधिकारी-कर्मचारी आपके घर पहुंचेंगे. NPR में रहवासियों की जानकारी इकट्ठा होगी और NRC में नागरिकों की. सभी नागरिक रहवासी हो सकते हैं लेकिन सभी रहवासी, नागरिक नहीं हो सकते. तो NRC एक ज़्यादा गंभीर नतीजे देने वाली कवायद है. लेकिन ये जानिए कि NPR एक ऐसा डेटाबेस है, जिसके अंदर ऐसी जानकारी दर्ज होगी जिसका इस्तेमाल एक राष्ट्रव्यापी NRC में किया जा सकता है.

NPR को लेकर क्या-क्या चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं?

1. अमित शाह लंबे वक्त से ”वन नेशन, वन कार्ड” की बात कर रहे हैं. और यहीं लोग पूछ रहे हैं कि नया कार्ड क्यों जब पहले ही आप आधार के लिए आंख की पुतली तक स्कैन कर चुके हैं. कोई जानकारी कम पड़ रही हो तो आधार को ही अपडेट किया जा सकता था. दो-दो डेटाबेस क्यों?

2. सरकार कह रही है कि NPR का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं के क्रियानवयन में होगा. इसपर सवाल उठ रहा है कि जब आधार है, जिसके आधार पर डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर चल रहा है, तो NPR का क्या काम.

3. सरकार कह रही है कि डेटा को डिजिटल इसलिए रखा जा रहा है कि नतीजे जल्दी आएं. प्रकाश जावड़ेकर ने आज शिकायत की कि 2011 की जनगणना के आरंभिक नतीजे 2016 में जाकर आए. 2019 आ गया, लेकिन अभी अंतिम नतीजे आए नहीं हैं. तकनीक की मदद से जल्द नतीजे आएंगे. और नीतियां बनेंगी. लेकिन मंत्री जी ने ये नहीं बताया कि इतने विशाल और संवेदनशील डेटा को डिजिटल फॉर्मेट में रखा जाएगा तो उसकी सुरक्षा कैसे होगी. भारत में निजता और डेटा प्राइवेसी को लेकर न आम जनता चिंतित है न ही सरकार.

4. और सबसे बड़ा डर यही है कि क्या NPR राष्ट्रव्यापी NRC की भूमिका तैयार कर देगा. सरकार कह रही है कि NRC के लिए नियम बनाए नहीं गए हैं. लेकिन अमित शाह कई बार साफ कर चुके हैं कि सरकार NRC लाना तो चाहती है. टिप्पणीकार लगातार इस बात की तरफ इशारा कर रहे हैं कि पहले NPR में हर रहवासी की जानकारी इकट्ठा होगी. इसके बाद जब NRC बनाना होगा, तो अलग से कवायद करने के बजाय NPR की ही जानकारी को सत्यापित माने वेरिफाय करके नागरिकों की लिस्ट बना ली जाएगी. यही होगा राष्ट्रव्यापी NRC.

5. चिंता का सबसे बड़ा कारण है NPR का एक सवाल – आपके माता-पिता का जन्म कहां हुआ था. माता-पिता का जन्म स्थान नागरिकता तय करने में अहम था, और रहेगा. सवाल किया जा रहा है कि अगर आपको छह महीने के सामान्य रहवासियों से ही मतलब है तो फिर आप माता-पिता का जन्मस्थान क्यों पूछ रहे हैं.

ममता बनर्जी अपने सूबे में एनपीआर का काम रोक चुकी हैं.
ममता बनर्जी अपने सूबे में एनपीआर का काम रोक चुकी हैं.

क्या NRC और NPR की तुक मिलना गलत है?

प्रकाश जावड़ेकर ने 24 दिसंबर को साफ किया था कि NPR और NRC अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं. लेकिन 17 दिसंबर, 2019 को स्क्रोल डॉट इन पर शोएब दानियाल की रिपोर्ट Amit Shah’s all-India NRC has already begun – with the NPR दूसरी तरफ इशारा करती है. रिपोर्ट आपको बताती है कि Citizenship Act, 1955 में एक बदलाव 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार ने भी किया था. संशोधन के बाद “illegal migrant” या अवैध प्रवैसी नाम की एक कैटेगरी तैयार हुई. संशोधन को लागू करने के लिए नए नियम भी बने. नियमों में National Register of Indian Citizens का ज़िक्र आता है. नियमों में लिखा है कि National Register of Indian Citizens के लिए सरकार पूरे देश में घर-घर जाकर हर परिवार के हर व्यक्ति की जानकारी इकट्ठा करे. इसमें नागरिकता की जानकारी भी हो.

2003 के नियमों के मुताबिक, National Register of Indian Citizens को कई इकाइयों में बांटा जाएगा –
1. State Register of Indian Citizens
2. District Register of Indian Citizens
3. Sub-district Register of Indian Citizens
4. Local Register of Indian Citizens

इन्हीं नियमों में लोकल रजिस्टर बनाने का तरीका बताया गया है. इसके मुताबिक, पॉपुलेशन रजिस्टर में दर्ज जानकारी के सत्यापन के बाद Local Register of Indian Citizens तैयार किया जाएगा.

2003 में आए इन नियमों का चौथा बिंदू है – Preparation of the National Register of Indian Citizens. इस बिंदू के अंदर 7 और बिंदू हैं जिनमें से चौथा कहता है कि सत्यापन के दौरान जिन लोगों की नागरिकता पर संशय होगा, उन्हें लोकल रजिस्ट्रार अपनी टिप्पणी के साथ दर्ज कर लेगा जिसपर आगे जांच होगी. टिप्पणीकार कह रहे हैं कि असम में तैयार हुए NRC में आवेदन वाला सिस्टम था. सबको मालूम था कि कटऑफ डेट क्या है, नागरिकता की अर्हताएं क्या हैं. NPR के आधार पर राष्ट्रव्यापी NRC बना तो सबकुछ सरकारी अधिकारियों के हाथ में चला जाएगा. वो अपनी मर्जी से नागरिकता देंगे और लेंगे.

क्या NPR को लेकर हम ज़्यादा ही डर रहे हैं, ये सेंसस जैसा ही तो लगता है?

भाजपा सांसद स्वपन दासगुप्ता कह चुके हैं कि NPR को 2021 के सेंसस की तैयारी की तरह देखा जाए. लेकिन ये कानूनी रूप से सही नहीं है. NPR को Citizenship Act, 1955 और 2003 में आए नए नियमों के आधार पर तैयार किया जाएगा. जबकि जनगणना Census Act, 1948 के तहत होती है. जनगणना की जानकारी गोपनीय होती है, इसका इस्तेमाल नीतियां बनाने से इतर करना वर्जित है. लेकिन NPR को लेकर स्थिति साफ नहीं है.

इन्हीं सारी बातों को लेकर NPR पर सवाल उठाए जा रहे हैं. ममता बनर्जी अपने सूबे में NPR का काम रोक चुकी हैं. प्रकाश जावड़ेकर आज कम से कम प्रेस के सामने तो आश्वस्त दिखे कि NPR बनाया जाएगा. बनाया जाए या न बनाया जाए, सरकार को चाहिए कि वो NPR को लेकर अपनी नीयत साफ करे.


अमित शाह ने बताया NPR और NRC में क्या संबंध है?

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