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वायरस का नया वैरिएंट पैदा न हो, क्या इसके लिए कुछ किया जा सकता है?

कोरोनावायरस लगातार अपना रूप बदल रहा है. इस रूप बदलने को विज्ञान के शब्दों में कहते हैं म्यूटेशन. और एक म्यूटेशन के बाद जिस जीव का बदला रूप आएगा उसे कहेंगे स्ट्रेन. और अब इस कोरोना ने जितनी बार रूप बदला है, उतने नए रूप दुनिया के अलग-अलग देशों में फैल गए हैं. हालांकि, ये भी ज़रूरी नहीं है कि रूप बदलने के बाद हर बार कोरोना वायरस पहले से ज्यादा खतरनाक हो जाए. कई बार वायरस का नया स्ट्रेन बनता है और अपने आप खत्म भी हो जाता है. लेकिन कुछ स्ट्रेन रह जाते हैं और लोगों में तेज़ी से फैलते हैं. ऐसा ही स्ट्रेन भारत में इस वक्त एक्टिव है. उसे लेकर WHO ने भी चेतावनी जारी कर दी है.

वायरस के स्ट्रेन कितने तरह के होते हैं?

मुख्य रूप से वायरस के तीन तरह के स्ट्रेन होते है. वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट, वैरिएंट ऑफ कंसर्न और वैरिएंट ऑफ इन्वेस्टिगेशन.

– वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट यानी रुचि वाला वैरिएंट : वायरस का वो स्ट्रेन जिसकी वजह से संक्रमण तेज़ी से फैलता है.

– वैरिएंट ऑफ कंसर्न यानी चिंता वाला वैरिएंट : इसमें उन वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट को शामिल किया जाता है, जिनकी वजह से लोगों में गंभीर हेल्थ ईशूज़ डेवलप होने लगते हैं. ये वाला वैरिएंट शरीर पर ज्यादा तेज़ी से वार करता है, संक्रमण तेज़ी से घर करता है और मौतों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जाती है.

– वैरिएंट ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी जांच वाला वैरिएंट : वो स्ट्रेन, जो अमूमन RTPCR टेस्ट में पकड़ में नहीं आता है. इन स्ट्रेन्स की जांच की जाती है.

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भारत में 22 अप्रैल से अब तक हर दिन कोरोना वायरस के तीन लाख से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. फोटो – पीटीआई

अब भारत में जो स्ट्रेन आए, वो कौन से हैं?

B.1.1.7: यानी कोरोना वायरस का यूके वैरिएंट . इस वैरिएंट का पहला मामला सितंबर, 2020 में यूके में आया था. हालांकि, इसकी पुष्टि नवंबर, 2020 में जीनोम टेस्टिंग के जरिए हुई. कोरोना वायरस का ये वैरिएंट शरीर में एंटी बॉडीज़ मौजूद होने के बावजूद संक्रमण फैला सकता है. काफी तेज़ी से फैलता है. भारत में इस वक्त जिन दो वैरिएंट के सबसे ज्यादा मामले हैं, उनमें से एक यूके वैरिएंट भी है.

B.1.351: यानी कोरोना वायरस का साउथ अफ्रीका वैरिएंट . ये वैरिएंट ज्यादा तेज़ी से संक्रमण फैलाता है. हालांकि, इस बात को लेकर कोई सबूत नहीं मिले हैं कि ये वैरिएंट ओरिजिनल वायरस से ज्यादा गंभीर दिक्कतें पैदा करता है. ओरिजिनल वायरस की तरह ही इस वायरस का खतरा भी बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को ज्यादा है.

P.1: मतलब कोरोना वायरस का ब्राज़ील वैरिएंट . इसका पता पहली बार 6 जनवरी, 2021 को चला था. ब्राज़ील से टोक्यो पहुंचे चार लोगों में ये स्ट्रेन पाया गया था. ओस्वाल्डो क्रुज़ फाउंडेशन के रिसर्चर्स ने एक स्टडी प्रकाशित की थी. इसमें सामने आया था कि P.1 वैरिएंट से इंफेक्ट होने पर शरीर में वायरल लोड 10 गुना बढ़ जाता है. रिसर्च में ये भी पाया गया कि ये वैरिएंट दूसरे वैरिएंट्स की तुलना में युवाओं में ज्यादा तेज़ी से फैलता है.

Covid
वायरस का और खतरनाक रूप हमारे सामने न आए इसके लिए ज़रूरी है कि वायरस को फैलने से रोका जाए. फोटो – इंडिया टुडे फाइल (रिप्रेज़ेन्टेशन के लिए )

भारत में इस वक्त वायरस का जो वैरिएंट एक्टिव है उसका कोड नेम है B.1.617. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन ने इस वैरिएंट को हाल ही में वायरस ऑफ कंसर्न घोषित किया है. कुछ मीडिया आउटलेट्स इसके लिए इंडिया वैरिएंट नाम का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि, WHO ने यह साफ किया है कि उन्होंने इस वैरिएंट का नाम किसी देश के साथ लिंक नहीं किया है. वायरस का ये वैरिएंट भारत सहित 44 देशों में पाया गया है, और जहां भी ये पहुंचा है वहां संक्रमण तेज़ी से फैल रहा है.

B.1.617 में क्या अलग है?

इस वैरिएंट के लिए डबल म्यूटेंट शब्द का इस्तेमाल भी किया जा रहा है. इसके वजह है इसमें दो म्यूटेशंस होना. इन म्यूटेशंस के कोड नेम E484Q और L452R. वैसे तो कोरोना वायरस के ज्यादातर वैरिएंट में इनमें से कोई एक म्यूटेशन होता ही है. लेकिन B.1.617 में ये दोनों म्यूटेशंस हैं. जो इसे ज्यादा खतरनाक बना रहे हैं.

इनमें L452R म्यूटेशन की वजह से वायरस बहुत तेज़ी से फैलता है. ये पाया गया है कि ये म्यूटेशन वायरस को मरीज के शरीर से सेल्स से ज्यादा मजबूती से जोड़ देता है और एंटीबॉडीज़ से बचने के इसके चांसेस को बढ़ा देता है. वहीं, E484Q म्यूटेशन एंटीबॉडीज़ को तोड़कर वायरस को मारने की शरीर की शक्ति को कम कर देता है. ये अलग-अलग वैरिएंट  में इन म्यूटेशंस की मौजूदगी की स्टडी में वैज्ञानिकों ने पाया है. लेकिन ये दोनों साथ में कितने खतरनाक हो सकते हैं, इसे लेकर ठीक-ठीक कोई स्टडी सामने नहीं आई है. हालांकि, भारत में बढ़ते मामलों को देखते हुए ये तो कहा ही जा सकता है कि डबल म्यूटेंट शरीर के अंदर घुसकर उसे तेज़ी से नुकसान पहुंचा रहा है. सिम्प्टम दिखने के एक दो दिन बाद ही मरीज की हालत बहुत खराब होने के कई मामले अब तक हमारे सामने आ चुके हैं.

Corona Virus Precautions
वायरस को फैलने से रोकने के लिए वैक्सीनेशन के साथ-साथ मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथों की सफाई का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है. फोटो – पीटीआई

क्या वायरस को म्यूटेट होने से रोका जा सकता है?

ये जानने के लिए हमने बात की डॉक्टर एकता गुप्ता से. डॉक्टर एकता एम्स दिल्ली में वायरोलॉजिस्ट हैं. उन्होंने बताया कि वायरस तेज़ी से फैल रहा है, वो जितना ज्यादा फैलेगा उसके म्यूटेशन की संभावना उतनी ज्यादा होगी. वायरस को म्यूटेट करके नया वैरिएंट बनाने से रोका नहीं जा सकता है. उन्होंने बताया कि वायरस सर्वाइव करने के लिए म्यूटेट होते हैं. वो लगातार म्यूटेट होते हैं, इस प्रोसेस में कई बार कोई ऐसा वैरिएंट बनता है जो आकर मर भी जाता है और किसी को पता भी नहीं चलता. कई बार कोई ऐसा वैरिएंट बनता है, जो बना रहता है लेकिन इंसानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता. और कई वैरिएंट ऐसे बन जाते हैं जो लोगों के लिए जानलेवा साबित होते हैं. जैसे अभी का डबल म्यूटेंट वैरिएंट.

Coronavirus Hospital
भारत में इस वक्त कोरोना वायरस का B.1.617 वैरिएंट बहुत ज्यादा फैला हुआ है. WHO ने हाल ही में उसे वैरिएंट ऑफ कंसर्न घोषित किया है. (तस्वीर: एपी)

कोरोना वायरस का कौन सा म्यूटेंट कितना खतरनाक होगा, ये कहा नहीं जा सकता है. इसके लिए ज़रूरी है कि सामने आ रहे हर म्यूटेंट की जांच की जाए.

वायरस के खतरनाक स्वरूप से बचने के लिए फिलहाल ज़रूरी है कि वायरस के संक्रमण को फैलने से रोका जाए. इसके लिए ज़रूरी है वैक्सीनेशन. और उसके साथ-साथ मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथों के हाईजीन का विशेष ख्याल रखना ज़रूरी है.


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