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मुंबई ने कैसे मैनेज किया ऑक्सीजन सप्लाई का संकट कि सुप्रीम कोर्ट तारीफ कर रहा है

ऑक्सीजन सप्लाई के संकट को मैनेज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की तारीफ की है. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार 5 मई को सुझाव दिया कि दिल्ली में कोरोना मरीजों के लिए लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन सप्लाई के मैनेजमेंट के लिए मुंबई मॉडल अपनाना चाहिए. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि ग्रेटर मुंबई नगर निगम के अनुभव से कुछ सीखें, वे कुछ महान काम कर रहे हैं. दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. इस नोटिस के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की ओर से याचिका दायर की गई थी. लाइव लॉ की खबर के मुताबिक, इसी सुनवाई में जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा,

हर दिन जानकारी का खजाना सामने आ रहा है. बॉम्बे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) कुछ महान कार्य कर रहा है, इससे दिल्ली का कोई अपमान नहीं होगा. वे क्या कर रहे हैं, वे कैसे प्रबंधन कर रहे हैं. हम उनसे सीख सकते हैं. मैं यह भी समझता हूं कि महाराष्ट्र ऑक्सीजन का उत्पादन भी करता है, जो दिल्ली नहीं कर सकती है.

मुंबई की तारीफ क्यों हो रही है?

इंडिया टुडे के एग्जिक्यूटिव एडिटर साहिल जोशी की रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड को लेकर नागरिकों से अधिक कर्तव्यनिष्ठ होने की अपील करने और सुरक्षा मानदंडों का पालन करने से लेकर अस्पताल के बेड बढ़ाने तक, BMC ने कई कदम उठाए हैं. BMC के एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर सुरेश काकाणी का कहना है,

हमने कोरोना की पहली लहर के दौरान पाया कि ऑक्सीजन की सप्लाई महत्वपूर्ण है. अगर यह निरंतर नहीं रही तो सप्लाई प्रभावित हो सकती है. ऐसे में तभी से हमने तैयारी शुरू कर दी.

सिलेंडर पर निर्भरता कम की

न्यूज 18 की खबर के मुताबिक, सुरेश काकाणी ने बताया है कि BMC ने ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम को दुरुस्त किया. मुंबई में 28 हजार बेड थे, इनमें से 12 से 13 हजार बेड ऑक्सीजन बेड थे. कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की मांग बढ़ी. लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से तैयार था तो मरीजों को बेड की दिक्कत नहीं हुई. शुरू में ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए मुंबई के अस्पताल सिलेंडर पर निर्भर थे. इसे हर दिन भरना होता था, जो एक जटिल और टाइम टेकिंग प्रोसेस था. कोरोना की पहली लहर में बीएमसी ने महसूस किया कि इन ऑक्सीजन सिलेंडरों पर इतनी निर्भरता ठीक नहीं है.

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सांकेतिक फोटो-PTI

जनवरी 2021 में बीएमसी ने एक कैंपेन लॉन्च किया. सिलेंडर बेस्ड ऑक्सीजन सिस्टम की जगह हॉस्पिटल और कोविड के बड़े सेंटरों पर पाइप बेस्ड सिस्टम लगाया. सीधे पाइप से सप्लाई का सिस्टम. बीएमसी ने सबसे पहले जाना कि सिलेंडर के इस्तेमाल से वेस्टेज बढ़ता है, ऐसे में उन्होंने मुंबई के बड़े कोविड केयर सेंटर्स पर ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम को बदल दिया. हालांकि सिलेंडर को पूरी तरह से हटाया नहीं गया, इन्हें इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए रखा गया है.

ऑक्सीजन नर्स की तैनाती

बीएमसी ने इसके साथ ही ऑक्सीजन नर्स की तैनाती की, जिनका काम ये था कि वे वार्ड में प्रति मरीज का ऑक्सीजन लेवल 96 तक रखें. जो मरीज के लिए उपयुक्त है. मार्च में जब कोविड के केस बढ़े तब मुंबई में प्रति मरीज ऑक्सीजन की खपत 6 किग्रा. तक पहुंची, जिसे अप्रैल में 4.2 किग्रा. तक लाया गया.

Covid Care Train Coaches In Jabalpur
सांकेतिक तस्वीर-PTI

प्राइवेट अस्पतालों में रिजर्व ऑक्सीजन

एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर सुरेश काकाणी का कहना है कि अगर हम लोगों को कहें कि कल पानी की कमी होगी, तो लोग पानी जमा करना शुरू कर देंगे. ऐसे में लोगों को पानी की सप्लाई की सही डिटेल देना जरूरी है. प्राइवेट हॉस्पिटल में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए हमने उसी तकनीक पर काम किया. ख़बरें बताती हैं कि बीएमसी ने प्राइवेट अस्पतालों से अपनी ऑक्सीजन सप्लाई का बीस फीसदी हिस्सा रिजर्व करने को कहा, साथ ही भरोसा दिलाया कि जरूरत पड़ने पर उन्हें सप्लाई मिलेगी.

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प्राइवेट अस्पतालों से कहा गया कि वे 20 प्रतिशत ऑक्सीजन रिजर्व में रखें. सांकेतिक फोटो-PTI

डॉक्टरों के साथ ट्रेनिंग सेशन

इसके अलावा डॉक्टरों के लिए आयोजित एक ख़ास ट्रेनिंग सेशन का ज़िक्र भी ख़बरों में मिलता है. ये ट्रेनिंग इसलिए दी गई ताकि मेडिकल ऑक्सीजन का सही इस्तेमाल सिखाया जा सके. साथ ही इसमें ऑक्सीजन पर निर्भरता कम करने के महत्व पर भी बल दिया गया. सुरेश काकाणी का कहना है कि डॉक्टरों को सलाह दी गई कि उस तरह के इलाज पर जोर दें, जिससे मरीजों की क्षमता बढ़े. इसमें छह मिनट का वॉक टेस्ट शामिल है. बीएमसी रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रशिक्षण से डिस्चार्ज रेट बढ़ा और और ऑक्सीजन आपूर्ति पर निर्भरता कम हुई.

बीएमसी कमिश्नर इकबाल सिंह चहल ने इंडिया टुडे टीवी को बताया,

हमारा उद्देश्य मुंबई जैसे शहर का विकेंद्रीकरण करना रहा. हमारे पास 24 वार्ड लेवल वॉर रूम हैं, इससे मरीजों को बेड उपलब्ध कराने के मुद्दे को हल किया गया. और इसी रणनीति ने हमें मुंबई में कोविड पर निगरानी रखने में सक्षम बनाया.

एक अधिकारी ने बताया कि बीएमसी अपने 12 अस्पतालों में 16 ऑन-साइट ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र स्थापित करेगी, जो 43 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन करेंगे. परियोजना की उम्र 15 वर्ष होगी. और जंबो सिलेंडर की तुलना में इसकी कीमत कम होगी.

पिछले दो वर्षों में स्थापित किए गए दो संयंत्रों में, एक कस्तूरबा अस्पताल में है, जो प्रति दिन 500 घन मीटर ऑक्सीजन का उत्पादन करता है, जबकि दूसरा जोगेश्वरी में हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे ट्रामा केयर सेंटर में है जिसमें प्रति दिन 1740 घन मीटर ऑक्सीजन का उत्पादन होता है.

महाराष्ट्र के बाकी हिस्से में क्या स्थिति है?

दी लल्लनटॉप के रिपोर्टर निखिल इस समय कोरोना की कवरेज के लिए महाराष्ट्र में हैं. वह राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कवरेज कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में भी ऑक्सीजन की किल्लत है. खासकर प्राइवेट हॉस्पिटल में. महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों जैसे नासिक वगैरह के प्राइवेट हॉस्पिटल में आपको ऑक्सीजन की किल्लत देखने को मिलेगी. इसकी वजह से कई हॉस्पिटल बंद भी हुए हैं. एक हफ्ते पहले कई हॉस्पिटल बंद हुए थे, क्योंकि वो ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर निश्चिंत नहीं थे. हालांकि वहां सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई ठीक है.

वहीं विदर्भ में मुंबई जैसी सुविधा देखने को नहीं मिलेगी. विदर्भ का सबसे बड़ा शहर है नागपुर, लेकिन यहां भी जंबो कोविड सेंटर देखने को नहीं मिलता है. नागपुर के कई होटलों को कोविड हॉस्पिटल में बदला गया है. लेकिन कह सकते हैं कि अब राज्य में स्थिति सुधर रही है.

निखिल का कहना है कि केंद्र की ओर से महाराष्ट्र को मिलने वाले ऑक्सीजन कोटे में उतना अंतर देखने को नहीं मिलता है जितना की दिल्ली में देखने को मिलता है. जो डिमांड है उस हिसाब से 19-20 का ही अंतर है.

वहीं दूसरी ओर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के सभी प्राइवेट हॉस्पिटल के लिए ऑक्सीजन प्लांट लगाना अनिवार्य कर दिया है. कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते कोर्ट ने ये आदेश दिया है.

केंद्र से ऑक्सीजन बढ़ाने की मांग कर चुका है महाराष्ट्र

महाराष्ट्र ने ऑक्सीजन की बढ़ती जरूरत का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) का कोटा बढ़ाने की मांग की है. प्रदेश के मुख्य सचिव सीताराम कुंटे ने केंद्रीय कैबिनेट सचिव राजीव गौबा को तीन मई को पत्र लिखकर ऑक्सीजन का कोटा 200 मीट्रिक टन बढ़ाए जाने की मांग की है. महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि गुजरात के जामनगर से इस समय 125 मीट्रिक टन और भिलाई से 130 मीट्रिक टन ऑक्सीजन रोज आ रही है. इसे बढ़ाकर 225 और 230 मीट्रिक टन किया जाना चाहिए. कुंटे ने कहा कि जामनगर और भिलाई महाराष्ट्र से काफी नजदीक हैं, इसलिए यहां से आ रही ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि ऑक्सीजन टैंकरों पर निर्भरता कम की जा सके. इससे हमें हर रोज की मांग के मुताबिक ऑक्सीजन मिलेगा और उसका मैनेजमेंट भी आसान हो जाएगा. महाराष्ट्र के मुख्य सचिव ने आगे कहा कि पालघर, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, सतारा, सांगली, कोल्हापुर, सोलापुर, नंदुरबार, बीड, परभणी, हिंगोली, अमरावती, बुलढाणा, वर्धा, गढ़चिरौली और चंद्रपुर समेत 16 जिलों में कोरोना संक्रमण के नये मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है, जिसके कारण ऑक्सीजन की मांग काफी बढ़ गई है.


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