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कप्पा वैरिएंटः डेल्टा वैरिएंट का यह मौसेरा भाई कितना खतरनाक है?

यूपी के बाद राजस्थान में कोरोना वायरस के कप्पा वैरिएंट (Kappa Variant) के मिलने की खबर ने सरकार और मेडिकल एक्सपर्ट की चिंता बढ़ा दी है. देश में कोरोना की दूसरी लहर भले ही कुछ कमजोर पड़ी हो, लेकिन अब भी खतरा बना हुआ है. महाराष्ट्र, केरल सहित पूर्वोत्तर के राज्यों में कोरोना के नए केस परेशानी का सबब बने हुए हैं. और अब कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन के रूप में कप्पा वैरिएंट ने खतरे की घंटी बजा दी है. आइए जानते हैं क्या है कोरोना वायरस का कप्पा वैरिएंट और क्या वाकई में इससे डरने की जरूरत है.

राजस्थान-यूपी में मिले केस

राजस्थान में कप्पा वैरिएंट के करीब एक दर्जन मरीज सामने आ चुके हैं. प्रदेश के हेल्थ मिनिस्टर डॉ. रघु शर्मा ने बताया,

“राजस्थान में अब तक कप्पा वैरिएंट के 11 मरीज मिल चुके हैं. इनमें से 4-4 मरीज जयपुर और अलवर के हैं. दो मरीज बाड़मेर से और एक भीलवाड़ा से है. हालांकि कप्पा वैरिएंट, डेल्टा वैरिएंट के मुकाबले मध्यम तरीके का है, फिर भी हमें अनुशासन के साथ कोरोना के नियंत्रण से जुड़े प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए.”

इससे पहले उत्तर प्रदेश में भी कप्पा वैरिएंट के मरीज मिले थे. 9 जुलाई को यूपी सरकार ने एक स्टेटमेंट जारी करके बताया था कि प्रदेश में 109 सैंपल लेकर किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में उनकी जांच कराई गई थी. इनमें से 107 में डेल्टा प्लस वैरिएंट और 2 में कप्पा वैरिएंट पाया गया. यह भी कहा गया था कि दोनों ही वैरिएंट प्रदेश में नए हैं, इसलिए जीनोम सिक्वेंसिंग का काम तेज करवाया जाएगा.

क्या है कप्पा वैरिएंट?

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के अनुसार कप्पा वैरिएंट कोरोना वायरस के उन दो वैरिएंट्स में से एक है जो सबसे पहले भारत में आइडेंटिफाई हुए. कप्पा से पहले डेल्टा वैरिएंट भारत में कई लोगों की जान ले चुका है. कप्पा वैरिएंट असल में डेल्टा वैरिएंट का मौसेरा भाई है. दोनों ही कोरोना वायरस की B.1.617 वंशावली से संबंध रखते हैं. जब भारत में दूसरी लहर जोर पकड़ चुकी थी तब कोरोना वायरस के B.1.617.2 म्यूटेंट को ‘भारतीय वैरिएंट’ के नाम से पुकारा जाने लगा. इस पर भारत ने आपत्ति जताई. इसके बाद WHO ने कोरोना वायरस के वैरिएंट का नामकरण ग्रीक अल्फाबेट के हिसाब से कर दिया. B.1.617.2 को ‘डेल्टा’ और B.1.617.1 को ‘कप्पा’ वैरिएंट कहा गया. इस तरह से दूसरे देशों में पाए जाने वाले वैरिएंट्स के नाम भी रख दिए गए. मिसाल के तौर पर,

# ब्रिटेन से मिले वैरिएंट B.1.1.7 को ‘अल्फा’ नाम दिया गया.
# दक्षिण अफ्रीका में मिले वैरिएंट B.1.351 को ‘बीटा’ कहा गया.
# ब्राजील में नवंबर 2020 में मिले P.1 स्‍ट्रेन को अब ‘गामा’ कहलाया.
# अमेरिका में मिले B.1.427 और B.1.429 स्‍ट्रेन को ‘एप्‍सीलोन’ तो B.1.526 वैरिएंट को ‘आयोटा’ नाम दिया गया.
# फिलीपींस में जो कोरोना वायरस का स्ट्रेन P.3 मिला था, उसे ‘थीटा’ कहा गया.
# कुछ अन्य देशों में मिले B.1.525 वैरिएंट को ‘ईटा’ नाम दिया गया.

जब यह नामकरण किया गया तो WHO ने ट्वीट करके बताया कि इन नामों की वजह से वायरस के अलग-अलग वैरिएंट्स के साइंटिफिक नामों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इन्हें रिसर्च के लिए इस्तेमाल किया जाता रहेगा. नामों को रखने का मतलब सिर्फ इतना है कि कोरोना वायरस की वजह से किसी खास जगह के साथ भेदभाव न किया जाए और उसकी बदनामी न हो.

कप्पा वैरिएंट कितना खतरनाक है?

कप्पा वैरिएंट अब भी WHO की ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ वाली लिस्ट में है. मतलब इस वायरस पर नजर बनी हुई है लेकिन यह अभी चिंता का विषय नहीं बना है. जब केस बढ़ते हैं तो वैरिएंट को ‘वैरिएंट ऑफ कंसर्न’ की कैटेगिरी में डाल दिया जाता है. जैसा कि डेल्टा वैरिएंट के केस में किया गया था. WHO के अनुसार कप्पा वैरिएंट की कैटेगिरी के वायरस कोविड-19 बीमारी के फैलने की क्षमता और लक्षणों की गंभीरता बढ़ा सकते हैं. इतना ही नहीं ये शरीर में बनी प्रतिरोधक क्षमता को भी छका सकते हैं.

Delta Plus variant
वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि भारत में सबसे पहले पहचाने गए कोरोना वायरस के वैरिएंट डेल्टा अब विकसित होकर डेल्टा प्लस बन गया है. कप्पा वायरस भी इस फैमिली का ही सदस्य है. प्रतीकात्मक तस्वीर. फोटो- आजतक

जहां तक बात लक्षणों की है तो कप्पा वैरिएंट के सिंपटम्स भी दूसरे कोरोना वैरिएंट से होने वाले इन्फेक्शन जैसे ही हैं. इसकी चपेट में आने पर बुखार, जुखाम, खांसी, सिरदर्द, मुंह सूखना, स्वाद और गंध ना आना जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं. इनके अलावा कुछ अलग लक्षण भी हो सकते हैं.

इंडोनेशिया में कोरोना की स्थिति पर नजर बनाए हुए ग्रीफिथ यूनिवर्सिटी के वायरस विशेषज्ञ डिक बुडिमान ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा है कि कप्पा वैरिएंट के मरीजों में शुरुआत में मीजल्स यानी खसरे जैसे लक्षण दिख सकते हैं. बुडिमान के मुताबिक, इस वैरिएंट से ग्रसित मरीज को इंफेक्शन के पहले या दूसरे दिन शरीर पर हल्के निशान नजर आ सकते हैं. इसके बाद कोरोना वायरस के बारे में पहले से बताए गए लक्षण दिखना शुरू होते हैं.

कप्पा वैरिएंट पर वैक्सीन कितनी असरदार है?

हाल ही में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने कहा है कि भारत में बना कोविड टीका- कोवैक्सीन- कोरोना वायरस के बीटा और डेल्टा वैरिएंट के अलावा कप्पा वैरिएंट पर भी असरदार है. इसी तरह की तस्दीक अमेरिका के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ ने भी की है. पिछले महीने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ‘सेल’ नाम के मेडिकल जर्नल में कप्पा वैरिएंट पर वैक्सीन के प्रभाव का जिक्र किया था. इस स्टडी के अनुसार, एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कोरोना के डेल्टा और कप्पा वैरिएंट पर असरदार है. बता दें कि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन ही भारत में कोवीशील्ड के नाम से उपलब्ध है.


वीडियो – कोरोना के लैंब्डा वैरिएंट के बारे में जानिए जिसे लेकर WHO के साथ दुनिया भर के वैज्ञानिक परेशान हैं

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