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मालगाड़ियों पर गार्ड करते क्या हैं, जिनकी जगह लेने अब मशीनें आ रही हैं

मुमकिन है कि भविष्य में मालगाड़ियों पर आपको गार्ड नजर न आएं. मालगाड़ियों का संचालन बिना गार्ड के EoTT यानी एंड ऑफ ट्रेन टेलीमेट्री (End of Train Telemetry) सिस्टम से किया जाएगा. उत्तर-मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि इस सिस्टम का सफल प्रयोग कानपुर यार्ड से टुंडला के बीच एक मालगाड़ी में किया जा चुका है. प्रयोग के बाद ऐसी 900 डिवाइस तैयार करने का ऑर्डर बनारस लोकोमोटिव वर्कशॉप को दे दिया गया है. इन डिवाइस को उत्तर-मध्य रेलवे के झांसी, प्रयागराज और आगरा मंडल से चलने वाली मालगाड़ियों में लगाया जाएगा.

इस स्टोरी में हम ये समझने की कोशिश करेंगे कि मालगाड़ियों पर गार्ड का असली काम होता क्या है, जिनकी जगह अब मशीनें ले लेंगी. इस नए EoTT सिस्टम में क्या है और यह कैसे काम करेगा. सबसे पहले जानते हैं कि मालगाड़ियों के गार्ड के बारे में.

मालगाड़ियों पर क्या करते हैं गार्ड?

गार्ड एक तरह से मालगाड़ी का सुपरवाइजर होता है. उसका मेन काम है ट्रेन को गार्ड करना. वह ट्रेन की हर गतिविधि पर नजर रखता है. हर स्टेशन पर सिग्नल एक्सचेंज कराना, खतरा भांपना, डिब्बों में किसी तरह की गड़बड़ी दिखने पर ड्राइवर को बताना, हैंड ब्रेक लगाकर गाड़ी की गति को धीमा करना जैसे कई काम उसके जिम्मे होते हैं. इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमने बात की एक लोको पायलट से जो मालगाड़ी चलाते हैं और गार्ड के काम से परिचित हैं. उन्होंने बताया कि

आमतौर पर मालगाड़ियों में 42 डिब्बे होते हैं. यात्री ट्रेनों से ये लंबी होती हैं. ज्यादातर स्टेशनों पर पटरियां दो-तीन लाइनों में बंटी होती हैं. मान लीजिए कि गाड़ी एक नंबर प्लेटफॉर्म पर आ रही है. ड्राइवर ट्रेन के अगले हिस्से में होते हैं, ऐसे में उन्हें पता नहीं चल पाता कि पूरी गाड़ी प्लेटफॉर्म पर आ गई है कि नहीं. हो सकता है कि उसका कुछ हिस्सा मुड़ नहीं पाया हो और पिछली लाइन पर ही हो. ऐसे में अगर कोई दूसरी गाड़ी उस पिछली वाली लाइन पर आ जाए तो एक्सीडेंट हो सकता है. जहां से पटरी दो हिस्सों में बंटती है, वहां पर फाउलिंग मार्क वाला पत्थर लगा रहता है. गार्ड ही लोको पायलट को बताता है कि पूरी ट्रेन उस लाइन में एंटर कर चुकी है या नहीं, और बगल वाली लाइन पूरी तरह क्लियर है या नहीं. उसके बाद लोको पायलट गाड़ी को रोकते हैं.

सांकेतिक इमेज (दी दार्जिलिंग लिमिटेड के यू-ट्यूब ट्रेलर का स्क्रीन शॉट)
सांकेतिक इमेज (दी दार्जिलिंग लिमिटेड के यू-ट्यूब ट्रेलर का स्क्रीन शॉट)

नाम न बताते हुए उन्होंने जानकारी दी कि लोको पायलट गार्ड के आदेश पर चलते हैं. गार्ड चेक करने के बाद ऑलराइट बोलता है तो हम ट्रेन को आगे बढ़ाते हैं. एक स्टेशन से निकलने के बाद दूसरे स्टेशन तक पहुंचने का समय निर्धारित रहता है. अगर ड्राइवर सही से गाड़ी नहीं चला रहा है, धीमे चला रहा है या तेज चला रहा है तो गार्ड ही ड्राइवर को अलर्ट करता है कि लेट हो रहा है, स्पीड बढ़ाइए या तेज है, कम करिए. गार्ड नोट करता है कि फलां स्टेशन से फलां स्टेशन तक पहुंचने में कितना समय लगा. इसके अलावा गार्ड यह भी देखता रहता है कि ट्रेन से कोई माल चोरी ना हो जाए. मालगाड़ी के किसी डिब्बे का गेट खुला रह गया, सामान गिर तो नहीं रहा, ये सारी चीजें भी गार्ड को देखनी होती हैं.

नया सिस्टम कैसे काम करेगा?

ये तो हुआ गार्ड का काम. अब बात करते हैं नए ऑटोमैटिक सिस्टम के बारे में, जो गार्ड की जगह लेने जा रहा है. ये EoTT (End of Train Telemetry) सिस्टम लगभग 10 लाख रुपए का आता है. इसमें दो यूनिट होते हैं. एक यूनिट को CDO कहते हैं यानी कार्ड डिस्प्ले यूनिट, जो इंजन में फिट होता है.

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कार्ड डिस्प्ले यूनिट कुछ इस तरह दिखती है. (सांकेतिक फोटो)

दूसरा होता है SBU यानी सेंस एंड ब्रेक यूनिट. ये लास्ट डिब्बे में फिट होता है.

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सेंस एंड ब्रेक यूनिट कुछ इस तरह दिखता है. (सांकेतिक फोटो)

ये दोनों  रेडियो ट्रांसमीटर के जरिये एकदूसरे से जुड़े रहते हैं. EoTT सिस्टम में GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) और GSM (ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्यूनिकेशन) लगा होता है. इससे ये डेटा को आसानी से ट्रांसफर करते रहते हैं और इंजन और लास्ट कोच तक प्रॉपर कम्युनिकेशन बना रहता है.

लोको पायलट ने बताया कि EoTT का मेन मकसद फाउलिंग मार्क बताना है. जो काम मैनुअली होता था, अब ऑटोमैटिक तरीके से यह सिस्टम काम करेगा. इसके अलावा ये सिस्टम इमरजेंसी ब्रेक लगाने में भी काम आएगा. ड्राइवर जब आपातकालीन ब्रेक लगाता है तो लास्ट वैगन में भी ब्रेक लग जाता है. EoTT सिस्टम में भी इमरजेंसी ब्रेक पावर होती है. इस सिस्टम से ब्रेकिंग सिस्टम और ज्यादा एफिशिएंट हो जाएगा. यानी जो काम गार्ड का होता है, यानी ट्रेन के संचालन की जानकारी ड्राइवर को देना, अब ये सिस्टम वो काम करेगा. ड्राइवर को आखिरी कोच में लगी यूनिट की मदद से ट्रेन की पीछे तक की गतिविधियों की जानकारी मिलती रहेगी.

तो गार्ड्स का क्या होगा?

ये बात सही है कि ये सिस्टम आने के बाद मालगाड़ियों में गार्ड की संख्या कम हो जाएगी. लेकिन उनकी छुट्टी नहीं की जाएगी. खबरों के मुताबिक, EoTT सिस्टम के लगने के बाद मालगाड़ियों के गार्ड्स को ट्रेनिंग देकर पैसेंजर ट्रेनों में खाली पदों को भरा जाएगा. जो गार्ड बचेंगे, उनको दूसरे कामों में लगाया जा सकता है. बता दें कि रेलवे बोर्ड सभी मालगाड़ियों में EoTT डिवाइस लगाने की सैद्धांतिक मंजूरी नवंबर 2020 में ही दे चुका है. इसके बाद ईस्ट कोस्ट रेलवे (ECoR) भारत का पहला ऐसा रेलवे जोन बना, जिसने ये टेक्नोलॉजी एडॉप्ट की. अब देखना ये है कि बाकी जोन की मालगाड़ियों में ये सिस्टम कब तक लग पाता है.


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