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'Hero' नाम में क्या रखा है कि इसके वास्ते मुंजाल ब्रदर्स एक-दूसरे के लिए विलेन बन रहे हैं?

हीरो इलेक्ट्रिक के नवीन मुंजाल, हीरो साइकल्स के पंकज मुंजाल और होरो मोटोकॉर्प के पवन मुंजाल (फाइल फोटो-साभार : बिजनेस टुडे, आजतक)

देश ही नहीं दुनिया की सबसे बड़ी टू-व्हीलर कंपनी हीरो मोटोकॉर्प ने शुक्रवार 14 जनवरी को इलेक्ट्रिक दोपहिया बनाने वाली एथर एनर्जी में 420 करोड़ रुपये निवेश का ऐलान किया. आप सोच रहे होंगे कि इसमें क्या खास है? बड़ी कंपनियां तो इस तरह के निवेश करती ही रहती हैं. असल में हीरो मोटोकॉर्प अब तक डीजल-पेट्रोल वाली गाड़ियां ही बनाती थी. इस तरह के निवेश को उसके इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के बाजार में धमाकेदार एंट्री की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. कंपनी मार्च तक अपना पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च करने वाली है.

अब हमारी कहानी यहां से शुरू होती है. हीरो मोटोकॉर्प अपना इलेक्ट्रिक स्कूटर तो लॉन्च कर देगी, लेकिन क्या उसके नाम के साथ ‘हीरो’ लगा होगा? यह सवाल एक बार फिर मुंजाल घराने से निकलकर दिल्ली हाई कोर्ट के गलियारों तक जा पहुंचा है. एक साल के भीतर ही ऐसा दूसरी बार हुआ है, जब मुंजाल घराने के एक भाई ने ‘हीरो’ ब्रैंडनेम के इस्तेमाल के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

हीरो इलेक्ट्रिक (Hero Electric) के मालिक विजय मुंजाल और उनके बेटे नवीन मुंजाल ने इस बार अपने चचेरे भाई और हीरो मोटोकॉर्प (Hero Motocorp) के प्रमोटर पवन मुंजाल को कानूनी चुनौती दी है. इस महीने के शुरू में ही उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. मांग है कि हीरो मोटोकॉर्प को उसके इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन के लिए ‘हीरो’ नाम का इस्तेमाल करने से रोका जाए.

विजय और नवीन मुंजाल ने ही पिछले साल इसी घराने के एक और भाई और हीरो साइकल के मालिक पंकज मुंजाल के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. तब मांग थी कि पंकज के नए वेंचर (Lectro E-Mobility) से निकलने वाली ई-साइकल्स के लिए ‘हीरो’ नाम पर रोक लगाई जाए. 2 मार्च 2021 को दिल्ली हाई कोर्ट ने दोनों धड़ों को कोर्ट के बाहर समझौता कर मामला सुलझाने का निर्देश दे डाला था. लेकिन इस बार कारोबारी घराने की सबसे बड़ी ताकत के कटघरे में खड़ा होने से मामला सुर्खियों में आ गया है.

क्या है लड़ाई की वजह?

फसाद की जड़ हमें 12 साल पीछे ले जाती है. साल 2010 में चार मुंजाल भाइयों वाले औद्योगिक घराने में कारोबार का बंटवारा हुआ था. विजय और नवीन मुंजाल को हीरो इलेक्ट्रिक का मालिकाना हक मिला था. साथ ही यह अधिकार भी कि इलेक्ट्रिक वाहन बेचने के लिए ‘हीरो’ ब्रैंड का इस्तेमाल सिर्फ हीरो इलेक्ट्रिक यानी विजय मुंजाल की कंपनी के पास होगा. इसके लिए सभी भाइयों में बाकायदा एक ट्रेडमार्क एग्रीमेंट भी हुआ था. तब इलेक्ट्रिक गाड़ियों का उतना क्रेज नहीं था. हीरो साइकल वाले पूरे देश के लिए अकेले साइकल बनाने में मशगूल हो गए और पवन मुंजाल की कंपनी हीरो मोटोकॉर्प को पेट्रोल बाइक बनाने से ही फुर्सत नहीं थी.

लेकिन उसके बाद देश और दुनिया भर में कार्बन एमिशन घटाने और इकोफ्रेंडली वाहनों के इस्तेमाल पर जोर के साथ ही कारोबार में ट्विस्ट आया. सबको लगने लगा कि भविष्य इलेक्ट्रिक वाहनों का ही है. कल तक हीरो मोटोकॉर्प के आगे कहीं भी नहीं ठहरने वाले विजय मुंजाल के हीरो इलेक्ट्रिक और हीरो एक्सपोर्ट की सेल्स धीरे-धीरे बढ़ने लगी. दूसरी बड़ी कंपनियों ने जब इलेक्ट्रिक गाड़ियां लॉन्च करनी शुरू कीं तो हीरो मोटोकॉर्प को भी भविष्य की रणनीति पर विचार करना पड़ा. ऐसे में जब हीरो इलेक्ट्रिक वालों को लगा कि अगर हीरो मोटो वाले भी इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनाने लगे तो अपनी विशाल पूंजी और मार्केट नेटवर्क के दम पर जल्द ही ईवी मार्केट भी कब्जा लेंगे.

दूसरी ओर पवन मुंजाल ग्रुप को लगता है कि जिस हीरो नाम के साथ पेट्रोल बाइक की दुनिया में वह बेताज बादशाह बने, उसके बिना इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में उतरना जोखिम भरा होगा. नए ब्रैंड के प्रमोशन पर करोड़ों खर्च करने के बाद भी जरूरी नहीं कि वह असल पहचान हासिल कर पाए, जो हीरो मोटरसाइकल्स को हासिल है. ऐसे में दोनों की लड़ाई कोर्ट के बाहर भी लंबी खिंचने के कयास लगाए जा रहे हैं.

हीरो को VIDA करने की तैयारी?

हालांकि हीरो इलेक्ट्रिक और हीरो मोटोकॉर्प के बीच लड़ाई अभी कोर्ट में है, लेकिन हीरो साइकल के खिलाफ हीरो इलेक्ट्रिक के मामले में 2 मार्च 2021 के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को देखते हुए अटकलें लगाई जा रही हैं कि ट्रेडमार्क और नाम पर हीरो इलेक्ट्रिक का पलड़ा भारी पड़ सकता है. कोर्ट के बाहर (Arbitration) मामला सुलझाने की स्थिति में भी हीरो इलेक्ट्रिक बड़ी दावेदारी रखेगी.

जानकारों का यह भी मानना है कि जब तक इस बारे में फैसला नहीं हो जाता, हीरो मोटोकॉर्प अपना इलेक्ट्रिक वाहन लॉन्च भी नहीं कर सकती. शायद इन सभी संभावनाओं को पवन मुंजाल की अगुवाई वाली हीरो मोटोकॉर्प ने खंगाल लिया है. तभी उसने अपने इलेक्ट्रिक वेंचर के लिए वैकल्पिक ब्रैंड ‘VIDA’ का ऐलान कर रखा है. कंपनी ने इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनाने के लिए आंध्र प्रदेश के चित्तूर में पहले ही यूनिट लगा रखी है. मैन्युफैक्चरिंग में मदद के लिए ताइवान की कंपनी गोगोरो (Gogoro) के साथ समझौता हो चुका है.

हाल ही में एथर एनर्जी में 420 करोड़ का निवेश भी इसी दिशा में एक बड़ा कदम है. लेकिन सबसे अहम यह कि उसने अपने उत्पादों के लिए VIDA Electric, VIDA EV, VIDA MotoCorp, VIDA Scooters जैसे नाम रजिस्टर्ड करा लिए हैं. मामला कोर्ट में होने के चलते दोनों ही कंपनियों की ओर से कोई इस बारे में सवालों के जवाब नहीं दे रहा. लेकिन माना जा रहा है कि पवन मुंजाल नए ब्रैंड की तैयारी के बावजूद इस लड़ाई में किस्मत आजमाना चाहते हैं, क्योंकि ‘हीरो’ नाम मिल जाने की थोड़ी संभावना भी उनके लिए काफी मायने रखती है.

पवन मुंजाल की अगुवाई वाली हीरो मोटोकॉर्प ने भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स मार्केट में उतरने की तैयारी कर ली है. फाइल फोटो (साभार: बिजनेस टुडे)

क्यों साख का सवाल है ‘हीरो’?

पेट्रोल-डीजल की महंगाई, प्रदूषण संबंधी बंदिशों और इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर सरकारी प्रोत्साहन को देखते हुए अब पूरे ऑटो सेक्टर में ई-व्हीकल्स का क्रेज देखा जा रहा है. बीते एक साल में भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री 300 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है. देश के इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में हीरो इलेक्ट्रिक फिलहाल मार्केट लीडर है. इसका बाजार पर सबसे ज्यादा 34.56 फीसदी कब्जा है. इसने पिछले एक साल में करीब 50,000 दोपहिया गाड़ियां बेची हैं. इसी के मालिक हैं विजय और नवीन मुंजाल, जो किसी दूसरे भाई के इलेक्ट्रिक प्रॉडक्ट्स पर ‘हीरो’ का ठप्पा नहीं देखना चाहते.

ईवी मार्केट में दूसरा नंबर ओकीनावा ऑटोटेक का है. लेकिन यहां गौरतलब है तीसरे नंबर की कंपनी. नाम है एथर एनर्जी. साल में करीब 17000 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर ही बेचे हैं, लेकिन 12.13 फीसदी मार्केट पर कब्जा है. पवन मुंजाल ने यहीं निशाना लगाया है. यही वो कंपनी है, जिसमें वह करोड़ों का निवेश कर रहे हैं. हाल में 420 करोड़ निवेश की घोषणा पहली बार नहीं हुई है. साल 2016 से ही वह इस कंपनी में पूंजी झोंक रहे हैं. मकसद साफ है, पेट्रोल सेग्मेंट की तरह इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में भी झंडे गाड़ना.

यही बात हीरो इलेक्ट्रिक वाले भाई को चुभ रही है. उसे पता है कि करीब 48,000 करोड़ रुपये का मार्केट कैप रखने वाली हीरो मोटोकॉर्प को अगर ‘हीरो’ नाम मिल गया तो कल को बाजार में उसे अपना नाम ढूंढना मुश्किल हो सकता है.

साइकल से शुरू हुआ सफर

पवन मुंजाल के पिता बृजमोहन मुंजाल ने अपने तीन भाइयों के साथ मिलकर 1940 में साइकल पार्ट्स बनाने का काम शुरू किया, जो 1956 में साइकल बनाने की फैक्ट्री तक चल निकला. सत्तर के दशक तक कंपनी ने मजेस्टिक मोपेड और स्कूटर के जरिए अपनी धाक जमा ली. 1983 में जापानी कंपनी होंडा के साथ जॉइंट वेंचर बना. नाम रखा गया-हीरो होंडा मोटर्स लिमिटेड. उसके बाद की कहानी हम सब जानते हैं. तब तक इसकी साइकल यूनिट दुनिया में सबसे ज्यादा साइकलें बेच चुकी थी.

हीरो होंडा के बैनर तले मोटर साइकलों की नई रेंज ने बाइक मार्केट का बड़ा हिस्सा कब्जा लिया और कई देशों में गाड़ियां एक्सपोर्ट होने लगीं. 2010 में परिवार में कारोबारी बंटवारा हो गया. बृजमोहन मुंजाल को हीरो होंडा मोटर्स में 26 फीसदी हिस्सेदारी मिली, जबकि ओमप्रकाश मुंजाल के परिवार को साइकल का बिजनेस मिला. सत्यानंद मुंजाल के परिवार को मजेस्टिक ऑटो, मुंजाल शोवा, जबकि दयानंद मुंजाल फैमिली को हीरो इलेक्ट्रिक, हीरो एक्सपोर्ट और सनबीम ऑटो जैसे सेग्मेंट मिले.

यहीं परिवार में ट्रेडमार्क और ब्रैंडनेम को लेकर भी समझौता हुआ. इसके तहत पेट्रोल वाहनों के लिए हीरो ब्रैंड की इजाजत तो बृजमोहन मुंजाल फैमिली को मिली. चूंकि इलेक्ट्रिक वाहन का काम दयानंद मुंजाल के बेटे विजय और उनके बेटे नवीन के हिस्से चला गया, इसलिए यह फैसला किया गया कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों के कारोबार में ‘हीरो’ ब्रैंड का अधिकार सिर्फ विजय की कंपनी के पास होगा. इस नाम का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कोई और नहीं कर पाएगा.

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