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अगर आपको लगता है कि देश में सरकारें आप चुनते हैं, तो ज़रा हॉर्स ट्रेडिंग के बारे में भी जान लें

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कर्नाटक में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं.

भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में तो उभरी है लेकिन फिर भी उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. वहां पर अब कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है. चूंकि हर कोई सत्ता पाना चाहता है इसलिए समर्थन, विरोध, गठबंधन के साथ साथ ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ का दौर भी कभी भी शुरू हो सकता है.

22 जुलाई, 2008 | लोकसभा
22 जुलाई, 2008 | लोकसभा

2014 में भाजपा की सरकार बनने से पहले दो बार यूपीए की सरकार बनी थी.

इसमें से पहली यानी 2004 में बनी मनमोहन सिंह की सरकार लेफ्ट के सपोर्ट से बनी थी. जुलाई 2008 में एक वक्त ऐसा भी आया था कि लेफ्ट ने अपना समर्थन वापस ले लिया था. कारण था एक न्यूक्लियर समझौता जो कांग्रेस चाहती थी और लेफ्ट नहीं. लेफ्ट के समर्थन वापस लेने के बाद भाजपा ने नो कॉन्फिडेंस मोशन (अविश्वास प्रस्ताव) लाने और लोकसभा सांसदों के बीच वोटिंग करवाने की मांग की. इसी दौरान, भारत के संसदीय इतिहास में पहली बार तीन सांसद – फग्गन सिंह कुलस्ते, अशोक अर्गल, महावीर भगौड़ा  बीच संसद में नोट लहराने लगे. उनका कहना था कि अमर सिंह ने ये पैसे उन्हें दिए हैं. ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के दौरान, ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के चलते.

क्या होती है ‘हॉर्स ट्रेडिंग’

हमारे देश में यह शब्द आम-तौर पर राजनीति से जुड़ा होता है. बाकी समय में आप कम ही इसे सुनेंगे. आइए आपको बताते हैं कि चुनावों के दौरान भी कब ख़ास-तौर पर आप इस शब्द को ज़्यादा सुनेंगे.

देखिए यदि भारत के किसी राज्य में चुनाव हों और चुनाव लड़ रही पार्टियों में से किसी भी पार्टी को बहुमत न मिले तब ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ होती है.

– बहुमत मतलब – यदि उतने विधायक न जीतें कि जितने सरकार बनाने के लिए ज़रूरी हों.

– और ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ मतलब – खरीद-फ़रोख्त.

Video देखें: यदि 1999 में अटल बिहारी हॉर्स ट्रेडिंग कर लेते तो, एक वोट से विश्वास मत न हारते –

राज्य के अलावा केंद्र के चुनावों में भी यह स्थिति पैसा (पैदा) हो सकती है.

तो क्या इसका मतलब ये है कि जहां कहीं भी खरीद-फ़रोख्त हो रही हो वहां पर ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ शब्द का उपयोग किया जा सकता है?

नहीं. अगर ऐसा होता तो अन्य जगहों पर भी आप इसे सुनते जैसे – ‘मैं आज मार्किट जा रहा हूं सब्जियों की हॉर्स ट्रेडिंग करने.’

लेकिन आप ऐसा नहीं सुनते.

मोदी जी मंगोलिया से गिफ्ट मिले घोड़े - कंठकिया के साथ. इसमें कहीं भी हॉर्स ट्रेडिंग नहीं है.
मोदी जी मंगोलिया से गिफ्ट मिले घोड़े – कंठकिया के साथ. इसमें कहीं भी हॉर्स ट्रेडिंग नहीं है.

क्यूंकि ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ का मतलब खरीद-फरोख्त नहीं एक ‘विशेष तरह की’ खरीद फ़रोख्त होता है.

एक ऐसी शातिर तरह की खरीद-फरोख्त जिसमें मोलभाव बड़ा समझ बूझ के किया जाता है.

लेकिन ऐसा तो हम भारतीय हर सौदे में करते हैं, और इसे ‘बार्गेनिंग’ कहते हैं. है न?

‘बार्गेनिंग’ और ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ में कई अंतर हैं. अव्वल तो ‘बार्गेनिंग’ के इतर ज़्यादातर मामलों में ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ गुपचुप तरीके से होती है, ज़्यादा शातिर तरीके से होती है, केवल पैसों को लेकर ही नहीं कई और चीज़ों को लेकर भी होती है और सौदा और उसके परिणाम लॉन्ग टर्म होते हैं. और हां ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ पूरी तरह से अनैतिक और ग़ैर-कानूनी है. इसलिए जहां आप खुलकर कह सकते हैं कि आपने बार्गेनिंग की, वहीं ये खुलकर नहीं कह सकते कि आपने ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ की.

किसी दुकान में फिक्स्ड प्राइस लिखा हो. तब भी बार्गेनिंग कीजिए. अव्वल तो ये हमारा हक़ है और दूसरा, ये हॉर्स ट्रेडिंग की तरह अनैतिक नहीं है.
किसी दुकान में फिक्स्ड प्राइस लिखा हो, तब भी बार्गेनिंग कीजिए. अव्वल तो ये हमारा हक़ है और दूसरा, ये हॉर्स ट्रेडिंग की तरह अनैतिक नहीं है.

और अब आपको ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ और शॉपिंग/बार्गेनिंग में सबसे महत्वपूर्ण अंतर बताते हैं. वो ये कि पहले चाहे ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ शब्द का कितनी ही जगह उपयोग होता आया हो लेकिन अब इसका उपयोग (अपने शब्दशः अर्थ के अलावा) केवल राजनीति में और खास तौर पर वोटों की अनुचित खरीद फ़रोख्त के लिए ही होता है.

लेकिन ये ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ शब्द ही क्यूं इस तरह की खरीद-फ़रोख्त के लिए यूज़ किया जाता है? इसके पीछे एक कहानी और उससे जुड़ा एक लॉजिक है.

हार्स यानी घोड़े और ट्रेडिंग यानी खरीद फ़रोख्त. तो यूं हॉर्स ट्रेडिंग का शाब्दिक अर्थ हुआ घोड़ों की खरीद फ़रोख्त.

हीरे की पहचान तो फिर भी जौहरी को हो जाती है लेकिन घोड़े की पहचान करना हॉर्स ट्रेडर के लिए भी मुश्किल है.
हीरे की पहचान तो फिर भी जौहरी को हो जाती है लेकिन घोड़े की पहचान करना हॉर्स ट्रेडर के लिए भी मुश्किल है.

पुराने ज़माने में घोड़ों को बेचने वाले और उन्हें पालने वाले लोग अलग-अलग हुआ करते थे. यानी हॉर्स-ट्रेडर, एक बिचौलिया सरीखा होता था. जो एक जगह से घोड़े खरीद कर उन्हें दूसरी जगह बेचता था और बीच में मार्जिन खाता था.

इस बिचौलिये, यानी ट्रेडर का घोड़ों से जुड़ी सभी जानकारियों में दक्ष होना बहुत ज़रूरी था. क्यूंकि घोड़े की नस्ल से लेकर उसकी उम्र जैसी कई चीज़ें जानना और पहचानना बहुत मुश्किल था. और घोड़े इतने महंगे होते थे कि यदि किसी को खरीदने या बेचने में आपको नुकसान हुआ (जैसे घोड़े की मृत्यु) तो उसकी भरपाई करना बहुत मुश्किल हो जाता था. खास तौर पर तब, जबकि आप केवल बिचौलिया हों और एक दो प्रतिशत के मार्जिन पर काम करते हों.

तो ये ट्रेडर शातिरता की हद तक जानकार हो गए थे. अब इससे घोड़े खरीदने वाले या बेचने वाले लोगों को दिक्कतें होने लगीं थीं. क्यूंकि ट्रेडर्स ने डिफेंस के लिए जो ‘ज्ञान’ अर्जित किया था उसे ही अब ‘अटैक’ के लिए प्रयोग में लाने लगे. यानी इनके पास जो कोई भी घोड़े खरीदने या बेचने आता उसे ठगने लगे.

यूं घोड़ों की खरीद फ़रोख्त में हर किसी का शातिरता की हद तक ज्ञानी होना ज़रूरी हो गया था.

और जब ‘भौतिकवादी’ पश्चिमी देशों, खासतौर पर अमेरिका में व्यापार करने के नैतिक मानकों में उत्तरोत्तर गिरावट आई तो घोड़ों की खरीद फ़रोख्त में होने वाली इस चालाकी को प्रतिस्पर्धी बाजार के लिए आवश्यक ‘गुण’ के रूप में देखा गया न कि किसी अनैतिकता के रूप में.

गुपचुप और अनैतिक सौदे - 'अंडर दी टेबल' सौदे भी कहे जाते हैं.
गुपचुप और अनैतिक सौदे – ‘अंडर दी टेबल’ सौदे भी कहे जाते हैं.

और इसलिए ही जहां भी चालाकी, समझदारी, लॉन्ग प्रॉफिट को ध्यान में रखकर गुपचुप और अनैतिक सौदे किए जा रहे होते उन्हें हॉर्स ट्रेडिंग की संज्ञा दी जाने लगी.

लेकिन जैसा कि आपको पहले बताया कि ये ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ धीरे-धीरे केवल राजनीति और वोटों की खरीद फ़रोख्त तक सिमट कर रह गई. (हां अपने शाब्दिक अर्थ को छोड़कर. अपने शाब्दिक अर्थ यानी – यदि आप घोड़ों की खरीद फ़रोख्त कर रहे हैं तो उसे ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ ही कहेंगे, लेकिन वो अनैतिक या असंवैधानिक नहीं होगी. या अगर हो भी तो किसी और कारण के चलते अपने नाम के चलते नहीं.)

इस विशेष तरह की ‘खरीद फ़रोख्त’ जिसे अब हॉर्स ट्रेडिंग कहा जाता है उसे अतीत में लॉगरोलिंग कहा जाता था.

थॉमस नास्ट की कलाकृति 'दी लास्ट रॉल' जो पहली बार 1886 में 'हार्पर विकली' में प्रकाशित हुई थी.
थॉमस नास्ट की कलाकृति ‘दी लास्ट रॉल’ जो पहली बार 1886 में ‘हार्पर विकली’ में प्रकाशित हुई थी.

व्यापक अर्थों में यदि हिंदी में हॉर्स ट्रेडिंग की परिभाषा दी जाए तो – ‘गुपचुप’ और ‘गैरकानूनी’ तरीके से किए गए सौदों के चलते ‘प्रत्यक्ष’ और ‘कानूनी’ गठबंधन.

यानी हाथ मिलाना सबको दिख रहा है और वो ग़ैर कानूनी भी नहीं, लेकिन हाथ मिलाने का रास्ता गुप्त और ग़ैर कानूनी है.


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