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ये FATF क्या है, जिसमें पाकिस्तान के जिगरी दोस्त चीन ने भी उसका साथ छोड़ दिया

पाकिस्तान. टेरर फाइनेंसिंग को लेकर दुनिया के एक बड़े मंच पर उसका लिटमस टेस्ट चल रहा है कि वो आतंकवाद के ख़िलाफ़ गंभीरता से कार्रवाई कर रहा है या नहीं. टेरर फाइनेंसिंग का मतलब आतंकवाद को सुरक्षित आर्थिक मदद मिलना. एक संगठन है, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF). पेरिस में इसकी मीटिंग चल रही है. 21 फरवरी को इसमें फैसला होगा कि पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा जाए या नहीं. इस मीटिंग में 205 देशों के 800 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे, जिनमें IMF, UN, वर्ल्ड बैंक के अलावा कई संस्थानों के लोग भी हैं. तुर्की और मलेशिया ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर करने का सपोर्ट किया है. लेकिन पाकिस्तान के एवरग्रीन दोस्त चीन ने भी पाकिस्तान का साथ छोड़ दिया है. हालांकि 2018 में बीजिंग में हुई मीटिंग में आतंकवाद के ख़िलाफ़ पाकिस्तान के ऐक्शन को लेकर चीन ने संतोष जताया था.

FATF का एक सब-ग्रुप है. इंटरनेशनल कोऑपरेटिव रिव्यू ग्रुप. ICRG. 20 फरवरी को इसने देखा कि क्या पाकिस्तान ने टेररिज्म से लड़ने के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं या नहीं.

हाफिज़ सईद पर कार्रवाई पाकिस्तान की इमेज मेकिंग?

जून 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में डाला गया था. अगर ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान बना रहता है तो भी उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं होगी. हालांकि वो इससे निकलने की कोशिश कर रहा है. हाल ही में मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज़ सईद को टेरर फंडिंग के आरोप में जेल हुई थी. इसे पाकिस्तान की तरफ से ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर निकलने के प्रयास की तरह भी देखा जा रहा है. मतलब पाकिस्तान आतंकवाद के मामले में अपनी साफ-सुथरी इमेज बनाना चाह रहा है. अमेरिका ने हाफिज़ सईद पर कार्रवाई को लेकर तारीफ भी की थी. अगर पाकिस्तान को ‘ब्लैक लिस्ट’ में डाल दिया जाता है तो उसके लिए झटका ज़रूर होगा.

पिछले दिनों लाहौर की एक कोर्ट ने टेरर फंडिंग के दो मामलों में दोषी पाया था और उसे दोनों मामलों में पांच साल कैद की सजा सुनाई थी. फोटो: India Today
पिछले दिनों लाहौर की एक कोर्ट ने टेरर फंडिंग के दो मामलों में हाफिज को दोषी पाया था और पांच साल कैद की सजा सुनाई थी. फोटो: India Today

FATF ने पाकिस्तान को हड़काया था

पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से व्हाइट लिस्ट में जाने के लिए FATF के 39 सदस्यों में से 12 वोट की ज़रूरत पड़ेगी. पिछले साल अक्टूबर में हुई मीटिंग में पाकिस्तान से कहा गया था कि टेरर फाइनेंसिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करे. इसे लेकर FATF ने पाकिस्तान को 27 पॉइंट बताए थे. तब कहा गया था कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन को होने वाली फंडिंग को कंट्रोल करने के लिए पाकिस्तान ने सिर्फ पांच कदम उठाए हैं. FATF ने उसे हड़काते हुए कहा था कि अगर पाकिस्तान बाकी के 22 पॉइंट पर कदम नहीं उठाता है तो उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा. FATF की अगली बैठक जून में होगी. इसमें पाकिस्तान सरकार की कार्रवाई की समीक्षा होगी. अगर FATF पाकिस्तान की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होता तो उसका ब्लैक लिस्ट होना लगभग तय हो जाएगा.

पेरिस में FATF की मीटिंग में 19 फरवरी से पाकिस्तान के स्टेटस पर बात हो रही है. फोटो: Twitter
पेरिस में FATF की मीटिंग में 19 फरवरी से पाकिस्तान के स्टेटस पर बात हो रही है. फोटो: Twitter

ये FATF क्या है?

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स. FATF. ये एक इंटर गवर्नमेंट ऑर्गनाइजेशन है. 1989 में बनी थी. फ्रांस के पेरिस में इसका हेडक्वार्टर है. ये संस्था दुनिया भर में आतंकी संगठनों की फंडिंग यानी आर्थिक मदद करने वाले देशों पर नज़र रखती है. जो देश आतंकियों की मदद करते हैं, उनको ‘ग्रे लिस्ट’ और ‘ब्लैक लिस्ट’ में डाल देती है. साल में तीन बार इसकी मीटिंग होती है.

FATF एक पॉलिसी मेकिंग बॉडी है. इसने दुनिया भर में टेरर फाइनेंसिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के ख़िलाफ़ स्टैंडर्ड और नियम बना रखे हैं. शुरुआत में इसका काम मनी लॉन्ड्रिंग तक सीमित था. बाद में 2001 में इसमें टेरर फाइनेंसिंग जोड़ दिया गया. 2012 में मास डिस्ट्रक्शन के वेपन बनाने के लिए होने वाली फाइनेंसिंग पर नियम बनाने का अधिकार इसको मिला.

FATF का लोगो. फोटो: Twitter
FATF का लोगो. फोटो: Twitter

कितने सदस्य होते हैं?

FATF में 39 सदस्य हैं. इसमें 37 देश और दो रीजनल ऑर्गनाइजेशन हैं. भारत इसका सदस्य है, लेकिन भारत का कोई भी पड़ोसी देश इसका सदस्य नहीं है. कई ऑब्जर्वर भी होते हैं- इनमें इंडोनेशिया शामिल है. इसके अलावा ऐसे संगठन हैं जो मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ काम करते हैं. जैसे- वर्ल्ड बैंक. इनमें एसोसिएट मेंबर जिनमें 9 फाइनेंशियल टास्क फोर्स (एरिया स्पेसिफिक) हैं.

ग्रे लिस्ट क्या होती है

इसमें उन देशों को शामिल किया जाता है, जिन पर टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के सुरक्षित ठिकाने होने का आरोप होता है. ये ब्लैक लिस्ट जितनी ख़तरनाक नहीं होती. ये एक तरह की चेतावनी होती है कि आप ब्लैक लिस्ट में शामिल हो सकते हैं. अगर देश टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के कदम नहीं उठाता तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाता है. ग्रे लिस्ट में जाने पर किसी देश को IMF, वर्ल्ड बैंक जैसे संस्थानों से पैसे मिलने पर मुश्किल होती है. उसे लोन मिलने में मुश्किल होती है. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में दिक्कत आती है.

ब्लैक लिस्ट क्या होती है

टेरर फंडिंग और मनी लॉन्डिंग को लेकर कोऑपरेट ना करने वाले देशों को ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाता है. इन देशों को नॉन कोऑपरेटिव कंट्रीज ऑर टेरिटरीज (NCCTs) कहा जाता है. इसमें अगर कोई देश है तो इसका मतलब होता है कि वो टेरर फंडिंग और मनी लॉन्डिंग को सपोर्ट कर रहा है. ये लिस्ट अपडेट होती रहती है. किसी देश के ब्लैक लिस्ट में जाने पर उस देश को IMF, वर्ल्ड बैंक जैसे संस्थानों से लोन नहीं मिल पाता है.


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