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वो इंटरनेशनल संस्था, जिसकी नज़र में चढ़ गए तो देशों का हुक्का-पानी बंद हो जाता है

“गांधी जी सारी उम्र अहिंसा के लिए लड़ते रहे. और हमने उनकी फोटो ऐसी चीज़ पर छाप दी, जो हिंसा की सबसे बड़ी जड़ है – पइसा.”

ये संजय दत्त का बोला हुआ डायलॉग है. मुसाफ़िर फिल्म का. पैसा हिंसा की सिर्फ़ जड़ ही नहीं, ज़रिया भी है. पैसे की हिंसा है, हिंसा के पैसे हैं और पैसे से ही हिंसा है. हम बात करेंगे हिंसा की, आतंकवाद की, पैसे की और एक ऐसी संस्था की, जो वित्तीय अंकुशों के ज़रिये आतंकवाद को, हिंसा को ख़त्म करने का बीड़ा उठाती है. और साथ ही पाकिस्तान की बात. दाऊद इब्राहिम की बात.

पाकिस्तान का नया ऑर्डर, पर पुरानी फ़ितरत

22 अगस्त को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने 88 आतंकियों की लिस्ट वाला स्टैचुअरी रेगुलेटरी ऑर्डर जारी किया. इसमें डेजिगनेटेड आतंकियों की लिस्ट थी. यानी उन लोगों की सूची, जिन्हें ऐलानिया तौर पर आतंकी घोषित किया गया. इसमें लश्कर-ए-तैयबा के मुखिया हाफिज सईद, 26/11 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड जकीउर रहमान लखवी, जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर जैसों के नाम थे. साथ ही नाम था दाऊद इब्राहिम का भी.

पाकिस्तान ने ये भी माना कि भारत का ये मोस्ट वांटेड आतंकी उसकी ज़मीन पर ही है. कराची के पास कहीं. लेकिन वही पाकिस्तान, वही उसकी फ़ितरत. रात होते वो अपनी बात से पलट गया. कह दिया कि- न, हमारे यहां नहीं है दाऊद.

लेकिन हम बात करेंगे एक अलग एंगल पर. दरअसल पाकिस्तान ने 88 आतंकियों के नाम वाली ये लिस्ट, ये ऑर्डर जारी किया है फाइनेंशियल एक्शन टास्क फॉर्स (FATF) की मीटिंग से ठीक पहले. मीटिंग आज यानी 24 अगस्त से शुरू होनी है. ये FATF, इसकी मीटिंग, इसकी शक्तियां ही अहम हैं. इसी पर बात करेंगे. और इससे जुड़ी पाकिस्तान की एक छटपटाहट पर भी.

FATF क्या है?

आसान शब्दों में- FATF एक ऐसी इंटरनेशनल संस्था है, जो दुनियाभर में होने वाले हर उस अपराध पर नज़र रखती है, जो पैसों से और पैसों के लिए हो रहे हैं. FATF ख़ुद को एक वॉचडॉग कहती है. दो तरह के अपराधों पर ख़ास नज़र रहती है- मनी लॉन्ड्रिंग और टेररिस्ट फंडिंग. यानी कि अवैध तरह से पैसे बनाना, निकालना और आतंकवादी गतिविधियों में लगने वाला, आने वाला पैसा. FATF 1989 में बना था. फ्रांस के पेरिस में इसका हेडक्वार्टर है.

Fatf
FATF का लोगो. (फोटो: Twitter)

कौन चलाता है FATF?

FATF में 39 सदस्य हैं. इसमें 37 देश और दो रीजनल ऑर्गनाइज़ेशन हैं. भारत इसका सदस्य है, लेकिन भारत का कोई भी पड़ोसी देश इसका सदस्य नहीं है. कई ऑब्जर्वर भी होते हैं- इनमें इंडोनेशिया शामिल है. इसके अलावा ऐसे संगठन हैं, जो मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ काम करते हैं. जैसे- वर्ल्ड बैंक.

FATF को देखते ही पाकिस्तान रास्ता बदल लेता है

मोहल्ले के एक ताऊ जी होते हैं न. जिनको आते देखते ही लड़के रास्ता बदल लेते हैं. काहे कि ताऊ जी अभी पकड़कर रेत देंगे कि शर्ट की बटन क्यों खुली है, बाल क्यों बढ़े हैं आदि-इत्यादि. ये ताऊ जी हैं FATF और लड़का है पाकिस्तान.

चूंकि FATF का काम है टेरर फंडिंग पर नज़र रखना तो वो ऐसे देशों को ठांसे रहता है, जो आतंकी संगठनों को आर्थिक मदद दे रहे हों. अब इस मामले में तो पाकिस्तान का ट्रैक रिकॉर्ड भीषण रूप से ख़राब है. और यही वजह है कि FATF ने पाकिस्तान को अपनी ग्रे लिस्ट में डाल रखा है.

ग्रे और ब्लैक लिस्ट क्या है?

दरअसल FATF की दो तरह की लिस्ट होती हैं. ब्लैक लिस्ट और ग्रे लिस्ट. जब उसे लगता है कि कोई देश गड़बड़ी कर रहा है तो उन देशों को इन्हीं लिस्ट में डाल देता है

ब्लैक लिस्ट – टेरर फंडिंग और मनी लॉन्डिंग को लेकर सहयोग न करने वाले देशों को ‘ब्लैक लिस्ट’ में डाल दिया जाता है. इन देशों को कहा जाता है- नॉन को-ऑपरेटिव कंट्रीज़ ऑर टेरिटरीज़ (NCCTs). इस लिस्ट में शामिल होने का मतलब है कि वो देश साबित तौर पर टेरर फंडिंग और मनी लॉन्डिंग को बढ़ावा दे रहा है. फिर उस देश को इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF), वर्ल्ड बैंक जैसे संस्थानों से एक रुपया भी नहीं मिल पाता है.

ग्रे लिस्ट – इसमें उन देशों को शामिल किया जाता है, जिन पर आरोप होता है कि उनकी ज़मीन पर टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के सुरक्षित ठिकाने पनप रहे हैं. ये ब्लैक लिस्ट जितनी ख़तरनाक नहीं होती. ये एक तरह की चेतावनी होती है कि अगर आपने ये सब नहीं होका तो ब्लैक लिस्ट में शामिल हो सकते हैं. ग्रे लिस्ट में जाने पर किसी देश को IMF, वर्ल्ड बैंक जैसे संस्थानों से पैसे मिलने पर मुश्किल होती है. बहुत मशक्कत की तो थोड़ी-बहुत मदद मिल पाती है. इंटरनेशनल ट्रेड भी कमज़ोर होता है.

Fatf Office
पेरिस में FATF का दफ़्तर. (फोटो- Twitter)

पाकिस्तान की छटपटाहट

जून 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में डाल दिया गया था. वो इससे बाहर आना चाहता है. ताकि इंटरनेशनल लेवल पर छवि सुधरे और बिज़नेस भी मज़बूत हो. इसके लिए ज़रूरी है कि दुनिया में नज़र में ऐसा लगे कि पाकिस्तान आतंकवाद को रोकने के लिए जुटा पड़ा है. मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज़ सईद को पाकिस्तान में टेरर फंडिंग के आरोप में जेल हुई थी. ये पाकिस्तान का ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर निकलने का प्रयास ही था. अब FATF की मीटिंग से ठीक पहले ये पाकिस्तान की छटपटाहट ही थी कि छवि चमकाने के लिए उसने 88 आतंकियों की लिस्ट जारी की. और साथ ही दाऊद का पता भी बता डाला.

*यहां तक थी FATF की बात. लेकिन जब कहानी में दाऊद का ज़िक्र आए तो उस ज़िक्र को अधूरा नहीं छोड़ते.

पता बताकर मुकर कैसे गया पाकिस्तान?

लिस्ट सामने आने के बाद पाकिस्तान कठघरे में आ गया. ऐसे में 23 अगस्त को उसने बयान जारी कर दाऊद के उसकी जमीन पर होने से यू टर्न ले लिया. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के दावे बेबुनियाद और गुमराह करने वाले हैं. पाकिस्तान ने कहा-

“ये ऑर्डर संयुक्त राष्ट्र की तालिबान, इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा पर प्रतिबंधों वाली लिस्ट की तर्ज़ पर थे. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत इस ऑर्डर में प्रतिबंधित लोगों और उनकी संपत्ति की जानकारी है. ऑर्डर में, लिस्ट में संयुक्त राष्ट्र की ओर से तय किए लोगों का ही नाम होता है. भारतीय मीडिया के एक हिस्से में यह दावा किया गया कि पाकिस्तान ने ‘कुछ लोगों’ के अपने इलाके में होने की बात स्वीकार की है. ये दावे बेबुनियाद और भ्रामक हैं.”

कुल मिलाकर पाकिस्तान की हालत ऐसी है कि अगर वो दाऊद के अपने देश में न होने का झूठ बोलता है. तो इस एक झूठ को छिपाने के लिए उसे 100 झूठ बोलने पड़ेंगे. और अगर ये बात कबूल लेता है तो फ़ज़ीहत होगी. और फिर भारत इंटरनेशनल लेवल पर पाकिस्तान पर दबाव बनाएगा कि वो दाऊद को हमारे हवाले करे.

यही वजह है कि तमाम बार ऐसी बातें भी उठती हैं कि भारत के लिए अब दाऊद को पकड़कर लाने से ज़्यादा आसान है कि वो जहां है, वहीं उसे ख़त्म कर दिया जाए. और इसी के लिए 2005 में चला था ‘ऑपरेशन मुच्छड़’. क्या था ये ऑपरेशन? क्यों सफल नहीं हो सका? क्या कोई घर का भेदी भी शामिल था? ये सब यहां जानिए.

बाकी FATF और पाकिस्तानी पैंतरेबाज़ी की कहानी यहीं तक. टाटा.


पाकिस्तान ने डेजिगनेटेड आतंकियों की लिस्ट में दाऊद इब्राहिम को रखकर खुद ही सच बता दिया

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