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हम-आप जैसे बिजली उपभोक्ताओं के लिए ये ड्राफ़्ट है कमाल, लेकिन एक बात बड़ी अजीब है

20 जुलाई, 2020. इस दिन सरकार ने ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’ को लागू कर उपभोक्ताओं के हाथ में काफ़ी अधिकार दिए थे. आप इससे जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट यहां पर पढ़ सकते है.

अब उपभोक्ताओं के हितों को और सुरक्षित करने के क्रम में भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने एक और मसौदा तैयार किया है: ड्राफ़्ट इलेक्ट्रिसिटी (उपभोक्ताओं के अधिकार) 2020.

9 सितंबर, 2020 को जारी ये ड्राफ़्ट किसने तैयार किया है और सब्जेक्ट लाइन में क्या लिखा है, ये हमने आपको ऊपर बता दिया है. और इससे साफ़ हो जाता है कि ये ‘विद्युत’ उपभोक्ताओं से जुड़ा हुआ है. यानी भारत के हर उस शख़्स से, जो बिजली की खपत करता है, जिसके घर कारख़ाने, ऑफ़िस या दुकान में बिजली का मीटर लगा है.

इस ड्राफ़्ट को ऊर्जा मंत्रायल से संबंधित कई संस्थाओं और विभागों के उच्च अधिकारियों को भेजकर उनसे इस पर टिप्पणी और सुझाव मांगे गए हैं. इसके लिए उन्हें 21 दिन का समय दिया गया है. यानी 30 सितंबर, 2020 तक का.

हालांकि बिजली के बिल से जुड़ा ये बिल, अभी अपने सबसे प्रारंभिक स्वरूप, यानी ड्राफ़्ट के रूप में है और इसे क़ानून बनने में बहुत सी प्रक्रियाओं से गुज़रना पड़ेगा. लेकिन चूंकि ये भारत की बहुत बड़ी जनता को प्रभावित करता है, इसलिए हमने सोचा कि आपको बताएं इस ड्राफ़्ट में क्या है और फिर आप खुद अनुमान लगाएं कि ये आपको किस तरह से और कितना प्रभावित करता है.

18 पन्नों के इस ड्राफ़्ट में कुल 13 पॉइंट्स हैं. हम आपको चौथे पॉइंट से बताना शुरू करेंगे, क्योंकि इससे पहले के तीन पॉइंट टेक्निकल शब्दों की विवेचना भर हैं. वैसे ही, जैसे किसी भी क़ानूनी लेटर, कॉन्ट्रैक्ट वग़ैरह में होते ही हैं.

अब इस ड्राफ़्ट से जुड़ी हुई क्या ही और कितनी ही तस्वीरें होंगीं. इसलिए हम आपको दिखा रहे हैं, देश के कोने-कोने से खींची गई विद्युत-सेवा से उपजी प्रदर्शन की तस्वीरें. ये ठाणे की है. एनसीपी कार्यकर्ताओं ने अगस्त 29, 2020 को ठाणे के मुंब्रा में टोरेंट पावर लिमिटेड के खिलाफ बिजली के बिलों में महंगाई को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. यहां पर टोरेंट पावर लिमिटेड, ‘डिस्ट्रीब्यूटर लाइसेंसी’ कहलाई. (PTI Photo)
अब इस ड्राफ़्ट से जुड़ी हुई क्या ही और कितनी ही तस्वीरें होंगीं. इसलिए हम आपको दिखा रहे हैं, देश के कोने-कोने से खींची गई विद्युत-सेवा से उपजी प्रदर्शन की तस्वीरें. ये ठाणे की है. एनसीपी कार्यकर्ताओं ने अगस्त 29, 2020 को ठाणे के मुंब्रा में टोरेंट पावर लिमिटेड के खिलाफ बिजली के बिलों में महंगाई को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. यहां पर टोरेंट पावर लिमिटेड, ‘डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी’ कहलाई. (PTI Photo)

#1. नया कनेक्शन या पुराने कनेक्शन में बदलाव

चौथा पॉइंट नए कनेक्शन और पुराने कनेक्शन में किसी बदलाव के बारे में बात करता है.

इसके अनुसार ‘डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी’ को अपनी वेबसाइट में और अपने सभी ऑफ़िसेज़ के नोटिस बोर्ड पर निम्न चीज़ों को डिस्प्ले करना ज़रूरी है-

नए कनेक्शन की फ़ीस, प्रॉसेस, पुराने कनेक्शन की मॉडिफ़िकेशन प्रॉसेस, फ़ॉर्म सबमिशन, ऑनरशिप का ट्रान्सफ़र, चार्जेज़, आवश्यक फ़ॉर्म वग़ैरह.

डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी, बोले तो ऐसी सरकारी और ग़ैर सरकारी कम्पनियां, जो एंड यूज़र को बिजली बेचती हैं. यानी डिस्ट्रीब्यूट करती हैं. यानी जिनके पास बिजली डिस्ट्रीब्यूट करने का लाइसेंस है. अस्तु, डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी.

ये टर्म बहुत बार आएगा आगे. जहां भी आए, समझ लीजिए आपको-हमको बिजली बेचने वाली कंपनियां.

ख़ैर, ‘नए कनेक्शन- पुराने कनेक्शन’ वाले पॉइंट पर आगे बात करते हैं.

सभी प्रकार के ऐप्लिकेशन फ़ॉर्म, फिर चाहे वो फ़्रेश ऐप्लिकेशन के लिए हो या मॉडिफ़िकेशन के लिए, मुफ़्त होंगे और डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी के हर लोकल ऑफ़िस में मौजूद होंगे. डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी को ये भी सुनिश्चित करना होगा कि फ़ॉर्म के ऑनलाइन सबमिशन का विकल्प भी मौजूद हो. यादि कोई कस्टमर हार्ड कॉपी में ऐप्लिकेशन देता है, तो डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी को उसे डिजिटल फ़ॉर्मेट में अपनी वेबसाइट पर अपलोड करके सबमिट करेंगे.

10 किलोवाट तक का बिजली का कनेक्शन पाने के लिए उपभोक्ता को अब केवल दो ही डॉक्यूमेंट्स की ज़रूरत पड़ेगी. आइडी प्रूफ़ और एड्रेस प्रूफ़.

ड्राफ़्ट के अनुसार, कमीशन द्वारा तय समय से पहले कनेक्शन लग जाना होगा. लेकिन ये तय सीमा मेट्रो सिटी में एप्लिकेशन रिसीव होने से 7 दिन, नगरपालिका क्षेत्र में 15 दिन एवं ग्रामीण क्षेत्र में 30 से अधिक नहीं होनी चाहिए.

कमीशन का अर्थ यहां पर ठीक वैसी ही नियामक संस्था है, जैसे बैंकों के लिए RBI. बोले तो ‘विद्युत नियामक आयोग’.

#2. मीटरिंग

उपभोक्ता को ये विकल्प दिया जाएगा कि वो –

मीटर, एमसीबी तथा अन्य संबंधित उपकरण ख़ुद से ख़रीदे,

या

उसका पेमेंट डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी को कर दे, ताकि डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी उसे ये सामान उपलब्ध करवाए.

अमृतसर. 3 सितंबर, 2020. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कार्यकर्ताओं ने बिजली संशोधन विधेयक 2020 के विरोध में नारे लगाए. बिजली संशोधन विधेयक 2020 का मतलबकेंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण के निजीकरण की योजना. (PTI Photo)
अमृतसर. 3 सितंबर, 2020. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कार्यकर्ताओं ने बिजली संशोधन विधेयक 2020 के विरोध में नारे लगाए. बिजली संशोधन विधेयक 2020 का मतलबकेंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण के निजीकरण की योजना. (PTI Photo)

डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी को अप्रूव हुए सारे मीटर और अन्य उपकरणों का पूरा विवरण अपनी वेबसाइट और साथ ही साथ हर ऑफ़िस के नोटिस बोर्ड पर उपलब्ध कराना होगा. डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी के एक अधिकृत प्रतिनिधि को हर बिलिंग साइकल में कम से कम एक बार मीटर रीडिंग करना आवश्यक होगा.

अगर दो बार की मीटर रीडिंग के दौरान मीटर इन-एक्सेसिबल है, तो उपभोक्ता को विकल्प दिया जाएगा कि वो मीटर की फ़ोटो खींच के अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर से या रजिस्टर्ड ईमेल से डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी को भेज दे. और अगर उपभोक्ता ऐसा करता है, तो फिर उसको प्रोविजनल बिल या फिर कोई नोटिस नहीं दिया जाएगा.

अगर उपभोक्ता कहता है कि जितनी बिजली मैं ख़र्च कर रहा हूं, उस हिसाब से मीटर में रीडिंग नहीं आ रही है या मीटर ख़राब हो गया है या सील टूट गई है या मीटर जल गया है, तो ऐसी किसी भी कंप्लेन के 30 दिन के भीतर-भीतर डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी को मीटर चेक करना होगा. और इस कंप्लेन के दौरान उपभोक्ता को कोई पैसा नहीं देना होगा. हां, अगर मीटर में डिफ़ेक्ट किसी ऐसे कारण से आया है, जिसके लिए उपभोक्ता उत्तरदायी है, तो फिर उपभोक्ता को मीटर और टेस्ट-फ़ीस का भुगतान करना होगा.

अगर उपभोक्ता इस मीटर टेस्ट से संतुष्ट नहीं होता है, तो फिर मीटर कमीशन द्वारा निर्धारित थर्ड-पार्टी (तटस्थ पार्टी) द्वारा टेस्ट किया जाएगा. इन थर्ड पार्टी एजेंसियों की लिस्ट डिस्ट्रिब्यूशन के ऑफ़िस और उनकी वेबसाइट पर डिस्प्ले होनी आवश्यक है.

अगर मीटर में कोई ख़राबी पाई जाती है, तो डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी को ये सुनिश्चित करना होगा कि नया मीटर लगे या न लगे, लेकिन एक तय समय के भीतर उपभोक्ता के घर में बिजली आपूर्ति शुरू हो जाए. ये तय समय, शहरी क्षेत्रों के लिए 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 72 घंटे है.

#3. बिलिंग और भुगतान

सभी कैटेगरी के टैरिफ़ डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी की वेबसाइट में उपलब्ध रहेंगे. और यदि टैरिफ़ में कोई परिवर्तन होता है या कोई सरचार्ज जोड़ा जाता है, तो डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी को इसकी सूचना कम से कम एक बिलिंग साइकल पहले अपने उपभोक्ताओं को देनी होगी. डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि उपभोक्ता को लास्ट पेमेंट डेट से कम से कम 10 दिन पहले बिल मिल जाए.

‘बिल आपको भेज दिया गया है’, ये जानकारी डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी को ईमेल या SMS के माध्यम से उपभोक्ता को देनी होगी. बिल जनरेशन के बाद उसे जल्द से जल्द अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना होगा. साथ ही साथ पिछले एक साल के बिल भी डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी को अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध करने रहेंगे.

डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी एक साल (वित्त वर्ष) में दो से ज़्यादा प्रोविजनल बिल नहीं जनरेट कर सकते. (प्रोविजनल बिल, मतलब ऐसे बिल जो अनुमान के आधार पर जनरेट किए गए हैं और जिनके लिए मीटर रीडिंग नहीं ली गई है.)

नई दिल्ली. 27 जुलाई, 2020. बिजली बिलों को लेकर AAP सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का पुतला जलाते हुए भाजपा कार्यकर्ता. (PTI Photo / Shahbaz Khan)
नई दिल्ली. 27 जुलाई, 2020. बिजली बिलों को लेकर AAP सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का पुतला जलाते हुए भाजपा कार्यकर्ता. (PTI Photo / Shahbaz Khan)

यदि किसी इमरजेंसी के चलते उपभोक्ता को एक साल में दो से ज़्यादा प्रोविजनल बिल भेजे जाते हैं, तो उपभोक्ता को पूरा अधिकार रहेगा कि वह बिल का भुगतान करने से मना कर दे. कब तक? जब तक कि मीटर रीडिंग के बाद जनरेट किया गया बिल उसे नहीं मिल जाता.

यदि उपभोक्ता को कोई बिल 60 से ज़्यादा दिनों की देरी से मिलता है, तो उसे बिल पर दो से पांच प्रतिशत तक की छूट मिलेगी. जैसा भी स्टेट-कमीशन द्वारा निर्धारित होगा.

इसमें एक चीज़ प्रथम दृष्टया बड़ी दिक्कत भरी और कंज़्यूमर के लिए अधिकार कम नियम या बंधन ज़्यादा लगती है. वो ये कि 1,000 रुपये (या फिर जो भी अमाउंट कमीशन निर्धारित करेगी) से ज़्यादा का बिल आवश्यक रूप से ऑनलाइन ही पे करना होगा. तो क्या ये छोटे शहरों या गांवों में सबके लिए संभव हो पाएगा? यही वो चीज़ है, जिसका ज़िक्र हमने इस स्टोरी की हेडिंग में किया.

हालांकि इस पॉइंट से ऊपर वाले पॉइंट में ड्राफ़्ट कहता है कि उपभोक्ता के पास ये विकल्प होगा कि वो ऑनलाइन या ऑफ़लाइन कैसे भी अपने बिल का भुगतान करे. तो सवाल ये कि क्या ये ड्राफ़्ट कुछ और कहना चाह रहा था, जो अलफ़ाज़ बर्बाद कर गए? बहरहाल…

#4. डिस्कनेक्शन/री-कनेक्शन-

कस्टमर के आग्रह के बाद फ़ाइनल बिल के भुगतान के तुरंत बाद बिजली डिस्कनेक्ट करनी होगी. और जो भी एक्स्ट्रा पैसा आता है, वो सिक्योरिटी में से काटकर, बचा हुआ पैसा 7 दिन के भीतर कस्टमर को देना होगा.

अगर बिजली इसलिए डिस्कनेक्ट की गई है, क्योंकि ग्राहक ने बिल नहीं भरा, तो डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी को बिल और बाकी सभी चार्जेज़ का पूरा भुगतान मिलने के 6 घंटों के भीतर बिजली रीकनेक्ट करनी होगी.

#5. बिजली सुचारू तरीके से मिले

डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी को सप्ताह के सातों दिन चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध करवानी होगी. हालांकि कमीशन कुछ सेक्टर्स और उपभोक्ताओं की कैटेगरी के लिए कम घंटे निर्धारित कर सकता है.

#6. कंज़्यूमर यानी प्रोज़्यूमर

पहले प्रोज़्यूमर का अर्थ समझ लें. ऐसा उपभोक्ता, जो वस्तुओं का उपयोग ठीक अन्य उपभोक्ता की तरह ही करता है, लेकिन उसमें थोड़ी मोडिफ़िकेशन करके या करवाके. जैसे ब्रूनेई का राजा अगर रॉल्स रॉयस ख़रीदता है, तो निर्माता से बोलत है कि इसे गोल्ड प्लेटेड कर दो. इस तरह वो रॉल्स रॉयस का कंज़्यूमर और प्रोज़्यूमर दोनों हुआ.

इस ड्राफ़्ट के अनुसार, प्रोज़्यूमर के पास कंज़्यूमर की तरह ही अधिकार होंगे, लेकिन साथ ही साथ उसके पास कुछ और अधिकार होंगे. जैसे वो अपने घर में बिजली के कनेक्शन के अलावा सोलर सिस्टम भी लगा (या डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी से लगवा) सकता है. हालांकि इसको लेकर काफ़ी नियम क़ानून और शर्तें रहेंगी, जैसे इस सोलर सिस्टम से अधिकतम कितनी बिजली का उत्पादन कर सकते हैं, वग़ैरह.

लेकिन ये ज़रूर है कि डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी को RE (रिन्यूएबल एनर्जी) का प्लांट लगाने की इच्छा रखने वाले ग्राहकों को फ़ेसिलीटेट करना होगा. मतलब उनकी सोलर प्लांट वग़ैरह लगाने में सहायता करनी होगी. डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी को ऑनलाइन पोर्टल बनाना होगा. जहां पर जाकर कोई भी उपभोक्ता सोलर पैनल या किसी भी प्रकार के रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट के इन्स्टॉलेशन, इंटरकनेक्शन, डिस्ट्रिब्यूशन वग़ैरह के लिए आवेदन कर सकता है.

डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी को इस प्रक्रिया से जुड़ी सारी जानकारी, अपने सभी ऑफिसेज़ में भी डिस्प्ले करनी (दर्शानी) होगी.

बीकानेर. 11 जून, 2020. COVID-19 के चलते लॉकडाउन है. लेकिन बिजली के बिलों का भुगतान करने के लिए निवासी, सामाजिक सुरक्षा मानदंडों का ताक में रखे हुए हैं. चीज़ें ऑनलाइन होने भर से ही नहीं, लोगों के ऑनलाइन होने से फ़र्क़ आएगा. (PTI Photo)
बीकानेर. 11 जून, 2020. COVID-19 के चलते लॉकडाउन है. लेकिन बिजली के बिलों का भुगतान करने के लिए निवासी, सामाजिक सुरक्षा मानदंडों का ताक में रखे हुए हैं. चीज़ें ऑनलाइन होने भर से ही नहीं, लोगों के ऑनलाइन होने से फ़र्क़ आएगा. (PTI Photo)

वेबसाइट और ऑफिसेज़ में प्रोज़्यूमर के लिए सिंगल पॉइंट ऑफ़ कॉन्टेक्ट सुनिश्चित करना होगा. और ये भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रोज़्यूमर अपने फ़ॉर्म और डॉक्यूमेंट्स ऑनलाइन या ऑफ़लाइन (हार्ड कॉपी) कैसे भी जमा कर पाए. 20 दिन के भीतर-भीतर टेक्निकल फिजिबिलिटी से जुड़ी स्टडी पूरी करनी रहेगी और जो भी रिज़ल्ट आता है, उसे उपभोक्ता के साथ शेयर करना होगा. (जैसे क्यों उपभोक्ता के घर पर सोलर प्लांट नहीं लगाया जा सकता.)

इन्स्टॉलेशन, स्टडी वग़ैरह में कोई भी देर होगी और अगर उस देरी का कोई तार्किक कारण नहीं होगा, तो डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी, कंज़्यूमर को हर दिन के हिसाब से पेनल्टी देगा. हालांकि ये पेनल्टी कमीशन निर्धारित करेगा, लेकिन ये न्यूनतम 500 रुपया प्रतिदिन तो होगी ही होगी.

#7. प्रदर्शन के मानक

यदि डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी की सेवाओं में किसी तरह की कोई ‘दिक्कत’ आती है, तो कई पूर्व में ही लागू क़ानूनों और ड्राफ़्ट के कुछ नए अपडेट्स के हिसाब से उसे उपभोक्ताओं को मुआवज़ा देना होगा.

इन दिक्कतों में कई चीज़ें शामिल हैं. कुछ चीज़ें तो हम पहले ही अलग-अलग पॉइंट्स के अंदर डिस्क्स कर चुके हैं. लेकिन दिक़्क़तें और भी सम्भव हैं जैसे-

# कनेक्शन, री-कनेक्शन, शिफ़्टिंग के दौरान होने वाली देरी
# वोल्टेज संबंधित
# बिल संबंधित
# लोड शेडिंग संबंधित

जैसे ही ये ड्राफ़्ट एक रेग्यूलेशन का रूप लेगा, उसके 6 महीनों के भीतर डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी (विद्युत कंपनियों) को एक ऐसी ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध करवानी होगी, जहां पर कंज़्यूमर कंपनसेशन के लिए क्लेम कर सकें. यादि कंपनसेशन बनता है, तो उसे कंज़्यूमर के अगले बिलों में एडजस्ट किया जाएगा. लेकिन एक निश्चित समय के भीतर कंपनसेशन की राशि एडजस्ट हो जानी चाहिए. ये निश्चित समय, ऑफ़ कोर्स, कमिशन डिसाइड करेगा.

# 8.9.10. कॉल सेंटर, शिकायत निवारण, जर्नल चीज़ें

आख़िर के तीन पॉइंट जेनरिक से हैं. इसलिए चलिए इन्हें एकसाथ ही कवर कर लेते हैं.

11वां पॉइंट 24*7 टोल फ़्री कॉल सेंटर स्थापित करने की बात करता है. जहां पर उपयुक्त सभी पॉइंट्स से संबंधित जो भी सहायता फोन के माध्यम से की जा सकती हो, की जा सके. जैसे कनेक्शन, डिस-कनेक्शन, लोड चेंज, नो सप्लाई… आदि.

साथ ही साथ ये पॉइंट एक कस्टमर रिलेशन मैनेजमेंट की बात करता है. वो जैसे बैंक वग़ैरह में होते हैं. उन्हें किसी सवाल का उत्तर तो नहीं पता होता, लेकिन ये मालूम होता है कि सारे उत्तरों से जवाब कहां मिलेंगे.

हैदराबाद. 6 जुलाई, 2020. बिजली बिलों में कथित अनियमितताओं को लेकर टीआरएस सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लेते हुए कांग्रेस नेता. (PTI Photo)
हैदराबाद. 6 जुलाई, 2020. बिजली बिलों में कथित अनियमितताओं को लेकर टीआरएस सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लेते हुए कांग्रेस नेता. (PTI Photo)

वहीं 12वां पॉइंट शिकायत निवारण प्रबंधन की बात करता है. मतलब अपनी हिंदी में बोले तो कोई शिकायत कहां पर करनी है, वहां पर सुनवाई न हो तो कहां पर जाना है, शिकायत की हयार्की कैसे काम करती है, इस सब के लिए डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी को एक कन्ज्यूमर ग्रीवेंस रिड्रेसल फ़ोरम (CGRF) बनाना होगा. इसकी शुरुआत सब-डिवीजन से होगी. CGRF की परफ़ॉरमेंस, कमीशन मॉनिटर करेगा.

अंतिम यानी 13वां पॉइंट जनरल प्रोविज़न की बात करता है. जिसमें ग्राहकों के बीच जागरूकता पैदा करना, डिस्ट्रिब्यूशन लाइसेंसी का कार्य निर्धारित किया गया है. अब सवाल ये है कि जागरूकता कैसे पैदा करेगा? इसके लिए तीन-चार बातें कही गई हैं, जिनमें से कुछ हमने ऊपर ही डिस्कस कर ली हैं, जैसे नोटिस बोर्ड और ऑनलाइन वेब पोर्टल पर हर जानकरी को अपडेट करना.

# अंततः

हालांकि ये लेटर कुछ विशिष्ट लोगों, और विशिष्ट विभाग के बड़े अधिकारियों को ही सम्बोधित किया गया है, लेकिन मंत्रालय ने आम लोगों को भी सुझाव देने के लिए कहा है. आप भी लैटर में बताए गए ई-मेल ऐड्रेस, sandeep.naik68@gov.in या debranjan.chattopadhyay.nic.inपर अपने सुझाव भेजकर देख लीजिए. क्या पता आपकी सुनवाई हो ही जाए. You never know.


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