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छत्तीसगढ़ का नान घोटाला, जिसमें रमन सिंह को घेरने वाले भूपेश बघेल अब खुद घिर गए हैं

डॉक्टर रमन सिंह भ्रष्ट लोगों को बचाने में लगे हैं. नान घोटाला 36000 करोड़ का है. इसमें मुख्यमंत्री के रिश्तेदार, मंत्री और अधिकारी शामिल हैं.

22 फरवरी 2017. ये ट्वीट कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया था. उस समय के मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह पर भ्रष्ट लोगों को बचाने का आरोप लगाया था. लेकिन वो साल दूसरा था, ये साल दूसरा है. रमन सिंह की जगह भूपेश बघेल अब सीएम की कुर्सी पर हैं. जो आरोप भूपेश बघेल ने विपक्ष में रहते रमन सिंह पर लगाए थे, वही आरोप अब विपक्ष में रहते हुए रमन सिंह ने बघेल पर लगाए हैं.

राहुल गांधी जी देखिये! कैसे आपके CM भूपेश बघेल PDS स्कैम के दो बड़े आरोपी अधिकारियों को बचाने में लगे हैं. ED के मुताबिक IT रेड के दौरान मिले चैट्स से साफ जाहिर है कि मुख्यमंत्री के संरक्षण में केस को कमजोर किया जा रहा है. आखिर सीएम भ्रष्टाचारियों को क्यों बचा रहे हैं?

ये कथित घोटाला है क्या, जो एक बार फिर से चर्चा में है. विपक्ष में रहते भूपेश बघेल ने जिसे मुद्दा बनाया था, सीएम बनने के बाद उन पर ही आरोप क्यों लग रहे हैं? आइए बताते हैं.

रमन सिंह ने क्या कहा है?

छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम रमन सिंह. मंगलवार, 28 सितंबर को उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. आरोप लगाया कि बघेल सरकार करोड़ों रुपये के नागरिक आपूर्ति घोटाले का हिस्सा होने के आरोपी दो सीनियर नौकरशाहों को बचा रही है. रमन सिंह ने अपने आरोपों में कहा,

ED ने सुप्रीम कोर्ट में ये आरोप लगाया है कि PDS मामले में मनी लॉन्ड्रिंग पहलू की जांच को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है. दो IAS अधिकारियों को बचाने की साजिश की गई. इसके लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, SIT के सदस्य और एक बड़े काननू अधिकारी ने केस को कमजोर करने का षड्यंत्र किया. इन दोनों IAS अधिकारियों को मुख्यमंत्री का संरक्षण प्राप्त है. इसका प्रमाण ये है कि आलोक शुक्ला रिटायर्ड होने के बाद भी प्रमुख सचिव के पद पर कार्यरत हैं. वहीं अनिल टुटेजा वर्तमान में सचिव उद्योग के पद पर कार्यरत हैं.

रमन सिंह ने आगे दावा किया,

भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव ने इन अधिकारियों के भ्रष्टाचार के खिलाफ तब पीएम को पत्र लिखा था. ED और CBI जांच की मांग की थी. फिर ED उन्हीं पर आरोप क्यों लगा रही है? कांग्रेस सरकार इन अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रही है. सरकार ऐसा क्यों कर रही है, उसे इसका जवाब देना होगा.

ED ने सुप्रीम कोर्ट में क्या दावा किया?

PDS घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही ED ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखी थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी ने कहा कि घोटाले की जांच के लिए बनाई गई स्पेशल टास्क फ़ोर्स के सदस्यों, मुख्यमंत्री और एक बड़े कानून अधिकारी ने कथित तौर पर इसमें शामिल दो सीनियर अधिकारियों के खिलाफ मामले को कमजोर किया है. ED ने दोनों नौकरशाहों की अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की. ये अधिकारी हैं नागरिक आपूर्ति निगम के पूर्व एमडी अनिल कुमार टुटेजा और निगम के पूर्व अध्यक्ष आलोक शुक्ला. ED ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हाईकोर्ट से इन्हें पिछले साल अगस्त महीने में अग्रिम जमानत मिली थी. इसके बाद से अधिकांश गवाह मुकर गए. इससे यह साफ संकेत मिलते हैं कि दोनों आरोपियों ने राज्य में अपने प्रभाव का दुरुपयोग किया.

Ed
ED ने सुप्रीम कोर्ट में छत्तीसगढ़ सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. (ED की सांकेतिक फोटो)

ED ने अपनी बात के सपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट में कुछ दस्तावेज और कथित सबूत भी दिए हैं, जिसे आयकर विभाग ने अपनी कार्रवाई के दौरान जब्त किया था. इनमें मोबाइल मैसेज के ट्रांसक्रिप्शन और फोन शामिल है, जिसे एक सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में पेश किया गया है. इनके आधार पर ही केस को कमजोर करने और गवाहों को धमकाने के आरोप लगाए जा रहे हैं.

ये घोटाला है क्या?

साल 2015. छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार थी. आरोप लगा कि सरकार की ओर से चावल मिलों से लाखों क्विंटल घटिया चावल खरीदे गए. इसके लिए नेताओं और अधिकारियों को करोड़ों रुपये की रिश्वत दी गई. राशन वितरण के ट्रांसपोर्टेशन में भी बड़ी रकम का घोटाला हुआ.

सरकार ने उस समय एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और Economic Offences Wing (EOW) को जांच सौंपी. ACB ने नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यालयों पर छापा मारा. कैश और दस्तावेज बरामद करने का दावा किया. IAS अधिकारी आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा सहित कई लोगों पर आरोप लगाया. कथित घोटाले के दौरान दोनों अधिकारी नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक और चेयरमैन थे. करीब एक साल बाद दोनों अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार ने अनुमति भी दे दी लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी.

2012 में रमन सिंह के शासनकाल के दौरान सीबीआई के अधिकारियों को बंधक बना लिया गया था.
रमन सिंह के शासनकाल में ये घोटाला सामने आया था.

छापे में एक डायरी भी मिली थी. इसमें कथित भुगतान की डिटेल्स थी. कांग्रेस ने दावा किया था कि डायरी में ‘सीएम मैडम’ समेत तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के कई परिजनों के नाम कथित रूप से रिश्वत पाने वालों के तौर पर दर्ज थे. विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी और कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया था. इसे 36 हजार करोड़ का घोटाला करार दिया था.

BBC की एक रिपोर्ट बताती है कि इस मामले की जांच का आदेश देने वाली रमन सिंह की सरकार ने बाद में हाईकोर्ट में एक हलफ़नामा दिया. दावा किया कि नागरिक आपूर्ति निगम में कोई घोटाला हुआ ही नहीं. हालांकि सरकार बदली और भूपेश बघेल सीएम बने तो उन्होंने नान घोटाले की एसआईटी जांच की घोषणा कर दी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, SIT ने नान घोटाले में छापामारी और जांच करने वाले आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के पूर्व एडिशनल DG मुकेश गुप्ता और ACB व EOW के SP रजनेश सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया. दोनों अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया. उन पर आपराधिक साजिश, जालसाजी और अवैध फोन टैपिंग का आरोप लगाया गया. SIT के मुताबिक, गुप्ता और सिंह ने कथित तौर पर फोन टैपिंग को वैध दिखाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड के साथ खिलवाड़ किया. हालांकि गुप्ता ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया.

ED ने दर्ज किया केस

इस बीच प्रवर्तन निदेशालय ने नान घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरु की. जनवरी, 2019 में इसका केस दर्ज किया. 27 फ़रवरी 2020 को अधिकारियों और नेताओं के घर छापेमारी की गई. इसके बाद वित्त मंत्रालय की ओर से बताया गया कि सरकारी अधिकारियों और अन्य लोगों को हर महीने बड़ी रक़म दी जाती थी. जांच के दौरान बिना किसी अकाउंट के ख़रीद-बिक्री हुई. कर्मचारियों के नाम पर बैंक अकाउंट्स बनाये गए, जिनसे करोड़ों का लेन-देन हुआ. जांच के दौरान भारी मात्रा में नक़दी बरामद करने का भी दावा किया गया.

हालांकि इस मामले में टुटेजा और शुक्ला दोनों को अगस्त 2020 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी. क्योंकि ED के समन के बाद इन अधिकारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इन्होंने याचिका में आरोप लगाया था कि ED के अधिकारी दुर्भावनापूर्ण तरीके से” काम कर रहे थे और राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित थे.

कांग्रेस का क्या कहना है?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस प्रवक्ता शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा,

भाजपा 15 साल तक घोटाले का हिस्सा रही. 36,000 करोड़ रुपये के घोटाले में अपना हिस्सा लिया. कोई भी आरोप लगाने से पहले, उन्हें जांच में बाधा डालने वाले विवरणों का खुलासा करना चाहिए. क्या रमन सिंह हमें बताएंगे कि उनकी ही पार्टी के सदस्यों ने जांच पर रोक लगाने के लिए आवेदन क्यों किया है?

कांग्रेस ने बीजेपी पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया. शैलेश नितिन त्रिवेदी का कहना है कि उन्हें अभी तक ED के ऐसे किसी शपथ पत्र की जानकारी नहीं है. अगर ऐसे किसी शपथ पत्र का अस्तित्व है, जिसका दावा रमन सिंह ने किया है तो स्पष्ट है कि वह एजेंसी भाजपा के इशारे पर काम कर रही है. रमन सिंह सुप्रीम कोर्ट में सील्ड कवर में दी गई जानकारी का न केवल उल्लेख कर रहे हैं बल्कि सील्ड कवर में क्या है और ED के उस हलफनामे में क्या लिखा है, उसे उजागर भी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ ED, IT सहित केंद्र सरकार की एजेंसियों का दुरुपयोग भाजपा की फितरत है.


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