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क्या है आयुष्मान भारत योजना, जो 25 सितंबर 2018 से लागू हो रही है

15 अगस्त 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से 82 मिनट का लंबा भाषण दिया. इस भाषण के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिन यानी कि 25 सितंबर से भारत में आयुष्मान योजना लागू होगी. इस योजना के लिए चुने जाने वाले परिवारों को चिह्नित करने का काम 15 अगस्त से शुरू हो गया है. चार-पांच हफ्ते में 10 करोड़ परिवारों को चिह्नित करने के बाद इस योजना को लागू कर दिया जाएगा. क्या है योजना और कैसे इस योजना को पूरे देश में लागू किया जाना है, हम आपको इसके बारे में विस्तार से बता रहे हैं.

भारत में पांच करोड़ लोग हर साल गरीब हो जाते हैं. वजह है तमाम बीमारियों पर होने वाला खर्च. ये बात वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट में सामने आई है. वैसे इस बात को समझने के लिए किसी रिपोर्ट की जरूरत नहीं है. किसी अस्पताल चले जाइयेगा, वहां मरीजों के परिवारों से मिल लीजिएगा. समझ आ जाएगा. कैसे वो घर-जायदाद बेचकर अपने किसी रिश्तेदार को बचाने में लगे हैं. इसका फायदा तमाम निजी अस्पताल उठाते भी हैं, जहां छोटी-मोटी बीमारियों के लिए भी लाखों रुपये वसूले जा रहे हैं. इसका बड़ा कारण है देश में स्वास्थ्य सेवाओं की खस्ता हालत. इसे ऐसे समझिए कि आजादी के बाद जितने समय में देश की जनसंख्या सात गुनी हो गई, अस्पताल दोगुने भी नहीं हो पाए.

अब इन दिक्कत, परेशानियों से देश को निकालने के लिए केंद्र की मोदी सरकार एक योजना लेकर आई है. नाम है आयुष्मान भारत. सरकार का दावा है कि वो इस योजना से देश के 10 करोड़ परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दिलवाने की कोशिश करेगी. इसके लिए इस योजना के दो बड़े हिस्से हैं.

1. पहला प्राथमिक चिकित्सा जिसके तहर देश भर में 1.5 लाख हेल्थ ऐंड वेलनेस सेंटर खोले जाएंगे. इनमें चोट-चपेट, खांसी-जुकाम का इलाज यानी कि प्राथमिक उपचार किया जाएगा.

15 अगस्त के बाद आयुष्मान योजना के लागू होने की उम्मीद.
15 अगस्त के बाद आयुष्मान योजना के लागू होने की उम्मीद.

2. दूसरा है नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम. इसके तहत सरकार का दावा है कि वो देश की 50 करोड़ आबादी को मुफ्त सेहत बीमा देगी. बीमा की राशि 5 लाख रु. होगी. यानी कि इलाज पर पांच लाख रु. तक का खर्च सरकार उठाएगी. इस स्कीम के अंतर्गत छोटी बड़ी 1,350 बीमारियों का इलाज होगा. मरीज के भर्ती होने से तीन दिन पहले से लेकर अस्पताल से छुट्टी के बाद 15 दिन तक का खर्चा (दवाएं, मरहम पट्टी) बीमा योजना में शामिल होगा. इसका लाभ उन्हीं बीमारियों के लिए मिलेगा, जिनमें अस्पताल में भर्ती होना जरूरी होगा. इसका खर्च केंद्र और राज्य, दोनों मिलकर उठाएंगे.

कैसे लागू होगी स्कीम?

सरकार की ओर से स्कीम लॉन्च करने के बाद लाभार्थियों के कार्ड बनने शुरू होंगे. लाभार्थी की पहचान के लिए तकनीक जैसे मोबाइल एप्लीकेशंस का सहारा लिया जाएगा. हर राज्य में एक स्टेट हेल्थ एजेंसी होगी जो स्कीम के क्रियान्वयन पर नजर रखेगी.

लाभार्थियों को कैसे चिन्हित करेंगे?

सही लाभार्थियों की पहचान बड़ी चुनौती है. एक ही नाम के कई लाभार्थी, नाम की स्पेलिंग में अंतर, ऐसी कई चीजें हैं जो सही व्यक्ति की पहचान में दिक्कत पैदा करती हैं. हालांकि राज्यों के माध्यम से एक सूची ग्राम पंचायतों तक पहुंचा दी गई है. लोग खुद जान सकें कि वे लाभार्थी हैं या नहीं, इसके लिए सरकार तकनीक का सहारा लेगी और स्कीम की लॉन्चिंग के बाद अभियान चलाएगी.

हेल्थ के क्षेत्र में बड़ा कदम साबित हो सकती है ये योजना.
हेल्थ के क्षेत्र में बड़ा कदम साबित हो सकती है ये योजना.

कब तक शुरू होगी योजना?

आयुष्मान भारत योजना के सीईओ इंदु भूषण के मुताबिक 15 अगस्त तक इसकी तैयारियां पूरी हो जाएंगी. फिर यह प्रधानमंत्री पर निर्भर करेगा कि वे इस स्कीम को कब लॉन्च करते हैं. लॉन्चिंग के साथ ही राज्यों में लाभार्थियों को चिन्हित करने और उनके कार्ड बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा.

कैसे तय होगा बीमा का प्रीमियम?

आयुष्मान स्कीम के अंतर्गत बीमा कंपनियों को ठेका राज्यों के हिसाब से दिया जाएगा. हर राज्य के लिए बोली लगाई जाएगी, जिसमें निजी और सरकारी, दोनों बीमा कंपनियां हिस्सा ले सकती हैं. राज्य की जनसंख्या में स्कीम के लिए पात्र लोगों की संख्या के आधार पर प्रीमियम तय होगा.

पीएम नरेंद्र मोदी के लिए 2019 में फायदेमंद साबित हो सकती है ये योजना.
पीएम नरेंद्र मोदी के लिए 2019 में फायदेमंद साबित हो सकती है ये योजना.

चुनौतियां क्या होंगी?

केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी सभी राज्यों का समर्थन. वो इसलिए क्योंकि आयुष्मान में होने वाले खर्च का 60 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार को तो 40 फीसदी हिस्सा राज्यों को खर्च करना होगा. जबकि उत्तर पूर्वी और पहाड़ी राज्यों मसलन, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्ताखंड जैसे राज्यों में केंद्र की हिस्सेदारी 90 फीसदी की होगी. ऐसे में केंद्र ये काम बिना राज्यों को साथ लिए नहीं कर सकती. अब दिक्कत ये है कि आयुष्मान का श्रेय केंद्र के हिस्से आएगा. इसलिए राज्य सरकार इससे थोड़ा जरूर बिदकेंगी. केंद्र के लिए राज्यों को मनाना भी इसलिए आसान नहीं होगा. हालांकि इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा कहते हैं, “24 राज्यों के साथ एमओयू साइन किए जा चुके हैं. राज्यों से बातचीत जारी है. हमें पूरा भरोसा है कि सभी राज्यों को बीमा योजना के साथ जोड़ लिया जाएगा.”

निजी अस्पतालों का साथ भी जरूरी

आयुष्मान की राह में एक बड़ी चुनौती है निजी अस्पतालों को साथ लाना. अब इस साथ लाने में दिक्कत ये है कि सरकार ने जो विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए दरें तय की हैं, उनसे निजी अस्पताल संतुष्ट नहीं हैं. वो इसे कम बता रहे हैं. डॉक्टर कहते हैं सरकार को इलाज की दरें टेक्निकल तरीके से तय करनी चाहिए अन्यथा यह स्कीम भी सरकार की अन्य बीमा स्कीमों की तरह दम तोड़ देगी. इसका एक उदाहरण देखिए –

सरकार ने सिजेरियन डिलिवरी के लिए 9,000 रुपए तय किए हैं. अब डॉक्टरों का कहना है इसमें हॉस्पिटलाइजेशन, ऑपरेशन थिएटर का खर्च, सर्जन, एनेस्थिसिया सब कुछ कैसे संभव होगा?

अब आपको ये भी बता देते हैं कि इसमें खर्चा आता कितना है. देखिए शहरों में तो प्राइवेट अस्पताल सिजेरियन डिलीवरी के लिए 50,000 से 1 लाख तक वसूलते हैं. मगर सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी करवाने पर पैसा एक नहीं लगता. 6000 रुपये अलग मिलते हैं प्रसूता को.

सिजेरियन के मामले में प्राइवेट हॉस्पिटल अच्छी-खासी रकम वसूलते हैं.
सिजेरियन के मामले में प्राइवेट हॉस्पिटल अच्छी-खासी रकम वसूलते हैं.

कुछ सवाल जिनका जवाब जरूरी है

# सरकार ने देशभर में 1.5 लाख हेल्थ ऐंड वेलनेस सेंटर खोलने का लक्ष्य रखा है, लेकिन इसके लिए 1,200 करोड़ रु. का बजट बेहद कम है. साथ ही नेशनल रूरल हेल्थ मिशन (एनआरएचएम) के तहत बुनियादी ढांचे के देखभाल के बजट को भी सरकार ने नहीं बढ़ाया.

इसके अलावा 50 करोड़ लोगों को बीमा सुविधा मुहैया कराने के लिए भी 2,000 करोड़ रुपए का आवंटित बजट अपर्याप्त है. संभावना है कि 15 अगस्त को यह स्कीम लागू हो जाएगी. लेकिन इस बात की गारंटी नहीं कि स्कीम की लॉन्चिंग के साथ ही लाभार्थियों के हाथ कुछ आएगा.


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