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कोरोना: सस्ते AgVa वेंटिलेटर क्या हैं, जिन पर सरकार के ही पैनल ने सवाल उठाए हैं

कोरोना वायरस. इसका असर लाइफ में जो पड़ा है, वो तो है ही. लेकिन जिन्हें ये जकड़ ले, उनके फेफड़ों पर सीधा इसका असर पड़ता है. फेफड़ों पर असर का मतलब है सांस लेने में तकलीफ होगी. कोरोना का गंभीर मरीज ख़ुद सांस नहीं ले पाता, तब बाहर से मदद की ज़रूरत पड़ती है. ऐसे में आते हैं वेंटिलेटर. सीधी भाषा में वेंटिलेटर मतलब वो मशीन, जो मरीज के फेफड़ों में हवा भरें. वेंटिलेटर की कीमत पांच लाख रुपए से 40 लाख रुपए तक हो सकती है. कीमत उसके मॉडल और कंपनी पर निर्भर करती है.

पूरे विश्व में कोरोना की वजह से वेंटिलेटर की डिमांड बढ़ी है. इसकी वजह से कमी भी आ गई है. ऐसे में हमारे देश में बाहर से वेंटिलेटर मंगवाना मुश्किल भी है और खर्चीला भी. तो सरकार ने सोचा कि बाहर वालों का क्या लोड लेना. घर के ही लोगों से वेंटिलेटर बनवाया जाए. कम पैसों में. लाइव मिंट  के मुताबिक, अब तक 2,923 वेंटिलेटर बन चुके हैं और 1,340 वेंटिलेटर अलग-अलग राज्यों को भेजे जा चुके हैं.

लेकिन हम अचानक वेंटिलेटर की चर्चा क्यों करने लगे? 

केंद्र की मोदी सरकार ने 23 जून को पीएम केयर्स फंड से दो हज़ार करोड़ रुपए जारी किए. 50 हज़ार ‘मेड इन इंडिया’ वेंटिलेटर्स की सप्लाई के लिए. अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में. लाइव मिंट के मुताबिक, इनमें 30 हज़ार वेंटिलेटर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड बना रहा है. बाकी के लिए AgVa हेल्थकेयर, AMTZ Basic, AMTZ हाई एंड और एलाइड मेडिकल जैसी कंपनियां काम कर रही हैं.

इसमें एक कंपनी का नाम अंडरलाइन कीजिए- AgVa हेल्थकेयर (अगवा हेल्थकेयर) ये एक भारतीय स्टार्ट-अप है और सस्ते वेंटिलेटर्स की सबसे बड़ी कंपनी बनकर उभरी है. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की 24 जून की ख़बर के मुताबिक, जल्द ही इस कंपनी के बनाए वेंटिलेटर्स को सभी राज्यों को सप्लाई किया जाएगा. कंपनी का कहना है कि उसके 10,000 वेंटिलेटर डिस्पैच के लिए तैयार हैं.

ये वेंटिलेटर कैसे हैं और बाकियों से कितने अलग हैं? कितनी कम कीमत के हैं? क्या इन वेंटिलेटर में सब कुछ ठीक है? ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब आगे जानेंगे.

AgVa वेंटिलेटर पोर्टेबल वेंटिलेटर हैं. इन्हें एंड्रायड सिस्टम पर ऑपरेट किया जाता है. फोटो: AgVa Healthcare
AgVa वेंटिलेटर पोर्टेबल वेंटिलेटर हैं. इन्हें एंड्रायड सिस्टम पर ऑपरेट किया जाता है. फोटो: AgVa Healthcare

AgVa: फीचर्स एंड ऑल

# कोरोना के लिए बनाए गए AgVa वेंटिलेटर का नाम ‘AgVa-Covid’ है.

# AIIMS, दिल्ली के न्यूरोसर्जन डॉक्टर दीपक अग्रवाल और रोबॉटिक इंजीनियर प्रोफेसर दिवाकर वैश ने मिलकर इसे बनाया है.

# दोनों के सरनेम के शुरुआती अक्षरों को मिलाकर AgVa (अगवा) शब्द बना है.

# इसकी कीमत डेढ़ लाख रुपए बताई जा रही है. दावा है कि दूसरे वेंटिलेटर से ये पांच गुना सस्ता है.

# ये साइज में दूसरे वेंटिलेटर्स से 50 गुना छोटे हैं. पोर्टेबल हैं. अंडे के शेप के ये वेंटिलेटर काफी कम जगह घेरते हैं.

# मरीज के ब्रीदिंग पैटर्न या सांस लेने के उतार-चढ़ाव को ऑटोमैटिक तरीके से डिटेक्ट करते हैं. अगर कोई दिक्कत हुई, तो ये चेतावनी दे देते हैं.

# इसमें टैबलेट या फोन स्क्रीन को कनेक्ट कर AgVa ऐप के जरिए डेटा देख सकते हैं. इसे यूजर फ्रेंडली बताया गया है.

# लाइट जाने पर चार घंटे के बैट्री-बैकअप की सुविधा है.

# इस वेंटिलेटर का शुरुआती मॉडल न्यूरोलॉजी के लिए था. मतलब नसों से जुड़ी दिक्कतों वाले उन मरीजों के लिए, जिनके फेफड़े दुरुस्त हैं, लेकिन उन्हें वेंटिलेटर की ज़रूरत पड़ती है. फिर कोरोना के लिए इसे अपग्रेड किया गया और नाम दिया गया- AgVa-Covid.

# कंपनी ने इसमें कई सुधार किए. दावा किया गया कि इन्हें घर पर, इमरजेंसी एंबुलेंस या इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

इसे दुनिया का सबसे सस्ता वेंटिलेटर कहा गया है. फोटो: NITI Ayog
इसे दुनिया का सबसे सस्ता वेंटिलेटर कहा गया है. फोटो: NITI Ayog

AgVa और मारुति-सुज़ुकी साथ आए

केंद्र सरकार ने मार्च में हजारों वेंटिलेटर खरीदने का प्लान बनाया. सरकार ने फैसला किया कि भारत के स्टार्ट-अप को बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों से जोड़ा जाए, ताकि वेंटिलेटर का प्रॉडक्शन बढ़ सके. अगर एक्सपर्ट पैनल जांच-परख के कहेगा कि इनके बनाए वेंटिलेटर ठीक हैं, तो हम खरीद लेंगे. भारत सरकार ने कुछ स्टार्ट-अप के नाम छांटे. AgVa हेल्थकेयर कंपनी उनमें से एक थी. ऑटो सेक्टर की दिग्गज कंपनी मारुति सुज़ुकी ने AgVa से हाथ मिलाया.

27 मार्च, 2020 को पीएम केयर्स फंड के तहत 10,000 AgVa वेंटिलेटर का ऑर्डर दिया गया. नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने अपने कई आर्टिकल में इन वेंटिलेटर का ज़िक्र किया. पीएम केयर्स फंड खुद बहुत से सवालों के घेरे में है. सरकार की ही दो समितियों ने ही इन वेंटिलेटर्स को सवालों के घेरे में ले लिया. फिलहाल इन वेंटिलेटर्स का इस्तेमाल देश की कई जगहों पर हो रहा है.

मारुति-सुज़ुकी देश की बड़ी कार निर्माता कंपनी है. इसने AgVa वेंटिलेटर का प्रोडक्शन बढ़ाने में अपनी एक्सपर्टीज का इस्तेमाल किया.
मारुति-सुज़ुकी देश की बड़ी कार निर्माता कंपनी है. इसने AgVa वेंटिलेटर का प्रोडक्शन बढ़ाने में अपनी एक्सपर्टीज का इस्तेमाल किया.

कौन सी समिति? कैसे सवाल? 

हफपोस्ट इंडिया  के लिए समर्थ बंसल और अमन सेठी की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जून, 2020 को सरकार की तरफ से नियुक्त की गई डॉक्टरों की एक समिति ने सरकार से कहा कि ये वेंटिलेटर खरीदिए, लेकिन साथ में पुछल्ला जोड़ दिया कि इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में इन्हें हाई-एंड वेंटिलेटर यानी अच्छी क्वालिटी वाले वेंटिलेटर का रिप्लेसमेंट मत मानिए. ये भी कहा कि जहां ये वेंटिलेटर लगे हों, वहां बैकअप वेंटिलेटर की भी व्यवस्था होनी चाहिए. ये सरकार की दूसरी समिति है, जिसने AgVa वेंटिलेटर की जांच-परख की. इसने तो फिर भी थोड़ा रहम दिखाया. पहली समिति ने तो इन वेंटिलेटर्स से वैसे ही समर्थन खींच लिया था, जैसे पार्टियां सरकारों से खींचती हैं.

AgVa वेंटिलेटर के बारे में एक समिति में कहा कि जहां इनका इस्तेमाल हो, वहां बैकअप वेंटिलेटर रखना ज़रूरी है. फोटो: NITI Aayog
AgVa वेंटिलेटर के बारे में एक समिति में कहा कि जहां इनका इस्तेमाल हो, वहां बैकअप वेंटिलेटर रखना ज़रूरी है. फोटो: NITI Aayog

समितियों ने क्या कहा? 

पहली समिति ने 16 मई, 2020 को अपनी रिपोर्ट दी. नई दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में ट्रायल के आधार पर. इसमें कहा गया कि सांस से जुड़े पैरामीटर को ये वेंटिलेटर पूरा नहीं करते हैं. जैसे कि कितनी ऑक्सीजन मरीज के फेफड़ों में जाती है, किस रेट से जाती है. समिति ने कहा कि इन वेंटिलेटर्स को अभी और ‘तकनीकि मान्यता’ की ज़रूरत है.

करीब 10 दिनों बाद 27 मई को एक और समिति बनाई गई कि इस वेंटिलेटर को फिर से देखा जाए. इसने पुरानी समिति की तरफ से उठाए गए कई बिंदुओं पर AgVa के स्पष्टीकरण को मंजूर कर लिया. कहा कि कुछ सुधार किए गए हैं और 1 जून, 2020 को वेंटिलेटर को हरी झंडी दिखा दी.

लेकिन…

‘हफपोस्ट इंडिया’ के मुताबिक, दूसरी समिति ने अपने ऑब्जर्वेशन के अंत में लिखा,

इसे क्लियरेंस दी जा रही है, क्योंकि कोविड की स्थिति को देखते हुए देशभर में वेंटिलेटर्स अच्छी-खासी मात्रा में ज़रूरी हैं.

ये वेंटिलेटर अलग-अलग फेज़ में खरीदे जाने चाहिए, न कि एक साथ.

इसे हाई-एंड वेंटिलेटर (ऊंची क्वालिटी वाले वेंटिलेटर) का रिप्लेसमेंट न समझा जाए. मतलब ऐसा नहीं कि अच्छी क्वालिटी वाले वेंटिलेटर की जगह ये ले सकते हैं.

जहां ये वेंटिलेटर इस्तेमाल हो रहे हैं, वहां बैकअप वेंटिलेटर की भी व्यवस्था होनी चाहिए.

ये वेंटिलेटर कई मॉडल में आते हैं. कुछ को आप तस्वीर में देख सकते हैं. फोटो: AgVa Healthcare Website
ये वेंटिलेटर कई मॉडल में आते हैं. कुछ को आप तस्वीर में देख सकते हैं. फोटो: AgVa Healthcare Website

समितियों से अलग वेंटिलेटर पर सवाल

डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन के प्रमुख डॉक्टर टीपी लहाने ने ‘मिरर’ को बताया कि AgVa वेंटिलेटर को ज़्यादा से ज़्यादा मरीजों को ट्रांसफर करने में इस्तेमाल किया जा सकता है.

अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भी ये वेंटिलेटर लगाए गए थे. 18 मई की हिंदुस्तान टाइम्स  की एक ख़बर के मुताबिक, अस्पताल के मेडिकल सुपरिंडेंट जेवी मोदी ने कहा कि AgVa वेंटिलेटर पर जब मरीजों को रखा गया, तो अस्पताल को जो नतीजे चाहिए थे, वो नहीं मिल रहे थे. इसके अलावा ‘धमण-1’ वेंटिलेटर पर भी विवाद हुआ था.

19 जून को मुंबई मिरर  ने रिपोर्ट किया कि मुंबई के दो प्रतिष्ठित अस्पतालों, जेजे अस्पताल और सेंट जॉर्ज अस्पताल ने 81 AgVa वेंटिलेटर्स का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया.

‘हफपोस्ट इंडिया’ की रिपोर्ट में वेंटिलेटर के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले सूत्रों के हवाले से ये सवाल भी उठाया गया है कि जिस वेंटिलेटर को उन मरीजों के लिए बनाया गया हो, जिन्हें फेफड़े की समस्या नहीं है, वो कोरोना के मरीजों की मदद कैसे कर सकता है, क्योंकि कोरोना में तो फेफड़े ही प्रभावित होते हैं.

गुजरात के अहमदाबाद सिविल अस्पताल में मौतों के बाद AgVa और धमण-1 वेंटिलेटर को लेकर राज्य की विजय रूपाणी सरकार को घेरा जा चुका है. फोटो: India Today
गुजरात के अहमदाबाद सिविल अस्पताल में मौतों के बाद AgVa और धमण-1 वेंटिलेटर को लेकर राज्य की विजय रूपाणी सरकार को घेरा जा चुका है. फोटो: India Today

AgVa का क्या कहना है

AgVa हेल्थकेयर कंपनी का कहना है कि उसके वेंटिलेटर बिल्कुल सही हैं. को-फाउंडर दिवाकर वैश ने हफपोस्ट इंडिया को बताया कि पहली समिति को जो खामियां मिलीं, वो इसलिए थीं, क्योंकि समिति ने वेंटिलेटर की सही सेटिंग्स इस्तेमाल नहीं की थी.

वो कहते हैं,

हमने नया अल्गोरिथ्म विकसित किया है, जिसमें अगर वेंटिलेटर की गलत सेटिंग की गई है, तो अलार्म बजेगा.

वैश आरोप लगाते हैं कि डॉक्टरों और वेंडर्स का गठजोड़ देश में बने क्वालिटी प्रोडक्ट को रहने नहीं देना चाहता. इस वेंटिलेटर के लिए बैकअप वेंटिलेटर रखने के समिति के सुझाव पर वैश कहते हैं कि दो AgVa वेंटिलेटर रखने पर बैकअप वेंटिलेटर की भी ज़रूरत पूरी हो जाएगी और ये सामान्य ज़रूरत है, क्योंकि बैकअप वेंटिलेटर फैसिलिटी हमेशा मौजूद होनी चाहिए. वहीं, डॉक्टर दीपक अग्रवाल कहते हैं कि हमने वेंटिलेटर में कुछ फीचर ऐड किए हैं और सॉफ्टवेयर में सुधार किए हैं.


गुजरात में कोरोना संक्रमितों के लिए जो वेंटिलेटर इस्तेमाल किए गए उनमें क्या गड़बड़ी है?

 

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