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ड्यूटी कर रहे पुलिसवालों का दर्द, कोरोना पॉजिटिव आने पर भी ख़बर सार्वजनिक नहीं की जाती

लॉकडाउन और कोरोना वायरस के इस दौर में पुलिस की कई छवियां देखने को मिलीं. ‘कभी नीम-नीम, कभी शहद-शहद’ वाली छवियां. माने कभी सख्ती दिखाती हुई, तो कभी लोगों की मदद करती हुई. तमाम पुलिसवालों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने की भी ख़बरें तैरीं. लेकिन वो तैनात हैं. ज़मीन पर. प्रशासन के स्तर पर उनके सामने भी तमाम दिक्कतें हैं, क्योंकि उन्हें रोज़ ही ज़मीन पर लोगों से डील करना है. ड्यूटी की सीमाओं में बंधे कुछ पुलिसवालों से हमने बात की. अधिकारियों से लेकर सिपाही तक से. कुछ ने अपनी बातें साझा कीं लेकिन कई निर्देशों के चलते बहुत कुछ नहीं भी बताया.

मध्य प्रदेश में इंदौर के डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्रा कहते हैं कि पुलिस के जवानों का ख्याल रखा जा रहा है. हालांकि परिवार और ड्यूटी के बीच संतुलन को वो चिंता का विषय बताते हैं. उन्होंने कहा,

ये अप्रत्याशित चुनौतियों का दौर है. पुलिस ने अगर कर्फ्यू लगाया है तो कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए नहीं बल्कि लोगों की हिफाजत के लिए लगाया है. हमारे जवानों को अगर स्वास्थ्य की कोई समस्या हो तो उसके लिए एक नोडल अधिकारी है.

उन्होंने कहा,

जो पुलिसकर्मी 50 साल से ज़्यादा के हैं, उन्हें रेड ज़ोन से बाहर कम संवेदनशील इलाकों में रखा गया है. संवेदनशील इलाकों में पीपीई किट्स मुहैया कराई गई हैं. उनके लिए छोटी-छोटी चीजें जैसे छाते, ओआरएस के घोल, पानी, सेनिटाइजर, मास्क दिए गए हैं. 

जहां तक परिवार और ड्यूटी के बीच संतुलन की बात है, ये निश्चित तौर पर चुनौती है. जवान और अधिकारी 40-50 दिनों से अपने घरों से बाहर हैं. सभी अलग-अलग हॉस्टल, धर्मशालाओं में रह रहे हैं ताकि संक्रमण कहीं परिवार तक ना जाए. उन्होंने इस स्थिति को स्वीकार भी किया है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जवानों को पर्याप्त सुविधाएं दी जा रही हैं. महाराष्ट्र के एक पुलिस जवान की थर्मल स्क्रीनिंग. फोटो: PTI
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जवानों को पर्याप्त सुविधाएं दी जा रही हैं. महाराष्ट्र के एक पुलिस जवान की थर्मल स्क्रीनिंग. फोटो: PTI

सिपाहियों को खुद खरीदने पड़े मास्क

ग्राउंड ज़ीरो पर काम कर रहे सिपाहियों के लिए सब कुछ ठीक नहीं है. ये एक नहीं बहुत से सिपाहियों की कहानी है. मध्य प्रदेश के सतना ज़िले के एक सिपाही ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया,

लोग बहुत सी समस्याओं के साथ हमारे पास आते हैं. गाड़ी कहां से मिलेगी, खाने-पीने को लेकर. बहुत से लोगों की हम मदद करते हैं, लेकिन सब कुछ हमारे हाथ में नहीं होता. बड़े प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ में रहता है.

सुविधाओं की मौजूदगी पर उन्होंने कहा,

मुझे नहीं लगता कि जो रोड पर हैं उनके लिए आधिकारिक तौर पर मास्क बनवाया गया हो, या सैनिटाइजर दिलवाया गया हो. शुरू में तो हम लोगों ने ही अपने पैसों से सैनिटाइजर और कपड़े वाले मास्क बीस-चालीस रुपए में खरीदे. ग्राउंड लेवल पर हालात बुरे हैं. अपनी सूझ-बूझ से हम काम करते हैं.

पुलिस के कई सिपाहियों की कहना है कि तमाम मजदूर अपनी समस्याओं के साथ पुलिस के पास ही आते हैं लेकिन हमारे पास संसाधन नहीं हैं उनको घर भेजने के. फोटो: PTI
पुलिस के कई सिपाहियों का कहना है कि तमाम मजदूर अपनी समस्याओं के साथ पुलिस के पास ही आते हैं, लेकिन हमारे पास संसाधन नहीं हैं उन्हें  घर भेजने के. फोटो: PTI

‘कई बार संक्रमण की ख़बर सार्वजनिक नहीं की जाती’

संक्रमण के ख़तरे को लेकर वो कहते हैं,

हम घर जाने से भी बचते हैं. ताकि अगर संक्रमण का खतरा हो तो वो बचे रहें. डर भी लगता है. लेकिन ड्यूटी तो करनी ही है. ये भी सुनने में आया है कि कई बार पुलिसवालों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने पर ख़बर सार्वजनिक नहीं की जाती. दो तिहाई लोग बढ़िया काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ लोगों की वजह से पुलिस की छवि खराब होती है.

‘नहाकर और वर्दी घर के बाहर टांगकर घर में घुसते हैं’

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक सब-इस्पेक्टर ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा,

सुरक्षा के लिए हमें मास्क वगैरह मिले हैं. सोशल डिस्टेंसिंग कर रहे हैं, लेकिन अभी किट्स वगैरह नहीं मिली हैं. जिनकी ड्यूटी कोविड अस्पतालों में है, उन्हें किट्स मिली हैं. कई बार अपराधियों को पकड़ने जाते हैं तो हमें पता नहीं होता कि वो पॉजिटिव है या निगेटिव है. लेकिन फिर भी उसे गाड़ी में बैठाना पड़ता है. ये सब समस्याएं हैं. घर देर से लौटते हैं तो अच्छे से सैनिटाइज करके, नहाकर, वर्दी बाहर टांगकर ही अंदर जाते हैं.

कोरोना संक्रमित क्षेत्रों में कई जगह पुलिसवालों को पीपीई किट्स मुहैया कराई गई हैं. कई जगह ऐसा नहीं है. फोटो: PTI
कोरोना संक्रमित क्षेत्रों में कई जगह पुलिसवालों को पीपीई किट्स मुहैया कराई गई हैं. कई जगह ऐसा नहीं है. फोटो: PTI

‘घर पहुंचाने के लिए लोग पुलिस के पास ही आते हैं’

मजदूरों के बारे में उन्होंने कहा,

बहुत से मजदूर दूसरे राज्य के हैं. वो जाना चाहते हैं. हर आदमी पुलिस के पास ही आता है लेकिन इस मामले में पुलिस के पास कोई संसाधन नहीं है, जिससे वो मदद कर सके. उन्हें निर्देश दिए जाते हैं पास बनाने के लिए. लेकिन वो गाड़ी अरेंज करने को कहते हैं. ट्रांसपोर्टेशन की समस्या है. 

27 मार्च से लेकर 3 मई तक एक कम्युनिटी किचन चलवाया हमने. तीन साढ़े तीन हजार लोगों को खाना देते थे. जो खाने की समस्या बताते हैं उन्हें यहां के लोगों से सहयोग लेकर खाना खिलाया जाता है.

कई बार बलप्रयोग करने के सवाल पर वो कहते हैं,

अब लोग समझने लगे हैं. पहले कोई भी कहीं भी निकल जाता था तो बलप्रयोग करना पड़ता था.

कई पुलिसवाले कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. फोटो: India Today
कई पुलिसवाले कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. फोटो: India Today

‘वर्दी के पीछे इंसान ही हैं’

यूपी के एक सिपाही बताते हैं,

बाहर से काफी मजदूर आए. ऐसे में पुलिस तमाम पॉइंट पर खड़े होकर मजदूरों के खाने-पीने की व्यवस्था कर रही है. उनकी स्क्रीनिंग जहां होती है, वहां डॉक्टरों की टीम के साथ पुलिस की टीम भी होती है. पीपीई किट, मास्क सैनिटाइजर खरीदने के लिए कुछ बजट भी मिला हुआ है, शासन की तरफ से. इकाई स्तर पर उन्हें खरीदा भी गया है. जो कोरोना पॉजिटिव क्षेत्र में हैं, उन्हें पीपीई किट्स भी दी गई हैं. लेकिन जितना ड्यूटी समय है, उससे ज़्यादा ही काम कर रहे हैं.

कोरोना वायरस के संक्रमण से डर लगता है क्योंकि वर्दी के पीछे इंसान ही है. लेकिन हमें ड्यूटी करनी है क्योंकि हमने वर्दी पहन रखी है. दूसरों की भी सुरक्षा करनी है. अपनी भी सुरक्षा करनी है.


वीडियो: दिल्ली में शराब की दुकान पर पुलिस ने पैसे लेकर खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मार ली

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