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नरेंद्र मोदी को संत बताने वाले दिलीप घोष ने अमित शाह के लिए ऐसा क्यों नहीं कहा?

दिलीप घोष. पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद हैं. RSS के रास्ते BJP में आए हैं. दिलीप घोष सरसंघचालक रहे केसी सुदर्शन के साथ काम कर चुके हैं. उन्हें बंगाल में BJP को खड़ा करने का श्रेय दिया जाता है. कई लोग उन्हें BJP के सत्ता में आने की सूरत में राज्य के भावी मुख्यमंत्री के तौर पर भी देखते हैं.

लेकिन दिलीप घोष अक्सर अपने विवादास्पद बयानों की वजह से चर्चा में रहते हैं. संघ की नर्सरी में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके घोष बाबू कभी राज्य की महिला मुख्यमंत्री के बाल पकड़ कर घसीटे जाने की बात करते हैं, तो कभी आंदोलनकारियों को 6 इंच छोटा करने की धमकी भी देते हैं.

‘दी लल्लनटाॅप’ के संपादक सौरभ द्विवेदीके साथ हुई लंबी बातचीत में दिलीप घोष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को संत बताया है. लेकिन पार्टी और मोदी सरकार में दूसरी सबसे ताकतवर शख्सियत अमित शाह को घोष ने संत नहीं माना.

केसी सुदर्शन के साथ काम किया 

दिलीप घोष संघ के प्रचारक हुआ करते थे. संघ के सरसंघचालक रहे केसी सुदर्शन के सानिध्य में उन्होंने लंबे समय तक काम किया. बाद में वो संघ की गतिविधियों को देखने के लिए अंडमान और निकोबार द्वीप पर भेज दिए गए. वहां उन्होंने संघ की गतिविधियों को तेज किया. बकौल दिलीप घोष संघ ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के अलग-अलग बंटे समाज को एक कर दिया. फिर तकरीबन 8 साल वहां बिताने के बाद 2007 में वो पश्चिम बंगाल वापस लौटे.

दी लल्लनटाॅप के संपादक सौरभ द्विवेदी को इंटरव्यू देते दिलीप घोष.
दी लल्लनटाॅप के संपादक सौरभ द्विवेदी को इंटरव्यू देते दिलीप घोष.

6 इंच छोटा करने की धमकी पर सफाई

दिलीप घोष ने अंडमान-निकोबार के समाज को एकजुट करने का दावा तो इस इंटरव्यू में किया, लेकिन बंगाली समाज को बांटने वाले अपने बयान पर सफाई पेश करते नजर आए. जब उनसे पूछा गया कि आपने CAA का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को 6 इंच छोटा करने की धमकी क्यों दी, तो उनका जवाब था,

आंदोलनकारी बांग्लादेशी थे और देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे, इसलिए उन्हें 6 इंच छोटा करने की धमकी दी.

लेकिन विडंबना देखिए कि इसी इंटरव्यू में दिलीप घोष पश्चिम बंगाल में दशकों से बने हिंसा के वातावरण की निंदा करते भी दिखे. लेकिन वो शायद ये भूल गए कि उनकी पार्टी का उभार भी एक ऐसे आंदोलन (मंदिर आंदोलन) से ही हुआ था, जिसकी हिंसा ने सरकारी संपत्ति का बहुत नुकसान किया था.

कम्युनिस्टों के दफ्तर भी जाते हैं 

इंटरव्यू के दौरान विपक्षी पार्टी के नेताओं से संबंधों के बारे में पूछे जाने पर दिलीप घोष ने कहा कि अधीर रंजन चौधरी से लेकर ममता बनर्जी और यहां तक कि लेफ्ट फ्रंट के नेताओं के साथ भी उनके निजी संबंध बहुत अच्छे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि वे कभी-कभार विधानसभा परिसर स्थित कम्युनिस्ट पार्टियों के दफ्तर भी चले जाया करते हैं. और जब कम्युनिस्ट नेता उनके साथ फ़ोटो खिंचवाने से बचते हैं, तो वो जबरन उनका हाथ थामकर फ़ोटो भी खिंचवाते हैं.

जे पी नड्डा, नरेन्द्र मोदी और अमित शाह (बाएं से दाएं)
जेपी नड्डा, नरेन्द्र मोदी और अमित शाह (बाएं से दाएं)

मोदी, नड्डा संत, लेकिन अमित शाह नहीं 

इस इंटरव्यू में दिलीप घोष ने स्वीकार किया कि विपक्ष के लोग जब प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की आलोचना करते हैं, तो उन्हें बहुत बुरा लगता है. बकौल दिलीप घोष, नरेंद्र मोदी और जेपी नड्डा संत हैं. लेकिन अमित शाह संत नहीं हैं, बल्कि एक राजनीतिक व्यक्ति हैं. हालांकि उनके वक्तव्य से यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि नरेंद्र मोदी और जेपी नड्डा को वे संत क्यों मानते हैं. वहीं, गृह मंत्री अमित शाह के बारे में उन्होंने इतना जरूर कहा कि अमित शाह डर पैदा करते हैं और कई बार डर पैदा करना जरूरी होता है.

ममता बनर्जी के बाल खींचने की बात क्यों कही?

इस इंटरव्यू में जब सौरभ द्विवेदी ने सवाल किया कि आपने अपने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाल पकड़कर घसीटे जाने की बात क्यों कही? इस पर दिलीप घोष का जवाब था कि मेरी बातों को गलत ढंग से पेश किया गया. मैंने यही कहा था कि जिस प्रकार राज्य सरकार अपने विपक्षी कार्यकर्ताओं पर बल प्रयोग करती है. उसी प्रकार यदि हम लोग चाहते, तो उस वक्त ममता बनर्जी का बाल पकड़कर घसीटवा सकते थे, जब वह नोटबंदी के विरोध में प्रदर्शन करने दिल्ली गईं थीं. जैसे राज्य में प्रशासन उनके (ममता बनर्जी) हाथ में है, उसी प्रकार दिल्ली में हमारे हाथ में है. लेकिन हमने ऐसा कुछ नहीं किया.

दिलीप घोष और ममता बनर्जी. (फ़ोटो क्रेडिट : इंडिया टुडे)
दिलीप घोष और ममता बनर्जी. (फ़ोटो क्रेडिट : इंडिया टुडे)

वैसे महिला नेताओं के प्रति इस प्रकार की असभ्य टिप्पणी करने वाले दिलीप घोष पहले BJP नेता नहीं हैं. पार्टी का इतिहास बताता है कि इसके छोटे-बड़े नेता महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देते रहे हैं. इनमें दिवंगत प्रमोद महाजन से लेकर दयाशंकर सिंह जैसे नेता शामिल हैं. प्रमोद महाजन ने सोनिया गांधी की तुलना मोनिका लेविंस्की से कर डाली थी, जो पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से अवैध संबंधों को लेकर चर्चा में आई थीं. वहीं, दयाशंकर ने BSP प्रमुख और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसके लिए उन्हें पार्टी से निकाल भी दिया गया था. हालांकि उनकी पत्नी को टिकट देकर विधायक और मंत्री दोनों बनाया गया.


वीडियो : सौरभ द्विवेदी के साथ दिलीप घोष का पूरा इंटरव्यू देखिए.

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