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'डियर विराट कोहली, आपसे नाराज़गी का हक़ है मुझे'

हर खिलाड़ी के हिस्से में गाली और ताली आती है. सूर्य उगता है तो अस्त भी होता है. निर्भर करता है कि आप अपने अंतिम दिनों में मिली नाकामयाबी को कैसे झेलते हैं. कई उदाहरण हैं. ये कहना गलत होगा कि विराट कोहली अपने करियर के आखिरी पड़ाव में हैं. मैंने कोहली को इस कदर टूटते हुए कभी नहीं देखा. इतना असहाय दिखना, भगवान कसम एक चैंपियन खिलाड़ी के चेहरे पर ठीक तो कतई नहीं लगता. आप कह सकते हैं कि 2014 का इंग्लैंड दौरा कोहली के करियर का सबसे बुरा दौर था. तब विराट कोहली बल्ले से फेल हुए थे. बाद में उससे उबर भी गये.

लेकिन पिछले दो हफ़्तों में कोहली ने जो फैसले लिए हैं. या जो कुछ भी हुआ है. उससे तो यही लगता है कि कोहली खुद से हार गये हैं. टीम इंडिया की कप्तानी छोड़ना बहुत बड़ी बात हो जाती है. वो भी तब, जब टीम जीत रही हो. कुर्सी कोई नहीं छोड़ना चाहता. इसकी कई वजह है. खिलाड़ी को एक ओहदा मिलता है. बहुत सारे ब्रांड्स मिलते हैं. खूब कमाई भी होती है.

अपन कोहली का डाय हार्ड फ़ैन नहीं है. लेकिन वॉरियर किसे पसंद नहीं. वो भी जब खिलाड़ी अपने देश का हो तो. कोहली की तारीफों में गाथा नहीं लिखूंगा. और ना ही लिखूंगा कि वो कितने बड़े खिलाड़ी है. ये भी नहीं लिखूंगा कि कोहली ने टी20 और आरसीबी की कप्तानी क्यों छोड़ी. जस्टिफ़ाई तो क़तई नहीं करूंगा.

# मैं उस कोहली को जानता हूं

लेकिन मैं उस कोहली को जानता हूं, जो मैच जिताने के बाद दहाड़ लगाता था. एक दम शेर माफिक. मैं उस कोहली को जानता हूं जो मैदान पर रहते हुए स्टेडियम में जोश भर देता था. मैं उस कोहली को जानता हूं, जो उम्मीद का दूसरा नाम था. मैं उस कोहली को जानता हूं, जिस पर स्ट्राइक रेट और सिर्फ पचासा ठोकने का इल्ज़ाम लगा तो बदले में उसने एक IPL सीजन में चार शतक ठोक दिए.

ऐसा लगता था कि ये कोहलिया इस धरती का तो हइये नहीं है. मैं उस कोहली को जानता हूं, जो कवर ड्राइव पर छक्का लगाता था, वो भी बड़ी आसानी से. बैट फ़्लो ऐसा कि आलोचना करने वाले भी शर्म के मारे अपने गाल पर थप्पड़ मार ले. मैं उस कोहली को जानता हूं, जो विपक्षी टीमों के गेंदबाजों की आंख में आंख डालकर कहता था कि स्लेज मत करियो भाई. वरना बुरी तरह से पिटोगे. मैं उस कोहली को जानता हूं, जो अपने तेज गेंदबाजों से मैच निकलवा लेता था.

# Virat Kohli जैसा कोई नहीं

बीते एक दशक में दुनिया ने एक कोहली में कई खिलाड़ियों को देखा. किसी को विव रिचर्ड्स लगे तो किसी को सचिन. हक़ीकत ये है कि कोहली सदियों में एक बार पैदा होने वाला खिलाड़ी है. भले ही ICC ट्रॉफी को कामयाब कप्तानी का पैमाना बना दिया गया हो लेकिन कोहली की कप्तानी इसकी मोहताज नहीं है. और कप्तानी की ही बात करनी है तो आंकड़े भी उठाकर देख लीजियेगा. पता चल जाएगा कि कोहली कितने बड़के तोप हैं और उनके सामने बाकी कप्तानों का रिकॉर्ड कैसा है.

और जरा मुझे कोई बताए कि ये कौन लोग हैं जो कहते हैं कि कोहली कप्तानी के दबाव की वजह से खेल नहीं पा रहे हैं. मतलब आप दबाव की बात कर रहे हैं और वो भी कोहली के ऊपर. ये दबाव की बात करने वाले लोगों को एक ही बात कहना चाहूंगा कि

‘जाके देख रिकॉर्ड में, इंसान है कि भगवान?’

अगर कप्तानी का दबाव कोहली की बल्लेबाजी में दिखता तो उन्हें 2014 में ही बिखर जाना चाहिए था. लेकिन किंग तो निखर गए. अब तक बतौर कप्तान 43 T20 पारियों में कोहली ने 48 के एवरेज से 1502 रन बनाए हैं. और इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 148 का रहा. कोहली ने 65 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की है.

इस दौरान उन्होंने 56 के एवरेज से 5667 रन कूटे हैं. 20 शतक और 17 अर्धशतक. जरा कनवर्जन रेट पर भी ध्यान दीजियेगा. वनडे में कोहली ने 91 पारियों में 73 की एवरेज से 5449 रन बनाए हैं. इस दौरान 21 शतक और 27 अर्धशतक उनके बल्ले से निकले.

अब बड़के क्रिकेट पंडित बताएं कि कोहली कितने और कौन से दबाव में खेल रहे हैं. दबाव लेना और न लेना निजी मामला है. और कोहली ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जो दबाव में बिखरते नहीं बल्कि निखरते हैं. पिछले दिनों कोहली ने RCB की कप्तानी छोड़ी. तो ऐलान करते हुए उनके चेहरे से कई बातें मालूम पड़ रही थी. मुझे इस बात का दुःख नहीं था कि उन्होंने कप्तानी छोड़ी.

मलाल इस बात का है कि एक चैंपियन खिलाड़ी ने घुटने टेक दिए. अरे भाई, IPL की नाकामयाबी से कोई ये थोड़ी बता सकता है कि कोहली अच्छे कप्तान हैं या बुरे. कोहली ने एक विश्वकप, एक चैंपियंस ट्रॉफी और एक विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में कप्तानी की है. दो सालों के भीतर तीन ICC इवेंट्स हैं. लेकिन हमारे कप्तान ने कहा- नहीं अब और नहीं. बोझ ज्यादा लग रहा है. सच बताऊं तो मैं विराट कोहली से नाराज हूं और शायद एक फै़न के नाते मुझे नाराज रहने का हक़ भी है.

क्योंकि योद्धा जंग में शस्त्र रखा नहीं करते. आख़िरी सांस तक लड़ते हैं. ताकि हारने पर भी नाम के आगे ‘वीर’ लिखा जाए.


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