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वो आदमी जिसने मनमोहन सिंह की इज्ज़त में पलीता लगा दिया

“मनमोहन सिंह चाहते तो ये घोटाले रोक सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा किया नहीं.”

ये वो शब्द हैं जो भारतीय राजनीति में साफ़ छवि रखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री को पूरी ज़िंदगी परेशान करते रहेंगे. कहने वाले की साख ऐसी थी कि इसे राजनीतिक आरोप कह के खारिज भी नहीं किया जा सकता था.

मार्च 2012 की बात है. कैग (Comptroller and Auditor General) की ड्राफ्ट रिपोर्ट आई, जिसमें 2004 से लेकर 2009 तक हुए कोयला ब्लॉक आवंटन में गड़बड़ियों का ज़िक्र था. इस रिपोर्ट के साथ ही कांग्रेस के जहाज़ में वो सुराख हो गया, जो आगे चलके उसके डूबने की मज़बूत वजह बना. जो शख्स इस पर्दाफ़ाश की वजह बना, उसका नाम विनोद राय है. 23 मई को उनका जन्मदिन होता है.

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कौन हैं विनोद राय!

विनोद राय का जन्म 23 मई 1948 को उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर में हुआ. वो बेहद प्रतिभाशाली अर्थशास्त्री हैं, जिन्होंने ग्यारहवें CAG के तौर पर लगभग 5 साल तक काम किया. 7 जनवरी 2008 से 22 मई 2013 तक. फिलहाल यूनाइटेड नेशंस के बाहरी ऑडिटर्स पैनल के चेयरमैन हैं. 30 जनवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) का अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया था.

दिल्ली के हिंदू कॉलेज से ग्रेजुएट विनोद ने अपनी मास्टर्स डिग्री हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से ली है. वो 1972 बैच के आईएएस हैं. केरल से उन्होंने अपना करियर शुरू किया. सब-कलेक्टर से कलेक्टर होते हुए 8 साल वहां बिताए. केरल राज्य सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी रहे. वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाले बैंकों और इश्योरेंस कंपनियों में अलग-अलग पदों पर काम करने के बाद उन्होंने CAG का पद संभाला.

CAG करता क्या है?

CAG यूं समझिए सरकारों के आर्थिक मामलों पर नज़र रखने वाला चौकीदार है. ये परदे के पीछे रहकर देखता है कि सरकार अपने आर्थिक मामलों में कैसा परफॉर्म कर रही है. संसद और सुप्रीम कोर्ट के जैसा ही रुतबा इस अधिकारी का भी है. और इसमें उसके द्वारा जनहित में किए गए खुलासों का बहुत बड़ा हाथ है. सरकारी खज़ाने से जो पैसा खर्च हो रहा है, क्या वो सही जगह हो रहा है, क्या उसका फायदा उन्हें ही मिल रहा है जिन्हें मिलना चाहिए, इन सब बातों की जांच CAG के ज़िम्मे है. ये बजट की छानबीन भी करता है. CAG की रिपोर्ट में अगर सरकारों की कोई गड़बड़ी दर्ज पाई जाती है, तो संसद की लोकलेखा समिति उसकी छानबीन करती है. ऐसी ही कुछ रिपोर्टों में विनोद राय ने UPA सरकार की गड़बड़ियां देश के सामने रखीं.

लालफीताशाही से दूर रहे

कहा जाता है कि विनोद राय उन अधिकारियों में से थे, जिन्हें सरकारों की लालफीताशाही से बचते हुए काम करना आता था. जब वो बतौर CAG अपॉइंट हुए तो उन्हें तब के फाइनेंस मिनिस्टर पी. चिदंबरम का समर्थन हासिल था. आगे चलकर उन्होंने ऐसी रिपोर्टें बनाई, जो चिदंबरम समेत समूची कांग्रेस के लिए आफत बन गई. कांग्रेस के पतन के लिए ज़िम्मेदार बहुत से घोटाले उन्हीं के कार्यकाल में उजागर हुए.

2G स्पेक्ट्रम घोटाला: विनोद राय को 2G स्पेक्ट्रम घोटाले के पर्दाफ़ाश का पूरा श्रेय जाता है. मोबाइल कंपनियों को हुए 2G स्पेक्ट्रम के आवंटन में बहुत सी गड़बड़ियां पाई गईं. 2 अप्रैल 2011 को CBI ने जो चार्जशीट दाखिल की उसके मुताबिक़ इस घोटाले से देश का तकरीबन 30 हज़ार करोड़ का नुकसान हुआ.

कोयला घोटाला: राय का दिया हुआ UPA सरकार को एक और तगड़ा झटका. विनोद राय के मुताबिक़ 2004 से 2009 के बीच मनमाने तरीकों से लाइसेंस बांटे गए. बेहद सस्ती कीमतों पर बगैर नीलामी के खदानों से कोयला निकालने के ठेके निजी कंपनियों को दिए गए. इससे सरकारी खजाने को 1.86 लाख करोड़ का अनुमानित नुकसान हुआ है.

दिल्ली कॉमनवेल्थ घोटाला: 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान भयंकर भ्रष्टाचार हुआ. चीज़ें अपनी कीमत से कई गुना ज़्यादा दाम देकर खरीदी गईं. कई बार तो जितने पैसों में कोई चीज़ खरीदी जा सकती थी, उससे दुगनी-तिगुनी राशि सिर्फ किराए में दी गई. इसमें सुरेश कलमाड़ी, जो उस इन खेलों के अध्यक्ष थे, भ्रष्टाचार के केस में फंसे और बाद में जेल में भी रहे.

अकाउंटेंट से ऑथर तक

विनोद राय ने अपने कार्यकाल पर एक किताब लिखी, “Not Just An Accountant”. इस किताब में उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अगर चाहते, तो इन घोटालों को रोक सकते थे. लेकिन उन्होंने कभी चाहा ही नहीं.

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एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था,

“जेपीसी की मीटिंग्स के दौरान कांग्रेस के संजय निरुपम, अश्विनी कुमार और संदीप दीक्षित जैसे सांसदों ने मुझे प्रधानमंत्री का नाम इससे बाहर रखने को कहा. लेकिन तब तक रिपोर्ट संसद की टेबल पर रखी जा चुकी थी.”

हालांकि उन्होंने ये भी स्पष्ट किया था कि प्रधानमंत्री ऑफिस से किसी ने उन पर कभी दबाव नहीं डाला.

क्रिकेट प्रशासक के रोल में

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन ना करने पर जनवरी 2017 में कोर्ट ने BCCI अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को बर्खास्त कर दिया. उनकी जगह जिस शख्स को अंतरिम अध्यक्ष चुना वो विनोद राय थे. फिलहाल वो इस पद को संभाल रहे हैं. कुछ दिन पहले उन्होंने देश के मशहूर क्रिकेटरों से अपील भी की कि वो खुल कर बोलें और क्रिकेट प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने में मदद करें. उन्होंने सचिन तेंडुलकर, कपिल देव, अनिल कुंबले, राहुल द्रविड़, सुनील गावसकर जैसे लेजेंडरी खिलाड़ियों से कहा कि वो खुद पहल कर के चीज़ें सुधारें.

बरखास्त किए गए BCCI चेयरमैन अनुराग ठाकुर.
BCCI से बर्खास्त किए गए अनुराग ठाकुर.

उन्हें 2011 में फ़ोर्ब्स मैगज़ीन ने पर्सन ऑफ़ द ईयर चुना था.

2011 के ही दिसंबर में उन्हें यूनाइटेड नेशंस के एक्सटर्नल ऑडिट पैनल का चीफ बनाया गया.

विनोद राय का कहा तमाम प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी वर्किंग डेस्क पर चिपका लेना चाहिए:

“हम चीयरलीडर्स का रोल नहीं कर सकते. हमारा काम सरकारों के अलग-अलग विभागों के काम का सच्चा लेखा-जोखा पेश करना है.”


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