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कोरोना के नए स्ट्रेन के खिलाफ वैक्सीन की क्षमता कम होने की बात सामने आई, अब क्या होगा?

कोरोना की वैक्सीन आ चुकी है. लगायी जा रही है. और वैक्सीन के साथ ही आ चुके हैं कोरोना के नए-नए स्ट्रेन. एक है डेल्टा स्ट्रेन, जिसे लेकर हुआ एक ताज़ा शोध संकेत देता है कि कोविड वैक्सीनों की क्षमता इस नए स्ट्रेन की रोकथाम के लिए पर्याप्त नहीं है. 

रिसर्च है इज़रायल के स्वास्थ्य मंत्रालय का. वहां की एक बड़ी न्यूज वेबसाइट Ynet की रिपोर्ट के मुताबिक़, कोरोना वायरस के खिलाफ 90 प्रतिशत से ज्यादा इफेक्टिव पाई गई फ़ाइज़र वैक्सीन, डेल्टा स्ट्रेन के खिलाफ़ 64 प्रतिशत ही कारगर है. रिपोर्ट कहती है कि जब मई 2021 में डेल्टा स्ट्रेन पर इस वैक्सीन की क्षमता की जांच की गयी थी, तो उस समय इसकी क्षमता लगभग 94 प्रतिशत थी. लेकिन एक महीने में वैक्सीन की क्षमता कम कैसे हो गई, इस सवाल ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि इसी रिपोर्ट में ये बात भी साफ़ की गयी है कि वैक्सीन की मदद से बीमारी की गंभीरता में कमी आयी है.

संक्रामक रोग विशेषज्ञ एरिक फ़ाइगल डिंग के मुताबिक़, बीते 2 हफ़्तों में इज़रायल में कोरोना के केसों में बढ़ोतरी हुई है. इनमें से 90 प्रतिशत केस डेल्टा स्ट्रेन से जुड़े हुए हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायली स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बारे में कुछ नहीं कहा है. लेकिन सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इजरायल में 55 प्रतिशत कोरोना मरीज़ों को कोविड वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी हैं. 

भारत में भी डेल्टा स्ट्रेन के खिलाफ कोरोना वैक्सीनों के प्रभाव से जुड़ा एक रिसर्च सामने आया है. देश के शीर्ष मेडिकल रिसर्च संस्थान इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने ये शोध किया है. इसके मुताबिक, जिन लोगों को कोविशील्ड वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी हैं, उनमें से करीब 16 प्रतिशत के शरीर में डेल्टा वैरियंट से लड़ने वाले एंटीबॉडी नहीं पाए गए हैं. वहीं, जिन लोगों को कोविशील्ड वैक्सीन की सिर्फ एक डोज़ लगी है, उनमें से करीब 58 फीसदी के शरीर में डेल्टा वैरियंट के ख़िलाफ एंटीबॉडी नहीं हैं.

तो क्या वैक्सीन काम नहीं कर रही?

ऐसा नहीं कह सकते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक़, ये साफ़ किया गया है कि वैक्सीन लोगों को गम्भीर रूप से बीमार नहीं पड़ने दे रही है. इससे उनके अस्पताल में भर्ती होने की दर में कमी आयी है. लेकिन एंटीबॉडी नहीं मिलने की बात का क्या करें? इस पर विशेषज्ञों की सुनते हैं.

वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के पूर्व हेड डॉ. टी जॉन जैकब हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहते हैं,

“एंटीबॉडी का नजर न आना और एंटीबॉडी का होना दो अलग बातें हैं. हो सकता है कि एंटीबॉडी हों, लेकिन वो इतनी कम हों कि उन्हें डिटेक्ट कर पाना मुश्किल हो. लेकिन उसके बाद भी ये व्यक्ति को गंभीर संक्रमण से बचा सकते हैं.” 

इसके अलावा हम डॉ. रमन गंगाखेडकर के एक बयान का भी रूख करते हैं. वे ICMR के वैज्ञानिक रह चुके हैं. इंडिया टुडे के साथ कुछ समय पहले हुई बातचीत में गंगाखेडकर ने बताया था,

“अगर आपको वैक्सीन लगी है तो इसका मतलब ये कतई नहीं है कि आपको संक्रमण नहीं होगा. वैक्सीन लगने का मतलब है कि आप पर संक्रमण का असर कम होगा. लक्षण कम ख़तरनाक होंगे.”

वहीं, टाइम्स ऑफ इंडिया से हुई एक बातचीत में डॉ. गंगाखेडकर कहते हैं,

“वैक्सीन की दूसरी डोज़ शरीर में एंटीबॉडी के साथ-साथ टी-सेल को बढ़ाने का काम करती है. इन टी-सेल को किलर टी-सेल भी कहा जाता है. ये इम्यून रेस्पॉन्स के साथ मिलकर वायरस के खिलाफ हमला करती हैं.”

अब क्या होगा?

इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है. फिलहाल चर्चाएं हैं बूस्टर डोज़ की. माने वैक्सीन की दो डोज़ के कुछ महीनों बाद एक और डोज़. ICMR ने अपने स्टडी में इस बूस्टर डोज़ का ज़िक्र किया है. इसके पीछे सिद्धांत ये है कि शुरुआती वैक्सीनेशन के कुछ समय बाद एक और वैक्सीन देने से इम्यून सिस्टम विषाणु के खिलाफ और बेहतर प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार हो जाता है.

ICMR के अलावा अमेरिकी वैक्सीन निर्माता फ़ाइज़र ने भी बूस्टर डोज़ की बात की है. बिज़नेस स्टैंडर्ड की ख़बर के मुताबिक़, फ़ाइज़र के CEO ऐल्बर्ट बोरला ने कहा है कि पूरी तरह से टीकाकरण करवा लेने के लगभग 12 महीने बाद लोगों को वैक्सीन के तीसरे डोज़ की ज़रूर पड़ सकती है.   

नहीं पहन रहे हैं तो पहन लीजिए, बहुत ज़रूरी है मास्क.
नहीं पहन रहे हैं तो पहन लीजिए, बहुत ज़रूरी है मास्क.

क्या करें हम?

जो जब होगा, तब होगा. अभी तो वो मनाली-शिमला-नैनीताल में भीड़ लगाने वाली ग़लती नहीं करनी है. क्योंकि तीसरी लहर के आने की पूरी संभावना है. SBI रिसर्च ने तो कह भी दिया है कि अगस्त में तीसरी लहर की शुरुआत हो सकती है. दूसरी एजेंसियां अक्टूबर तक तीसरी लहर का पीक आने की सम्भावना जता रही हैं. ऐसे में अपना बहुत ख़याल रखना है. ज़रूरी होने पर ही यात्रा करनी है या घर से बाहर निकलना है. और जहां भी जाएं, मास्क लगाना है. भले ही वैक्सीन के दोनों डोज लगवा लिए हों.


वीडियो : वैक्सीन कंपनी मॉडर्ना ने इंडिया में वैक्सीन बेचने के लिए क्या शर्त रखी है?

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