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ये काम हो पाए, तभी कोविड-19 की तीसरी वेव से बच पाएंगे!

कोविड-19 की दूसरी लहर (Coronavirus Second Wave) पहली से भी ज़्यादा ख़तरनाक होती जा रही है. 4 मई तक देश में 34 लाख 47 हज़ार 133 एक्टिव केस हैं. 2 लाख 22 हज़ार 408 लोगों की मौत हो चुकी है. अब तो ये भी डर ज़ेहन में आने लगा है कि क्या आगे के कुछ महीने में ही कोरोना की तीसरी वेव का भी सामना करना पड़ेगा? ऐसा न हो, इसके लिए कुछ बातें बेहद अहम हैं. इनमें सबसे अहम है भारत की टीका-नीति. इस पर विस्तार से बात करेंगे. साथ ही तीसरी वेव रोकने के लिए कुछ अन्य ऐहतियातों पर भी बात करेंगे.

वैक्सीनेशन, वैक्सीनेशन, वैक्सीनेशन

कोविड से निपटने के लिए अभी तक इससे प्रभावी तरीका कोई जान नहीं पड़ता है. डॉक्टर्स लगातार कह रहे हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को वैक्सीनेट करने की ज़रूरत है. इससे संक्रमण को तो पूरी तरह ख़त्म नहीं किया जा सकता, लेकिन ये कोई गंभीर स्थिति पैदा होने से ज़रूर रोका जा सकता है, मृत्युदर को काफी नीचे लाया जा सकता है. भारत में इस समय दो टीके मौजूद हैं- कोविशिल्ड और कोवैक्सीन. स्पूतनिक-वी टीका भी मई से बाज़ार में आने की उम्मीद है. लेकिन दूसरी वेव ने साफ कर दिया है कि भारत की टीकाकरण नीति की रफ्तार चुस्त नहीं है.

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ये स्पूतनिक-वी वैक्सीन की पहली खेप है, जो 1 मई को भारत पहुंची है. रूस से अभी करीब 15 लाख वैक्सीन आई हैं. उम्मीद की जा रही है कि इससे भारत में वैक्सीनेशन तेज होगा. (फोटो- PTI)

Ourworldindata.org पर दुनियाभर के वैक्सीनेशन डेटा उपलब्ध हैं. इसके मुताबिक 13 अप्रैल तक के प्राप्त डेटा का विश्लेषण करें तो भारत ने 87 दिन के वैक्सीनेशन प्रोग्राम में 7.6 फीसदी आबादी को वैक्सीनेट किया. वहीं अमेरिका इस तारीख़ तक 120 दिन के वैक्सीनेशन प्रोग्राम में 57 फीसदी आबादी को और चीन 99 दिन के प्रोग्राम में 12 फीसदी आबादी को वैक्सीनेट कर चुका था. साफ है कि भारत की वैक्सीनेशन रफ्तार काफी सुस्त है.

एक तरफ केंद्र सरकार का कहना है कि वैक्सीन की कोई कमी नहीं है. वह राज्यों को ही ख़राब वितरण और योजना के लिए ज़िम्मेदार ठहरा रही है. वहीं राज्य लगातार ये कह रहे हैं कि उनके पास पर्याप्त वैक्सीन नहीं हैं और इसलिए तमाम राज्यों ने 1 मई से 18+ वालों को टीका लगाने से भी हाथ खड़े कर दिए हैं.

इस रफ्तार से तीसरी वेव आनी तय!

इंडिया टुडे मैग्ज़ीन में अप्रैल में छपी एक रिपोर्ट कहती है –

“भारत एक वैक्सीन इमरजेंसी से गुज़र रहा है. देश को हार्ड इम्यूनिटी हासिल करने के लिए 75 फीसदी आबादी का टीकाकरण करना होगा. टीकाकरण की वर्तमान दर को देखते हुए ये लक्ष्य 2022 की गर्मियों से पहले पूरा होता नहीं दिख रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि कायदे से ऐसा अगले 3-4 महीने में कर लेना चाहिए. अगर हम ऐसा करने में विफल रहते हैं तो निश्चित रूप से मौजूदा लहर के बाद एक तीसरी लहर भी आ सकती है.”

अप्रैल तक भारत में औसतन 40 लाख टीकाकरण रोज़ हो रहे थे. अगर तीसरी लहर रोकनी है तो इस रफ्तार को बढ़ाकर करीब 2 करोड़ टीके प्रतिदिन तक लाना होगा. यानी रफ्तार को करीब 5 गुना तेज़ करनी होगी.

वैरिएंट कोई भी हो, प्रोटोकॉल वही हैं

तीसरी वेव को रोकने के लिए एक बड़ी ज़िम्मेदारी हमारे-आपके ऊपर भी है. ये ज़िम्मेदारी है कोविड प्रोटोकॉल निभाने की. इस बात से कतई इनकार नहीं किया जा सकता कि नवंबर-दिसंबर से कोरोना के कस कम होने के बाद देशभर में कोविड प्रोटोकॉल्स की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं. राजनेताओं, ज़िम्मेदार शख़्सियत से लेकर आम नागरिकों तक ने मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग जैसी बेसिक बातों का भी ध्यान नहीं रखा.

AIIMS के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया कहते हैं –

“वायरस का म्यूटेंट कोई भी हो, हमें कोविड को लेकर प्रोटोकॉल वैसे ही फॉलो करने हैं. कोई भी वैरिएंट हो, वायरस इंसान से इंसान में ही फैल रहा है. ट्रीटमेंट, प्रोटोकॉल वही हैं. उनका पालन करें.”

बात साफ है. मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और हैंड-फ़ेस हाईजीन ही आगे भी वायरस से संक्रमण को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है.


कोरोना वैक्सीन, ऑक्सीजन और लॉकडाउन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से क्या कहा?

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