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सरकारी इंजीनियर ने डिपार्टमेंट के खाते में रिश्वत के 54 लाख 'भूल से' जमा करा दिये?

भूल चूक लेनी देनी. पुराने परचूनिए दाल चावल की रसीद के कोने में लिखा करते थे. इसका मतलब आपकी समझ में आया हो या न हो लेकिन उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग को समझ आ गया होगा. हम-आप चश्मा, घड़ी, पेन, टिफिन भूलते हैं लेकिन उत्तर प्रदेश बिजली विभाग का एक अधिकारी 54 लाख रुपए भूल गया. ऐसा आरोप है कि बिजली विभाग नोएडा के डिविजन दो में एक अधिकारी रिश्वत की रक़म विभाग के बैंक खाते में जमा करवा आया. बाद में विभाग को ख़बर मिली तो होश हिरण हो गए. अब अधिकारी भागदौड़ में लगे हुए हैं कि आखिर ये पैसे किसने जमा करवाए हैं. भूल चूक का ये मामला विचित्र है, लेकिन है.

# पूरा मामला क्या है?

हर महीने ग्राहक बिजली का बिल पटाते हैं. ये रुपये विभाग में बने एक कैश चेस्ट में रखे जाते हैं. जमा होने के बाद ये रुपये बैंक जाते हैं. विभाग के बैंक खाते में ये रुपये जमा कर दिये जाते हैं. नोएडा खंड में भी यही हुआ. लेकिन झोल तब सामने आया, जब पता चला कि जितने पैसे जमा होने थे, असल में उससे 54 लाख रुपये ज्यादा जमा हो गए हैं.

अकाउंट अफ़सर को लगा कि रकम सरकारी है. उन्होंने कहा कि इंजीनियर साहब ने 54 लाख दिए थे रखने को. हमने विभाग के खाते में जमा करा दिए. रिपोर्ट्स बता रही हैं कि रक़म सरकारी नहीं थी. इंजीनियर ने अपने मातहत को रिश्वत की रक़म दी थी रखने के लिए. इंजीनियर को क्या पता था कि भाई साहब उसे विभाग के बैंक खाते में जमा करा आएंगे. जूनियर अफ़सर ने समझा दिया हिसाब-क़िताब.आपका अपना हिसाब हो तो आप समझिए. लेकिन जब बात हो सरकारी हिसाब की, तो बही और खाते चकाचक होने चाहिए.

# इंजीनियर का क्या कहना है?

भूल चूक तो हमने भी सुनी थी लेकिन 54 लाख की भूल शायद ही किसी ने सुनी हो. ये पूरा मामला समझने के लिए The Lallantop ने बात की उस अधिकारी से जिस पर ये आरोप लगा है.

बातचीत में अधिकारी ने बताया-

पहली बात कि इस रक़म से मेरा कोई लेना देना नहीं है. दूसरी बात ये रिश्वत की रक़म भी नहीं है. बिल जमा करने के आख़िरी दिन जो पैसे ग्राहक जमा करते हैं उनकी रसीद बाद में बनती है. हर बार ऐसा होता है कि आख़िरी दिन हम चेक से बिल पेमेंट नहीं लेते. क्योंकि चेक कैश होने में टाइम लगता है. इसलिए आख़िरी दिन कैश में ही बिल जमा कराया जाता है. ये जो रक़म ज़्यादा बताई जा रही है, ये उसी बिल पेमेंट के हैं. ये आरोप मुझपर क्यों लगाया जा रहा है इसकी एक वजह है. और वो है रंजिश. मैंने इसी साल  आठ लोगों को जेल पहुंचाया है. धोखाधड़ी की शिकायत मैंने ही पुलिस से की थी. अब यही वजह है कि मुझसे बदला लिया जा रहा है.

# और आधी बात सही भी है

The Lallantop की टीम ने जब आरोपी इंजीनियर की कही बात जांची तो उनकी एक बात ठीक निकली. उन्होंने बिजली विभाग के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले आठ लोगों पर FIR करवाई थी. फरवरी, 2020 में करवाई FIR में लिखा था कि कुछ लोग बिजली विभाग में जमा होने वाले बिल में हेराफेरी कर रहे थे. मामला एक करोड़ 66 लाख का बताया गया था. नोएडा पुलिस ने अपनी जांच में पंजाब नैशनल बैंक के डिप्टी मैनेजर को भी गिरफ़्तार किया था. एक आरोपी फ़रार हो गया था और बाक़ी फ़िलहाल जेल में बंद हैं. पुलिस ने आरोपियों के पास से 12 लाख रुपये कैश भी बरामद किया था.

बिजली विभाग का काम है कनेक्शन जोड़ना. लेकिन इस केस में कहीं का कनेक्शन कहीं जुड़ गया और उसके बाद जो कनेक्शन सामने आया उसने अधिकारियों को माथा पीटने पर मजबूर कर दिया (तस्वीर सांकेतिक)
बिजली विभाग का काम है कनेक्शन जोड़ना. लेकिन इस केस में कहीं का कनेक्शन कहीं जुड़ गया और उसके बाद जो कनेक्शन सामने आया उसने अधिकारियों को माथा पीटने पर मजबूर कर दिया (तस्वीर सांकेतिक)

इंजीनियर ने The Lallantop से कहा,

आप ख़ुद सोचिए कि जिस आदमी ने FIR करवाकर आठ लोगों को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ़्तार करवाया वो ख़ुद फ्रॉड क्यों करेगा? असल में ये बदले की मंशा से की गई साज़िश है. विभाग में अकाउंट्स डिपार्टमेंट और इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के बीच झगड़ा चलता रहता है. इस आरोप से मुझे फंसाया जा रहा है.

# लेकिन सवाल दूसरा है

बड़ा सवाल ये है कि बैंक में जो एक्स्ट्रा पैसा जमा हुआ उसका जवाबदेह कौन है?

जिस अकाउंट अफ़सर ने पैसे जमा करवाए, वो तो प्रमोशन लेकर मेरठ चला गया. अब कौन बताएगा कि आख़िरी दिन जमा हुई इस रक़म का मालिक मुख्तार कौन है? किसके कहने से पैसा जमा हुआ और अब तक बिजली विभाग अपने उन ग्राहकों को क्यों नहीं खोज पाया जिन्होंने बिल क्लोज़िंग के दिन 54 लाख रुपये की रक़म बिना रसीद पर्ची के जमा कर दी. क्योंकि अब तक तो विभाग के पास उन 54 लाख रुपयों का कोई रसीदी वारिस है नहीं. होगा भी कि नहीं होगा ये भी विभाग को मालूम नहीं.

विभाग के ही एक अधिकारी नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं कि इंजीनियर हर वो कोशिश कर रहे हैं, जिससे मामले में लीपापोती हो सके. अगर उनकी बात सच है तो अब तक विभाग को 54 लाख रुपए जमा कराने वाले ग्राहक क्यों नहीं मिले.

The Lallantop की टीम ने नोएडा के चीफ़ इंजीनियर V.N Singh से बात करने की कोशिश की. लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया.

मामले में किसकी भूल, कौन सी चूक से किसको कितना लेना-देना पड़ा ये तो जांच के बाद सामने आएगा. लेकिन इस मामले में भूल सुधार कैसे होगा ये अधिकारियों को अब तक समझ नहीं आया है.


वीडियो देखें:

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