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ग्राम विकास अधिकारी भर्ती 2018: सालभर में तीसरी जांच, लेकिन दोषियों का पता नहीं

2018 में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी UPSSSC ने एक भर्ती निकाली. इसमें ग्राम पंचायत अधिकारी के 1527, ग्राम विकास अधिकारी के 362 और समाज कल्याण पर्यवेक्षक के 64 और कुल मिलाकर 1952 पदों के लिए आवेदन मांगे गए. फॉर्म भराए गए. 22-23 दिसंबर को परीक्षा हो गई. 28 अगस्त, 2019 को रिजल्ट भी आ गया. यहां तक सब ठीक रहा. अब लिखित परीक्षा में पास हुए अभ्यर्थियों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होना था, जिसके बाद सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिल जाती और भर्ती की प्रक्रिया खत्म हो जाती. लेकिन रिजल्ट आए लगभग सालभर होने को है, अब तक डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन ही नहीं हो पाया है, भर्ती पूरी होने की बात तो बहुत दूर की है. 

VDO-VPO भर्ती का नोटिफिकेशन
VDO-VPO भर्ती का नोटिफिकेशन

कहां अटक गई भर्ती? 

28 अगस्त, 2019 को लिखित परीक्षा का रिजल्ट आया था. इसके बाद 3 सितम्बर को आयोग ने मासिक कैलेंडर जारी किया. इस कैलेंडर में बताया गया कि अक्टूबर, 2019 के चौथे सप्ताह में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शुरू हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. फिर अक्टूबर का कैलेंडर आया. इसमें लिखा था कि नवम्बर में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शुरू हो सकता है, लेकिन नवम्बर में भी नहीं हुआ. लेकिन जब नवम्बर में भी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शुरू होने का कोई आसार नहीं दिखा, तो अभ्यर्थी आयोग में धरने पर बैठ गए. तब आयोग ने जल्द ही डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शुरू करने का आश्वासन देकर वापस भेज दिया. 

UPSSSC का कैलेंडर जिसमें हर महीने अगले महीने से डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शुरू होने की संभावना जताई जाती
UPSSSC का कैलेंडर, जिसमें हर महीने अगले महीने से डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शुरू होने की संभावना जताई जाती

आयोग हर महीने कैलेंडर जारी कर अगले महीने से डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराने की बात करता और परेशान अभ्यर्थी हर महीने आयोग का घेराव करते, प्रदर्शन करते. ये सिलसिला दिसम्बर, जनवरी, फरवरी तक चलता रहा. 6 फरवरी, 2020 को अभ्यर्थी आयोग में भूख हड़ताल पर बैठ गए, जिसके बाद 29 फरवरी, 2020 को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया. आयोग ने 1553 अभ्यर्थियों को 12 मार्च 2020 से लेकर 2 जून 2020 तक डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया. साथ ही ये भी कहा कि जो अभ्यर्थी बच गए हैं, उनके बारे में आयोग की जांच चल रही है. जांच पूरी होने के बाद उन्हें डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा. 

ग्राम विकास मंत्री की चिट्ठी
ग्राम विकास मंत्री की चिट्ठी

ग्राम विकास मंत्री ने की जांच की मांग

अब सवाल ये था कि आयोग किस चीज की जांच कर रहा था? क्या भर्ती में कोई गड़बड़ी हुई थी?  इस सवाल का जवाब मिलता है एक लेटर से. लेटर, जिसे लिखा था उत्तर प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री राजेंद्र सिंह मोती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को. इस लेटर में मंत्री जी ने गड़बड़ी की बात कहते हुए जांच की मांग की. मंत्री जी ने दो अभ्यर्थियों के रोल नंबर शेयर किए. कहा कि कार्बन-कॉपी के हिसाब से इन दोनों ने लगभग पांच प्रश्न हल किए हैं, जबकि मूल कॉपी में सम्पूर्ण गोले हैं. दोनों अभ्यर्थी उत्तीर्ण हैं. कार्बन कॉपी और ओएमआर शीट में अंतर का मतलब है कि भर्ती में गड़बड़ी हुई है. राजेंद्र सिंह ने लिखा, 

 मुझे लगता है कि इस धांधली में अधीनस्थ चयन सेवा आयोग की पूरी तरह से संलिप्तता है. प्रदेश के मेधावी बच्चों के साथ ये बहुत बड़ा अन्याय है और प्रदेश सरकार की ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ एक मजाक है. 

 राजेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री के नाम लिखे लेटर में भर्ती की प्रक्रिया को स्थगित कर इसमें शामिल लोगों के खिलाफ जांच की मांग की. ये लेटर लिखा गया था 29 अगस्त, 2019 को. यानी कि लिखित परीक्षा आने के अगले दिन. इसके बाद भर्ती में जांच शुरू हुई. यही वजह रही कि आयोग सितबंर से फरवरी तक डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन को टालता रहा. खैर, 12 मार्च से डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शुरू हुआ और 18 मार्च को COVID-19 और लॉकडाउन की वजह से अनिश्चित काल तक के लिए रोक दिया गया.

 20 जून को बताया गया कि SIT भर्ती की जांच कर रही है
20 जून को बताया गया कि SIT भर्ती की जांच कर रही है

आंतरिक जांच के बाद SIT जांच

इसी बीच लॉकडाउन के दौरान ही 20 जून, 2020 को आयोग ने एक और नोटिस जारी कर बताया कि ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती के संबंध में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी कि SIT बनाई गई है. भर्ती की प्रक्रिया SIT की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे बढ़ाई जाएगी. सफल अभ्यर्थियों में शामिल सुमित बताते हैं, 

एक लिखित परीक्षा पर ये तीसरी जांच है. लेकिन जांच की रिपोर्ट सामने नहीं आती है. कौन दोषी है और दोषियों पर क्या कार्रवाई हुई, ये भी नहीं पता चल पाता है. जब रिजल्ट आया था, तभी ये बताया था कि कॉर्बन कॉपी और ओरिजनल OMR में मिलान के बाद ही रिजल्ट आ रहा है. मंत्री जी की शिकायत के बाद दो सदस्यीय कमेटी बैठी, तो उसने भी 1553 अभ्यर्थियों को फेयर घोषित कर दिया. अब SIT जांच शुरू हो गई है. इस रवैये से तो यही लगता है कि सरकार भर्ती को पूरा नहीं करना चाहती, बल्कि लटकाना चाहती है. 

सफल अभ्यर्थियों में से कुछ का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन हो चुका है, जबकि काफी सारे अभी बचे हुए हैं. उन्हें इस बात का भी डर है कि कहीं वैकेंसी रद्द ही न कर दी जाए. अंकित तिवारी कहते हैं, 

जिन अभ्यर्थियों के कार्बन कॉपी और ओएमआर शीट में अंतर हैं, उनको होल्ड पर रख दिया गया था. अब ये नहीं समझ आ रहा है कि जब एक बार जांच करके डीवी शुरू कर दी गई थी, तो फिर दोबारा क्यों जांच शुरू की गई. पूछने पर यही जवाब मिलता है कि SIT की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ हो पाएगा. लॉकडाउन की वजह से किसी से बात भी नहीं हो पा रही है. ट्विटर पर भी हमने इस मुद्दे को कई बार ट्रेंड कराया, लेकिन इससे भी कुछ नहीं हुआ. 

ग्रामीण विकास मंत्री राजेंद्र सिंह ने गड़बड़ी में आयोग के भी संलिप्त होने की बात कही. जांच हुई, तो कई सारे अभ्यर्थियों की कॉपी में अंतर की बात सामने आई. इससे ये तो साफ होता है कि गड़बड़ी हुई है, लेकिन इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं? अब तक हुई जांच में क्या पता चला? आयोग इन सवालों का जवाब नहीं देता.

‘दी लल्लनटॉप’ से बात करते हुए UPSSSC के चेयरमैन प्रवीर कुमार ने कहा, 

अभी सरकार ने SIT की जांच बैठाई है, इसलिए अभी हमने प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है. SIT की जांच में जो भी परिणाम आएगा, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे. पिछले साल हमारे पास शिकायत आई थी, तो हमने आंतरिक जांच की थी. उसमें हमने खुद FIR करवाई हुई है. कुछ बच्चों के ओरिजनल कॉपी और ट्रेजरी कॉपी के मार्क्स में अंतर था. शिकायत आई, तो हमने जांच कराई. गड़बड़ी कैसे हुई, ये जांच का विषय है. पुलिस को हमने सीसीटीवी फुटेज और दूसरे साक्ष्य, सब दे दिया है. जो भी होगा, SIT की जांच में सामने आ जाएगा. 

भर्ती को आए दो साल से ज्यादा का समय हो गया है. एक स्टेज की परीक्षा और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद जॉइनिंग होनी थी, लेकिन नहीं हो पाई है. परीक्षा पास करने के बाद अभ्यर्थी 8-10 बार आयोग के सामने धरना दे चुके हैं, लेकिन आयोग है कि चुप है. बिल्कुल नहीं बताता कि कौन हैं वो, लोग जिन्होंने सरकारी भर्तियों में भ्रष्टाचार का जाल फैला रखा है. आयोग नहीं बताता कि जांच में दोषी पाए गए लोगों पर क्या कार्रवाई हुई? आयोग ये भी नहीं बताता कि बरसों से लटकी भर्तियां कब पूरी होंगी?


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