Submit your post

Follow Us

क्या यूपी में 2267 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है, जिसमें पीएफ के पैसे डूब रही कंपनी को दिए गए?

682
शेयर्स

तारीख 10 जुलाई, 2019. उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष आलोक कुमार के पास एक गुमनाम चिट्ठी आती है. चिट्ठी में दावा किया जाता है कि उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों की भविष्य निधि यानी कि प्रोविडेंट फंड में भारी गड़बड़ी हुई है. चिट्ठी के सामने आते ही महकमे में हंगामा मच जाता है. 12 जुलाई, 2019 को इस मामले की जांच के लिए पावर कॉरपोरेशन खुद से एक कमिटी बनाता है. करीब 17 दिनों की जांच के बाद ये कमिटी बताती है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन में काम करने वाले 45,000 कर्मचारियों की भविष्य निधि में 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की गड़बड़ी हुई है. कमिटी ने बताया कि कर्मचारियों के पीएफ का 65 फीसदी हिस्सा सिर्फ तीन कंपनियों में लगाया गया है. और इस पैसे का भी 99 फीसदी हिस्सा सिर्फ एक कंपनी में लगा है, जिसका नाम है दीवान हाउसिंग फाइनैंस लिमिटेड यानी कि डीएचएफएल.

पूरा बवाल सिर्फ डीएचएफएल में पैसे के निवेश को लेकर है. डीएचएफएल एक डूब रही कंपनी है और लोगों को डर है कि उनका भी पैसा डूब जाएगा.
पूरा बवाल सिर्फ डीएचएफएल में पैसे के निवेश को लेकर है. डीएचएफएल एक डूब रही कंपनी है और लोगों को डर है कि उनका भी पैसा डूब जाएगा.

इस बात की जानकारी सामने आने के बाद पावर कॉरपोरेशन ने 1 अक्टूबर को इस मामले की जांच अपनी सतर्कता विंग को सौंप दी. मामले ने तूल पकड़ा तो पावर कॉरपोरेशन ने 10 अक्टूबर तो एंप्लाईज ट्रस्ट के सचिव पीके गुप्ता को सस्पेंड कर दिया. लेकिन मामला तूल पकड़ता गया. राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई. बीजेपी सरकार ने अपनी पूर्ववर्ती अखिलेश यादव की सपा सरकार पर आरोप लगाया. सपा सरकार ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर आरोप लगाया. और तभी योगी सरकार को पता चला कि डीएचएफएल की जांच प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है और मुंबई हाई कोर्ट ने कंपनी के लेनदेन पर रोक लगा रखी है. इसके बाद सीएम योगी ने 2 नवंबर को ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा को बुलाया और ऐक्शन लेने के आदेश दिए. श्रीकांत शर्मा ने इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने के लिए पत्र लिख दिया. और अब ये मामला सीबीआई के पास है.

क्या है दीवान हाउसिंग फाइनैंस लिमिटेड (डीएचएफएल), जिसपर इतना हंगामा मचा है

डीएचएफएल एक हाउसिंग फाइनैंस कंपनी है, जो डूबने के कगार पर है. इस कंपनी पर बैंकों का करीब 40,000 करोड़ रुपये का बकाया हो गया है. कंपनी के पास पैसे नहीं हैं कि वो चुका सके. पैसे के घपले को लेकर ईडी ने 19 अक्टूबर को इस मामले की जांच शुरू की. डीएचएफएल के नॉन एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर धीरज वाधवान उर्फ बाबा दीवान इकबाल मिर्ची केस में मुंबई के ईडी दफ्तर में पहुंचे थे. ईडी ने 11 अक्टूबर को डीएचएफल के प्रमोटर्स और इकबाल मिर्ची के बीच रिश्ते को लेकर रंजीत सिंह बिंद्रा और हुमायूं मर्चेंट की गिरफ्तारी की थी. पूछताछ के दौरान बिंद्रा ने कहा था कि वर्ली में इकबाल मिर्ची की तीन प्रॉपर्टीज़ हैं. बाद में ये प्रॉपर्टीज़ सनब्लिंक रियल स्टेट कंपनी को बेच दी गई. सनब्लिंक रियल स्टेट सनी भतीजा की कंपनी है, जो धीरज का साला है. सनब्लिंक कंपनी धीरज वाधवान की कंपनी कही जाती थी. धीरज वाधवान का नाम राज कुंद्रा से भी पूछताछ के दौरान सामने आया था, जब राज कुंद्रा ने कहा था कि उन्होंने मुंबई एयरपोर्ट के पास की एक ज़मीन वाधवान को बेची थी. इसके अलावा इकबाल मिर्ची की प्रॉपर्टी को बिकवाने में धीरज वाधवान का ही हाथ था, जिसकी वजह से ईडी ने धीरज को पूछताछ के लिए बुलाया था. 4 नवंबर को धीरज के बड़े भाई कपिल वाधवान सारे दस्तावेज के साथ ईडी से मिले थे. और यही कपिल वाधवान-धीरज वाधवान की कंपनी डीएचएफएल है, जिसमें उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के कर्मचारियों ने अपने पीएफ का पैसा लगा रखा है और अब जो डूबने के कगार पर है.

डीएचएफएल के कपिल वाधवान ईडी के सामने पेश हो चुके हैं.
डीएचएफएल के कपिल वाधवान ईडी के सामने पेश हो चुके हैं.

कब से शुरू हुआ पूरा खेल?

साल था 2014. राज्य में थी समाजवादी पार्टी की सरकार. मुखिया थे अखिलेश यादव. इसी साल 21 अप्रैल को उत्तर प्रदेश स्टेट पावर सेक्टर एंप्लाईज ट्रस्ट के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक हुई. इस बैठक में तय किया गया कि अगर निजी बैंक, सरकारी बैंकों की तुलना में ज्यादा ब्याज देने को तैयार हैं, तो क्यों न पैसे निजी बैंकों में जमा किए जाएं. तय किया गया कि पीएफ का पांच से 10 फीसदी हिस्सा निजी बैंकों में जमा किया जा सकता है. लेकिन ये बात बैंकों की थी, तो खतरा नहीं था. फिर दिसंबर, 2016 में उस वक्त के यूपीपीसीएल के चेयरमैन संजय अग्रवाल और एमडी मिश्रा ने तय किया कि प्रोविडेंट फंड के पैसे सरकारी हाउसिंग स्कीम में लगाए जा सकते हैं. इसके बाद पावर कॉरपोरेशन ने पंजाब नेशनल बैंक हाउसिंग स्कीम और एलआईसी हाउसिंग स्कीम में पैसे लगाने शुरू कर दिए. लेकिन मार्च, 2017 में ट्रस्ट के सचिव पीके गुप्ता और निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी ने दीवान हाउसिंग फाइनैंस लिमिटेड (डीएचएफएल) में पैसे लगाने की मंजूरी दे दी. इसके बाद मार्च, 2017 से लेकर दिसंबर, 2018 तक पैसे लगाए जाते रहे.

अखिलेश यादव की सरकार में ये तय हुआ था कि पीएफ का कुछ हिस्सा उन निजी बैंकों में जमा किया जा सकता है, जो सरकारी बैंकों से ज्यादा ब्याज दे रही हों.
अखिलेश यादव की सरकार में ये तय हुआ था कि पीएफ का कुछ हिस्सा उन निजी बैंकों में जमा किया जा सकता है, जो सरकारी बैंकों से ज्यादा ब्याज दे रही हों.

कितने पैसे डूब रहे हैं यूपीपीसीएल कर्मचारियों के?

पावर कॉरपोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक मार्च, 2017 में पावर सेक्टर एंप्लाई ट्रस्ट ने करीब 4,121 करोड़ रुपये का निवेश डीएचएफएल में किया था. ये पैसे दो अलग-अलग एफडी के तौर पर लगाए गए थे. इसमें से 1,854 करोड़ रुपये की एफडी एक साल के लिए और 2268 करोड़ रुपये की एफडी तीन साल के लिए करवाई गई थी. एक साल वाली एफडी दिसंबर, 2018 में पूरी हो गई, जिसका पैसा ट्रस्ट के पास वापस आ गया. तीन साल वाली एफडी मार्च, 2020 में पूरी होगी. अब इसी पैसे के फंसने की आशंका है, क्योंकि मुंबई हाई कोर्ट ने कंपनी के सारे लेन-देन पर रोक लगा दी है.

डीएचएफएल की वजह से यूपीपीसीएल कर्मचारियों के पैसों के डूबने की नौबत आ गई है.
डीएचएफएल की वजह से यूपीपीसीएल कर्मचारियों के पैसों के डूबने की नौबत आ गई है.

क्या कहती है एफआईआर?

उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से 2 नवंबर को हज़रतगंज थाने में ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव प्रवीण कुमार गुप्ता और तत्कालीन निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी के खिलाफ नामजद एफआईआर हुई. इस एफआईआर के मुताबिक-
मार्च, 2017 से दिसंबर, 2018 के बीच ट्रस्ट का काम देख रहे थे प्रवीण कुमार गुप्ता. उन्होंने निदेशक वित्त सुंधाशु द्विवेदी के आदेश पर प्रोविडेंट फंड का 50 फीसदी से भी अधिक पैसा डीएचएफएल में ये जानते हुए लगाया कि डीएचएफएल वाणिज्यिक बैंक की श्रेणी में नहीं आती है और यह एक असुरक्षित प्राइवेट संस्था है. भविष्य निधि के 2631.20 करोड़ रुपये डीएचएफएल में लगाए गए, जिसमें से 1185.50 करोड़ रुपये ट्रस्ट को वापस मिल गए. बाकी के 1445.70 करोड़ रुपये अभी मिलने बाकी हैं. इसी तरह से 1491.50 करोड़ रुपये और भी डीएचएफएल में लगाए गए थे, जिसमें से 669.30 करोड़ रुपये ट्रस्ट को मिल गए हैं. बाकी के 822.20 करोड़ रुपये अभी ट्रस्ट को मिलने हैं. इस तरह कुल 2267.90 करोड़ रुपये का मूलधन डीएचएफएल पर बकाया है. और ये सब प्रवीण गुप्ता और सुधांशु द्विवेदी ने मिलकर किया है.

उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन में हुए पीएफ घोटाले की एफआईआर की कॉपी.
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन में हुए पीएफ घोटाले की एफआईआर की कॉपी.

अब तक क्या ऐक्शन हुआ?

इस मामले में 2 नवंबर को हजरजगंज थाने में एफआईआर दर्ज हुई. इसके बाद तत्कालीन वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी और तत्कालीन सचिव (ट्रस्ट) पीके गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया गया है. इसके अलावा डीएचएफल में निवेश शुरू होते वक्त पावर कॉरपोरेशन के एमडी रहे एपी मिश्रा को पुलिस ने हिरासत में लिया है और उनसे अज्ञात जगह पर पूछताछ की जा रही है. लखनऊ के शक्ति भवन में बने यूपी स्टेट पावर सेक्टर एंप्लाइज ट्रस्ट के दफ्तर को भी सील कर दिया गया है. मामला सीबीआई को सौंपा जा चुका है, लेकिन अभी सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू नहीं की है. और इसीलिए आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के डीजी आरपी सिंह खुद इस मामले की जांच कर रहे हैं. वहीं अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने कहा है कि इस बात की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि डीएचएफएल में निवेश के लिए बड़े पैमाने पर कमीशनबाजी भी हुई होगी. लिहाजा ईडी भी इस मामले की जांच में शामिल होगी और मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज करेगी.

पावर कॉरपोरेशन के एमडी रहे एपी मिश्रा को हिरासत में ले लिया गया है, जबकि तत्कालीन वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी को गिरफ्तार कर लिया गया है.
पावर कॉरपोरेशन के एमडी रहे एपी मिश्रा (बाएं) को हिरासत में ले लिया गया है, जबकि तत्कालीन वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी को गिरफ्तार कर लिया गया है.

अखिलेश यादव ने कहा, डीएचएफएल ने बीजेपी को दिया 20 करोड़ रुपये का चंदा

समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि डिफॉल्टर कंपनी डीएचएफएल को पैसा बीजेपी सरकार में दिया गया है. अखिलेश यादव ने कहा है कि डीएचएफएल ने बीजेपी को 20 करोड़ रुपये का चंदा दिया है. मामले को दबाने के लिए योगी आदित्यनाथ सीबीआई जांच की सिफारिश कर रहे हैं, जबकि इस मामले की जांच हाई कोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से करवानी चाहिए. अखिलेश यादव ने कहा कि योगी आदित्यनाथ कमजोर मुख्यमंत्री हैं. वह अपने मंत्री को हटाना तो चाहते हैं, लेकिन हटा नहीं पा रहे हैं. उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए.

बीजेपी ने कहा, घोटाला तो अखिलेश के वक्त शुरू हुआ

अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि डीएचएफएल को पैसा देने का फैसला 21 अप्रैल 2014 को हुआ था और तब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे. 17 मार्च, 2017 को DHFL में पहला निवेश हुआ और तबतक योगी सरकार अपना कार्यभार शुरू नहीं कर पाई थी. कर्मचारियों के पीएफ का पैसा कहां जमा होगा, ये ट्रस्ट तय करता है, ऊर्जा मंत्री नहीं. जैसे ही मामला हमारे संज्ञान में आया, हमने ऐक्शन लिया. दोषियों को जेल भेजा जा रहा है और मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है.

वन मंत्री दारा सिंह के लेटर ने योगी सरकार के निर्बाध बिजली सप्लाई के दावों की पोल खोल दी है.
योगी सरकार में बिजली मंत्री श्रीकांत शर्मा ने पूरे घोटाले के लिए अखिलेश यादव को जिम्मेदार ठहराया है.

प्रियंका ने पूछा, डिफाल्टर कंपनी में क्यों लगा दी कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई?

प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस मामले में ट्वीट कर सरकार से सवाल पूछा है कि आखिर किसका हित साधने के लिए कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई डीएचएफएल जैसी डिफाल्टर कंपनी में लगा दी गई और किसका हित साधने के लिए कर्मचारियों के साथ ये खिलवाड़ किया जा रहा है.

अब इस पूरे मामले पर सिर्फ और सिर्फ सियासत हो रही है. आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं. सरकार सपा पर निशाना साध रही है, तो समूचे विपक्ष के निशाने पर हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा. बवाल बढ़ा है तो सरकार ने 4 नवंबर को पावर कॉरपोरेशन की एमडी अपर्णा यू को हटा दिया है और एम देवराज को नया एमडी बनाया है. बिजली विभाग के कर्मचारी पूरे प्रदेश में प्रदर्शन कर रहे हैं. बिजली विभाग के इंजीनियरों ने कहा है कि वो 18 और 19 नवंबर को काम नहीं करेंगे.


NBFC में गड़बड़ियों के बीच मोदी सरकार के बेलआउट प्रस्ताव को क्यों नहीं माना RBI?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

रिव्यू पिटीशन क्या होता है? कौन, क्यों, कब दाखिल कर सकता है?

अयोध्या पर फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड रिव्यू पिटीशन दायर करने जा रहा है.

इन नौ सवालों का जवाब दे दिया, तब मानेंगे आप ऐश्वर्या के सच्चे फैन हैं

कुछ ऐसी बातें, जो शायद आप नहीं जानते होंगे.

अमिताभ बच्चन तो ठीक हैं, दादा साहेब फाल्के के बारे में कितना जानते हो?

खुद पर है विश्वास तो आ जाओ मैदान में.

‘ताई तो कहती है, ऐसी लंबी-लंबी अंगुलियां चुडै़ल की होती हैं’

एक कहानी रोज़ में आज पढ़िए शिवानी की चन्नी.

मोदी जी का बड्डे मना लिया? अब क्विज़ खेलकर देखो कितना जानते हो उनको

मितरों! अच्छे नंबर चइये कि नइ चइये?

कॉन्ट्रोवर्सियल पेंटर एमएफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एमएफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद के बारे में तो गूगल करके आपने खूब जान लिया. अब ज़रा यहां कलाकारी दिखाइए.

इस क्विज़ में परफेक्ट हो गए, तो कभी चालान नहीं कटेगा

बस 15 सवाल हैं मित्रों!

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

इंग्लैंड के सबसे बड़े पादरी ने कहा वो शर्मिंदा हैं. जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

KBC क्विज़: इन 15 सवालों का जवाब देकर बना था पहला करोड़पति, तुम भी खेलकर देखो

आज से KBC ग्यारहवां सीज़न शुरू हो रहा है. अगर इन सारे सवालों के जवाब सही दिए तो खुद को करोड़पति मान सकते हो बिंदास!

क्विज: अरविंद केजरीवाल के बारे में कितना जानते हैं आप?

अरविंद केजरीवाल के बारे में जानते हो, तो ये क्विज खेलो.