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जम्मू-कश्मीर में डोमिसाइल को लेकर क्या बदलाव हुए हैं, जिस पर सबकी नज़र टिकी है?

जम्मू-कश्मीर. केंद्रशासित प्रदेश. यहां सभी सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में डोमिसाइल सर्टिफिकेट जरूरी होगा. 20 मई को केंद्रीय कैबिनेट ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत डोमिसाइल से जुड़े दूसरे आदेश को मंजूरी दे दी. पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में जम्मू-कश्मीर सिविल सेवाएं (विकेंद्रीकरण एवं भर्ती) अधिनियम यानी Jammu & Kashmir Civil Services (Decentralisation and Recruitment) Act दूसरा आदेश, 2020 को मंजूरी दे दी.

इसके तहत प्रदेश में गैजेटेड और नॉन गैजेडेट, सभी तरह की नौकरियों के लिए संशोधित डोमिसाइल नियम लागू होंगे. आसान भाषा में कहें, तो राज्य की नौकरियां राज्य के लोगों को ही मिल सकेगी.

कैबिनेट की मंजूरी की प्रेस विज्ञप्ति.
कैबिनेट की मंजूरी की प्रेस विज्ञप्ति.

डोमिसाइल है क्या?

कॉलेज में पढ़ाई करनी हो या नौकरी, कागज के बिना काम नहीं होता. पैदा कब हुए थे, कहां पढ़े, कहां रहे, सबका सर्टिफिकेट होता है. कहने को हमारे देश में नागरिकता का एक ही पैमाना है, लेकिन ज़्यादातर राज्यों में कुछ सरकारी सुविधाएं उन्हें ही मिलती हैं, जो वहां के ‘मूल-निवासी’ होते हैं. इसके अलग-अलग नियम होते हैं. मसलन या तो आपका जन्म वहां का होना चाहिए या फिर आपको सबूत देना होता है कि आप वहां लंबे समय से रह रहे हैं. ये वक्त कुछ खास बरस का होता है. इसके बाद ही आपका डोमिसाइल सर्टिफिकेट बनता है. डोमिसाइल सर्टिफिकेट का असल प्रताप दो जगह सबसे ज़्यादा दिखता है– सरकारी कॉलेज और सरकारी नौकरी.

एक अप्रैल को नियम बनाए, दो दिन बाद बदल दिया

केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35ए समाप्त करने के आठ महीने बाद एक अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के लिए डोमिसाइल को लेकर नए नियम बनाए. सरकारी नौकरियों में एलिजिबिलटी के नियमों की अधिसूचना जारी की. इस अधिसूचना के मुताबिक उन लोगों को स्थानीय निवासी माना जाता, जो 15 साल से जम्मू-कश्मीर में रह रहे हैं या जिन्होंने सात साल तक यहां शिक्षा पाई है. साथ ही यहां के शिक्षण संस्थानों में 10वीं या 12वीं की परीक्षा दी हो.

इसके साथ ही सरकार ने चतुर्थ श्रेणी की सरकारी नौकरियां जम्मू-कश्मीर के निवासियों के लिए आरक्षित कीं. लेकिन सरकार के इस फैसले का जमकर विरोध हुआ. सरकार ने दो दिन बाद, यानी तीन अप्रैल को नियम बदल दिए और जम्मू-कश्मीर के निवासियों के लिए सभी नौकरियां आरक्षित कर दीं. यानी किसी अन्य राज्य का व्यक्ति जम्मू-कश्मीर में नौकरी के लिए अप्लाई नहीं कर सकता.

पहले नियम क्या थे?

अगस्त, 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने से पहले जम्मू-कश्मीर की सभी सरकारी नौकरियां राज्य के स्थायी निवासियों के लिए आरक्षित होती थीं. अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर में अलग संविधान होता था. 35ए के तहत राज्य से बाहर के लोगों पर यहां संपत्ति खरीदने और सरकारी नौकरियां पर प्रतिबंध था. 35ए के तहत जम्मू-कश्मीर सरकार को राज्य के स्थायी निवासी की परिभाषा तय करने का अधिकार था. इस अनुच्छेद के तहत स्थायी निवासियों को सरकारी नौकरियों और अचल संपत्ति के स्वामित्व में विशेषाधिकार देने की राज्य सरकार को अनुमति थी. लेकिन विशेष राज्य का दर्जा खत्म होने के साथ ही सबकुछ बदल गया.

अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने से पहले जम्मू कश्मीर की सभी सरकारी नौकरियां राज्य के स्थायी निवासियों के लिए आरक्षित होती थीं. (सांकेतिक फोटो)
अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने से पहले जम्मू कश्मीर की सभी सरकारी नौकरियां राज्य के स्थायी निवासियों के लिए आरक्षित होती थीं. (सांकेतिक फोटो)

नया डोमिसाइल एक्ट लागू

जम्मू-कश्मीर में 18 मई को नया डोमिसाइल एक्ट लागू हो गया. इसी के साथ प्रदेश में स्थानीय नागरिक प्रमाण पत्र (पीआरसी) की जगह डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी करने के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया गया है. जम्मू-कश्मीर में किसी भी पद पर नियुक्ति के लिए स्थानीय निवासी होना मुख्य पात्रता है. नए नियमों के मुताबिक, डोमिसाइल सर्टिफिकेट 15 दिनों में जारी किया जाएगा.

कौन होगा डोमिसाइल का पात्र? 

केंद्र सरकार के अधिकारी, अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों, पीएसयू, सरकारी बैंकों और केंद्र सरकार की स्वायत्त संस्थाओं के अधिकारियों, संवैधानिक संस्थाओं के अधिकारियों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और मान्यता प्राप्त केंद्र सरकार की अनुसंधान संस्थाओं के अधिकारी, जो 10 साल जम्मू-कश्मीर में रह चुके हैं, उन्हें डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा. यानी स्थानीय निवासी का दर्जा मिलेगा.

इसके अलावा, राहत और पुनर्वास आयुक्त के यहां पंजीकृत प्रवासियों और उनके बच्चों को भी डोमिसाइल सर्टिफिकेट मिलेगा. रोजगार, व्यवसाय, प्रोफेशन या किसी अन्य कारोबारी कारण से जम्मू-कश्मीर से बाहर रह रहे राज्य के लोगों को भी स्थानीय निवासी माना जाएगा.

पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी, सफाई कर्मचारी और दूसरे राज्यों में शादी करने वाली महिलाओं के बच्चे भी डोमिसाइल के हकदार होंगे. इन सभी के लिए 15 वर्ष तक प्रदेश में रहने समेत अन्य श्रेणी की अनिवार्यता के नियम लागू होंगे. नए नियमों के तहत पश्चिम पाकिस्तान के लोगों, बाल्मीकियों, समुदाय के बाहर शादी करने वाली महिलाओं, गैर-पंजीकृत कश्मीरी प्रवासियों और विस्थापित लोगों को जल्द ही आवास अधिकार मिल जाएंगे.

कैसे आवेदन कर सकते हैं?

डोमिसाइल सर्टिफिकेट के लिए आवेदन ऑफलाइन और ऑनलाइन किया जा सकता है. सक्षम अधिकारी डिजिटल डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी कर सकता है. नए नियमों के मुताबिक, डोमिसाइल सर्टिफिकेट 15 दिनों में जारी किया जाएगा. इसके बाद आवेदन करने वाला संबंधित अपीलीय प्राधिकारी से संपर्क कर सकता है. अपीलीय अधिकारी का फैसला बाध्यकारी होगा और उसके फैसले को सात दिनों के भीतर लागू करना होगा. अगर कोई अधिकारी ऐसा नहीं करता है, तो उसे अपने वेतन से 50 हजार रुपये जुर्माना देना होगा. अपीलीय अधिकारी के पास रिवीजन का भी अधिकार होगा. वह किसी आवेदन का स्वतः संज्ञान लेकर रिकॉर्ड की जांच कर सकता है और जांच करके आदेश जारी कर सकता है.

Internet In Jammu Kashmir
डोमिसाइल सर्टिफिकेट बनवाने के लिए सरकार ने कुछ नियम तय किए हैं. (सांकेतिक फोटो)

डोमिसाइल सर्टिफिकेट के लिए राशन कार्ड, अचल संपत्ति रिकॉर्ड, शिक्षा प्रमाण पत्र, बिजली बिल, सत्यापित लेबर कार्ड, नियोक्ता प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज जमा करने होंगे.

 कॉलेज में दाखिले के लिए डोमिसाइल जरूरी

इस बीच जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने राज्य के शिक्षण संस्थानों, स्कूल और हायर एजुकेशन में दाखिले के लिए डोमिसाइल सर्टिफिकेट को अनिवार्य कर दिया है. 20 मई को जारी सर्कुलर के अनुसार संघ शासित क्षेत्र में स्थित विभिन्न शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए, जहां भी परमानेंट रेजिडेंट सर्टिफिकेट लगाना अनिवार्य था, वहां अब डोमिसाइल सर्टिफिकेट लगाना होगा.

पाकिस्तान क्यों कर रहा है विरोध? 

नए डोमिसाइल रूल जारी होने के बाद पाकिस्तान इसका विरोध कर रहा है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का यह नया डोमिसाइल ऐक्ट जम्मू-कश्मीर की आबादी को बदलने के लिए है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने जारी एक बयान में कहा, “भारत ने कश्मीर में जो नया डोमिसाइल ऐक्ट लागू किया है, वह पूरी तरह गैरकानूनी है और यूएन सिक्योरिटी काउंसिल के दोनों देशों के बीच हुए एग्रीमेंट का खुला उल्लंघन है.”


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