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यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज साइट बनने की खबर तो सुनी होगी, पर ये दर्जा छिन भी जाता है; कैसे?

तेलंगाना के 800 साल पुराने काकतीय मंदिर को यूनेस्को ने विश्व धरोहर में शामिल किया है जबकि यूके के लिवरपूल शहर को इस लिस्ट से डिलीट कर दिया है. (फोटो-यूनेस्को)

देश की धरोहर को जब दुनिया सराहे तो खुश होना लाजमी है. ऐसा एक और मौका आया है. रविवार 25 जुलाई को यूनेस्को ने तेलंगाना में स्थित काकतीय रुद्रेश्वर रामप्पा मंदिर को विश्व धरोहर में शामिल कर लिया है. पीएम मोदी ने इस सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि-

“सभी को बधाई, खासकर तेलंगाना की जनता को, प्रतिष्ठित रामप्पा मंदिर महान काकतीय वंश के उत्कृष्ट शिल्प कौशल को प्रदर्शित करता है. मैं आप सभी से इस राजसी मंदिर परिसर की यात्रा करने और इसकी भव्यता का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने का आग्रह करूंगा.”

लेकिन इस बार वर्ल्ड हैरिटेज साइट्स की घोषणा के साथ यूनेस्को ने एक खेदजनक सूचना भी शेयर की. अब तक यूनेस्को हैरिटेज साइट्स में शामिल ब्रिटेन के लिवरपूल शहर को सूची से हटा दिया गया है. आपके मन में भी सवाल आ रहा होगा कि आखिर क्यों? तो आइए जानते हैं वर्ल्ड हैरिटेज लिस्ट में शामिल करने और बाहर करने का तरीका.

सबसे पहले बात काकतीय रुद्रेश्वर रामप्पा मंदिर की

इस साल यूनेस्को की हैरिटेज सूची में शामिल हुआ रुद्रेश्वर रामप्पा मंदिर देश में ऐसा दर्जा पाने वाला 39वां स्थल बन  गया है. तेलंगाना के वारंगल में स्थित यह शिव मंदिर अपने आप में अनूठा है. यह अकेला ऐसा मंदिर है, जिसका नाम इसके शिल्पकार रामप्पा के नाम पर रखा गया. तेलंगाना के काकतीय वंश के महाराजा गणपति देव ने सन 1213 में इस मंदिर का निर्माण शुरू करवाया था. इस मंदिर को बनने में 40 साल लगे. मंदिर के शिल्पकार रामप्पा के काम को देखकर महाराजा गणपति देव इतने खुश हुए कि मंदिर का नाम रामप्पा के नाम पर रख दिया.

छह फीट ऊंचे प्लेटफॉर्म पर बने इस मंदिर की दीवारों पर महाभारत और रामायण के दृश्य देखे जा सकते हैं. यह मंदिर हजार खंभों से बना हुआ है. सबसे बड़ी बात यह है कि उस काल में बने ज्यादातर मंदिर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, लेकिन कई आपदाओं के बाद भी इस मंदिर को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा है. शिवरात्रि और सावन के महीने में यहां काफी श्रद्धालु पहुंचते हैं.

किसे मिलता है विश्व धरोहर का दर्जा

धरोहर मतलब विरासत या थाती. इंसान की अपनी जड़ें हैं और वो धीरे-धीरे ‘विकसित’ हुआ है. इस क्रम में उसने बहुत कुछ बनाया, बिगाड़ा है. अगर मानवता के लिहाज से किसी जगह का वैश्विक मूल्य हो, तो उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाता है. किसी भी जगह को उसके सांस्कृतिक, ऐतिहासिक या दूसरे महत्व की वजह से विश्व धरोहर स्थल (वर्ल्ड हैरिटेज साइट) का दर्जा मिलता है.

वर्ल्ड हैरिटेज साइट्स में ऐतिहासिक भवन, शहर, रेगिस्तान, जंगल, द्वीप, झील, स्मारक, पहाड़ शामिल हो सकते हैं. वर्ल्ड हैरिटेज साइट समिति इनका चयन करती है. ये समिति UNESCO World Heritage Convention, 1972 के तहत आती है.

इन साइट्स को विश्व धरोहर की लिस्ट में इसलिए जोड़ा जाता है, ताकि ये उपेक्षा का शिकार होकर खत्म ना हो जाएं. लोगों की आवाजाही से इन पर असर ना पड़े. हमारे यहां लोगों में स्मारकों पर अपना नाम गोदकर ‘अमर होने’ का भी शगल होता है. इससे इन ऐतिहासिक स्थलों का नुकसान पहुंचता है.

किस पैमाने पर वर्ल्ड हैरिटेज का दर्जा मिलता है?

सांस्कृतिक पैमाना

# ये स्थल इंसान की रचनात्मक मेधा के मास्टरपीस होने चाहिए.
# मानवीय मूल्यों के आदान-प्रदान, आर्किटेक्चर, टेक्नॉलजी, स्मारक कला, प्लानिंग, डिज़ाइन को दिखाते हों.
# किसी नष्ट हो चुकी सभ्यता की सांस्कृतिक परंपरा को दिखाते हों.
# मानव इतिहास के अहम पड़ाव के उदाहरण हों.

प्राकृतिक पैमाना

# ये जगहें असाधारण प्राकृतिक सुंदरता और परिघटना को दिखाती हों.
# पृथ्वी के इतिहास, जीवन के रिकॉर्ड, लैंडफॉर्म में बदलाव का उदाहरण हों.
# इकोलॉजी, बायोलॉजिकल प्रक्रियाओं और बायोलॉजिकल डायवर्सिटी, तटीय या समुद्री इको सिस्टम, पेड़-पौधों और जानवरों के महत्व को दिखाती हों.

UK के साथ दूसरा ही खेल हो गया

यूनाइटेड किंगडम में एक शहर है लिवरपूल. फुटबॉल में एक क्लब का नाम तो सुना ही होगा, एफसी लिवरपूल. बस वही वाला लिवरपूल. साल 2004 में लिवरपूल शहर के एक हिस्से मैरिटाइम मर्कैंटाइल सिटी को वर्ल्ड हैरिटेज साइट्स में शामिल किया गया. असल में ये इलाका 18वीं और 19वीं शताब्दी में विश्व व्यापार के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहा था. दुनियाभर के पानी के जहाज यहां रुकते थे. यह एक महत्वपूर्ण जलमार्ग का हिस्सा था. इसी की बदौलत इसे यह सम्मान प्राप्त हुआ.

इस लिस्ट में शामिल होने के बाद जहां हैरिटेज साइट को संरक्षित करने का काम तेज हो जाता है, वहीं लिवरपूल में उल्टा होने लगा. इस साइट के आसपास बेतरतीब तरीके से निर्माण कार्य शुरू हो गया. यूनेस्को ने कई बार चेताया भी लेकिन कुछ फर्क नहीं पड़ा. चिंता जताते हुए यूनेस्को ने साल 2012 में इसे खतरे में पड़ चुकी विश्व धरोहर की सूची में डाल दिया. इसके बाद भी हैरिटेज साइट के आसपास निर्माण कार्य जारी रहा. इतना ही नहीं, साइट के आसपास की निषिद्ध जगहों पर भी निर्माण किया गया. आखिर में यूनेस्को ने इस साइट को विश्व धरोहर की सूची से हटा दिया. यूनेस्को ने ऐसा करते हुए कहा कि

“विश्व धरोहर सूची से किसी भी साइट को हटाना विश्व समुदाय के लिए बड़ा नुकसान है. ये उन साझे वैश्विक मूल्यों और प्रतिबद्धता का भी नुकसान है जिसके अंतर्गत हमने विश्व हैरिटेज कन्वेंशन में कसम ली थी. जर्मनी के ड्रेसडेन की एल्बा वैली और ओमान के ओरिक्स सेंचुरी के बाद ये तीसरा मौका है, जब किसी विश्व धरोहर प्रॉपर्टी को लिस्ट से हटाया गया है “

यूके के लिवरपूल में वर्ल्ड हैरिटेज साइट को गगनचुंबी इमारतों से पूरी तरह से ढक दिया गया है. (फोटो-यूनेस्को)

लिवरपूल के इस लिस्ट से बाहर होने के बाद अब यूनाइटेड किंगडम में यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज साइट्स की संख्या 32 से घट कर 31 हो गई है.

किसी हैरिटेज साइट को लिस्ट से बाहर करने का तरीका क्या है?

यूनेस्को जिन साइट्स को हैरिटेज साइट्स के तमगे से नवाजता है, उनसे रख-रखाव की खास स्तर की उम्मीद रखता है. जो भी इस पैमाने पर खरे नहीं उतरते, उन्हें इस लिस्ट से बाहर कर दिया जाता है. कुछ मूल पैमाने हैं, जैसे-
# साइट का सही तरह से रखरखाव न करना.
# आसपास अतिक्रमण करना और साइट की मूल स्थिति को ही नष्ट कर देना.
# साइट को लेकर अथॉरिटी का पूरी तरह से उदासीन होना.
# बार-बार चेताए जाने पर भी साइट को बचाने के लिए प्रयास न करना.
# ऐतिहासिक इमारतों को नए निर्माण से ढक देना.

हालांकि अभी तक सिर्फ तीन साइट्स के साथ ही ऐसा हुआ है. इस प्रक्रिया को पूरा करने का अपना प्रोसेस है.

# सीधे ही किसी साइट को लिस्ट से बाहर नहीं किया जाता है. पहले उसे खतरे में पड़ी विश्व धरोहर की सूची में डाला जाता है. मिसाल के तौर पर लिवरपूल को ही ले लें. इसे साल 2012 में इस सूची में डाला गया. बार-बार सुधार लाने को कहा गया. लेकिन लिवरपूल में गगनचुंबी इमारतों ने वर्ल्ड हैरिटेज साइट को पूरी तरह अपने भीतर ढक लिया. यूनेस्को और लिवरपूल में होने वाले निर्माण कार्य में 9 साल तक खींचतान चली. और आखिर में वर्ल्ड हैरिटेज का तमगा वापस ले लिया गया.

# ओमान की ओरिक्स सेंचुरी पहली ऐसी विश्व धरोहर थी, जिसे लिस्ट से बाहर किया गया था. ये 2007 की बात है. ओरिक्स वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को ये दर्जा साल 1994 में मिला था. जैसे ही ओमान की सरकार को पता चला कि ओरिक्स में तेल उपलब्ध है. पूरी सेंचुरी के एरिया को 90 फीसदी तक घटा दिया गया. सरकार की प्राथमिकता तेल निकालना बन गई, न कि वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को बचाना. हार मानकर यूनेस्को ने इससे वर्ल्ड हैरिटेज का दर्जा वापस ले लिया.

# जर्मनी में ड्रेसडेन की अल्बा वैली को 25 जून 2009 में विश्व धरोहर की सूची से हटा दिया गया. इसका कारण बना एक ब्रिज. इस वैली में लोकल अथॉरिटी ने एक ब्रिज बनाने का फैसला लिया. यूनेस्को ने इसे वर्ल्ड हैरिटेज साइट के लिए खतरा बताया. लोकल अथॉरिटी ने पुल के प्रस्ताव को लोकल लोगों के बीच जनमत संग्रह के लिए रखा. लेकिन अथॉरिटी ने ये बात चतुराई से छुपा ली कि पुल वर्ल्ड हैरिटेज साइट से गुजरेगा. पुल के पक्ष में वोट पड़े और पुल बनाने का काम शुरू हो गया. साल 2004 में जिस साइट को वर्ल्ड हैरिटेज के तौर पर चुना गया था, उससे ये तमगा 5 साल बाद ही वापस ले लिया.

जुलाई 2021 तक दुनिया भर में कुल वर्ल्ड हैरिटेज साइट्स की संख्या 1,120 है. इनमें से 868 कल्चरल, 213 नेचुरल और 39 मिलेजुले गुणों वाली हैं. ये कुल 167 देशों में स्थित हैं. इटली में सबसे ज्यादा 57 वर्ल्ज हैरिटेज साइट्स हैं.

वीडियो – ग्वालियर और ओरछा ने बनाई UNESCO वर्ल्ड हैरिटेज सिटी में जगह लेकिन इसका प्रोसेस क्या है?

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