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ऊना रिपोर्ट: जहां भाजपा के CM कैंडिडेट ही भाजपा अध्यक्ष का कद छांट रहे हैं

शिमला से मामा आए थे. रात में अचानक उठकर बैठ गए. मुझसे बोले, ‘रमेश रानी, बाहर किसी ने गंदगी कर दी है क्या? बहुत बदबू आ रही है.’ मैं बोली, ‘मामा नहीं तो.’ बाहर बरामदे में तो खुद सो रही थी मैं. फिर मामा को समझ आ गया कि ये हवा में आ रही बदबू है. मुझे भी बताना पड़ा कि ये बरसाती नाले की बदबू है. मामा बोले, ‘अब मैं गर्मियों में तो तेरे घर आने से रहा.’

हमारा एक नौकर था. दिमाग थोड़ा कम था उसका. मेहनत-मजूरी करता था. एक दिन शाम को वो चारा काटने गया और फिर लौटकर नहीं आया. पहले हमें लगा कि कहीं निकल गया होगा. फिर पूरा एक दिन बीत गया. पुलिस में भी खबर कर दी. सात रोज बाद इस नाले में ऊपर उसकी फूली हुई लाश नज़र आई. कहने को 10-12 फीट का नाला. वो नौकर तैरना जानता था, आराम से ऊपर आ जाता. मगर इसके नीचे केमिकल के चलते दलदल सा बन गया है. उसमें जो कोई फंसा, तो कैसे लौटे.

मेरी उमर 60 साल हो गई. तीस साल से चिट्ठी-पत्री कर रहा हूं. सब सरकारें आईं-गईं. किसी ने कुछ नहीं किया.

चढ़तगढ़ का नाला. यहां कोई नहीं कहता कि उठाके नाले में फेंक देंगे
चढ़तगढ़ का नाला. यहां कोई नहीं कहता कि उठाके नाले में फेंक देंगे

तीन नागरिक. उनके तीन बयान. अब पढ़िए दो कार्यकर्ताओं के बयान.

सत्ती 15 साल से विधायक हैं, उन्होंने कुछ नहीं किया. कांग्रेस के सतपाल रायजादा पिछली बार हार गए, फिर भी उन्होंने काम करवाया नाले पर.
आपको उन गांव वालों ने गलत बताया. सत्ती पाइप बिछवा रहे थे. ये देखिए सबूत. मगर वीरभद्र की सरकार आई, तो काम रुक गया. रायजादा सत्ती के काम को कैसे अपना बता सकते हैं.

लोगों के पास बताने के लिए बहुत कुछ है
लोगों के पास बताने के लिए बहुत कुछ है

ऊना जिले की ऊना विधानसभा में आपका स्वागत है. क्या खाक स्वागत है. शहर रंग-रोगन में भौंडे दिखते हैं, जब आप मेहतपुर इंडस्ट्रियल एरिया से प्रभावित गांवों की तरफ जाते हैं. ऐसा ही एक गांव चढ़तगढ़, जिसके बयान आपने ऊपर पढ़े. यहां कई फैक्ट्री लगी हैं. सबसे बाहर बिजूका की तरह प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का बोर्ड लगा है. बस, उस बोर्ड के नजर से ओझल होते ही प्रदूषण के बारे में चिंता खत्म हो जाती है. असल में क्या होता है. एक STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) है, जो तब ही चलाया जाता है, जब बोर्ड जांच के लिए आता है. बाकी टाइम फैक्ट्री का केमिकल वेस्ट नाले में बहा दिया जाता है. शाम को बहाया जाना चालू होता है, सुबह तक जारी रहता है. ये गंधैला नाला 10-12 किलोमीटर बहकर स्वान नदी में मिल जाता है. रास्ते में पड़ने वाले कई गांवों का जीवन गंधाता.

ये नदी में मिल जाता है
ये नदी में मिल जाता है

बाकी गांव वैसे ही हैं, जैसे पंजाब के होते हैं. पंजाब के कि हिमाचल के. टाइपो नहीं है. दरअसल ऊना 1966 तक पंजाब के होशियारपुर जिले का हिस्सा था. जब हरियाणा अलग राज्य बना, तो कुछ पहाड़ी इलाकों को भी हिमाचल प्रदेश में मिलाया गया. पहाड़ी के साथ जो एक-दो मैदानी इलाके मिले, ऊना उनमें से एक है. बिल्कुल पंजाब बॉर्डर पर लगा. एक तरफ रोपड़, दूजी तरफ होशियारपुर. यहां के लोग भी खूब होशियार हैं. सबका टैंपो हाई किए हुए हैं. नेताओं को भनक नहीं लगने दे रहे ज्यादा. पर हमने जब 24 घंटे जमीन पर टोह ली, तो ये कुछ बातें सामने आईं.

अपनी गाड़ी छे. हिमाचल नाप रही है.
अपनी गाड़ी छे. हिमाचल नाप रही है.

#1. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और तीन बार से विधायक सतपाल सत्ती की राह आसान नहीं. लोकल लेवल पर संगठन में उनके मुकाबले कोई नहीं. मगर सियासी गप के मुताबिक धूमल सत्ती का कद कम करना चाहते हैं, ताकि आगे चलकर वो उनके बेटे अनुराग ठाकुर के लिए चुनौती न बन सकें. ये बात बीजेपी के भविष्य के संभावित सभी मुख्यमंत्री चेहरों के बारे में घूम-फिरकर सामने आती है. फिर चाहे वो नाहन के राजीव बिंदल हों या मंडी की जयराम. या फिर सत्ती.

ऊना, यहां पंजाब का बहुत असर है
ऊना, यहां पंजाब का बहुत असर है

#2. सत्ती की सभाओं में, खासतौर पर शाम-रात के वक्त गांव के इलाकों में होने वाली सभाओं में लगातार हुड़दंग हो रहा है. लोग पूछ रहे हैं, ‘वीरभद्र छोड़ो, अपना 15 साल का हिसाब दो’. सत्ती समर्थक कह रहे हैं कि ये हल्ला-गुल्ला कांग्रेसी कैंडिडेट सतपाल राजयादा के लोग कर रहे हैं सभा का माहौल बिगाड़ने के लिए.

#3. सतपाल राजयादा पैसे से बहुत तगड़े हैं .प्रॉपर्टी डीलिंग का काम रहा है. इंग्लैंड भी रहे 7-8 साल. पिछला चुनाव साढ़े चार हजार वोट से हारे थे. शहरी इलाकों में जीते थे, गांव में बढ़त गंवा दी. पांच बरस से गांव में सक्रिय हैं. गांव के युवाओं को जिम के लिए खूब पैसा बांटा है.

चुनाव के अलावा भी मनोरंजन है. जारी है.
चुनाव के अलावा भी मनोरंजन है. जारी है.

#4. सत्ती के मुताबिक रायजादा के पास काला धन है. वो बिना हिसाब कितना भी बांट सकते हैं. इसकी जांच होनी चाहिए. अपने संदर्भ में वो बोले कि जितना विधायक-सांसद निधि से पैसा आता है, उसी के हिसाब से दे सकता हूं. सिर्फ जिम नहीं, हैंडपंप से लेकर सीसी रोड तक कई जरूरतें होती हैं.

#5. रायजादा अपनी होर्डिंग में एक बात पर खूब ज़ोर देते हैं. विधायक विनम्र होना चाहिए. दरियाफ्त में पता चला कि सत्ती खरी बात तुरत-फुरत कह देते हैं. कोई इसे कड़वा कहता है, कोई ईमानदार. कोई बद्तमीज, तो कोई मुंहफट. जाकी रही भावना जैसी. उधर रायजादा के इन इल्ज़ामों पर सत्ती कहते हैं कि जो खुद शराब पीकर दिन-रात अपनी तस्वीरें फेसबुक पर फैलाता हो, उससे विनम्रता क्या सीखनी. सत्ती ये भी बोले कि मैं भ्रष्ट लोगों को बर्दाश्त नहीं करता और वही ऐसी बातें फैलाते हैं.

रायजादा और सत्ती के होर्डिंग

#6. स्थानीय पत्रकार और प्रदेश के नेता. दोनों कह रहे हैं कि सत्ती का चुनाव टाइट है. लगातार तीन बार जीतने के बाद एक लोकल एंटी-इनकमबैंसी डिवेलप हो गई है. सत्ती को 5 नवंबर का इंतजार है. जब नरेंद्र मोदी ऊना में रैली करने आएंगे, तो सब ठीक हो जाएगा, ऐसा उनके समर्थकों को भरोसा है.

#7. रायजादा को एक दिक्कत कांग्रेस के उन दावेदारों से आएगी, जो टिकट मांग रहे थे. रायजादा पिछली मर्तबा हार गए थे, तो पांच साल में कई लोगों को अगली बारी मेरी बारी नजर आई. अब वही लोग चौक-चौराहों पर बता रहे हैं कि सतपाल रायजादा को टिकट कैसे मिला. कोई बगल की हरोली सीट से विधायक, वीरभद्र के बेहद करीबी मुकेश अग्निहोत्री के कनेक्शऩ का जिक्र कर रहा है, तो कोई नदौन से लड़े रहे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुखपाल सिंह सुक्खू का. पैसों का भी जिक्र आ रहा है इन सबमें.

#8. रायजादा का इन सब पर यही कहना है कि 15 साल में विधायक जी ने कुछ किया नहीं, तो अब मुझसे हिसाब मांगने पर उतर आए हैं. यूथ पर उनका क्रेज दिख रहा है, मगर इलाकाई बुजुर्ग उनको लेकर अपने हिस्से की शंकाएं लिए हैं.

ऊना की एक सड़क, जिस पर एक तरफ सतपाल सिंह सत्ती की होर्डिंग है और दूसरी तरफ सतपाल सिंह रायजादा की होर्डिंग

कुल मिलाकर ऊना में सतपाल बनाम सतपाल की लड़ाई मजेदार है. और हां, बिलाशक कांटे की है. बाकी शहर अपनी गति से बढ़ रहा है. इंडस्ट्रियल एरिया का नया हिस्सा हरोली की तरफ चला गया है. हरोली से इंडस्ट्री मिनिस्टर मुकेश को वीरभद्र सरकार में डिप्टी सीएम सा रुतबा हासिल था. उन्होंने अपने इलाके के लिए खूब प्रोजेक्ट पाए. फिर भी मुकाबले में घिरे हैं. इतने कि बगल की सीट तक पर प्रचार के लिए नहीं जा पा रहे.

ये भी एक उम्मीदवार हैं
ये भी एक उम्मीदवार हैं

ये तो हुईं ऊना की दो सीटें. बचीं तीन. कुटलैहड़, गगरेट और चिंतपूर्णी. कुटलैहड़ में बीजेपी के वीरेंद्र मजबूत दिख रहे हैं. कांग्रेस ने यहां से पूर्व डिप्टी स्पीकर रामनाथ शर्मा के बेटे विक्कू शर्मा को टिकट दिया है. उनका चुनाव तना नजर नहीं आ रहा. पोल पंडित यहां बीजेपी को क्लियर एज दे रहे हैं. गगरेट में सिटिंग एमएलए कांग्रेस के राकेश कालिया हैं और उन्हें बीजेपी के ठाकुर घेरे हैं. लोग मज़ाक में इसका शोले कनेक्शन बनाए दे रहे हैं. कालिया के लिए गगरेट नई विधानसभा थी पिछले चुनाव में. परिसीमन में गगरेट को सुरक्षित से सामान्य बना दिया गया और चिंतपूर्णी के साथ इसका उलट हुआ. तो वो चिंतपूर्णी छोड़ यहां आ गए. चिंतपूर्णी पर बीजेपी के बलबीर कांग्रेस के सिटिंग विधायक कुलदीप को अच्छे से घेरे हैं.

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इनका कुटलैहड़, गगरेट और चिंतपूर्णी, कहीं से नाता नहीं है. फोटो थी, तो लगा दी.

अपना घेरा-अपना डेरा भी आगे बढ़ता है. देहरा, ज्वालामुखी और नादौन सीट का हाल जानने. पहले पर कांग्रेस की बुजुर्ग नेता विप्लव ठाकुर हैं. दूसरी पर 1998 के चर्चित निर्दलीय और फिर भाजपाई हुए रमेश धवाला. तीसरे पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुक्खू, जिनसे वीरभद्र कट्टी कर चुके हैं.

जय जनादेश


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