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कोविड मरीजों की मदद करते NRI और बेघरों को खाना खिलाते पुलिसवाले समेत 6 उम्मीद वाली कहानियां

घरों पर, दरवाज़ों पर

कोई दस्तक नहीं देता

पड़ोस में कोई किसी को नहीं पुकारता

अथाह मौन में सिर्फ़ हवा की तरह अदृश्य

हल्के से धकियाता है हर दरवाज़े, हर खिड़की को

मंगल आघात पृथ्वी का

इस समय यकायक बहुत सारी जगह है

खुली और ख़ाली

पर जगह नहीं है संग-साथ की, मेल-जोल की,

बहस और शोर की, पर फिर भी

जगह है: शब्द की, कविता की, मंगलवाचन की.

हम इन्हीं शब्दों में, कविता के सूने गलियारे से

पुकार रहे हैं, गा रहे हैं,

सिसक रहे हैं

पृथ्वी का मंगल हो, पृथ्वी पर मंगल हो.

“पृथ्वी का मंगल हो, पृथ्वी पर मंगल हो”, कवि अशोक वाजपेयी के इसी उद्घोष, इसी कामना, इसी प्रार्थना और इसी आशीर्वचन के साथ इस आलेख की शुरुआत करते हैं.

उम्मीद की बात-1

पहली उम्मीद की बात लखनऊ से. यहां के KGMC हॉस्पिटल के डाक्टर्स, ‘धन्वंतरी सेवा संस्थान’ के साथ मिलकर कोविड पेंशेट्स को फ्री दवाइयां और कंसलटेशन दे रहे हैं. इस मुहीम के तहत शहरों से लेकर गांव-गांव तक मुफ़्त में दवाएं बांटी जा रही हैं. जिसके लिए रोज़ दवाइयों के पैकेट तैयार किये जाते हैं और लोगों तक डिस्पेच किए जाते हैं. दूसरी तरफ़ फोन पर फ्री कंसलटेशन भी दिया जा रहा है. फ्री कंसलटेशन वाली सुविधा सुबह 8 बजे से लेकर रात 8 बजे तक रहती है. ये कंसलटेशन जिस कॉल सेंटर के माध्यम से दिया जा रहा है, उसमें आयुर्वेदाचार्यों की टीम भी शामिल है. साथ ही KGMC में जो मरीज़ कोरोना संक्रमण से लड़ रहे हैं, उनके तीमारदारों के लिए सुबह-शाम भोजन की व्यवस्था भी की जा रही है.

Dhanvantari
धन्वंतरी सेवा संस्थान तीमारदारों के लिए भोजन का भी इंतजाम करता है. (फोटो: इंडिया टुडे)

‘धन्वंतरी सेवा संस्थान’ के माध्यम से चलाई जा रही ये सेवाएं KGMC के मेडिसिन और रेस्पेटरी विभाग के हेड आफ डिपार्टमेंट के नेतृत्व में शुरू की गई हैं.

‘धन्वंतरी सेवा संस्थान’, व्हीलचेयर्स और रैनबसेरा की उपलब्धता के क्षेत्र में पिछले कई सालों से कार्य कर रहा है. इस संस्था के अध्यक्ष KGMC के मेडिसिन डिपार्टमेंट के डीन, ‘सूर्यकांत त्रिपाठी’ हैं.

मेडिसिन डिपार्टमेंट के डीन के नाम से निराला की कविता कुछ पंक्तियाँ याद हो आती हैं-

जैसे हम हैं, वैसे ही रहें,

लिए हाथ एक दूसरे का

अतिशय सुख के सागर में बहें

उम्मीद की बात- 2

अगली उम्मीद की बात तेलंगाना के महबूबनगर से. यहां के एक पुलिसकर्मी, बेघरों के लिए तारणहार बने हुए हैं. पुलिस उपनिरीक्षक सोम नारायण सिंह रात के समय बेघरों को खाना खिलाते हुए पाए जाते हैं. सोम नारायण सिंह अपने पुलिस वाहन में खाने के पार्सल भरकर ले जाते हैं और उन्हें सड़क किनारे या फुटपाथ पर सोते हुए लोगों को उपलब्ध कराते हैं. कोविड के चलते सोम नारायण ने अपनी पत्नी को खो दिया था. तबसे ही वे भूखे और बेसहारा लोगों की मदद करना चाहते थे.

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पुलिस उपनिरीक्षक सोम नारायण सिंह बेघरों को खाना खिलाए पाए जाते हैं. (फोटो: इंडिया टुडे)

उम्मीद की बात- 3

तीसरी उम्मीद की बात हैदराबाद से. यहां 30 वर्षीय NRI तरुण कप्पला हाल ही में US से लौटे हैं. तरुण अपनी मेकशिफ़्ट (यानी अस्थायी) एम्बुलेंस के माध्यम से कोविड -19 रोगियों को कम्यूट करवाने का कार्य कर रहे हैं. पिछले एक हफ्ते में तरुण ने 15 मरीजों को हॉस्पिटल पहुंचाया है और इस दौरान वो 200 से ज्यादा मरीजों को खाना भी खिला चुके हैं.

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कोविड मरीजों की सहायता करने के लिए तरुण अमेरिका से वापस आए हैं. (फोटो: इंडिया टुडे)

तरुण अमेरिका पढ़ाई करने गए थे और बाद में वहीं की एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करने लगे. हाल ही में जब उनकी मां की ब्रेन स्ट्रोक के चलते हालत बिगड़ी, तो वे नौकरी छोड़कर भारत आ गए. एंबुलेंस के लिए फंड जुटाने के वास्ते तरुण के एक अमेरिकी दोस्त डाल्टन दिवाकरन ने मदद की. तरुण एम्बुलेंस ख़ुद चलाते हैं. उनका दिन सुबह जल्दी शुरू हो जाता है, ख़त्म कब होता है, ये आपात स्थितियों और उनको आने वाली SOS कॉल्स पर निर्भर करता है.

उम्मीद की बात- 4

अगली उम्मीद की बात ‘मिशन रक्तदान’ के बारे में. आपको भुवनेश्वर शहर की इस मुहिम के बारे में इसके नाम से ही काफ़ी कुछ पता चल गया होगा. दरअसल COVID की दूसरी वेव के दौरान ब्लड की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कमिश्नरेट पुलिस और शहर के गैर सरकारी संगठन मिलकर इस अभियान का आयोजन कर रहे हैं. अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि COVID के दौरान ब्लड के लिए SOS कॉल बढ़ गई हैं, लेकिन उस अनुपात में डोनर नहीं मिल रहे हैं. इसी के चलते इस विशेष अभियान के अंतर्गत वर्ष भर में 100 रक्त-दान शिविर आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है. इन शिविरों का उद्देश्य उन रोगियों के लिए पर्याप्त रक्त एकत्र करना है, जो थैलेसीमिया, कैंसर जैसे रोगों से पीड़ित हैं, और जिन्हें नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है.

ओडिशा में पुलिस और कुछ संगठन मिशन रक्तदान चला रहे हैं. कोविड मरीजों की सहायता करने के लिए तरुण अमेरिका से वापस आए हैं. (फोटो: इंडिया टुडे)
ओडिशा में पुलिस और कुछ संगठन मिशन रक्तदान चला रहे हैं. कोविड मरीजों की सहायता करने के लिए तरुण अमेरिका से वापस आए हैं. (फोटो: इंडिया टुडे)

उम्मीद की बात- 5

उम्मीद के बात के पिछले एपिसोड्स में हम आपको देहरादून से लेकर लखनऊ, और भोपाल से लेकर चेन्नई तक से ऑटो एंबुलेंसेज़ की स्टोरी बता चुके हैं. अब इन शहरों में नाम जुड़ा है गौतमबुद्ध नगर का. और पांचवी स्टोरी इसी बारे में है. गौतमबुद्ध नगर में ये ‘ऑटो एंबुलेंस’ इनिशिएटिव लिया है यातयात पुलिस ने. इन्होंने ऑटो एम्बुलेंस के साथ-साथ ऑटो ऑक्सीजन वाहन की भी शुरुआत की है.

Auto Ambulance
कई बड़े शहरों के बाद अब गौतम बुद्ध नगर में ऑटो एंबुलेंस की शुरुआत हुई है. (फोटो: इंडिया टुडे)

गौतमबुद्ध नगर के इन ऑटो एम्बुलेंसेज़ में ऑक्सीजन सिलेंडर तो होंगे ही साथ ही इनके चालकों को फॉर्टिस अस्पताल से कोऑर्डिनट करके प्रशिक्षित भी किया गया है. ताकि किसी इमरजेंसी के वक्त वे भी मरीज़ों की हेल्प कर सकें. इस मुहिम के तहत कुल 20 ऑटोज़ को एम्बुलेंसेज़ और ऑक्सीजन वाहनों में तब्दील किया है. ट्रैफ़िक पुलिस के डीसीपी गणेश साहा ने अभी 5 ऑटो एम्बुलेंस को लॉन्च किया है. आगे इनकी संख्या बढ़ाने का विचार है.

उम्मीद की बात- 6

आख़िरी उम्मीद की बात बनारस से. यहां जब रात के वक्त सड़कें और गलियां सुनसान हो जाती हैं और इक्का-दुक्का लोग सड़कों पर दिखाई पड़ते हैं, तब सन्नाटे को चीरती हुई कुछ गीतों की धुनें, एक अलग ही समां बनाती हैं. गीत, जिनके बोल सुनने वालों को कोरोना के प्रति जागरूक करते हैं. और ये गीत सुनाई देते हैं रेलवे पुलिस फोर्स की पेट्रोलिंग करती गाड़ियों में लगे साउंड सिस्टम से. RPF की जीप से एक से बढ़कर एक कोरोना जागरूकता के गीतों से पूरा लोकोमोटिव वर्कशॉप परिसर संगीत के सुरों से गूंज उठता है.

Rpf
वाराणसी में RPF की तरफ से जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है. (फोटो: इंडिया टुडे)

इन गीतों के साथ में RPF आते-जाते लोगों को अपील भी करती चलती है कि बहुत ज़रूरी हो, तो ही घर से बाहर निकलें और मास्क जरूर पहनें. RPF के मुताबिक उनका यह तरीका लोगों को पसंद आ रहा है. लेकिन इससे भी जो लोग नहीं जागरूक हो रहे, ऐसे कुछ लोगों का RPF द्वारा सिविल पुलिस के साथ मिलकर चालान भी करवाया जाता है.

उम्मीद का संदेश

उम्मीद के संदेश में आज सुनते हैं देवांश सिंह को. देवांश की संस्था ‘इंदौर हेल्प्स’, कुछ कलाकारों ने मिलकर बनाई है. इस संस्था के स्पीकर, देवांश सिंह सहित इसके बाकी सदस्य किस तरह से इंदौर के लिए उम्मीद की बात बन रहे हैं, आइए जानते हैं. दरअसल, इन कलाकारों ने इंस्टाग्राम पर एक पेज बनाया है. बनाया क्या है. अपने ही एक पुराने पेज का नाम बदलकर इंदौर हेल्प्स रख दिया. देवांश बताते हैं कि इस पेज के जरिए जरूरतमंद लोगों को समर्थ्य लोगों से जोड़ा जाता है. मतलब जिन्हें प्लाज्मा, ऑक्सीजन, खाना, दवाइयों इत्यादि की जरूरत होती है, उन्हें उन लोगों तक पहुंचाया जाता है जिनके पास ये सब उपलब्ध होता है.

अंत

रोज़-ए-अव्वल से लल्लनटॉप के दोस्त रहे हिमांशु बाजपेई लिखते हैं-

सबके दिल से ये घटा ग़म की छंटेगी अब तो

हर तरफ़ बिखरी परेशानी हटेगी अब तो

अब शिफ़ा होगी तड़पते हुए बीमारों को

चैन मिल जाएगा रहमत के तलबगारों को

जगमगा उट्ठेगी यारों की वो महफ़िल फिर से

राग छेड़ेगा हर एक सहमा हुआ दिल फिर से

इसी उम्मीद के साथ कि तड़पते हुए बीमारों को फ़ौरन से पेशतर शिफ़ा होगी, हम इस आलेख को यहीं समाप्त करते हैं.

वीडियो- उम्मीद की बात: मां बीमार हुई तो US से नौकरी छोड़ दी और भारत आकर गजब का काम कर दिया

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