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दुबई की राजकुमारी के कैद में रहने की पूरी कहानी

अ गोल्डन केज़ इज़ स्टिल अ केज़. पिंजड़ा सोने का हो, तो भी पिंजड़ा ही होता है.

ये कहानी भी एक सोने के पिंजड़े की है. जिसके भीतर क़ैद है एक राजकुमारी. खिड़कियों पर लोहे की मोटी सलाखें. धूप का कतरा भी उसतक नहीं पहुंचता. चौबीस घंटे निगरानी. पहरेदारों की घूरती निगाहें. बस एक बाथरूम था, जिसके भीतर चौकीदारी नहीं थी. इस आयरन कर्टन सिक्यॉरिटी में भी राजकुमारी को मिला एक हमदर्द. उसने चुपके से एक फ़ोन थमाया. इसके सहारे राजकुमारी ने पैगाम पहुंचाया. बाथरूम में ख़ुद को बंद करके अपनी दोस्त को फ़ोन मिलाया. फुसफुसाती आवाज़ में बोली,

मैं एक विला में क़ैद हूं. यहां खिड़कियां तक नहीं खुलतीं. चौबीस घंटे मुझपर नज़र रखी जाती है. न जाने कब से ताज़ी हवा तक नहीं मिली मुझे. मैं बाथरूम से कॉल कर रही हूं तुम्हें. क्योंकि ये इकलौता कमरा है, जिसका दरवाज़ा बंद करने की इजाज़त है मुझे. मैं बंधक हूं. ग़ुलाम बना दी गई हूं. मेरी ज़िंदगी मेरे हाथों में नहीं.

ये किस राजकुमारी की कहानी है? कहां क़ैद है वो? किसने उसे हॉस्टेज़ बना रखा है? और इस मामले से भारत का क्या कनेक्शन है? विस्तार से बताते हैं आपको.

शुरुआत किडनैपिंग की क़हानी से

साल 2001. मार्च का महीना. ब्रिटेन में कैम्ब्रिज़शर नाम की एक जगह है. एक रोज़ यहां पुलिस स्टेशन में एक फ़ोन आया. कॉलर ने पुलिस को करीब नौ महीने पहले की एक शाम का वाकया बताया. वाकया यूं था कि अगस्त 2000 की एक शाम 19 बरस की एक लड़की अपने दो दोस्तों के साथ एक बार गई. देर रात तीनों बार से निकले. सड़क पर टहलते हुए वो चले जा रहे थे कि एकाएक एक कार उनके बराबर में आकर रुकी. कार के भीतर थे चार आदमी. उन्होंने लड़की को जबरन कार में बिठाया. फिर वो चारों लड़की को एक पॉश इलाके की इमारत में ले गए. रातभर उसे यहीं रखा. अगले रोज़ एक प्राइवेट जेट में बिठाकर लड़की को ब्रिटेन के बाहर ले जाया गया.

इस लड़की का नाम था, शेख़ शम्सा. कौन थी शम्सा? किसने उसे अगवा करवाया था? शम्सा के मुताबिक, उसके किडनैपर का नाम था-शेख़ मुहम्मद अल-मख़्तूम. कौन है ये शख़्स?

Prince Shamsa
प्रिंसेज़ शम्सा.

अरबी भाषा का एक शब्द है- अमीरात. मतलब, एक राजनैतिक भूभाग. जहां सत्ता माने राजशाही. अमीरात का राजा कहलाता है अमीर. ऐसी ही एक यूनिट है, संयुक्त अरब अमीरात. शॉर्ट में UAE. ये एक अकेला देश नहीं, सात अमीरातों का एक ग्रुप है. इन सातों अमीरातों के नाम हैं- अबू धाबी, शारजाह, अजमान, अम उल-क़विन, रास अल-ख़ाइमा, फुजाइरा और दुबई.

UAE में राजधानी अबू धाबी के बाद सबसे रईस दुबई ही है. इस रियासत के राजा हैं- शेख़ मुहम्मद अल-मख़्तूम. उम्र, 70 साल. छह शादियों से कुल 25 बच्चे. इन्हीं 25 औलादों में से एक थी- प्रिंसेज़ शम्सा. जिसे अगस्त 2000 में ख़ुद उसके वालिद ने ब्रिटेन से किडनैप कराया था.

ये आख़िरी बार नहीं था, जब शेख़ ने अपनी किसी बेटी को किडनैप कराया हो. अभी ऐसी कई कहानियां बाकी हैं. इन्हीं कहानियों का सिरा हमें ले जाता है शम्सा की छोटी बहन, राजकुमारी लतीफ़ा पर.

Mohammed Bin Rashid Al Maktoum
शेख़ मुहम्मद अल-मख़्तूम. (तस्वीर: एएफपी)

पहला एपिसोड

जून 2002. 16 साल की लतीफ़ा एक रोज़ महल से भाग जाती है. वो UAE और ओमान की सरहद पर पहुंच चुकी है. इरादा है, ओमान पार करके अरब सागर में पहुंचना. फिर किसी छोटी डोंगी में छुपकर दूर निकल जाना. मगर उसके वालिद शेख़ अल-मख़्तूम को लतीफ़ा के भागने की ख़बर लग चुकी है. सारे बॉर्डर्स पर लतीफ़ा को ट्रैक किया जा रहा है. वो पकड़ी जाती है. दुबई वापस लाकर उसे जेल भेज दिया जाता है. तकरीबन साढ़े तीन साल वो सॉलेटरी कन्फ़ाइनमेंट, यानी निरी अकेली क़ैद रखी जाती है. ख़ूब टॉर्चर होती है. फिर जब ये तस्दीक हो जाती है कि उसने सबक सीख लिया, तो उसे जेल से रिहा कर दिया जाता है.

रिहाई मिलती है, आज़ादी नहीं. लतीफ़ा जेल की जगह अब 40 कमरों के एक आलीशान महल में क़ैद कर दी जाती हैं. 100 नौकरों और पहरेदारों की निगरानी में. पैसा ख़ूब मिलता है, मगर ख़र्च करने की आज़ादी नहीं. किसी दोस्त से मिलने की परमिशन नहीं. अपनी मर्ज़ी से कहीं जाने की छूट नहीं. यहां तक कि डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए पढ़ाई तक की इजाज़त नहीं.

और इसी दौर में लतीफ़ा की मुलाकात होती है, टाइना योहिआइनियन से. फ़िनलैंड की रहने वाली टाइना फिटनस इन्स्ट्रक्टर हैं. वो लोगों को ‘कापोएरा’ भी सिखाती हैं. ‘कापोएरा’ ब्राज़ील का एक पुराना मार्शल आर्ट फॉर्म है. लतीफ़ा को कापोएरा सीखना था. उन्हें ये ट्रेनिंग देने के लिए टाइना को हायर किया गया. लतीफ़ा को केवल फ़िटनस इन्सट्रक्टर नहीं मिली, एक राज़दार मिल गई. वो जो किसी से नहीं कह पातीं, टाइना को बतातीं. लतीफ़ा ने टाइना से कहा, यहां मेरा दम घुटता है. मुझे हर हाल में यहां से भागना है. नॉर्मल ज़िंदगी जीनी है.

Tiina With Latifa
फिटनस इन्स्ट्रक्टर टाइना योहिआइनियन के साथ लतीफ़ा. (तस्वीर: ट्विटर)

मगर बड़ा सवाल यही था. इतने सुरक्षा बंदोबस्त को तोड़कर भागें कैसे? इसी उहापोह में लतीफ़ा को एक नाम सूझा- हर्व ज़ुबैर. इस आदमी की कहानी बड़ी दिलचस्प है. हर्व एक जमाने में फ्रेंच सीक्रेट सर्विस के जासूस थे. नौकरी छोड़ने के बाद अमेरिका चले गए. वहां अपनी एक शिपिंग कंपनी बनाई. कुछ सालों बाद एक शेख़ के न्योते पर हर्व कारोबार करने दुबई आ गए. यहां वो पर्यटकों के लिए छोटी पनडुब्बियां और नाव बनाने लगे.

कुछ ही बरस बीते थे कि हर्व के साथ एक कांड हो गया

अथॉरिटीज़ ने उनपर गबन का इल्ज़ाम लगा दिया. उन्हें पांच साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई. अब हर्व ने बनाया एक प्लान. कहा, थोड़ी मोहलत दो, सारे पैसे चुका दूंगा. ये मोहलत मांगते समय हर्व के दिमाग़ में एक प्लानिंग थी. वो चुपचाप दुबई से भाग जाने की युक्ति बना रहे थे. इसमें काम आई उनकी जासूसों वाली ट्रेनिंग. मई 2008 में एक रोज़ बुर्का पहनकर उन्होंने पुलिस को चकमा दिया. समंदरव की पट्रोलिंग करने वाली पुलिस टीम की नाव ख़राब की. और, ख़ुद एक छोटी सी डोंगी में बैठकर दुबई से भाग आए. हर्व के दुबई से भागने की कहानी विस्तार में जाननी हो, तो आप उनकी लिखी क़िताब ‘एस्केप फ्रॉम दुबई’ पढ़ सकते हैं.

Herve Jaubert
हर्व ज़ुबैर छोटी सी डोंगी में बैठकर दुबई से भाग आए थे. (तस्वीर: एएफपी)

दुबई से यूं भाग जाना मामूली बात नहीं थी. इसीलिए लतीफ़ा ने जब दोबारा भागने की सोची, तो उन्हें हर्व का ख़याल आया. लतीफ़ा ने पहली बार हर्व से संपर्क किया साल 2011 में. उन्होंने ईमेल भेजकर हर्व से मदद मांगी. कहा, यहां से निकलने में आप ही मेरी मदद कर सकते हैं. शुरुआत में हर्व को लतीफ़ा पर यकीन नहीं हुआ. सोचा, कहीं ये मुझे धोखे से दुबई बुलाने की साज़िश तो नहीं. मगर धीरे-धीरे लतीफ़ा ने हर्व का भरोसा जीत लिया. वो लतीफ़ा की मदद के लिए तैयार हो गए.

लेकिन ये होता कैसे?

हर्व जानते थे कि रातोरात दुबई से भागना मुमकिन नहीं. इसके लिए बहुत तैयारी करनी होगी. हर्व ने टाइना के मार्फ़त लतीफ़ा के पास अनरजिस्टर्ड सिम कार्ड पहुंचवाए. ताकि लतीफ़ा और उनकी बातचीत की शेख़ अल-मख़्तूम को भनक न लगे. उन्होंने टाइना की मदद से लतीफ़ा को स्कूबा डाइविंग में ट्रेन करवाया. फिर दुबई के बाहर लतीफ़ा के सीक्रेट ट्रांसफ़र की तैयारियों में जुट गए. इसके ख़र्चों के लिए लतीफ़ा ने हर्व को करीब तीन करोड़ रुपये भिजवाए. हर्व ने ओमान में एक आउडी कार ख़रीदी. उसे मोडिफाई करके कार में एक सीक्रेट कंपार्टमेंट बनवाया. ताकि लतीफ़ा और टाइना जब दुबई क्रॉस करके ओमान आएं, तो वहां से समंदर तक पहुंचने के दरमियान पकड़ी न जाएं.

महीनों की तैयारी के बाद प्लानिंग पर अमल की तारीख़ मुकर्रर हुई- 24 फरवरी, 2018. इस रोज़ हर्व भी अपनी नाव लेकर ओमान के समुद्र तट पहुंच चुके थे. उधर दुबई में लतीफ़ा और टाइना कैफ़े जाने के बहाने महल से निकलीं. दोनों को रात 10 बजे तक लौट आने की ताकीद मिली थी. लतीफ़ा के ड्राइवर ने उन्हें क़ैफे के बाहर ड्रॉप किया और पार्किंग में गाड़ी लगाकर इंतज़ार करने लगा. दोनों लड़कियां कैफ़े के अंदर गईं. कपड़े बदले. अपना फ़ोन फेंका. और पिछले दरवाज़े से निकलकर बाहर आईं. यहां एक कार पहले से ही उनका इंतज़ार कर रही थी. इसमें बैठकर दोनों दुबई की सीमा पार करके ओमान पहुंच गईं. यहां सीक्रेट कंपार्टमेंट वाली आउडी में बैठकर वो समुद्र तट पहुंची. यहां एक छोटी डोंगी में बैठकर दोनों इंटरनैशनल वॉटर्स की तरफ बढ़ीं. वहां, जहां हर्व अपनी नाव लिए उनका इंतज़ार कर रहे थे.

तीनों को लगा, अब तो हम अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में हैं. दुबई की पहुंच से दूर हैं. मिशन पूरा हुआ. लतीफ़ा बहुत ख़ुश थीं. उन्होंने नाव में लगे सैटेलाइट सिस्टम से अपनी मां और बहनों को संदेशा भेजा. कहा, अलविदा.

मगर क्या एक क्रूर पिता से बच पाना लतीफ़ा के लिए इतना आसान था?

हर्व, लतीफ़ा और टाइना, तीनों को अभी करीब एक हफ़्ते तक समंदर में रहना था. अरब सागर पार करते हुए उनकी पहली मंज़िल थी- भारत. और फिर यहां से अमेरिका. ये कमोबेश वही रूट था, जिस रास्ते मई 2008 में हर्व दुबई से भागे थे. दोबारा वही रूट पकड़ना उन तीनों के लिए बड़ी ग़लती साबित होने वाली थी.

ये बात है 4 मार्च, 2018 की. लतीफ़ा के दुबई से भागे आठवां दिन था. उनकी नाव भारत के पश्चिमी तट के पास इंटरनैशनल वॉटर्स में थी. यहां से आगे बढ़ते, तो कुछ घंटों में गोआ पहुंच जाते. मगर ऐसा हुआ नहीं. इन तीनों ने देखा, थोड़ी दूरी से तीन सफ़ेद जहाज़ उनकी तरफ़ बढ़ रहे हैं. ये तीनों भारतीय कोस्टगार्ड के जहाज़ थे. एक चौथा जहाज़ भी था, जिसपर UAE का झंडा लगा था. इन चार जहाज़ों के अलावा आसमान में दो हेलिकॉप्टर्स भी नज़र आ रहे थे.

लतीफ़ा नज़र में आ चुकी थीं. उन्होंने फ़ौरन राधा स्टिर्लिंग नाम की एक वकील को मेसेज किया. लिखा- प्लीज़ हेल्प, प्लीज़ प्लीज़, देअर आर मैन आउटसाइड. माने, मेरी मदद करो, बाहर कुछ लोग आ गए हैं.

Radha Stirling
राधा स्टिर्लिंग.

लतीफ़ा क्या मदद मांग रही थीं राधा से?

दरअसल राधा के पास लतीफ़ा का एक विडियो था. लतीफ़ा ने ये विडियो अडवांस में ही राधा को भेज दिया था. इस ताकीद के साथ दिया था कि अगर उन्हें कुछ हो जाए, तो राधा विडियो पब्लिक कर दें. लतीफ़ा ने कहा, हम घिर गए हैं. तुम विडियो रिलीज़ कर देना. 4 मार्च, 2018 की उस रात तकरीबन 11 बजे थे. जब लतीफ़ा का मेसेज मिलने के बाद राधा ने वो विडियो इंटरनेट पर अपलोड कर दिया. इसमें लतीफ़ा कह रही थीं-

अगर आप ये विडियो देख रहे हैं, तो इसका मतलब या तो मैं मर चुकी हूं या बहुत बहुत बहुत बुरी हालत में हूं.

उस रात क्या हुआ लतीफ़ा के साथ?

ये कहानी दुनिया को सुनाई हर्व और टाइना ने. उनके मुताबिक, इंडियन कोस्टगार्ड के कमांडो उनकी नाव पर चढ़ गए. उन्होंने लतीफ़ा को पकड़ा. वो रोती, गिड़गिड़ाती रहीं. कहती रहीं कि प्लीज़, तुम चाहे मुझे गोली मार दो, मगर दुबई वापस मत ले जाओ.

लतीफ़ा ने ये भी कहा कि वो इंटरनैशनल वॉटर्स में हैं. भारत से शरण मांगना चाहती हैं. उन्हें जबरन वापस भेजना ग़ैरक़ानूनी है. मगर इसके बावजूद इंडियन कोस्टगार्ड्स ने उन्हें UAE सिक्यॉरिटी फोर्सेज़ के हवाले कर दिया. वो पहले हेलिकॉप्टर, फिर प्राइवेट जेट में बिठाकर लतीफ़ा को दुबई ले गए. उधर UAE अथॉरिटीज़ ने हर्व और टाइना से साथ भी ख़ूब मारपीट की. करीब दो हफ़्ते तक अरेस्ट रहने के बाद उन्हें रिहाई मिली.

उस रात के बाद करीब एक साल तक लतीफ़ा की ख़बर नहीं आई

फिर आया 2019. टाइना अपने परिवार से मिलने फिनलैंड गई हुई थीं. यहां एक रोज़ मार्केट में एक अजनबी उनके पास आया. उसने टाइना से एक सवाल पूछा. कहा, लतीफ़ा को ‘कापोएरा’ सिखाते हुए तुमने उनका क्या निकनेम रखा था? टाइना का जवाब सुनकर उस अजनबी ने उन्हें एक फ़ोन थमाया. उस फ़ोन पर घंटी बजी. उठाया, तो आवाज़ आई- हैलो, मैं लतीफ़ा.

आपको शुरुआत याद है? जब एक क़ैद राजकुमारी बाथरूम में छुपकर अपनी सहेली को फ़ोन करती थी. वो लतीफ़ा ही थीं. वो विडियो कॉल पर टाइना को अपनी दुर्दशा बताती थीं. टाइना इन विडियोज़ को रिकॉर्ड कर लेती थीं. ये सोचकर कि शायद कभी ज़रूरत पड़े.

बीते रोज़, यानी 16 फरवरी को टाइना के रिकॉर्ड किए गए वही विडियोज़ पब्लिक हो गए हैं. टाइना ने ख़ुद ये विडियो BBC को दिए. उनका कहना था कि महीनों से उनका लतीफ़ा से संपर्क नहीं हो पा रहा. उन्हें आशंका है कि शायद लतीफ़ा का फ़ोन पकड़ा गया. वो किस हाल में हैं, कोई नहीं जानता. इसीलिए वो लतीफ़ा के विडियोज़ दुनिया को दिखानी चाहती हैं. ताकि UN समेत बाकी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं कुछ तो सुध लें लतीफ़ा की.

Latifa Bin Mohammed Al Maktoum
16 फरवरी को टाइना के रिकॉर्ड किए गए वही विडियोज़ पब्लिक हो गए हैं.

टाइना ने BBC को जो विडियोज़ दिए, उनमें लतीफ़ा ख़ुद अपनी आपबीती सुना रही हैं. विडियो के कुछ मुख्य अंशों का अनुवाद हम आपको यहां बता देते हैं-

1. मैं हर रोज़ अपनी ज़िंदगी के लिए डरती हूं. मुझे नहीं पता कि मैं बच पाऊंगी कि नहीं. पुलिस मुझे धमकाती है. कहती है, मुझे जीवनभर जेल में रखा जाएगा. मैं सूरज की रोशनी तक नहीं देख सकूंगी.

2. मेरे लिए ये सीधी सी बात है. या तो मैं आज़ाद हूं या नहीं हूं. दुनिया को जानना चाहिए कि मुझे किस तरह क़ैद रखा गया है.

इन विडियोज़ में लतीफ़ा ने 4 मार्च, 2018 की भी कहानी सुनाई. उन्होंने कहा-

मैं लड़ रही थी उनसे. उन्होंने मुझे जकड़ा हुआ था. फिर एक आदमी मेरे पास आया. उसने अपने पास से एक सिरिंज निकाली और मेरी बांह में इंजेक्शन लगा दिया. मुझे भारत के एक मिलिटरी जहाज़ पर ले जाया गया. मैं कहती रही कि मुझे दुबई नहीं जाना, मुझे शरण चाहिए. मगर उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी. मुझे UAE कमांडोज़ के सुपुर्द कर दिया गया. उन्होंने मुझे बहुत पीटा. मैंने एक कमांडो की बांह में ख़ूब ज़ोर से दांत काटी. फिर उन्होंने मुझे ट्रैन्क्वेलाइज़र लगाया और दुबई वापस ले गए. तब से मुझे अकेले क़ैद में रखा गया है. आज़ाद होने की मेरी सारी उम्मीदें टूट गई हैं. मैंने कोई अपराध किया है, तो केस चलाओ मुझपर. ट्रायल दो मुझे.

लतीफ़ा के प्रसंग में अपनी भूमिका पर भारत ने कभी कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया. मामला उछला, तो UAE की सफ़ाई आई. कहा, लतीफ़ा को किडनैप नहीं, रेस्क्यू किया गया था. इसपर UN ने कहा कि हमें लतीफ़ा के ज़िंदा होने का सबूत दो.

ये सबूत देने के लिए शेख़ अल-मख़्तूम ने एक और साज़िश रची

इसमें मददगार बनीं, शेख की छठी बीवी हया. वही हया, जो कुछ महीने बाद ख़ुद दुबई से भाग गईं. ब्रिटेन में अपने पति पर मुक़दमा किया. कहा कि शेख़ उन्हें मरवाना चाहते हैं.

Haya Bint Hussein
शेख़ मुहम्मद अल-मख़्तूम की पत्नी हया. (तस्वीर: एएफपी)

मगर लतीफ़ा वाले प्रसंग के समय हया अपने पति की टीम में थीं. ये बात है, दिसंबर 2018 की. एक रोज़ हया लतीफ़ा से मिलने आईं. कहा, तुमको परीक्षा देनी होगी. मैं तुम्हें किसी से मिलवाऊंगी. अगर तुमने वहां ठीक बर्ताव किया, तो तुम्हें रिहा कर दिया जाएगा.

इस वादे के साथ हया, लतीफ़ा को मिलवाने ले गईं मैरी रॉबिनसन से. मैरी आयरलैंड की पूर्व राष्ट्रपति हैं. UN की हाई कमिश्नर रह चुकी हैं. ख़ास इस मुलाकात के लिए मैरी 15 दिसंबर, 2018 को दुबई पहुंची. हया, लतीफ़ा को उनसे मिलवाने लाईं. इस मीटिंग में मैरी ने क़िताब, पर्यावरण, अलाना फ़लाना तमाम मुद्दों पर बात की. लतीफ़ा के साथ तस्वीरें खिंचवाईं. मगर एक बार भी लतीफ़ा का हालचाल नहीं पूछा.

मीटिंग के नौ रोज़ बाद लतीफ़ा और मैरी की तस्वीरें पब्लिक हो गईं. इन्हें जारी किया था UAE. दुनिया को ये दिखाने के लिए कि लतीफ़ा बिल्कुल ठीक हैं. इस प्रोपैगैंडा के पीछे की असली साज़िश जानते हैं? हया ने मैरी से कहा था कि लतीफ़ा को एक मानसिक बीमारी है. बायपोलर डिसॉर्डर है उन्हें. मैरी ने भी तोते की तरह दुनिया के आगे ये दोहरा दिया. कहा, उसकी दिमाग़ी हालत ठीक नहीं. परिवार बड़े प्यार से उसका ख़याल रख रहा है.

Latifa With Mary Robinson
आयरलैंड की पूर्व राष्ट्रपति के साथ मैरी रॉबिनसन लतीफ़ा. (तस्वीर: एएफपी)

मैरी को अब अपने कहे पर अफ़सोस है. वो कहती हैं कि वो अनजाने ही प्रोपैगैंडा का शिकार बन गईं.

क्या है इस कहानी का निचोड़?

निचोड़ है, पावर का बेज़ा फ़ायदा. शेख़ अल-मख़्तूम ने अपनी बेटियों के साथ जो किया, जो कर रहे हैं, वो सरासर अपराध है. कोई आम इंसान ये करता, तो जेल में होता. लेकिन शेख़ मख़्तूम ख़ुद शासक हैं. ताक़तवर हैं. इसलिए उन्हें किसी का डर नहीं. उनके लिए कोई सज़ा नहीं. दुनिया चुपचाप देख रही है. लतीफ़ा की दुर्दशा, मदद की उनकी अपील, बस मानवाधिकार संगठनों और इंटरनैशनल मीडिया की रपटों में जगह पा रही हैं. शायद वो कहावत ही ग़लत है. ग्रेट पावर अपने साथ कोई जिम्मेदारी नहीं लाती. ये आपके अपराध ढकने का ज़रिया बन जाती है.


विडियो- चीन WHO को कोरोना वायरस को लेकर जांच क्यों नहीं करने दे रहा?

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