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क्या है 'ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन’, जिसे नरेंद्र मोदी और निर्मला सीतारमण 'क्रांतिकारी' बता रहे हैं?

13 अगस्त, 2020. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे एक ‘लैंडमार्क डे’ यानी ‘ऐतिहासिक दिन’ बताया. उसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संदेश हुआ. सब किसलिए? ‘ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन – ऑनरिंग दी ऑनेस्ट’ नाम के प्लेटफ़ॉर्म के लोकार्पण के चलते. अब आप पूछेंगे, क्या है ये प्लेटफ़ॉर्म. तो सबसे पहले जान लेते हैं, इस प्लेटफ़ॉर्म के बारे में PM मोदी ने क्या बताया-

बीते छह वर्ष में हमारा फ़ोकस रहा है, बैंकिंग दी अन-बैंक, सिक्योरिंग दी अन-सिक्योर और फंडिंग दी अन-फ़ंडेड. आज एक तरह से एक नई की यात्रा शुरु हो रही है. ऑनरिंग दी ऑनेस्ट. ईमानदार का सम्मान. देश का ईमानदार टैक्सपेयर राष्ट्र-निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है. जब देश के ईमानदार टैक्सपेयर का जीवन आसान बनता है, वो आगे बढ़ता है, तो देश का भी विकास होता है, देश भी आगे बढ़ता है.

इस प्लेटफ़ॉर्म में फेसलेस असेसमेंट, फेसलेस अपील और टैक्सपेयर्स चार्टर जैसे रिफॉर्म्स हैं. फेसलेस असेसमेंट और टैक्सपेयर्स चार्टर, 13 अगस्त से ही लागू हो गए हैं, जबकि फेसलेस अपील की सुविधा पं. दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिन, यानी 25 सितम्बर उपलब्ध होगी.

आइए ‘ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन – ऑनरिंग दी ऑनेस्ट’ प्लेटफ़ॉर्म के उन तीन रिफॉर्म्स को आसान भाषा में समझते हैं, जिन्हें पीएम मोदी ने क्रांतिकारी बताया है. हम इन रिफॉर्म्स के बारे में जो एक्सप्लेनर कर रहे हैं, वो इनकी फ़ेस वैल्यू के आधार पर और जैसे ये ऑन दी पेपर्स दिख रहे हैं, उस आधार पर कर रहे हैं. लागू हो जाने के बाद इनका असर क्या पड़ता है, उसके लिए यकीनन अभी कुछ समय इंतज़ार करना पड़ेगा.

# फेसलेस असेसमेंट

फेसलेस. अंग्रेज़ी का शब्द. जिसका अर्थ हुआ ‘चेहरा मुक्त’. तो फेसलेस असेसमेंट का मतलब क्या हुआ? मतलब ऐसा मूल्यांकन, जिसका कोई चेहरा न हो. तो क्या फेसलेस असेसमेंट से पहले असेसमेंट का कोई चेहरा होता था? एक उदाहारण से समझिए-

राजेश पढ़ने में ठीक-ठाक है. लेकिन उसे अपने रिज़ल्ट की चिंता सता रही है. उसे लगता है कि वो फेल हो सकता है. क्यों? क्योंकि उसे लगता है कि कॉपी चेक करने वाल टीचर उससे जलता है. खार खाता है. दूसरी तरफ सुरेश है. जिसका फेल होना तय है, लेकिन वो चिल कर रहा है. उसे लगता है कि वो टीचर को घूस दे देगा, काम बन जाएगा. लेकिन टीचर ईमानदार है, राजेश पास हो जाता है, सुरेश फेल.

ये अलग बात है कि कोरोना ने सबको फ़ेसलैस कर दिया है, पर जहां तक बात फ़ेसलैस असेसमेंट की है, उसका फ़ायदा बोर्ड का इग्ज़ाम देने वाले ईमानदार बच्चे जानते हैं. (तस्वीर: PTI)
ये अलग बात है कि कोरोना ने सबको फ़ेसलेस कर दिया है, पर जहां तक बात फ़ेसलेस असेसमेंट की है, उसका फ़ायदा बोर्ड का इग्ज़ाम देने वाले ईमानदार बच्चे जानते हैं. (तस्वीर: PTI)

सोचिए अगर टीचर ईमानदार नहीं होता? वो तो टीचर का उदाहरण था और टीचर्स डे भी क़रीब है इसलिए. वरना उदाहरण तो हम बेईमान टीचर वाला ही लेने वाले थे. और ईमानदार है, तो भी, जब तक रिज़ल्ट नहीं आया, तब तक राजेश की धड़कनें बढ़ी हुई थीं.

कहने का मतलब ये कि राजेश और सुरेश अपनी परफ़ॉर्मेंस की वजह से नहीं, टीचर की वजह से क्रमशः ‘चिंतित’ और ‘चिल-तित’ थे. असेसर की वजह से. क्योंकि असेसर का एक फ़ेस था. बोर्ड के इग्ज़ाम्स इसलिए ही तो सातवीं-आठवीं के इग्ज़ाम्स से ज़्यादा मायने रखते हैं. क्योंकि बोर्ड के इग्ज़ाम्स में असेसर का, कॉपी चेक करने वाले का, कोई फ़ेस नहीं होता. आपकी कॉपी कोई भी चेक कर सकता है, जो आपको जानना तो दूर, आपसे कभी मिला भी नहीं होगा. न वो आपसे निजी तौर पर कोई बदला ले सकता है, न घूस. पूरे दौरान आप उसका और वो आपका चेहरा नहीं देख पाएंगे. यूं मेटाफोरिकली बोलें, तो आपके असेसर का कोई चेहरा न हुआ. और इसलिए आपका असेसमेंट हो गया फ़ेसलेस. और ये फ़ेसलेस असेसमेंट क्यों नॉर्मल वाले असेसमेंट से बेहतर है, ये राजेश जैसे ईमानदार स्टूडेंटस के साथ-साथ, आपको भी समझ आ गया होगा.

टैक्स के मामले में फ़ेसलेस असेसमेंट का क्या अर्थ है? ये कि अब टैक्सपेयर्स को मूल्यांकन के लिए इनकम टैक्स ऑफ़िस के चक्कर लगाने की ज़रूरत नहीं है. ‘प्रादेशिक क्षेत्राधिकार’ ख़त्म किया जाएगा. मतलब लोकल स्तर पर असेसमेंट नहीं होंगे. जैसे बोर्ड के इग्ज़ाम्स में उत्तर पुस्तिकाओं के साथ होता है. केंद्र DIN यानी डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नम्बर की मदद से नोटिस भेजेगा. निर्मला सीतारमण ने DIN के बारे में बताया-

IT (इनकम टैक्स) डिपार्टमेंट से बिना DIN के निकलने वाले नोटिस इनवैलिड यानी अमान्य माने जाएंगे. यूं ये (DIN) डिपार्टमेंट और टैक्सपेयर्स के बीच होने वाले कम्यूनिकेशन को एक ट्रेसेबिलिटी (पता लगाने की क्षमता) और ऑथेंटिसिटी (प्रामाणिकता) भी देगा.

पीएम मोदी के भाषण से पहले निर्मला सीतारमण ने भी ‘ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन - ऑनरिंग दी ऑनेस्ट' से जुड़े कई पहलू बताए. (स्क्रीन ग्रैब: यू ट्यूब)
पीएम मोदी के भाषण से पहले निर्मला सीतारमण ने भी ‘ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन – ऑनरिंग दी ऑनेस्ट’ से जुड़े कई पहलू बताए. (स्क्रीन ग्रैब: यू ट्यूब)

इस फेसलेस असेसमेंट को पीएम मोदी की स्पीच के एक अंश से भी समझा जा सकता है-

अभी तक तो होता ये है कि जिस शहर में हम रहते हैं, उसी शहर का टैक्स डिपार्टमेंट टैक्स से जुड़ी हमारी सभी बातों को हैंडल करता है. स्क्रूटनी हो, नोटिस हो, सर्वे हों या फिर ज़ब्ती हो. इसमें उसी शहर के इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की, आयकर अधिकारी की मुख्य भूमिका रहती है. और अब ये भूमिका एक प्रकार से ख़त्म हो गयी है. अब इसको टेक्नोलॉजी की मदद से बदल दिया गया है. अब स्क्रूटनी के मामलों को देश के किसी भी क्षेत्र में, किसी भी अधिकारी के पास रैंडम तरीक़े से आवंटित किया जाएगा.

अब जैसे मुम्बई के किसी टैक्सपेयर का रिटर्न से जुड़ा कोई मामला सामने आता है, तो इसकी छानबीन का ज़िम्मा मुम्बई के अधिकारी के पास नहीं जाएगा. बल्कि संभव है कि वो चेन्नई चला जाए, गुवाहाटी चला जाए, रायपुर चला जाए, अहमदाबाद चला जाए. वो फ़ेसलैस टीम के पास जा सकता है. और वहां से भी जो आदेश निकलेगा, उसका रिव्यू किसी दूसरे शहर, कहीं जयपुर हो जाएगा, बैंगलोर हो जाएगा, चेन्नई हो जाएगा, कोच्चि हो जाएगा. वहां की टीम करेगी. अब फ़ेसलेस टीम कौन सी होगी, इसमें कौन होगा, यह भी कंप्यूटर रेंडमली तय करेगा. और इस प्रक्रिया में भी बार-बार बदलाव होता रहेगा.

इस सिस्टम से करदाता और इनकम टैक्स दफ़्तर को (एक दूसरे से) जान-पहचान बनाने का, प्रभाव और दबाव का मौक़ा अब ज़ीरो हो गया. सब अपने-अपने दायित्व के हिसाब से काम करेंगे. डिपार्टमेंट को इससे लाभ यह होगा कि अनावश्यक मुकदमेबाजी बचेगी. दूसरा ट्रान्सफर-पोस्टिंग में लगने वाली गैर ज़रूरी ऊर्जा से भी अब राहत मिलेगी.

# फेसलेस अपील

अब कहीं नियम होते हैं, तो थोड़ी बहुत ह्यूमन एरर भी होते हैं. जानबूझ के, कभी अनजाने में. तो अगर कभी टैक्सपेयर को लगता है कि कहीं कुछ दिक्कत हो रही, तो वो अपील कर सकता है. इसे कुछ-कुछ ऐसा ही मानिए जैसे बोर्ड के इग्ज़ाम में अपने रिज़ल्ट से अप्रसन्न होकर कोई कॉपी रिचेक के लिए भेजे. और वो कॉपी भी रिचेक होने के लिए रेंडमली चुने गए व्यक्ति के पास जाए.

तो फेसलेस अपील के अंतर्गत भी, किसी टैक्सपेयर की शिकायत को रेंडमली तरीक़े से चुने गए इनकम टैक्स ऑफ़िसर के पास भेजा जाएगा. अफ़सर के लिए अपील करने वाले टैक्सपेयर की और टैक्सपेयर के लिए उस अफ़सर की, जिसके पास शिकायत गई है, पहचान अज्ञात होगी. और जैसा फेसलेस असेसमेंट के केस में था, फेसलेस अपील के मामले में भी अपील करने वाले टैक्सपेयर को किसी ऑफ़िस के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.

ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन के तीन महत्वपूर्ण रिफ़ॉर्म्स. (स्क्रीनग्रैब: यू ट्यूब)
ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन के तीन महत्वपूर्ण रिफ़ॉर्म्स. (स्क्रीनग्रैब: यू ट्यूब)

अच्छा मज़े की बात, अपील पर जो सुनवाई होगी, अपील करने वाला टैक्सपेयर, उसकी समीक्षा भी कर/करवा सकता है. लेकिन कुछ गंभीर मामलों में इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा. जैसे- कालाधन, बेनामी संपत्ति या कुछ ज़्यादा ही बड़ी टैक्स चोरी.

फेसलेस अपील और फेसलेस असेसमेंट से भविष्य में पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी दावा किया-

देश के साथ छल करने वाले कुछ मुट्ठीभर लोगों की पहचान के लिए बहुत से लोगों को अनावश्यक परेशानी से गुज़रना पड़ता था. कहां तो टैक्स देने वालों की संख्या में गर्व के साथ विस्तार होना चाहिए था, और कहां गठजोड़ की, साठ-गांठ की व्यवस्था बन गई. इस विसंगति के बीच ब्लैक और व्हाइट का उद्योग भी फलता-फूलता गया. इस व्यवस्था ने ईमानदारी से व्यापार कारोबार करने वालों को, रोज़गार देने वालों को और देश की युवा शक्ति की आकांक्षाओं को प्रोत्साहित करने के बजाय कुचलने का काम किया. जहां कॉम्प्लेक्सिटी और दी है, वहां कंप्लायंस भी मुश्किल होता है. कम से कम क़ानून हों, जो क़ानून हो वो बहुत स्पष्ट हों, तो टैक्सपेयर भी ख़ुश रहता है और देश ख़ुशहाल होता है.

अच्छा ये फेसलेस अपील या फेसलेस असेसमेंट के लिए अधिकारी रेंडमली कैसे चुके जाएंगे? कोई पर्ची निकाली जाएगी क्या? एक तरह से कह सकते हैं हां. ये पर्ची डिजिटल तरीक़े से निकाली जाएगी. मतलब कंप्यूटर और आर्टीफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से. और कंप्यूटर में ही सारा डेटाबेस भी रहेगा, ताकि फ़ाइलिंग और उससे उपजी लाल-फ़ीताशाही से बचा जा सके. जैसा कि इस प्लेटफ़ॉर्म के बारे में वित्त मंत्री ने भी बताया-

इसमें टेक्नॉलजी, डेटा एनेलिसिस और आर्टीफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया गया है.

PM मोदी ने दावा कहा-

नई व्यवस्थाएं, नई सुविधाएं, ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और मज़बूत करती हैं. ये देशवासियों के जीवन से, सरकार को, सरकार के दख़ल को कम करने की दिशा में भी एक बड़ा क़दम है.

# टैक्सपेयर्स चार्टर

चार्टर का मतलब विशेषाधिकार. किनका? टैक्सपेयर्स का. करदरताओं का. कैसे विशेषाधिकार? जैसे निजता और गोपनीयता विशेषाधिकार. अपील और समीक्षा का विशेषाधिकार. हालांकि टैक्सपेयर्स चार्टर केवल अधिकार ही नहीं, कर्तव्यों की बात भी करता है.

अमेरिका और कनाडा जैसे कुछ ही देशों में टैक्सपेयर्स चार्टर है. जैसा कि पीएम मोदी ने भी अपने संबोधन में कहा-

टैक्सपेयर को इस स्तर का सम्मान और सुरक्षा देने वाले दुनिया में बहुत कम देश हैं. गिने-चुने देश हैं. लेकिन अब भारत भी इस महत्वपूर्ण क़दम की ओर अपने आप को ले जा करके, उसमें शामिल हो गया है.

आपने चार्टर प्लेन के बारे में सुना है न? मतलब कुछ विशेष लोगों के लिए निजी प्लेन. वैसे ही टैक्सपेयर्स चार्टर भी सबके लिए नहीं है. सिर्फ़ उनके लिए है, जो टैक्स देते हैं. टैक्सपेयर्स चार्टर एक लिस्ट है, जिसकी बातें सिर्फ़ टैक्सपेयर्स पर लागू होंगी. फिर चाहे वो अधिकार हों या कर्तव्य. इसमें इनकम टैक्स अधिकारियों के लिए भी कुछ बातें हैं. जैसे उनकी जवाबदेही तय किया जाना.

एयर इंडिया की स्पेशल, चार्टर फ़्लाइट. जो 07 अप्रैल, 2020 को कुछ 'लाइफ़ सेविंग ड्रग्स' लेकर भारत से श्रीलंका के लिए रवाना हुआ. (तस्वीर: PTI)
एयर इंडिया की स्पेशल, चार्टर फ़्लाइट. जो 07 अप्रैल, 2020 को कुछ ‘लाइफ़ सेविंग ड्रग्स’ लेकर भारत से श्रीलंका के लिए रवाना हुआ. (तस्वीर: PTI)

PM मोदी के संबोधन का एक अंश इसको थोड़ी और समझाता है –

टैक्सपेयर चार्टर देश की विकास यात्रा में बहुत बड़ा क़दम है. और टैक्सपेयर के लिए अधिकार और कर्तव्य, दोनों को संतुलित करने का, और सरकार की ज़िम्मेदारी पक्की करने का ये बहुत अहम क़दम है.

अब टैक्सपेयर को उचित, विनम्र और तर्कसंगत व्यवहार का भरोसा दिया गया है. यानी आयकर विभाग को अब टैक्सपेयर की डिग्निटी का संवेदनशीलता के साथ ध्यान रखना होगा. अब टैक्सपेयर्स की बात पर विश्वास करना होगा. डिपार्टमेंट उसको बिना किसी आधार के ही श़क की नज़र से नहीं देख सकता. अगर किसी प्रकार का संदेह है भी, तो टैक्सपेयर को भी अपील और समीक्षा का अधिकार दिया गया है.

अधिकार हमेशा दायित्वों के साथ आता है. कर्तव्यों के साथ आता है. इस चार्टर में भी टैक्स पेयर से कुछ अपेक्षाएं की गई हैं. टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स देना या सरकार के लिए टैक्स लेना, ये कोई हक़ का, अधिकार का विषय नहीं है. बल्कि ये दोनों का दायित्व है, ज़िम्मेदारी है, कर्तव्य है, रिस्पॉन्सिबिलिटी है. टैक्सपेयर को टैक्स इसलिये देना है, क्योंकि उसी से सिस्टम चलता है. देश की एक बड़ी आबादी के प्रति, देश अपना फ़र्ज़ निभा सकता है. और उज्ज्वल भविष्य की ओर क़दम भी रख सकता है. इसी टैक्स से ख़ुद टैक्सपेयर को भी तरक़्क़ी के लिए, प्रगति के लिए बेहतर सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर मिल पाता है. वहीं सरकार का यह दायित्व है कि टैक्सपेयर की पाई-पाई का सदुपयोग करे. ऐसे में आज जब करदाताओं को सुविधा और सुरक्षा, ये दोनों मिल रहे हैं, तो देश भी हर टैक्सपेयर से अपने दायित्वों के प्रति ज़्यादा ज़्यादा जागरूक रहने की अपेक्षा करता है. 

सारी चीज़ें आसान भाषा में समझने के बाद आइए अब पीएम नरेंद्र मोदी का पूरा भाषण सुन लिया जाए-

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