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जीते हुए मेडल अपनी जगह लेकिन असली कमाल तो इन एथलीट्स ने किया

Tokyo 2020 Olympics खत्म हो चुके हैं. सारे एथलीट्स अब जापान से वापस अपने घरों को पहुंच चुके हैं. आंकड़े देखें तो टीम इंडिया के लिए यह ओलंपिक्स अब तक के बेस्ट ओलंपिक्स रहे. इनमें भारत ने एक गोल्ड, दो सिल्वर और चार ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम किए. तो वहीं हमारे कई दिग्गज एथलीट बिना मेडल भी लौटे.

लेकिन कुछ ऐसे नाम भी रहे जिन्होंने कमाल का प्रदर्शन किया. इन्हें मेडल भले ना मिला हो लेकिन ओलंपिक्स में इन्होंने अपना बेस्ट दिया. यानी भले ही रिजल्ट मेडल में ना बदला हो. लेकिन इनका प्रदर्शन कमाल का था. इस आर्टिकल में हम ऐसे ही भारतीय एथलीट्स की बात करेंगे. और इसकी शुरुआत होगी भारतीय महिला हॉकी टीम से.

# Indian Women Hockey Team

सिर्फ तीसरे ओलंपिक्स में उतरी भारतीय महिला हॉकी टीम ब्रॉन्ज़ मेडल से चूक गई. ब्रॉन्ज़ मेडल मैच में उन्हें ग्रेट ब्रिटेन ने 4-3 से हराया. भारत ने इस मैच के दूसरे क्वॉर्टर के चार मिनट में तीन गोल मारे. लेकिन टीम अपनी ये इंटेंसिटी पूरे मैच में कायम नहीं रख पाई. और इसी के चलते अपने पहले ओलंपिक्स मेडल से चूक गई.

लेकिन ओवरऑल टीम ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया. पूल ए में सिर्फ दो मैच जीतकर टीम क्वॉर्टरफाइनल में पहुंची. और वहां ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से मात दी. इसके बाद हुए सेमीफाइनल में भारत को अर्जेंटीना ने 2-1 से हराया. इसके बाद हुए ब्रॉन्ज़ मेडल मैच में टीम ने कमाल की हॉकी खेली. लेकिन मैदान के दाहिनी ओर डिफेंडिंग में हुई गलतियों के चलते टीम को चौथे नंबर से संतोष करना पड़ा.

हालांकि इसके बाद भी इस टीम की खूब तारीफ हुई. और ये पूरी तारीफ टीम ने अपने प्रदर्शन से कमाई थी. खासतौर से गोलकीपर सविता पूनिया और ड्रैग फ्लिकर गुरजीत कौर ने बेहतरीन खेल दिखाया. साथ में वंदना कटारिया ने भी टूर्नामेंट में चार गोल मारे. वह ओलंपिक्स में हैटट्रिक मारने वाली पहली भारतीय महिला भी बनीं.

# Avinash Sable

स्टीपलचेज यानी बाधा दौड़. जिसे आम भारतीय उस दौड़ के रूप में जानता है जिसमें पान सिंह तोमर भागा करते थे. 3000 मीटर की इस रेस में भारत की ओर से अविनाश साबले उतरे थे. अविनाश ने दूसरी हीट में 8.18.12 का टाइम निकाला. यह नेशनल रिकॉर्ड है. पिछला रिकॉर्ड भी साबले के ही नाम था. यानी यहां उन्होंने अपना बेस्ट दिया.

हालांकि इसके बाद भी वह फाइनल नहीं खेल पाए. अविनाश यहां ओवरऑल 13वें सबसे तेज धावक रहे. जबकि फाइनल में सिर्फ टॉप-12 को जाना था. महाराष्ट्र के बीड से आने वाले साबले लंबे वक्त से स्टीपलचेज में भारत के सर्वश्रेष्ठ धावक हैं. वह लगातार अपना प्रदर्शन बेहतर करते आ रहे थे. ओलंपिक्स में भले ही वह फाइनल तक भी ना जा पाए हों लेकिन उनके प्रदर्शन की खूब तारीफ हुई.

# Men’s 4*400 Meter Relay Team

एथलेटिक्स में भारत ने इस बार कमाल का प्रदर्शन किया. भले ही ट्रैक एंड फील्ड में हमें सिर्फ एक मेडल मिला हो, लेकिन बाकी के एथलीट्स ने भी टोक्यो में बेहतरीन खेल दिखाया. और इनमें भारतीय 4*400 मीटर रिले पुरुष टीम भी शामिल रही.

साबले की तरह यह टीम भी फाइनल में नहीं खेली. लेकिन इन्होंने भी टोक्यो में अपना बेस्ट दिया. अमोल जैकब, नागनाथन पंडी, निर्मल नोआह टॉम और मुहम्मद अनस की इस टीम ने टोक्यो में एशियन रिकॉर्ड तोड़ा. उन्होंने 3.00.24 मिनट्स में रेस खत्म की. और दूसरी हीट में चौथे नंबर पर रहे. उनसे आगे पोलैंड, जमैका और बेल्जियम की टीमें रहीं. इस इवेंट के दोनों हीट मिलाकर कुल आठ टीमों को फाइनल में जाना था. भारतीय टीम ओवरऑल नौवें नंबर पर रही.

# Aditi Ashok

दुनिया की 200वें नंबर की गोल्फ अदिति टोक्यो में छा गईं. अदिति ने चार दिन के इस इवेंट का ज्यादातर वक्त टॉप-2 में बिताया. हालांकि चौथे दिन उनका प्रदर्शन थोड़ा खराब दिखा, लेकिन इसमें अदिति से ज्यादा रोल बाकी गोल्फर्स का रहा. खासतौर से जापान और न्यूज़ीलैंड की गोल्फर्स ने चौथे दिन कमाल का प्रदर्शन किया.

और इसी के चलते अदिति ओवरऑल चौथे नंबर पर रहीं. और बेहद क़रीबी अंतर से मेडल से चूक गईं. Rio2016 ओलंपिक्स में 41वें नंबर पर रहीं अदिति के इस प्रदर्शन की खूब तारीफ हुई. उन्होंने भारत में गोल्फ जैसे खेल के लिए ऐसी उत्सुकता जगाई कि लोग सुबह चार बजे उठकर उनका मैच देख रहे थे. सिर्फ 23 साल की अदिति और साथ में भारत के लिए भी यह कमाल की उपलब्धि रही.

# Atanu Das

आर्चरी में भारत को सबसे ज्यादा उम्मीद दीपिका कुमारी से थी. हालांकि अपना तीसरा ओलंपिक्स खेल रहीं दीपिका एक बार फिर से उम्मीदों पर खरी उतरने में नाकाम रहीं. लेकिन दूसरी ओर उनके पति अतानु दास ने सिंगल्स इवेंट में कमाल का खेल दिखाया.

उन्होंने अपने पहले दो मैचों में लगातार दुनिया के टॉप आर्चर्स को मात दी. पहले तो उन्होंने इसी ओलंपिक्स टीम इवेंट के सिल्वर मेडलिस्ट चाइनीज ताइपे के डे यु चेंग को हराया. अतानु ने इस मैच को 6-5 से अपने नाम किया. और फिर अगले मैच में ओलंपिक्स चैंपियन कोरिया के ओह जिन हाएक को मात दे दी.

अतानु दास ने इस कोरियन आर्चर के खिलाफ शूट ऑफ में गए मैच को 6-5 से अपने नाम किया. मैच इतना कांटे का हुआ कि विजेता का फैसला शूट-ऑफ में जाकर हो पाया. ओह जिन हाएक 2012 के लंदन गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट हैं . साथ ही वह टोक्यो गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट कोरियन टीम का हिस्सा भी थे.

हालांकि उन्हें राउंड ऑफ-16 में जापानी आर्चर से हार मिली. तकाहारु फुरुकावा ने अतानु को 6-4 से हराया. फुरुकावा ने बाद में ब्रॉन्ज़ मेडल भी अपने नाम किया.


टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड जीतने के बाद नीरज चोपड़ा ने अपना मेडल किसे समर्पित किया?

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