Submit your post

Follow Us

इस एक वजह से मोदी सरकार लाख आरक्षण दे दे, नौकरी नहीं दे पाएगी!

3.01 K
शेयर्स

कभी आपके साथ ऐसा हुआ. आप सपनों की दुनिया में खोए हों और कोई आकर आपको जोर से कंटाप मार दे. आप भड़भड़ा के उठ जाएं. आपकी नींद हवा हो जाए.और फिर ऐसा लगे कि क्या यार, काहे जगा दिया. इतना अच्छा सपना देख रहे थे. पर हकीकत की दुनिया में आने के लिए जागना ज़रूरी भी है. अगर आप सामान्य वर्ग के गरीब हैं और आरक्षण का इंतजार कर रहे हैं, तो ये खबर आपको जगाने के लिए है. क्योंकि ‘बिजनेस टुडे’ में छपी राजीव दुबे और मुदित कपूर की एक रिपोर्ट आंखें खोल देने वाली है. ये सपनों की दुनिया से निकलकर हकीकत का सामना कराती है. रिपोर्ट के मुताबिक सामान्य वर्ग के गरीबों का 10 फीसदी कोटा पूरा करने के लिए सरकार को 29 लाख पद भरने होंगे. और ये पद सालों से खाली  पड़े हैं. ये नौकरियां देने से सरकारी खजाने पर सालाना करीब 1 लाख 27 हज़ार करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा. और ये कुछ वैसा ही है कि ना नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी. मतलब ये कि न तो सरकार इतनी नौकरियां दे पाएगी और न सामान्य वर्ग का कोटा पूरा हो पाएगा. तो आइए समझ लेते हैं पूरा माजरा है क्या-

कितने पद खाली हैं इन दिनों?

इस वक्त अलग-अलग सरकारी विभागों में 29 लाख से भी ज्यादा पद खाली हैं. सांकेतिक तस्वीर. इंडिया टुडे.
इस वक्त अलग-अलग सरकारी विभागों में 29 लाख से भी ज्यादा पद खाली हैं. सांकेतिक तस्वीर. इंडिया टुडे.

बिजनेस टुडे के मुताबिक इस वक्त अलग-अलग सरकारी विभागों में 29 लाख से भी ज्यादा पद खाली हैं. ये पद केंद्र सरकार के भी हैं और राज्य सरकारों के भी. इन 29 लाख में से 13 लाख तो सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में खाली पड़े हैं. 9 लाख पद प्राइमरी शिक्षकों के रिक्त हैं. 4 लाख 17 हजार पद सर्व शिक्षा अभियान के भी वैकेंट हैं. पुलिस महकमे में भी 4 लाख से ज्यादा पद सालों से रिक्त हैं. इनकी वैकेंसी फुल नहीं हो पा रही है. इसी तरह करीब 4 लाख 12 हजार पद अलग-अलग सरकारी विभागों में खाली हैं. रेलवे में भी इस वक्त 2 लाख 53 हजार पद रिक्त हैं. इन पदों पर तत्काल कोई भर्ती होगी, ऐसा नजर नहीं आता.

क्या ये पद नहीं भरे जाएंगे?
अगर सरकार इन 29 लाख पदों को भरने की कोशिश करेगी, तो सरकारी खर्चे में 1 लाख 27 हज़ार करोड़ रुपए की बढ़ोत्तरी होगी. और सरकार खजाने पर इतना बोझ उठाने की स्थिति में नहीं है. इस फैसले को लागू करने से सरकार का सेलरी बजट यानी कर्मचारियों को दी जाने वाली तनख्वाह का खर्चा 76 फीसदी और बढ़ जाएगा. इसको कुछ इस तरह समझते हैं, जैसे अभी 100 कर्चारियों को सेलरी देने में सरकार को 10,000 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं तो इस फैसले के बाद उसे 17,600 रुपए खर्च करने पड़ेंगे. सातवें वेतन आयोग में कर्मचारियों की न्यूनतम सेलरी 7,000 से बढ़ाकर 18,000 रुपए कर दी है. दूसरे भत्ते, पेंशन और खर्चे मिलाकर सरकार पर एक कर्मचारी पर महीने में करीब 36,000 रुपए खर्च करती है. और अगर सरकार 29 लाख कर्मचारी भर्ती करती है, तो उसका वेतन भत्तों आदि पर खर्च 1 लाख 27 हजार करोड़ रुपए और बढ़ जाएगा.

सरकार क्यों नहीं लागू पाएगी ये फैसला?

सरकार से लगातार यही सवाल किए जा रहे हैं आखिर जब नौकरियों की ये हालत है तो आरक्षण के फैसले से क्या फायदा? सांकितिक तस्वीर. इंडिया टुडे.
सरकार से लगातार यही सवाल किए जा रहे हैं आखिर जब नौकरियों की ये हालत है तो आरक्षण के फैसले से क्या फायदा? सांकितिक तस्वीर. इंडिया टुडे.

सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण देने का बिल जब से सरकार ने संसद में पेश किया. उसी वक्त से इस पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. सरकार से लगातार यही सवाल किए जा रहे हैं आखिर जब नौकरियों की ये हालत है तो आरक्षण के फैसले से क्या होगा. ये पद सालों से नहीं भरे गए हैं. चाहे राज्यों की सरकारें हों या केंद्र की. हर सरकार नई भर्तियों पर कुंडली मारकर बैठी हुई है. एक उदाहरण देख लीजिए. साल 2018 में अप्रैल से नवंबर के बीच सरकार का राजस्व घाटा 1 लाख करोड़ रुपए बढ़ गया है. पेंशन भुगतान आदि की वजह से सरकार का सेलरी बजट भी लगातार बढ़ रहा है. साल 2018 में इसमें करीब 10,000 करोड़ रुपए की बढ़ोत्तरी हुई और ये बढ़कर 1 लाख 68 हजार करोड़ रुपए हो चुका है. इस फैसले के लागू हो जाने के बाद सरकार का राजस्व घाटा 21 फीसदी और बढ़ जाएगा. राजस्व घाटा सरकार की आमदनी और खर्च के अंतर को कहा जाता है. मतलब ये कि खर्च के अनुपात में अगर आमदनी कम हो तो जो घाटा आता है, उसे ही राजस्व घाटा कहते हैं. मगर आज की स्थिति में राजस्व घाटा कम करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. ये फैसला लागू होने से सरकार अपना घाटा बढ़ाना तो बिलकुल नहीं चाहेगी.

इतनी रकम से क्या कर सकती है सरकार?
1 लाख 27 हजार करोड़ रुपए की ये रकम अगर सरकार विकास के कार्यक्रमों पर खर्च करना चाहे तो कई काम हो सकते हैं. मसलन मोदी सरकार की ड्रीम स्कीम आयुष्मान भारत को 10 साल तक चलाया जा सकता है. इस योजना पर अभी 12,000 करोड़ रुपए खर्च कर रही है सरकार. इसी तरह लड़कियों की शिक्षा के प्रोग्राम को 482 साल और बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ योजना को 456 साल तक चलाया जा सकता है. साल 2018 के बजट में लड़कियों के सेकेंडरी एजुकेशन के लिए 265 करोड़ रुपए का इंतजाम किया गया है. ये रकम जीएसटी के औसत मासिक कलेक्शन का 1.42 गुना है. कुपोषित बच्चों के लिए चलाए जा रहे नेशनल न्यूट्रीशन मिशन को 42 साल तक चलाया जा सकता है. इतनी रकम से 16,000 करोड़ रुपए के रेट से 79 मिसाइलें भी आ सकती हैं.

 

इतनी रकम से मोदी सरकार की ड्रीम स्कीम आयुष्मान भारत को 10 साल तक चलाया जा सकता है. सांकेतिक तस्वीर. इंडिया टुडे.
इतनी रकम से मोदी सरकार की ड्रीम स्कीम आयुष्मान भारत को 10 साल तक चलाया जा सकता है. सांकेतिक तस्वीर. इंडिया टुडे.

 

एक लाख 27 हजार करोड़ रुपए से और क्या हो सकता है

केंद्र का मौजूदा सेलरी बजट-                         1,68,000 करोड़ रुपए
सेलरी बजट में संभावित बढ़ोत्तरी-   76%,    2,95,000 करोड़ रुपए

केंद्र सरकार का राजस्व घाटा अभी-               5,91,000 करोड़ रुपए
राजस्व घाटे में संभावित बढ़त-       21%      7,18,000 करोड़ रुपए

बालिक शिक्षा पर मौजूदा खर्च-                    265 करोड़ रुपए
बालिका शिक्षा पर क्या हो सकता है-           482 साल तक फंडिंग
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर अभी खर्च-       280 करोड़ रुपए
बेटी बचाओ-बेची पढ़ाओ पर क्या होगा-      456 साल तक फंडिंग
एक रफाएल विमान पर मौजूदा खर्च-          1600 करोड़ रुपए
कितने रफाएल और आ सकते हैं-                79 रफाएल
मातृत्व लाभ योजना पर अभी खर्च-             2,400 करोड़ रुपए
इतने पैसे से कितने दिन चलेगी योजना-       53 साल
राष्ट्रीय पोषण मिशन का अभी खर्च-            3,000 करोड़ रुपए
आयुष्मान भारत का अभी खर्च-                 12,000 करोड़ रुपए
योजना और कब तक चल सकती है-           10 साल
बिजली हर घर योजना-                             16,320 करोड़ रुपए
इतने पैसे से कब तक चल सकती है-          7 साल
महिला-बाल विकास मंत्रालय का बजट       24,720 करो़ड़ रुपए
क्या हो सकता है इतनी रकम से-               5 साल तक फंडिंग
रिलायंस इंडस्ट्रीज का सालाना प्रॉफिट-       33,612 करोड़ रुपए
उसके प्रॉफिट से कितने गुना रकम?           3.8 गुना
जीएसटी का मासिक कलेक्शन-                90,000 करोड़ रुपए
ये रकम उसके कितने गुना-                      1.42 गुना ज्यादा
एयर इंडिया रिवाइवल खर्च-                     28,055 करोड़ रुपए
इतनी रकम से क्या हो सकता है-             कंपनी कर्ज मुक्त
केंद्रीय खाद सब्सिडी-                              70,000 करोड़ रुपए
इतनी रकम से क्या हो सकता है-             किसानों को सब्सिडी


वीडियोः  इंदिरा साहनी केस, जो सामान्य वर्ग के आरक्षण में सबसे बड़ा अड़ंगा है

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें
To clear 10% reservation quota raise Centre’s salary budget by 76 per cent and fiscal deficit by 21 per cent

कौन हो तुम

रोहित शेट्टी के ऊपर ऐसी कड़क Quiz और कहां पाओगे?

14 मार्च को बड्डे होता है. ये तो सब जानते हैं, और क्या जानते हो आके बताओ. अरे आओ तो.

परफेक्शनिस्ट आमिर पर क्विज़ खेलो और साबित करो कितने जाबड़ फैन हो

आज आमिर खान का हैप्पी बड्डे है. कित्ता मालूम है उनके बारे में?

चेक करो अनुपम खेर पर अपना ज्ञान और टॉलरेंस लेवल

अनुपम खेर को ट्विटर और व्हाट्सऐप वीडियो के अलावा भी ध्यान से देखा है तो ये क्विज खेलो.

Quiz: आप भोले बाबा के कितने बड़े भक्त हो

भगवान शंकर के बारे में इन सवालों का जवाब दे लिया तो समझो गंगा नहा लिया

आजादी का फायदा उठाओ, रिपब्लिक इंडिया के बारे में बताओ

रिपब्लिक डे से लेकर 15 अगस्त तक. कई सवाल हैं, क्या आपको जवाब मालूम हैं? आइए, दीजिए जरा..

जानते हो ह्रतिक रोशन की पहली कमाई कितनी थी?

सलमान ने ऐसा क्या कह दिया था, जिससे हृतिक हो गए थे नाराज़? क्विज़ खेल लो. जान लो.

राजेश खन्ना ने किस हीरो के खिलाफ चुनाव लड़ा और जीता था?

राजेश खन्ना के कितने बड़े फैन हो, ये क्विज खेलो तो पता चलेगा.

सलमान खान के फैन, इधर आओ क्विज खेल के बताओ

क्विज में सही जवाब देने वाले के लिए एक खास इनाम है.

फवाद पर ये क्विज खेलना राष्ट्रद्रोह नहीं है

फवाद खान के बर्थडे पर सपेसल.

दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला के बारे में 9 सवाल

कुछ ऐसी बातें, जो शायद आप नहीं जानते होंगे.