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ऐडम गिलक्रिस्ट : स्लेजिंग की बादशाह ऑस्ट्रेलिया टीम का सबसे प्यारा खिलाड़ी

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क्रिकेट वर्ल्ड कप. साल 2003. पोर्ट एलिज़ाबेथ मैदान. ऑस्ट्रेलिया पहले बैटिंग करने उतरी. गिलक्रिस्ट और हेडेन ने शुरुआत ताबड़तोड़ की. छठे ओवर की तीसरी गेंद. डिसिल्वा की ऑफ स्पिन. जिस तरह से गिलक्रिस्ट ने मारना शुरू किया था, डिसिल्वा को रन रोकने के लिए लाया गया था. हेडेन और गिलक्रिस्ट की जोड़ी थोक में रन लूटने के लिए जानी जाती थी. उस पार्टनरशिप को शुरुआत में ही रोक देना ज़रूरी था. डिसिल्वा की स्पिन को इसी सोच के साथ लाया गया था. बाएं हाथ के बल्लेबाज गिलक्रिस्ट के पैरों के बाहर पड़ी गेंद को गिली ने स्वीप करना चाहा. गेंद डिप कर गई और कुछ पहले गिरी. नतीजतन गेंद हवा में थी. कीपिंग कर रहे संगक्कारा ने छोटी सी दौड़ लगा कर गेंद कैच कर ली. सभी श्री लंका के क्रिकेटर्स हवा में उछल रहे थे. वो अम्पायर से कैच की अपील कर रहे थे. रूडी कर्टज़न ने उस अपील पर कोई ध्यान नहीं दिया. अचानक रसेल अर्नाल्ड ने रूडी का ध्यान गिलक्रिस्ट की ओर दिलाया. गिलक्रिस्ट वापस जा रहे थे. पवेलियन की ओर. स्वीप करते वक़्त गेंद गिलक्रिस्ट के ग्लव्स से लगकर हवा में उठी थी. ऑस्ट्रेलिया का पहला विकेट गिर चुका था. सब कुछ गिलक्रिस्ट की ईमानदारी की बदौलत. वर्ल्ड कप के सेमी फाइनल में इस कदर से अपना विकेट खुद दे देने वाले खिलाड़ी कम ही मिलते हैं. गिलक्रिस्ट की खेल भावना का ये एकमात्र उदाहरण नहीं था.

4 मार्च 2008. इंडिया ने अभी अभी एक ऐसी सीरीज़ जीती थी जिसने आने वाले समय में इंडियन क्रिकेट में दोगुनी जान फूंक दी थी. इंडिया ने कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज़ जीत ली थी. इंडिया ने भयानक तगड़ी टीम ऑस्ट्रेलिया को उनके घर में हराया था. पहले और दूसरे फाइनल में सचिन तेंदुलकर ने कहर बरपाया था. दोनों ही मैचों में सचिन को मैन-ऑफ़-द-मैच मिला. मैच ख़त्म होने के बाद सचिन तेंदुलकर मैदान में खड़े होकर टीवी स्टूडियो में बैठे ऐंकर्स से बात कर रहे थे. पीछे से ऐडम गिलक्रिस्ट आए और सचिन की गर्दन पर हाथ डाल दिया. और गला दबाने का नाटक कर ने लगे. सचिन और गिलक्रिस्ट दोनों ही हंस पड़े. गिलक्रिस्ट तुरंत ही वहां से चले गए और सचिन ने अपना इंटरव्यू वहीं से शुरू कर दिया जहां उन्हें रोका गया था.

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ऐडम गिलक्रिस्ट. स्पोर्ट्समेन स्पिरिट का एम्बेसडर. बड़े दिल वाला क्रिकेटर जो लम्बे-लम्बे छक्के जड़ता था. इसने पहली बार टेस्ट क्रिकेट में बैटिंग करनी शुरू की तो 88 गेंदों में 81 रन बना डाले. गिलक्रिस्ट के आते ही ऑस्ट्रेलिया का बैटिंग लाइनअप एकदम कम्प्लीट लगने लगा. मानो क्रिकेट नहीं बल्कि रूबिक्स क्यूब सॉल्व किया जा रहा हो और गिलक्रिस्ट उसके आखिरी ब्लाक थे जिसे सही जगह पर लाते ही क्यूब सॉल्व हो गया.


चाहे वो वन-डे मैच में ओपेनिंग के लिए उतर रहा हो या टेस्ट में सातवें नम्बर पर आ रहा हो, गिली उसी ढिठाई के साथ बल्ला पटकता था और उतनी ही बेरहमी से गेंद को पीटता था. सहवाग जैसी बातें अकर्ता था. कहता था, “बस गेंद को देखो और मारो.” लेकिन सहवाग से कहीं बेहतर फ़ुटवर्क और स्ट्रोकप्ले. सहवाग अगर बल्ले के हत्थे को नीचे से पकड़ता था तो गिली हत्थे को काफ़ी ऊपर से. कलाई से शॉट मारना हो या बाज़ुओं की ताकत लगाकर गेंद को पुल करना हो, गिली दोनों ही में अव्वल रहता था. और इन्हीं वजहों से गिलक्रिस्ट का टेस्ट मैचों में भी 81 का स्ट्राइक रेट था.


ऐडम गिलक्रिस्ट यानी बड़े मैचों का खिलाड़ी. वर्ल्ड कप 2007. फाइनल मैच. सामने श्री लंका की टीम. गिलक्रिस्ट ने मारना शुरू किया तो 150 से एक कम रन पर सांस ली. 104 गेंदों में 149 रन. कुटाई का आलम ये था कि पहला विकेट गिरने पर टीम का स्कोर 172 रन था जबकि हेडेन ने मात्र 38 रन ही बनाये थे. 13 चौकों और 8 छक्कों से लैस वो इनिंग्स जिसने वर्ल्ड कप घर भिजवा दिया. ऑस्ट्रेलिया लगातार तीसरा वर्ल्ड कप फाइनल खेल रहा था. और इन तीनों ही मैचों में गिलक्रिस्ट ने जोर कसा हुआ था. 1999 में लॉर्ड्स में गिली ने पाकिस्तान के खिलाफ़ 36 गेंदों में 54 रन बनाये. 2003 में इंडिया के ख़िलाफ़ 48 गेंद में 57 रन बनाये. और 2007 में तो श्री लंका को अकेले रौंद दिया.

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श्री लंका के खिलाफ़ सेंचुरी के बाद.

श्री लंका के खिलाफ़ खेले इस फाइनल से एक बेहद मज़ेदार कहानी मिलती है. गिलक्रिस्ट के साथ एक समस्या थी. वो गेंद को उतना सीधा नहीं मार पा रहे थे जितना वो चाह रहे थे. बैटिंग कोच बॉब म्यूलमैन ने एक तरकीब बताई. उनके कहने पर गिलक्रिस्ट ने अपने दस्ताने में स्क्वॉश बॉल रख ली. अब उनके हाथ से बल्ला खुद-ब-खुद गेंद को सीधा लग रहा था. ग्लव्स में एक छोटी सी रबर की बॉल रखकर खेलना अपने आप में एक कला होगी और यहां गिलक्रिस्ट ने ऐसा करते हुए लगभग 150 मार ही दिए थे.

टेस्ट मैचों में गिलक्रिस्ट को हमेशा तीन इनिंग्स के लिए याद किया जाएगा –

1. जोहांसबर्ग में साउथ अफ्रीका के ख़िलाफ़ 204 रन. साल 2002.

ऑस्ट्रेलिया अपने टूर की शुरुआत कर रही थी. पहली इनिंग्स में 293 रन पर 5 विकेट गिर चुके थे. छठा विकेट 610 रन पर गिरा. डेमियन मार्टिन के साथ मिलकर 317 रनों की पार्टनरशिप. इस मैच में एक लोकल सोने की खान के मालिक ने एक होर्डिंग लगा रखी थी. उस होर्डिंग पर गेंद मारने वाले बल्लेबाज को एक सोने की ईंट दी जाने वाली थी. गिलक्रिस्ट 169 रन पर खेल रहे थे. नील मैकेंजी ने गेंद पटक दी. गिलक्रिस्ट को अब तक गेंद फ़ुटबाल जितनी बड़ी दिखाई देने लगी थी. उन्होंने पुल मारा. गिलक्रिस्ट गेंद को हवा में जाता हुआ देख रहे थे. गेंद हवा में उस होर्डिंग की ओर बढ़ रही थी और इधर गिली ऊपर नीचे कूद रहे थे. उन्हें विश्वास था कि उन्हें वो सोने की ईंट मिलने वाली थी. लेकिन गेंद उस होर्डिंग से कुछ अंगुल दूर गिरी. गिलक्रिस्ट की हताशा एक लम्बी मुस्कान के साथ साफ़ देखी जा सकती थी.

2. पाकिस्तान के खिलाफ़ होबार्ट में 149 रन. साल 1999.

ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज़ का पहला टेस्ट जीत लिया था. दूसरा भी वो जीतते दिख रहे थे. चौथे दिन ऑस्ट्रेलिया 126 रन पर 5 विकेट के स्कोर पर खेल रही थी. गिलक्रिस्ट ने कुछ ही दिन पहले अपना पहला टेस्ट खेला था और 88 गेंद में 81 रन बनाये थे. जस्टिन लैंगर के साथ मिलकर उन्हें मैच जितवाना था. 72 गेंदों में गिलक्रिस्ट की हाफ़ सेंचुरी बन चुकी थी. तीसरी इनिंग्स में दूसरी हाफ़ सेंचुरी. और इसके बाद गिलक्रिस्ट ने सक़लैन मुश्ताक़ को स्वीप करना शुरू कर दिया. गिलक्रिस्ट का इस इनिंग्स में सबसे अच्छा पॉइंट वो था जब वसीम अकरम को गिलक्रिस्ट ने डीप पॉइंट बाउंड्री के पार मार दिया. अकरम असल में वहां खड़े होकर गिलक्रिस्ट का मुंह ताक रहे थे.

3. ऐशेज़ में 57 गेंदों में सेंचुरी. पर्थ. साल 2006.

विवियन रिचर्ड्स का रिकॉर्ड एक गेंद से रह गया. माइकल हसी और क्लार्क की बेहतरीन बैटिंग की बदौलत गिलक्रिस्ट खुल कर खेल रहे थे. उनपर विकेट को बचाए रखने का दबाव नहीं था. और गिलक्रिस्ट उन बल्लेबाजों में से एक थे जिपर से दबाव हटा दो तो वो विस्फ़ोट कर देता है. जैसे खिलाड़ी नहीं बल्कि लैंड-माइन हो. मोंटी पनेसर के एक ओवर में 24 रन आये. गिलक्रिस्ट ने उन 24 रनों से अपनी हाफ़ सेंचुरी पूरी की. मैथ्यू हॉगार्ड मैदान भर में मारे जा रहे थे.


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