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वो 4 बाबा जिनके समर्थकों से टक्कर लेने में फोर्स को पसीने आ गए

हरियाणा जल रहा है. भयानक हिंसा के हवाले है पूरा प्रदेश. पुलिस-प्रशासन बेबस है. क्यों बेबस है? क्योंकि खुद को संत कहलवाने वाले एक आदमी के भक्त आतंकवादियों में तब्दील हो गए हैं. पागलों की तरह हर नज़र आती चीज़ पर झपट रहे हैं. जो सामने पड़ रहा है उसे नोच रहे हैं, नष्ट कर रहे हैं. गाड़ियां, दुकानें, मकान, सरकारी कार्यालय सब. यहां तक कि ज़िंदा लोगों पर भी हमलावर हो गए हैं. न्यूज़ चैनल्स की ओबी वैन तोड़ दी. रिपोर्टर, कैमरामैन भी हमले की ज़द में आ गए. वितृष्णा से भरा मन इस फैक्ट को पचा नहीं पा रहा कि ये सब लोग और इनके ‘बाबा’ खुद को इंसान कहते नहीं थकते. काम तो इनका हैवानों वाला है. बाबा रेपिस्ट निकले हैं और भक्तगण आतंकवादी. 21वीं सदी में भारत की ऐसी भी तस्वीर हो सकती है, यकीन नहीं होता. हम लोगों के सामूहिक शर्म का मुकाम है ये पूरा मामला.

हरियाणा में आगजनी और हमले की तस्वीरें
हरियाणा में आगजनी और हमले की तस्वीरें

और ये पहली बार नहीं हो रहा. ईश्वर के उपासक कहलाने के शौक़ीन और भी ऐसे बाबा रहे हैं, जिनकी या जिनके समर्थकों की हरकतें गुंडों जैसी थी. इतनी घृणित कि फिल्मों/उपन्यासों के क्रिमिनल भी शरमा जाए. ऐसे कुछ बाबा ये रहे.

आसाराम बापू

इस मुल्क में एक गांधी नाम का आदमी हुआ करता था कभी. प्यार से देश उस शख्स को बापू कहता था. एक वो बापू थे, जो अहिंसा का आग्रह अपनी अंतिम सांस तक करते रहे. एक ये बापू चल रहे हैं भारतवर्ष में, जो बलात्कार के आरोप में जेल में हैं. जिनके केस के गवाह चुन-चुन कर मौत के घाट उतारे गए.

राम रहीम पर अब चलेगा ये केस, जिसकी कहानी बहुत डरावनी है. देखें वीडियो

2013 का अगस्त महीना था. वही अगस्त जिसमें अक्सर ‘बच्चे मरते ही हैं’. आसाराम के जोधपुर आश्रम की एक 16 साल की लड़की ने आसाराम पर यौन शोषण का आरोप लगाया. लड़की के पिता ने दिल्ली में उनके खिलाफ़ शिकायत दर्ज की. पूछताछ के लिए बुलाने पर जब आसाराम नहीं आएं, तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें कई धाराओं में बुक करते हुए मामला जोधपुर कोर्ट के हवाले कर दिया. इधर आसाराम क़ानून को अपनी जूती पर रखकर इंदौर प्रवचन देने पहुंचे. उन्हें गिरफ्तार करने को दृढप्रतिज्ञ पुलिस भी उनके पंडाल में पहुंची. और हंगामा हो गया.

बाबा के भक्त, जो बाबा से प्रवचनों में मानवता की चाशनी चाटते थे, हिंसा का ज़हर उगलने लगे. पुलिस के साथ मारपीट पर उतारू हो गए. मीडिया के गले पड़ गए. रिपोर्टर्स पर हमला किया. उनसे माइक, कैमरा छीन लिया. आसाराम के समर्थक और पुलिस में हिंसक झड़प हुई. बड़ी जद्दोजहद के बाद पुलिस आसाराम को गिरफ्तार करने में कामयाब हुई.

आसाराम बापू.
आसाराम बापू.

बाबा पर सिर्फ यौन शोषण का ही आरोप नहीं है. उनके आश्रम द्वारा चलाए जाते स्कूल गुरुकूल में हुई बच्चों की रहस्यमयी हत्याओं के लिए भी बाबा और उनका आश्रम संदेह के घेरे में है. आशंका जताई गई थी कि इन बच्चों की हत्या काले जादू के चक्कर में की गई हैं. हालांकि आश्रम ने इंकार ही किया लेकिन आसाराम के बेटे नारायण साईं के सेक्रेटरी ने जांच कमीशन के आगे कबूला था कि उसने नारायण साईं को काला जादू करते देखा था. जब अलग-अलग आश्रम के गुरुकुलों में मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़ने लगी तो 2009 में गुजरात सरकार ने एक जांच कमीशन बनाया. इसके खिलाफ़ आसाराम के समर्थकों ने रैली निकाली. जो कि हिंसक प्रदर्शन में तब्दील हुई. पुलिस और भक्तों में जमकर संघर्ष हुआ. तकरीबन 20 पुलिसवाले घायल हुए. 200 के करीब समर्थकों को गिरफ्तार किया गया.

इसके अलावा भी आसाराम बापू का केस गुंडई की वो मिसाल है जिससे माफिया भी शरमा जाए. इस केस के कितने ही गवाह या तो मार डाले गए या उन पर जानलेवा हमले हुए. अमृत प्रजापति को मई 2014 में मार डाला गया. उसके पहले उन पर कई बार हमला भी हो चुका था. इसी तरह मुज़फ्फरनगर के रहने वाले अखिल गुप्ता को भी गोली मार दी गई.

2015 में एक और गवाह कृपाल सिंह की हत्या हुई. लखनऊ के राहुल सचान पर तो तब हमला हुआ जब वो जोधपुर कोर्ट में गवाही देने गए थे. उन्हें चाकुओं से गोदा गया लेकिन उनकी किस्मत अच्छी रही जो बच गए. पानीपत के महेंद्र चावला पर भी गोली चलाई गई जिससे वो गंभीर रूप से घायल हुए. आसाराम के खिलाफ़ केस दायर करने वाली पीड़िता के पिता को तो अनगिनत बार धमकियां मिलीं. जोधपुर के जिस होटल में वो रुके थे वहां हमला भी किया गया, लेकिन पुलिस ने उनको बचा लिया.

आसाराम बापू की रिहाई के लिए गुहार लगाते उनके भक्त.
आसाराम बापू की रिहाई के लिए गुहार लगाते उनके भक्त.

आज भी आसाराम के समर्थक उनकी रिहाई के लिए रैलियां निकालते हैं. अपने ‘बापू’ को भगवान का अवतार मानते हैं.

बाबा रामपाल

एक और संत जिनके नाम में तो राम है, लेकिन जिनके समर्थक रावण की आसुरी सेना जैसा बर्ताव करते हैं. हत्या के आरोपी बाबा रामपाल को जब पुलिस गिरफ्तार करने पहुंची, तो उनके सामने भक्तों की एक मुकम्मल सेना छाती ताने खड़ी थी. बाबा के हथियारबंद भक्तों ने, जिनमें बाबा के निजी गनमैन भी शामिल थे, आश्रम के बाहर मानव शृंखला बना ली. पुलिस ने बातचीत करने की कोशिश की और बाबा को सरेंडर के लिए मनाने की कोशिश की.

बाबा रामपाल.
बाबा रामपाल.

जवाब में रामपाल के भक्तों ने कहा कि बाबा को गिरफ्तार करने से पहले, पुलिस को उनके 1 लाख से ज़्यादा समर्थकों की लाश पर से गुज़रना होगा. बाबा भक्तों की ढाल के पीछे आश्रम में छिपे रहे. आश्रम को हज़ारों समर्थकों ने घेर रखा था. उनके पास लाठियां, डंडे, चाकू और बाकी गैर-कानूनी हथियार बहुतायत में थे. इतना ही नहीं, महिला समर्थकों की भी अच्छी खासी तादाद थी, जो संत को गार्ड करने के लिए सड़कों पर उतरी थी.

राम रहीम समर्थक इस लड़की की बात भी सुन लीजिए. देखें वीडियो

पुलिस और सुरक्षा दस्ते के हज़ारों सैनिकों ने आश्रम में एंट्री लेने की ठानी तो भीड़ ने पूरा विरोध किया. एक युद्ध सा छिड़ गया. इसे मीडिया के सदके पूरे देश ने देखा. पूरे 2 दिन लग गए फ़ोर्स को बाबा तक पहुंच पाने में. गनीमत है कि पुलिस ने होश से काम लिया. गोलीबारी नहीं की. वरना मुहावरे की ज़ुबान में नहीं, सच में ही लाशें बिछ जातीं. बुलडोज़र के सहारे आश्रम की दीवारों को ध्वस्त कर पुलिस अंदर घुसी. अंदर भी खूब विरोध हुआ. भक्तों के झुंड के हमले में करीब 28 पुलिसकर्मी बुरी तरह घायल हो गए.

लंबी जद्दोजहद और कड़े संघर्ष के बाद पुलिस हालात पर काबू पा सकी. 19 नवंबर की रात बाबा को उनके तकरीबन 500 समर्थकों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया. अबकी बार जो चार्जेस उन पर लगे उनमें मर्डर और अटेम्प्ट टू मर्डर के साथ-साथ, देशद्रोह, षड़यंत्र रचने और गैर-कानूनी हथियार रखने के चार्जेस भी थे.

बाबा रामपाल के समर्थक और पुलिस के बीच हुए हिंसक संघर्ष की कुछ तस्वीरें.
बाबा रामपाल के समर्थक और पुलिस के बीच हुए हिंसक संघर्ष की कुछ तस्वीरें.

शादियों में ढोलक बजाने वाले एक लड़के से लेकर स्वघोषित भगवान बन जाने वाले राम सिंह की कहानी अचंभित करती है.

रामवृक्ष यादव

गाज़ीपुर का रहने वाला ये शख्स 2016 में भयंकर लाइमलाइट में आ गया था. रामवृक्ष यादव एक और बाबा जयगुरुदेव का शिष्य हुआ करता था. कहते हैं 2012 में हुई उनकी मौत के बाद जब उनकी विरासत को लेकर झगड़ा खड़ा हुआ, तो उनमें से एक दावेदार रामवृक्ष यादव भी था. हालांकि बाज़ी जयगुरुदेव के एक और शिष्य पंकज यादव के हाथ लगी. अपने बचे-कुचे समर्थकों के साथ रामवृक्ष यादव के कदम मथुरा के जवाहरबाग़ पार्क में पड़े. प्रशासन की इजाज़त लेकर वहां एक प्रदर्शन आयोजित किया गया. तारीख थी 15 मार्च 2014. प्रशासन ने 2 दिन की इजाज़त दे दी. 2 दिन के लिए रुकने वाला रामवृक्ष यादव वहां पक्का ही जम गया. शुरुआत में खुद के लिए एक झोपड़ी बनाई. धीरे-धीरे समर्थकों के लिए झोपड़ियां बनीं. और फिर 270 एकड़ पर कब्ज़ा सा कर लिया. रामवृक्ष इतना ताकतवर हो गया था कि उस पर प्रशासन का भी बस नहीं चलता था.

उस रेप केस की पूरी कहानी, जिसमें गुरमीत राम रहीम फंसे हुए हैं. देखें वीडियो

पत्रिका डॉट कॉम के मुताबिक़ 2014 से लेकर 2016 तक रामवृक्ष यादव पर 10 केस दर्ज हुए. विजयपाल तोमर नामक एक याचिकाकर्ता अवैध कब्ज़े के खिलाफ़ कोर्ट गया और बवाल शुरू हुआ. कोर्ट के आदेश पर पुलिस इस जगह को ख़ाली कराने पहुंची. उधर रामवृक्ष ने अपने खेमे को किसी गिरोह जैसी शक्ल दे दी. हथियारों का ज़खीरा सा इकट्ठा कर लिया जिसमें ग्रेनेड, हथगोले, राइफल, कट्टे-तमंचे सब शामिल थे.

जब पुलिस की टीम जगह ख़ाली कराने पहुंची, तो उन पर भयानक हमला हुआ. यादव की टीम तैयार थी. पेड़ों पर चढ़ी बैठी थी. उन्होंने फायर खोल दिए, ग्रेनेड फेंके. पुलिस उस तरह के प्रतिकार के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी. एक इंस्पेक्टर और एसपी की मौत हो गई. गुस्साई पुलिस ने और फ़ोर्स मंगाई. भयंकर संघर्ष हुआ. 24 लोगों की जान चली गई. मरने वालों में खुद रामवृक्ष यादव भी शामिल था.

रामवृक्ष यादव और संघर्ष में मारे गए एसपी मुकुल द्विवेदी.
रामवृक्ष यादव और संघर्ष में मारे गए एसपी मुकुल द्विवेदी.

रामवृक्ष यादव का केस बाबागिरी प्लस राष्ट्रवाद का मिला-जुला संस्करण था. अपने गिरोह का बड़ा फैंसी नाम रखा था उसने. स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह. सुभाषचंद्र बोस को अपना आदर्श मानने वाला ग्रुप शायद पुलिस पर ग्रेनेड फेंकने को आज़ाद हिन्द सेना की कोई लड़ाई समझता होगा.

Mathura:
Mathura:

बाबा गुरमीत सिंह राम रहीम इंसां

इस शख्स से आज की तारीख में कौन वाकिफ़ नहीं. एक प्रदेश और देश की राजधानी में आग लगी हुई है. इस अकेले शख्स की बदौलत. खुद के नाम में जबरन इंसां जोड़ने वाला ये आदमी अपने भक्तों में ज़रा भी इंसानियत न भर सका. और न खुद में. इनके खिलाफ़ लगे आरोप और आपराधिक मामले कुछ यूं हैं:

# 1998 में डेरा की जीप से कुचलकर गांव बेगू के एक बच्चे की मौत हो गई थी. गांव वालों से डेरा वालों का विवाद हो गया था. इसकी खबरें छापने पर एक स्थानीय अखबार के स्टाफ को डेरा के लोग धमकाने चले गए थे.

# इसके बाद 2002 में गुरमीत राम रहीम पर आश्रम में साध्वियों के रेप का इल्ज़ाम लगा. इसी साल आश्रम के एक मैनेजर रंजीत सिंह की हत्या हुई और फिर साध्वियों के रेप की खबर छापने वाले एक अखबार के संपादक रामचंद्र छत्रपति की हत्या हो गई. हत्या के इन दोनों मामलों में राम रहीम आरोपी हैं.

# मई 2007 में बठिंडा के डेरा सलावतपुरा में राम रहीम ने सिख गुरु गोबिंद सिंह जैसे कपड़े पहनकर तस्वीरें खिंचवाईं. इन तस्वीरों के अखबारों में छपने से सिख आहत हुए. पंजाब और दूसरी जगहों पर सिखों और डेरे के अनुयायियों में टकराव हुआ. डेरे के एक प्रेमी की चलाई गोली से एक सिख लड़के कोमल सिंह की मौत हो गई. इसके बाद पंजाब में राम रहीम की गिरफ्तारी के लिए काफी प्रदर्शन हुए थे.

# 2010 में डेरा के ही पूर्व साधु राम कुमार बिश्नोई ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर डेरा के पूर्व मैनेजर फकीरचंद की गुमशुदगी की सीबीआई जांच की मांग की. बिश्नोई का आरोप था कि डेरा प्रमुख के आदेश पर फकीरचंद की हत्या कर दी गई. इस मामले में भी उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश दिए. बौखलाए डेरा प्रेमियों ने हरियाणा, पंजाब व राजस्थान में एक साथ सरकारी सम्पति को नुकसान पहुंचाया. सीबीआई जांच के दौरान मामले में सुबूत नहीं जुटा पाई और क्लोज़र रिपोर्ट फाइल कर दी. बिश्नोई ने उच्च न्यायालय में क्लोज़र को चुनौती दे रखी है.

# 17 जुलाई, 2010 को फतेहाबाद के रहने वाले हंसराज चौहान (पूर्व डेरा साधु) ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर राम रहीम पर पर डेरा के 400 साधुओं को नपुंसक बनाने का आरोप लगाया. 

आज राम रहीम को कोर्ट ने दोषी माना है. और तुरंत बाद सड़कों पर समर्थकों का नंगा नाच शुरू हो गया. दर्जन भर से ज़्यादा लोग अब तक मर चुके हैं. बाबा के भक्तों की पुलिस से झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी और आंसूगैस के गोले छोड़ने पड़े. न्यूज चैनल आज तक की ओबी वैन में आग लगा दी गई और इसके पत्रकारों पर हमला किया गया. एक कैमरामैन को पत्थर मारकर घायल कर दिया गया. हरियाणा और पंजाब में कई सरकारी ऑफिस और पावर हाउस को आग के हवाले कर दिया गया. गाड़ियों के साथ तोड़-फोड़ की गई. हालात ऐसे हैं कि पूरे हरियाणा में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. पंचकुला समेत कई जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है.

गुरमीत राम रहीम.
गुरमीत राम रहीम.

ऐसे बाबाओं की कारगुजारियां तो शर्म का बायस हैं ही, इनके समर्थकों का अक्ल गिरवी रख देना बेहद दुखद नज़ारा है. जस्टिस काटजू की बात पर यकीन करने का मन करता है.

वीडियो देखें:

 


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