Submit your post

Follow Us

मैंने गिरीश कर्नाड को 'टाइगर' सीरीज़ की फिल्मों से जाना

497
शेयर्स

10 जून, 2019 को बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार गिरीश कर्नाड की डेथ हो गई. वो राइटर, एक्टर, डायरेक्टर, नाटककार और सामाजिक मसलों पर खुलकर अपनी बात रखने और उसके लिए खड़े होने के लिए जाने जाते थे. आपने जो लाइन ऊपर पढ़ी, उससे आपके ज्ञान में कुछ ज़्यादा वृद्धि नहीं हुई. लेकिन अगर इस आर्टिकल के इंट्रो में हम सिर्फ एक्टर लिख देते, तो गिरीश कर्नाड की तौहीन हो जाती है. अगर किसी खबर में ये सारी बातें नहीं लिखीं, तो ये समझें कि उसे लिखने वाला निरा बावला है. तिस पर अगर आपने ‘टाइगर ज़िंदा है’ से गिरिश कर्नाड को कनेक्ट कर दिया, तब तो भइया आफत है. क्योंकि इस हेडिंग से ये खबर हज़ारों ऐसे लोगों तक पहुंच जाएगी, जिन्होंने ‘मंथन’ या ‘निशांत’ जैसी सार्थक फिल्में नहीं देखी हैं. इसलिए उन्हें गिरीश कर्नाड को जानने का हक नहीं है.

मेरी उम्र 22-23 साल है. मैं एक मीडिया कंपनी में काम करता हूं. वो भी सिनेमा सेक्शन में. फिल्में देखनी बस शुरू भर की हैं. मैंने पहली बार गिरीश कर्नाड को ‘एक था टाइगर’ में रॉ चीफ डॉ. शेनॉय के कैरेक्टर में नोटिस किया था. वहां से मेरे दिमाग में ये सवाल कौंधा कि ये आदमी कौन है और इसे मैंने पहले क्यों नहीं देखा. इसके बाद मैंने प्रोफेसर गूगल की मदद से इनसे जुड़ी जानकारियां इकट्ठी की. इतनी भारी-भरकम प्रोफाइल देखने के बाद मैं थोड़ा ठिठक गया. लगने लगा कि यार ऐसे आदमी के बारे में तो मुझे और विस्तार से पता होना चाहिए. मैंने उनकी फिल्में देखनी शुरू की. हिंदी भाषा में बनी ‘निशांत’, ‘मंथन’, ‘डोर’ और ‘इकबाल’ जैसी फिल्में. लिटरेचर नहीं पढ़ा है, इसलिए उस बारे में ज़्यादा ज्ञान नहीं बघारूंगा.

गिरीश कर्नाड अपने सोशियो-पॉलिटिकल नाटकों के लिए जाने जाते थे.
गिरीश कर्नाड अपने सोशियो-पॉलिटिकल नाटकों के लिए जाने जाते थे.

फिर आई विवादों की बारी. एफटीआईआई (Film And Television Institute of India) चेयरमैन पद से इस्तीफा देने से लेकर, बाबरी मस्जिद को गिराने का विरोध करना, मुस्लिमों के प्रति घृणा का भाव रखने वाले बुकर प्राइज़ विजेता राइटर वी.एस. नायपॉल को गरियाने से लेकर नरेंद्र मोदी को सत्ता से बाहर रखने के लिए साइन किए गए पीटिशन तक. इतना सब जानने के बाद ये आदमी हमें ठीक लगने लगा. उनके लिखे नाटकों को भी देखने की इच्छा होने लगी. मैं इतनी सारी बातों की मदद से ये बताना चाहता हूं कि गिरीश कर्नाड से मेरा पहला परिचय ‘एक था टाइगर’ से हुआ था. उस चीज़ ने मेरे भीतर गिरीश कर्नाड को जानने के लिए उत्सुकता जगाई. और ये चीज़ मेरे लिए फायदेमंद साबित हुई. मुझे एक ढंग की पर्सनैलिटी को जानने का मौका मिला. और क्लैरिटी ये आई कि गिरीश कर्नाड को सिर्फ सलमान खान के साथ फिल्म करने की वजह से ही नहीं जाना जाना चाहिए.

नाक में पाइप लगे होने के बावजूद गले में 'मैं भी अर्बन नक्सल' का तख्ता लटकाए अपना विरोध दर्ज करवाते गिरीश कर्नाड.
नाक में पाइप लगे होने के बावजूद गले में ‘मैं भी अर्बन नक्सल’ का तख्ता लटकाए अपना विरोध दर्ज करवाते गिरीश कर्नाड.

गिरीश कर्नाड की डेथ पर उन्हें ‘टाइगर ज़िंदा है’ से जोड़ना पूरी तरह से कमर्शियल मानसिकता है. ये एरर ऑफ जजमेंट भी हो सकता है. अगर हमें सचिन के बारे में बात करनी होगी, तो हम उन्हें मुंबई इंडियंस के मेंटर के रूप में बिलाशक याद नहीं करना चाहेंगे. जो सारा विवाद शुरू हुआ वो सलमान खान की फिल्म से शुरू हुआ. इसलिए उनका एक एग्जांपल लेकर इस मामले को थोड़ा और साफ करने की कोशिश करते हैं. सलमान के करियर में ‘साजन’ जैसी फिल्म भी हैं, इसलिए हम उन्हें ‘सावन’ जैसी फिल्म से याद नहीं करना चाहेंगे. लेकिन हम अगर ‘सावन’ से उन्हें याद करते हैं, तो इसमें उनकी कोई बेइज्ज़ती नहीं है. क्योंकि फिल्में तो दोनों उन्हीं की हैं. क्या पता गिरीश कर्नाड के जाने के बाद ‘टाइगर ज़िंदा है’ की वजह से लोगों को ‘ययाति’, ‘तुग़लक’, ‘तेल डंडा’ और ‘नगरमंडला’ जैसे नाटकों के बारे में पता चले. हालांकि ये कंज़्यूमरिज़्म है, लेकिन इसमें आर्टिस्टिक फील भी है. क्योंकि इस हेडिंग की वजह से हम ढूंढ़कर कुछ पढ़ रहे हैं.

आप ‘टाइगर’ सीरीज़ की दो फिल्मों में गिरीश कर्नाड को देख चुके हैं. अच्छी बात है. अब हम आपको वो परफॉर्मेंसेज बताते हैं, जो गिरीश कर्नाड को बतौर कलाकार और बेहतर तरीके से समझने में आपकी मदद करेंगी:

1) संस्कार (1970)– ये फिल्म गांव के दो लोगों के बारे में भी थी. पहला जो अपनी धर्म-जाति में गहरी आस्था रखता है और उसे बचाने के लिए किसी हद तक जा सकता है. वहीं दूसरा आदमी भी उसी जाति का है लेकिन वो खुद इन सभी बंधनों से मुक्त रखता है. उसके जी में जो आता है, वो करता है. मांस-मच्छी खाता है, वेश्यालय जाता है. कुछ दिनों बाद उसी मौत हो जाती है. गांव के लोग उसका अंतिम संस्कार नहीं करना चाहते क्योंकि उसे छूने से उनका धर्म भी भ्रष्ट हो जाएगा. साथ ही उसे अपनी जाति से बाहर के किसी व्यक्ति से भी उसका संस्कार नहीं करवाना चाहते. ये फिल्म इसी द्वंद्व की मदद से जाति व्यवस्था पर कटाक्ष करती है. फिल्म में गिरीश कर्नाड अपनी जाति में गहरी आस्था रखने वाले व्यक्ति प्रणेशाचार्य के रोल में थे. साथ ही इसका स्क्रीनप्ले भी उन्होंने ही लिखा था. पत्ताभिराम रेड्डी डायरेक्टेड कन्नड़ भाषा की इस फिल्म को साउथ में पैरलल सिनेमा की शुरुआत करने वाली फिल्म माना जाता है. रिलीज़ के साल इसे बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला था.

2) निशांत (1975)- ये फिल्म भारत की आज़ादी के ठीक बाद एक गांव में घटती है. और इसमें गांवों में फैले इलीटिज़्म यानी ऊंची जाति, पावर और पैसे वाले लोगों की धौंस दिखाई जाती है. साथ में ये भी बताया जाता है कि कैसे महिलाएं तब के भारत में उपभोग की वस्तु के अलावा कुछ और नहीं समझी जाती थीं. अब जब इन दोनों मसलों को जोड़ेंगे, तो फिल्म की कहानी बनती है. गांव में एक नया स्कूल मास्टर आया है. उसकी पत्नी गांव के ज़मींदार के छोटे भाई को भा जाती है. ज़मींदार के लोग उसे घर से उठाकर ले जाते हैं और मास्टर कुछ नहीं कर पाता. लेकिन बाद में वो गांव के लोगों को इकट्ठा करता है और उनसे बदला लेता है. जो मॉब लिंचिंग पिछले कुछ सालों से इंडिया में चर्चा का विषय बनी हुई है, श्याम बेनेगल ने उसे आज से 44 साल पहले दिखा दिया था. गिरीश ने फिल्म में मजबूर स्कूल मास्टर और पति का रोल किया था. इस फिल्म को भी बेस्ट हिंदी फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला था. साथ ही इसे प्रतिष्ठित कान फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म के लिए भी नॉमिनेट किया गया था.

3) मंथन (1976)– ये फिल्म श्वेत क्रांति के ऊपर बेस्ड थी. इसमें गिरीश ने जानवरों के डॉक्टर का रोल किया था, जो गांव के किसानों को दूध की सही कीमत दिलवाना चाहता है. और इसके लिए उसे गंवई पॉलिटिक्स, जाति व्यवस्था और गांव के लोगों में एक-दूसरे पर विश्वास की कमी से लड़ना पड़ता है. फिल्म में गिरीश के किरदार को श्वेत क्रांति के पिता माने जाने वाले वर्गीज़ कुरियन से प्रेरित बताया जाता रहा है. ये फिल्म पूरी तरह से क्राउडफंडिंग से बनी थी. इस फिल्म को बनाने के लिए पांच लाख किसानों ने 2-2 रुपए का चंदा दिया था. श्याम बेनेगल डायरेक्टेड इस फिल्म को बेस्ट स्क्रीनप्ले (विजय तेंडुलकर) और बेस्ट हिंदी फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला था. साथ ही इसे ऑस्कर में बेस्ट फॉरन फिल्म कैटेगरी में इंडिया की ओर से ऑफिशियल एंट्री के तौर पर भी भेजा गया था.

4) मालगुडी डेज़ (1987) (सीरीज)- ये टीवी सीरीज़ आर.के. नारायण की शॉर्ट स्टोरी कलेक्शन वाली किताब ‘मालगुडी डेज़’ पर बेस्ड थी. गिरीश कर्नाड ने इस सीरीज़ के 9 एपिसोड्स में कहानी के मुख्य पात्र स्वामी (वी.एस स्वामिनाथन) के पिता वी.टी. श्रीनिवासन का किरदार निभाया था. इस सीरीज़ में उनके काम से वो टीवी देखने वाली जनता के बीच पहुंचे और खूब पसंद किए गए.

5) उंबरठा (1982)– ये फिल्म एक महिला (स्मिता पाटिल) के बारे में थी, जो अपने घर और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों की चारदीवारी से निकलकर महिलाओं की बेहतरी के लिए काम करना चाहती है. उसे महिला सुधार गृह में काम करने का मौका मिलता है और वो उसे दोनों हाथों से लपक लेना चाहती है. लेकिन उसका वकील पति और उसकी सास उसे ऐसा करने से रोकती है. तमाम बाधाओं को पारकर वो अपने सपने तक पहुंच जाती है. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती है. वो सिर्फ सपना पूरा नहीं करती, वो काम भी करती है, जिसके लिए वो अपनी उंबरठा (चौखट) से निकलना चाहती थी. इस फिल्म में गिरीश कर्नाड ने रूढ़िवादी मानसिकता से जूझ रहे पति का रोल किया था. और इसके लिए उन्हें तमाम शोहरत भी मिली थी. मराठी भाषा की इस फिल्म को बेस्ट मराठी फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला था.

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

KBC क्विज़: इन 15 सवालों का जवाब देकर बना था पहला करोड़पति, तुम भी खेलकर देखो

आज से KBC ग्यारहवां सीज़न शुरू हो रहा है. अगर इन सारे सवालों के जवाब सही दिए तो खुद को करोड़पति मान सकते हो बिंदास!

क्विज: अरविंद केजरीवाल के बारे में कितना जानते हैं आप?

अरविंद केजरीवाल के बारे में जानते हो, तो ये क्विज खेलो.

क्विज: कौन था वह इकलौता पाकिस्तानी जिसे भारत रत्न मिला?

प्रणब मुखर्जी को मिला भारत रत्न, ये क्विज जीत गए तो आपके क्विज रत्न बन जाने की गारंटी है.

ये क्विज़ बताएगा कि संसद में जो भी होता है, उसके कितने जानकार हैं आप?

लोकसभा और राज्यसभा के बारे में अपनी जानकारी चेक कर लीजिए.

संजय दत्त के बारे में पता न हो, तो इस क्विज पर क्लिक न करना

बाबा के न सही मुन्ना भाई के तो फैन जरूर होगे. क्विज खेलो और स्कोर करो.

बजट के ऊपर ज्ञान बघारने का इससे चौंचक मौका और कहीं न मिलेगा!

Quiz खेलो, यहां बजट की स्पेलिंग में 'J' आता है या 'Z' जैसे सवाल नहीं हैं.

कर लिया योगा? अब क्विज खेलने से होगा

आन्हां, ऐसे नहीं कि योग बस किए, दिखाना पड़ेगा कि बुद्धिबल कित्ता बढ़ा.

रोहित शेट्टी के ऊपर ऐसी कड़क Quiz और कहां पाओगे?

14 मार्च को बड्डे होता है. ये तो सब जानते हैं, और क्या जानते हो आके बताओ. अरे आओ तो.

परफेक्शनिस्ट आमिर पर क्विज़ खेलो और साबित करो कितने जाबड़ फैन हो

आज आमिर खान का हैप्पी बड्डे है. कित्ता मालूम है उनके बारे में?

चेक करो अनुपम खेर पर अपना ज्ञान और टॉलरेंस लेवल

अनुपम खेर को ट्विटर और व्हाट्सऐप वीडियो के अलावा भी ध्यान से देखा है तो ये क्विज खेलो.