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जब फ्लिंटॉफ की गाली से भिन्नाए युवराज सिंह ने 6 गेंदों पर 6 छक्के टांग दिए थे

19 सितंबर 2007. पहला वर्ल्ड टी-20. किन्ग्स्मीड, डर्बन. टी-20 के इतिहास का चालीसवां मैच. कुछ दिन पहले ही टी-20 इंटरनेशनल के इतिहास की पहली सेंचुरी मारी गयी थी. इसी वर्ल्ड टी-20 के दौरान. क्रिकेट के इस सबसे छोटे फॉरमैट के बारे में अभी भी हर कोई उतना श्योर नहीं था. इसे अभी भी एक एक्सपेरिमेंट की निगाह से ही देखा जा रहा था. इस लिहाज़ से इतनी फुर्ती में टी-20 का वर्ल्ड कप ऑर्गनाइज़ करवा देना एक रिस्क उठाने जैसा ही था.

मगर उस दिन इन सभी बातों को किनारे रख 2 टीमें मैदान में उतरीं. एक दूसरे को पछाड़ने की मंशा लिये हुए. इंडिया और इंग्लैंड. इंडिया की नयी, अधकच्ची, बिना बड़े नाम की एक टीम जिसके कई चेहरों को पहली बार ‘सीरियस’ क्रिकेट खेलते हुए देखा जा रहा था. और इंग्लैंड, जहां टी-20 क्रिकेट का चलन शुरू हुआ. जहां असल में क्रिकेट का ही चलन शुरू हुआ था. इंडिया ने टॉस जीता और नए नवेले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने पहले बैटिंग करने की सोची. पिच बैटिंग के लिए मुफ़ीद लग रही थी.

सहवाग और गंभीर ओपेनिंग को उतरे. जिमी एन्डरसन, स्टुअर्ट ब्रॉड, एंड्रू फ़्लिंटॉफ़ और दिमित्री मैस्केरेंह्स के शुरुआती ओवरों को गंभीर और सहवाग ने शांति से निपटाया. शुरुआत में तो सहवाग शांत लग रहे थे. लेकिन फिर उन्होंने भी हाथ घुमाये. 22 गेंद में 15 रन बनाने वाले सहवाग ने 38 गेंद में पचासा ख़तम किया. क्रिस ट्रेमलेट को बिना बात के मारा जा रहा था. सहवाग उसके लिए किसी भी तरह का रहम नहीं दिखा रहे थे. ट्रेमलेट को सहवाग ने 10 गेंदों में 15 रन मारे. ट्रेमलेट की ही गेंद पर वो आउट हुए. 52 गेंद में 68 रन बनाकर आउट हुए. गंभीर और सहवाग की पार्टनरशिप 136 रनों की बनी. पहले विकेट के लिए आज तक ये इंडिया के लिए सबसे बड़ी पार्टनरशिप बनी हुई है.

sehwag gambhir

सोलहवें ओवर में 41 गेंदों पर 58 रन बनाकर गंभीर भी आउट हुए. सत्रहवें में उथप्पा भी चल पड़े. अब आना हुआ युवराज सिंह का. धोनी पहले से ही उनका इंतज़ार कर रहे थे. यहां ज़रूरी है कि एक बार पूरी स्थिति को समझ लिया जाए. इंडिया 155 रन पर 3 विकेट बना चुका था. 20 गेंदें फेंकी जानी बची थीं. फ़्लिंटॉफ़ और स्टुअर्ट ब्रॉड के ओवर बचे थे. ये दोनों टी-20 मैचों के आखिरी ओवर फेंकने में उस्ताद माने ही जाते हैं.

युवराज की पहली खेली गेंद डॉट गयी. युवराज अभी क्रीज़ पर आये थे और उन्हें सेटल होने का वक़्त चाहिए था. लेकिन यहां गेंदें ही इतनी कम बची थीं कि वक़्त नहीं था. दूसरी गेंद, कवर्स के ऊपर ड्राइव और चार रन. ओवर खतम. अब 18 गेंदें बची थीं. इंडिया 159 पर 3 विकेट.

फ़्लिंटॉफ़ गेंद पकड़ते हैं. यहां ये भी जाना जाए कि फ़्लिंटॉफ़ को चोट लगी हुई थी. उनके पैर की मसल खिंची हुई थी. धोनी को पहली गेंद. एक रन. अगली गेंद युवराज को, 1 रन. एक बूढ़ा शेर. जो ज़ख़्मी भी है, अपने जंगल को बचाने की खातिर डटा हुआ था. नये शिकारी उससे पार पाने की फ़िराक में थे. उसकी गद्दी हथियाने को बेचैन थे. पहली तीन गेंदों में मात्र तीन रन आये. फ़्लिंटॉफ़ लंगड़ा के चल रहे थे. लेकिन रन नहीं लीक कर रहे थे. मगर युवराज भी बस उस एक सांक की तलाश में थे जिससे हवा उनके फेफड़ों तक पहुंच पाती. और वो सांक मिली उसी ओवर की चौथी गेंद पर.

फ़्लिंटॉफ़ ने पहले तो कसी बॉलिंग की मगर बाद में एक बड़ी गलती कर दी.
फ़्लिंटॉफ़ ने पहले तो कसी बॉलिंग की मगर बाद में एक बड़ी गलती कर दी.

एक हाफ़ वॉली, पॉइंट के ऊपर से चार रन. बल्ले से जो आवाज़ आई वो स्टेडियम के पार्किंग लॉट में बैठे सिक्योरिटी इंचार्ज को कन्फ्यूज़ कर गयी. उसे लगा कि कहीं किसी गाड़ी का कांच टूटा है. ओवर की पांचवीं गेंद. पटकी हुई गेंद. फ़्लिंटॉफ़ युवराज को मौका नहीं देना चाहते थे. वो चोटिल थे लेकिन हारे नहीं थे. लेकिन युवराज उस दिन किसी और ही मौज में थे. गेंद के नीचे आकर हुक कर दिया. साउथ अफ्रीका के आसमान में सेंध मार दी. गेंद को नीच उतरने में कुछ वक़्त लगा. बाउंड्री के ठीक पहले गिरी, चार रन. आखिरी गेंद, और एक सिंगल. ओवर में देखते ही देखते कुल 12 रन आ गये. अब बारह गेंदें बची हुई थीं.

लेकिन इसी बीच वो हुआ जिसे फ़्लिंटॉफ़ भूल जाना चाहेंगे. फ़्लिंटॉफ़ को अगर टाइम मशीन दे दी जाए तो वो यकीनन समय में वापस जाकर युवराज से हुई कहा-सुनी को बदल देना चाहेंगे. आज तक न युवराज ने और न ही फ़्लिंटॉफ़ ने ये बताया है कि दोनों के बीच उस दिन वहां उन्नीसवें ओवर के ठीक पहले आखिर बात क्या हुई, लेकिन युवराज इस बात पर जोर देते हैं कि वो दोनों मैदान के बाहर अच्छे दोस्त हैं. पर मैदान के अन्दर ये सब चलता है. माइक पर डेविड लॉइड कहते हैं “I wouldn’t bother Yuvraj if I was you.” वो सही थे. उन्हें पहले ही कुछ चीज़ों का आभास हो चुका था. शायद. राज़ फ़िल्म के आशुतोष राणा की तरह.

इंडिया की इनिंग्स का उन्नीसवां ओवर. स्टुअर्ट ब्रॉड अपने रन अप पर. कमेंट्री बॉक्स में रवि शास्त्री उतने ही मुस्तैद जितना नॉन-स्ट्राइकिंग एंड पर एम. एस. धोनी.

स्टुअर्ट ब्रॉड का बुरा सपना शुरू होने वाला था.
स्टुअर्ट ब्रॉड का बुरा सपना शुरू होने वाला था.

पहली गेंद.

लम्बी फ़ेंकी गेंद. बल्ले के आगे. लेग स्टंप की लाइन में. युवराज ने लेग साइड में रूम बनाया और गेंद के टप्पे पर बल्ले को सटा दिया. हाथों की पूरी ताकत उस शॉट में झोंक दी गयी थी. गेंद आसमान में चलती जा रही थी. वापस आने के मूड में नहीं थी. कम से कम उस रात तो नहीं. ये शॉट कम एक तमाचा ज़्यादा था. स्टुअर्ट ब्रॉड को ये बताना था कि आखिर ऐसे समय में जब इनिंग्स खात्मे की ओर है तब ऐसी जगह पर गेंद फेंकने की ज़ुर्रत भी कैसे की. पहली गेंद और छह रन. युवराज 20 रन, सात गेंद में.

दूसरी गेंद.

पहली और दूसरी गेंद के बीच में कुछ वक़्त लगा. पहली गेंद पर मारा गया शॉट गेंद को स्टेडियम के बाहर तक ले गया था. युवराज के पैरों की लाइन में आती गेंद. इस बार लेंथ कुछ छोटी. बिना रूम बनाये एक फ्लिक. ऐसे कि ब्रॉड को घर चले जाने को कह रहे हों. कलाइयों का इससे ज़्यादा इस्तेमाल बैटिंग में तो नहीं ही किया जा सकता था. बॉल एक लूप बनाते हुए बैकवर्ड स्क्वायर लेग की बाउंड्री के पार गिरी. कैमरा फ़्लिंटॉफ़ को दिखा रहा था. वो अपना सर हिला रहे थे. अविश्वास में. दूसरी गेंद और छह रन. युवराज 26 रन, आठ गेंद में.

गेंद को बार-बार बाउंड्री पार से वापस लाना पड़ रहा था.
गेंद को बार-बार बाउंड्री पार से वापस लाना पड़ रहा था.

तीसरी गेंद.

पहली गेंद की तरह ही दूसरी गेंद को वापस लाने में टाइम लग गया. युवराज बल्ले पर हीरो होंडा का स्टिकर चमकाये बल्ले को गदे जैसा घुमा रहे थे. गेंद के लौट आने तक. तीसरी गेंद. लोवर फ़ुलटॉस. इस बार ब्रॉड ने अपनी लाइन ठीक करने की कोशिश की. ऑफ स्टंप के कुछ बाहर. वो शायद ऑफ स्टम्प के बाहर यॉर्कर फेंकना चाह रहे थे. गेंद हवा में थी. इस बार छक्के पर एक संशय लग रहा था. “This is in the air again. Clears long on. Three in a row.” रवि शास्त्री की आवाज़ आ रही थी. दाहिना पैर रास्ते से हटाकर बल्ले को फ़ुल स्विंग करने देने के लिए युवराज की टेक्नीक पूरी तरह सही थी. गेंद बाउंड्री के पार पहुंची. तीसरी गेंद और छह रन. युवराज 32 रन, नौ गेंद में.

yuvraj

चौथी गेंद.

इस बार गेंद को वापस आने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगा. ब्रॉड के चेहरे पर हताशा साफ़ दिख रही थी. स्टेडियम में शोर अपने चरम पर. ब्रॉड फिर से दौड़ पड़े. इस बार राउंड द विकेट. लेंथ यॉर्कर रखने के चक्कर में और साथ ही पेस रखने के चक्कर में गेंद फुलटॉस हो गयी. ऑफ स्टम्प के बाहर. युवराज के लिए मुफ़्त का माल. सिर्फ सही टाइम करना था. पॉइंट के ऊपर से छह रन. चार छक्के लगातार. बॉलिंग कोच वेंकटेश प्रसाद बाउंड्री के पार खड़े तालियां पीट रहे थे. हिन्दुस्तानी गांवों में ऐसे कामों पर बताशे बांटे जाते थे. ये एक अलग गांव था. यहां ज़मीन विदेशी थी. लेकिन कर्मकांड हिन्दुस्तानी रीति-रिवाज़ से हो रहे थे. एक पंजाबी की चल रही थी. और वो धूम मचा रहा था. चौथी गेंद और फिर छह रन. युवराज 38 रन, 10 गेंद में. 

पांचवीं गेंद.

सैकड़ों रीप्ले दिखने के बाद ब्रॉड फिर से अपने रनअप पर खड़े दिखे. पॉल कॉलिंगवुड कप्तान होने के नाते ब्रॉड से कुछ कहते हैं. हालांकि दोनों ही एक दूसरे जितने लाचार थे. कॉलिंगवुड उन्हें किस चैनल में गेंद फेंकना ही समझा रहे थे. ब्रॉड फिर से ओवर द विकेट गेंद फेंकने को आते हैं. गुड लेंथ के आस-पास पड़ी गेंद. पैरों की लाइन में. युवराज घुटने पर बैठ जाते हैं. बल्ला आड़ा चला दिया. गेंद हवा में टंग गयी. बकौल युवराज सिंह, वो गेंद मिस-टाइम हो गयी थी. लेकिन हमारे लिए नहीं. हमारे लिए वो फिर से एक छक्का था. गेंद घंटों हवा में टंगी रहने के बाद तड़ाक की एक आवाज़ के साथ बाउंड्री से टकराई. पांच में पांच. पांचवीं गेंद और फिर छह रन. युवराज 44 रन, 11 गेंद में.

छठी गेंद.

ब्रॉड मुस्कुरा रहे थे. युवराज ने पांचवां छक्का मैस्केरेंह्स के सर के ऊपर से मारा था. वही मैस्केरेंह्स जिसने युवराज को ओवल में पांच छक्के मारे थे. युवराज ने एक कदम आगे रहने का मन बनाया हुआ था. ब्रॉड की लम्बी गेंद. पहली गेंद से कुछ छोटी पर फिर भी बल्ले की रेंज में. वाइड मिड ऑन के ऊपर से छह रन. मैस्केरेंह्स के पांच छक्के भुलाए जा चुके थे. स्टुअर्ट ब्रॉड ज़मीन के फटने का इंतज़ार कर रहे थे. फ़्लिंटॉफ़ खुद को कोस रहे थे. “Six sixes in an over.” तमाम चीजों के चांद से दिखने के बाद ये पहली दफ़ा ऐसा हुआ था कि कोई आवाज़ चांद पर सुनाई दी हो. रवि शास्त्री की वो आवाज़. युवराज सिंह धोनी के पास पहुंचे हंसते हुए उनके ग्लव्स पर वार किया. और फ़्लिंटॉफ़ को संबोधित करते हुए कुछ सुविचार उचारे. छठी गेंद और फ़िर फ़िर छह रन. युवराज 50 रन, 12 गेंदों में.टी-20 की सबसे तेज़ हाफ़ सेंचुरी.

yuvraj

कुछ दो घंटे बाद मैच का नतीज़ा इंडिया के ही पक्ष में रहा. स्टुअर्ट ब्रॉड और युवराज सिंह एक दूसरे से बातचीत करते नज़र आये. फ़्लिंटॉफ़ भी युवराज से मिले. मैदान से शुरू हुआ सब कुछ मैदान पर ही रख दिया गया. लेकिन 19 सितम्बर की तारीख, स्टुअर्ट ब्रॉड और युवराज सिंह के इस इतिहास के साथ ख़त्म हुई. इन छह गेंदों के लिए जितना शुक्रिया हमें युवराज को कहना चाहिए, उतना ही शुक्रिया उन्हें उकसाने के लिए फ़्लिंटॉफ़ को कहना चाहिए.


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