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अपनी नेशनल टीम के प्रेम में इस हद तक जा सकते हैं आप?

साल 2002 की 30 जून. साउथ कोरिया और जापान में हुए FIFA वर्ल्ड कप का फाइनल. ब्राज़ील और जर्मनी की टीमों को देखने के लिए पूरी दुनिया बेताब थी. दुनियाभर के लोग नए वर्ल्ड चैंपियन के दर्शनों को लालायित थे. लेकिन इधर भारत के छोटे से पड़ोसी देश भूटान का माहौल अलग था. यहां के लोग इस फाइनल से कहीं ज्यादा इंतजार उस मैच का कर रहे थे, जिसे बाकी दुनिया कोई महत्व ही नहीं देती. इस मैच को नाम दिया गया – द अदर फाइनल.

यह आधुनिक फुटबॉल का पहला मैच था, जिसकी पहल किसी देश या संस्था ने नहीं, बल्कि दो आम लोगों ने की थी. योहान क्रैमर और मथायस डे यॉन्ग नाम के दो डच नागरिकों ने. इसी नाम पर बनी डॉक्यूमेंट्री के मुताबिक, यह दोनों फिल्ममेकर और जबरा फुटबॉल फैन थे. अपनी टीम, नीदरलैंड्स को फुटबॉल खेलते देखने के लिए एशिया आने के लिए बरकरार थे. लेकिन नीदरलैंड्स तो वर्ल्ड कप के लिए क्वॉलिफाई ही नहीं कर पाया.

# नेक्स्ट लेवल की सोच

किसी भी सच्चे प्रेमी की तरह इन्हें भी झटका लगा. ऐसे झटकों में हम अक्सर सोचते हैं कि हमारी टीम इतनी खराब कैसे हो सकती है? और फिर मन मारकर हम वर्ल्ड कप में किसी और देश को सपोर्ट करने का फैसला कर लेते हैं. लेकिन इनने जो सोचा, वो नेक्स्ट लेवल था. इन दोनों ने इंटरनेट पर FIFA की ताजा रैंकिंग खोजी, देखा सबसे नीचे कौन से देश हैं और फिर शुरू कर दी कोशिशें इन दोनों के बीच मैच कराने की.

उस वक्त फीफा रैंकिंग में सबसे नीचे थी मोंटसेराट और उसके ठीक ऊपर था भूटान. इन्होंने 2002 FIFA वर्ल्ड कप फाइनल वाले दिन ही इन दोनों टीमों के बीच मैच कराने का सोचा. यह आइडिया सबसे पहले दिसंबर 2001 में आया. इस बारे में फीफा डॉट कॉम से बात करते हुए क्रैमर ने कहा,

‘मैंने सोचा कि भूटान और मोंटसेराट दो ऐसे देश थे, जिनके बीच कुछ भी कॉमन नहीं था. यह कितना मज़ेदार होगा, अगर ये दोनों एक-दूसरे के खिलाफ खेलें.’

बस, इन दोनों ने तुरंत भूटान और मोंटसेराट की फुटबॉल फेडरेशंस को फैक्स कर दिया. फैक्स क्यों किया? क्योंकि इन देशों में इंटरनेट वैसे ही था जैसे आजकल कॉमनसेंस है- ढूंढे ना मिलती. क्रैमर ने इस बारे में कहा,

‘मोंटसेराट ने तुरंत ही जवाब दे दिया, जबकि भूटान से जवाब आने में ही तीन हफ्ते लग गए.’

अब यह मैच एक डॉक्यूमेंट्री में भी बदलने को तैयार था. क्रैमर के साथी डे यॉन्ग ने इसे प्रोड्यूस करने का फैसला किया. भूटान में उनके कुछ कॉन्टैक्ट्स थे. दरअसल डे यॉन्ग ने बौद्ध धर्म अपना रखा था और वह पहले भी भूटान यात्रा कर चुके थे. उनकी पुरानी यात्रा में बने कॉन्टैक्ट्स ने उनकी काफी मदद की और चीजों ने थोड़ी स्पीड पकड़ी.

दोनों देश मैच के लिए तैयार हो गए. लेकिन समस्या ये थी कि ये दोनों ही एक-दूसरे को नहीं जानते थे. मोंटसेराट के प्लेयर्स ने अपनी लोकल लाइब्रेरी की मदद ली. उन्होंने एटलस और एनसाइक्लोपीडिया में भूटान को खोजा. इस तरह उनका परिचय उस देश से हुआ, जिसके साथ उन्हें जल्दी ही खेलना था. सारी तैयारियों के बाद आई असली चुनौती. मोंटसेराट में हाल ही में हुए ज्वालामुखी विस्फोट को देखते हुए मैच कराने की जिम्मेदारी मिली भूटान को.

भाईसाब मोंटसेराट का भूटान आना ही एक जंग जैसा था. टीम अपने घर से निकली और पहले पहुंची एंटीगा वहां से सेंट मार्टिन फिर कुराकाओ फिर एम्सटर्डम फिर बैंकॉक, बैंकॉक से कोलकाता और कोलकाता से फाइनली थिम्पू.

# दिल जीत लिया

FIFA ने जल्दबाजी में मैच के लिए इंग्लिश रेफरी स्टीव बेनेट को भेजा. इसके साथ ही इस मैच को ऑफिशल फ्रेंडली का दर्जा भी मिल गया. अर्थात इससे टीमें रैंकिंग पॉइंट कमा सकती थीं. फिर आया मैच का दिन.

थिम्पू के चांग्लिमिथांग स्टेडियम में टीमें जुटीं. बताते हैं कि इस मैच को देखने के लिए भूटान की राजधानी थिम्पू की आधी आबादी पहुंच गई थी. भूटान ने जल्दी ही अपने कैप्टन वांगे दोर्जी के हैडर के जरिए लीड ले ली. मोंटसेराट मैच में पिछड़ने लगी और यह फैंस को पसंद नहीं आया. क्रैमर ने इस बारे में कहा था,

‘थिम्पू की आधी आबादी मैच देखने आ गई थी. सेकंड हाफ में जो हुआ, वो कमाल था. भूटान जीत रहा था, लेकिन ऑडियंस इससे खुश नहीं थी, क्योंकि शायद एक बौद्ध के रूप में उनके दिमाग में कुछ ऐसा था कि इसमें किसी को नहीं जीतना चाहिए. उनके लिए ड्रॉ इस मैच का बेस्ट रिजल्ट होता, इसलिए उन्होंने विपक्षियों को चियर करना शुरू कर दिया.’

दोर्जी ने मैच में हैटट्रिक मारी और भूटान ने मैच को आसानी से 4-0 से अपने नाम कर लिया. मैच जीतने के बाद भूटान के प्लेयर्स ने मोंटसेराट टीम के इर्द-गिर्द घेरा बनाकर उनके देश का एक प्रसिद्ध गाना गाया. यह उनका तरीका था, अपने प्रतिद्वंद्वी को सम्मान देने का. बाद में दोनों टीमों ने एकसाथ बैठकर टीवी पर FIFA वर्ल्ड कप 2002 का फाइनल देखा. क्रैमर ने बाद में FIFA के सामने इस मैच को हर वर्ल्ड कप फाइनल के दिन कराने का प्रस्ताव रखा था. हालांकि FIFA ने इस पर कोई साफ जवाब नहीं दिया.

इस तरह अपनी टीम के प्रेम में पागल दो युवाओं ने वो कमाल कर दिया, जो पहले कभी नहीं हुआ. हम खेलप्रेम के तमाम क़िस्से सुनते हैं, लेकिन ऐसा क़िस्सा दोबारा सुन पाना लगभग असंभव होगा.


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