Submit your post

Follow Us

जब पाकिस्तानी तानाशाह ज़िया-उल-हक़ ने प्रोटेस्ट कर रहे हज़ारों लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलवाईं

साल 1977. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो की सत्ता छीन ली गई थी. छीनने वाले थे जनरल-ज़िया-उल हक़. पाकिस्तान का कट्टर तानाशाह. पूरे देश में मार्शल लॉ लागू हो गया था. जब लागू हुआ, तो मार सब पर पड़ी. ज़िया-उल-हक़ ने उद्योगपतियों की जमकर तरफदारी की, लेकिन कामगारों का जीना हराम हो गया. इन्हीं कामगारों में शामिल थे कॉलोनी टेक्सटाइल मिल के मजदूर.

कॉलोनी टेक्सटाइल मिल पाकिस्तान की सबसे मशहूर और मुनाफ़ा देने वाली मिलों में से एक थी. कॉलोनी ग्रुप के तहत आने वाली ये कंपनी 1946 में शुरू हुई थी. मुगीज़ अल शेख के जिम्मे इस मिल का मैनेजमेंट सौंपा गया था. शेख ज़िया उल हक़ के बेहद करीबी थे.

Zia Ul Haq Quora
ज़िया उल हक़ के कट्टरवाद की कहानियां काफी चर्चित हैं. इन्होंने पाकिस्तान में साड़ियां बैन करवा दी थीं. यही नहीं, अपने हर विरोधी को या तो कुचल दिया था या जेल में डाल दिया था. (तस्वीर: विकिमीडिया)

बात मिल के कामगारों की. लेबर पॉलिसी 1972 के तहत कामगारों को तीन महीने का बोनस मिलना तय हुआ था. वो इसकी मांग कर रहे थे. उनसे कहा गया कि जनवरी के अंत में उन्हें दो महीने का बोनस दे दिया जाएगा. लेकिन मजदूर नहीं माने. उन्होंने मिल में आना जारी रखा, लेकिन 29 दिसंबर से उन्होंने काम करना बंद कर दिया. मांग की कि जब तक उनका बोनस नहीं मिल जाएगा, तब तक वो काम नहीं करेंगे.

उस विरोध में डॉक्टर लाल खान भी मौजूद थे. उन्होंने बाद में इस विरोध के बारे में तफ़सील से बताया कि वहां हुआ क्या था. उनकी किताब है, Pakistan’s Other Story by Dr Lal Khan. उसके चैप्टर 9 में, जिसका शीर्षक है Dictatorship and Democracy – Regimes Changed, the Masses Continue to Suffer में ये बातें बताई गई हैं.

29 दिसंबर 1977 की सुबह पहली शिफ्ट में आने वाले कामगार मशीनों के पास तो गए, लेकिन काम नहीं लिया. जो नाइट शिफ्ट वाले थे, उन्होंने मिल छोड़कर जाने से मना कर दिया और वहीं कम्पाउंड में बैठ गए. कोई हिंसा नहीं हुई, लेकिन स्ट्राइक पूरी हो गई. बॉस ने गुंडे भेजे ताकि वो डरा-धमका कर स्ट्राइक ख़त्म करवा सकें. लेकिन कामगारों ने इनकार कर दिया. ट्रेन यूनियन के लीडर्स भी समझा-बुझाकर थक गए, लेकिन कोई असर नहीं हुआ. ये अगले तीन दिनों तक चलता रहा.

2 जनवरी 1978 को मिल के मालिक मुगीज़ की बेटी की शादी थी. ज़िया-उल-हक़ भी रावलपिंडी से वहां आया हुआ था. वहीं कामगारों को पता चला कि मालिक की बेटी की शादी में जो दहेज दिया जा रहा है, वो उन सबके कुल बोनस का तीन गुना था. वही बोनस जिसके लिए वो धरने पर बैठे थे.

Colony 1
कॉलोनी टेक्सटाइल्स को उस साल भी बेहतरीन मुनाफ़ा हुआ था. लेकिन इसके बावजूद कामगारों को उनका बोनस नहीं दिया गया था.  (तस्वीर: colonytextiles)

उस दिन दोपहर के खाने के बाद मिल के कामगार अपनी रोज की मीटिंग के लिए गेट के पास इकट्ठा हो रहे थे. किसी ने अफवाह उड़ाई कि वो लोग शादी के उत्सव को तहस-नहस करने आ रहे हैं. ज़िया-उल-हक़ के कानों तक ये बात पहुंची. गुस्से से लाल-पीले हुए ज़िया-उल-हक़ ने हुक्म दिया, कामगारों को कुचल देने का. गुंडे यही तो चाहते थे. जो पुलिस मिल को घेरे हुए बैठी थी, उसने और पैरा मिलिट्री फ़ोर्स ने हुक्म की तामील शुरू कर दी.

पैरामिलिट्री वालों ने सीधे कामगारों पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. इस अचानक हुए हमले में आपा खो बैठे कामगार चीख रहे थे. अपने साथियों की ख़ून से लथपथ लाशों के ऊपर से भागने की कोशिश कर रहे थे. इस कोशिश में कई लोग भी कुचले गए. हर जगह खून था. उन कामगारों के शरीर से रिसता हुआ, जिनका इकलौता जुर्म था अपने मूल अधिकारों की मांग करना.

तीन घंटे तक लगातार फायरिंग चली. शाम को छह बजते-बजते स्टेट की ताकतों ने मिल के कामगारों पर जीत हासिल कर ली थी. फैक्ट्री कम्पाउंड और लॉन में स्टेट की फोर्स ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने से रोक दिया था. जो लोग उनकी मदद करने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें भी पुलिस रोक रही थी. कई घायलों की तो इस वजह से मौत हो गई, क्योंकि उन्हें समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका और उनका खून काफी बह गया.

Jallianwala Into 700
जलियांवाला बाग़ में बैसाखी के दिन विरोध के लिए इकट्ठा हुए लोगों पर जनरल डायर ने गोलियां चलवा दी थीं. साल था 1919. (तस्वीर: इंडिया टुडे)

इस हत्याकांड के दौरान हुई मौतों का हिसाब प्रेस ने अलग दिया, कामगारों ने अलग. प्रेस के अनुसार 18 मौतें हुई थीं और 25 लोग घायल हुए थे. वर्कर्स एक्शन कमिटी ने कहा था कि 133 लोग मारे गए और 400 से ज्यादा लोग घायल हुए. स्टेट ने उलटा वर्कर्स एक्शन कमिटी के ही लोगों को हिरासत में ले लिया और उन पर मर्डर के चार्ज लगा दिए. जिनके नाम पर चार्ज लगे, उनमें से कई तो हत्याकांड में मारे जा चुके थे. जो लोग बचकर निकल पाए, उन्हें भी स्टेट ने काफी परेशान किया.

लेकिन कामगार इस हत्याकांड के बाद भी पीछे नहीं हटे. लड़ते रहे, अपने हक़ के लिए. मार्शल लॉ के तहत बनी जांच कमिटी को नकार दिया. कहा कि इंसाफ होगा, तो उन्हीं जजों और वकीलों द्वारा, जिन्हें वो खुद चुनेंगे. और जगह होगी फैक्ट्री का गेट.

इस के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए. नुसरत भुट्टो, नवाबज़ादा नसरुल्लाह खान जैसे राजनेताओं ने भी ज़िया-उल-हक़ की छिछालेदर की. SHO रजा खिज़र हयात और कॉन्स्टेबल हाकिम अली पर मिलिट्री कोर्ट में मुकदमा चलाया गया. जितने भी कामगार मारे गए थे, हर एक के परिवार वालों को 10 हजार रुपये का मुआवजा दिया गया. लेकिन इस हत्याकांड की याद इतिहास के सबसे घिनौने हिस्सों में से एक बनकर हमेशा के लिए कैद हो गई.


वीडियो: अशोक गहलोत सरकार कोटा में बच्चों की मौत की ज़िम्मेदारी क्यों नहीं ले रही?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

कौन है यूपी का डॉन बदन सिंह बद्दो, जो शेक्सपियर की ज़ुबान में जवाब देता है

पिछले साल पुलिस कस्टडी से भाग गया था.

सौरव गांगुली पर क्विज़!

सौरव गांगुली पर क्विज़. अपना ज्ञान यहां चेक कल्लो!

भारतीयों के हाथ में जो मोबाइल फोन हैं, उनमें चीन की कितनी हिस्सेदारी है

'बॉयकॉट चाइनीज प्रॉडक्ट्स' के ट्रेंड्स के बीच ये बातें जान लीजिए.

कॉन्ट्रोवर्सियल पेंटर एमएफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एमएफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद के बारे में तो गूगल करके आपने खूब जान लिया. अब ज़रा यहां कलाकारी दिखाइए.

'हिटमैन' रोहित शर्मा को आप कितना जानते हैं, ये क्विज़ खेलकर बताइए

आज 33 साल के हो गए हैं रोहित शर्मा.

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

मधुबाला को खटका लगा हुआ था इस हीरोइन को दिलीप कुमार के साथ देखकर

एक्ट्रेस निम्मी के गुज़र जाने पर उनको याद करते हुए उनकी ज़िंदगी के कुछ किस्से

90000 डॉलर का कर्ज़ा उतारकर प्राइवेट जेट खरीद लिया था इस 'गैंबलर' ने

उस अमेरिकी सिंगर की अजीब दास्तां, जो बात करने के बजाए गाने में ज़्यादा कंफर्टेबल महसूस करता था

YES Bank शुरू करने वाले राणा कपूर कौन हैं, जिन्होंने नोटबंदी को 'मास्टरस्ट्रोक' बताया था

यस बैंक डूब रहा है.

सात साल पहले केजरीवाल ने वो बात कही थी जो आज वो ख़ुद नहीं सुनना चाहते

बरसों पुरानी इस बात की वजह से सोशल मीडिया पर घेर लिए गए हैं.