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शहीद डीएसपी देवेंद्र मिश्र की 'चिट्ठी' कहां गुम है?

एक डीएसपी अपने ज़िले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को एक खत लिखता है. बताता है कि एक थानाध्यक्ष एक हिस्ट्रीशीटर अपराधी के साथ मिला हुआ है. इन दोनों पर कार्रवाई नहीं की गई तो कोई ‘गंभीर घटना हो सकती है.’ कुछ वक्त बीतता है और यही हिस्ट्रीशीटर घात लगाकर एक पुलिस पार्टी पर हमला करता है. चिट्ठी लिखने वाला डीएसपी हमले में सात और जवानों समेत शहीद हो जाता है. इस हिस्ट्रीशीटर के लिए पुलिस मूवमेंट की मुखबिरी करने का आरोप लगता है उसी थानाध्यक्ष पर, जिसका नाम शहीद डीएसपी ने अपनी चिट्ठी में लिखा था.

ये किसी फिल्म की पटकथा नहीं है. दावा किया जा रहा है कि कानपुर के विकास दुबे केस में यही हुआ है. अखबारों की भाषा में यूपी पुलिस एक ‘लेटर बम’ से जूझ रही है. सीओ बिल्हौर डीएसपी देवेंद्र मिश्र ने एक कथित चिट्ठी एसएसपी कानपुर नगर रहे अनंत देव को लिखी थी. इसमें विकास दुबे और चौबेपुर थानाध्यक्ष विनय कुमार तिवारी के बीच नज़दीकियों के चलते कोई ”गंभीर घटना” होने की आशंका जताई थी. विनय कुमार तिवारी पर ही पुलिस मूवमेंट की मुखबिरी करने का आरोप है. पुलिस कहती है कि चिट्ठी मिल नहीं रही है. इसीलिए चिट्ठी के साथ कथित लिखा जा रहा है.

‘चिट्ठी’ – थाने से सर्कल ऑफिस और एसएसपी दफ्तर तक

विकास दुबे का गांव बिकरू पड़ता है चौबेपुर पुलिस थाने की हद में. और चौबेपुर पुलिसा थाना पड़ता है सर्कल अफसर (CO) बिल्हौर के इलाके में. 3 जुलाई तक सीओ बिल्हौर के पद पर थे डीएसपी देवेंद्र मिश्र. देवेंद्र मिश्र रिपोर्ट करते थे SSP कानपुर नगर को. 16 जून तक इस पद पर थे अनंत देव तिवारी. इसके बाद वो प्रमोट होकर लखनऊ एसटीएफ में DIG बन गए.

देवेंद्र मिश्र ने अपने एसएसपी को 13 मार्च, 2020 को एक चिट्ठी लिखी. इसमें वो हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के खिलाफ चौबेपुर थाने में दर्ज हुए एक मामले का ज़िक्र करते हैं. बताते हैं कि विकास दुबे समेत कुछ दूसरे आरोपियों पर कई धाराएं लगाई गईं. इनमें से सबसे गंभीर धारा थी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 386. ये धारा जान से मारने या चोट पहुंचाने की धमकी देकर पैसा उगाहने के मामले में लगाई जाती है. अंग्रेज़ी में कहें तो एक्सटॉर्शन. डीएसपी देवेंद्र मिश्र ने चौबेपुर थानाध्यक्ष विनय कुमार तिवारी को निर्देश दिया कि विकास दुबे के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए.

देवेंद्र मिश्र का विकास दुबे के बारे में लिखा लेटर और उनके परिवार से मिलने पहुंचे चंद्रिका प्रशाद उपाध्याय.

कायदा कहता है कि विनय कुमार तिवारी को अपने डीएसपी का निर्देश मानना चाहिए था. अगले दिन डीएसपी मिश्र ने मामले की जानकारी सब इंस्पेक्टर अजहर इशरत से मांगी, जो कि मामले में जांच अधिकारी थे. एसआई अजहर ने बताया कि एक्स्टॉर्शन की धारा हटाकर पुरानी रंजिश का मामला कायम किया गया है. जब डीएसपी ने पूछा कि ऐसा कैसे हो गया, तो एसआई अजहर ने उन्हें बताया कि थानाध्यक्ष विनय कुमार तिवारी के कहने पर ऐसा किया गया.

इसके बाद डीएसपी देवेंद्र मिश्र ने अपने सीनियर अधिकारी एसएसपी अनंत देव को एक चिट्ठी लिखी, जिसमें ये पूरा मामला और विकास दुबे का आपराधिक इतिहास लिखा था. चिट्ठी का आखिरी पैराग्राफ सबसे गंभीर आरोप लगाता है,

”इस प्रकार ऐसे दबंग कुख्यात अपराधी के विरुद्ध थानाध्यक्ष द्वारा सहानुभूति बरतना व अब तक कार्यवाही न कराना श्री विनय कुमार तिवारी की सत्यनिष्ठा पूर्णतः संदिग्ध है. अन्य माध्यम से भी जानकारी हुई है कि श्री विनय कुमार तिवारी का पूर्व से विकास दुबे के पास आना-जाना व वार्ता करना बना हुआ था. यदि थानाध्यक्ष ने अपने कार्य प्रणाली में परिवर्तन न किया तो गंभीर घटना घटित हो सकती है. थानाध्यक्ष विनय कुमार तिवारी के विरुद्ध उपरोक्त अभियोग में 386 धारा हटवाने व अबतक कोई भी कार्यवाही न कराने के संबंध में कार्यवाही किये जाने की संस्तुति की जाती है.”

माने देवेंद्र मिश्र न सिर्फ पुलिस फोर्स में विकास दुबे की सेंध की तरफ इशारा कर रहे थे वो उसका सहयोग करने वाले पुलिस अफसर के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी कर रहे थे. और ये मांग अनंत देव तिवारी से की गई थी.

‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ अनंत देव तिवारी

यहां रुककर अनंत देव तिवारी के बारे में जानना ठीक होगा. अंत देव जून महीने में ही पुलिस उपमहानिरीक्षक, एसटीएफ बनाए गए थे. लेकिन एसटीएफ के साथ अनंत देव तिवारी का नाता पुराना है. 22 जुलाई, 2007 को एसटीएफ ने चित्रकूट के बीहड़ में कुख्यात डकैत ददुआ (शिव कुमार पटेल) को ‘एनकाउंटर’ में मार दिया. अगले साल अगस्त में इसी तरह ददुआ का शागिर्द ठोकिया (अंबिका पटेल) मारा गया. चित्रकूट में तैनात रहे अनंत देव इन दोनों मुठभेड़ों का हिस्सा रहे, तो उनका नाम हो गया. ददुआ के बाद से लगातार अनंत देव के करियर में बराबर ‘एनकाउंटर’ शब्द का ज़िक्र आता रहता है. जब अजय देवगन की फिल्म आ गई, तो अनंत देव को स्थानीय अखबारों ने ‘सिंघम’ भी लिखा. अनंत देव जब अगस्त, 2018 में कानपुर नगर में बतौर एसएसपी आए, तब भी उनकी छवि एक ”एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” पुलिस अफसर की ही थी.

बावजूद इसके विकास कुमार दुबे पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया. देवेंद्र मिश्र की चिट्ठी के पहले पैराग्राफ की आखिरी पंक्ति है,

”इस संबंध में मेरे द्वारा उपरोक्त घटना के संबंध में आपको भी बताया गया था.”

माने चिट्ठी लिखने से पहले भी देवेंद्र मिश्र ने विकास दुबे का ज़िक्र अनंत देव से किया था. अनंत देव जून, 2020 में एसटीएफ चले गए, उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) बनकर. और फिर वो अनहोनी घट ही गई जिसकी आशंका डीएसपी देवेंद्र मिश्र ने अनंत देव से जताई थी.

कानपुर नगर के नए एसएसपी दिनेश कुमार का कहना है कि वो चिट्ठी को लेकर जांच कर रहे हैं. आरंभिक जांच में सीओ बिल्लौर, एसपी देहात और एसएसपी कानपुर के दफ्तर में ऐसी कोई चिट्ठी नहीं मिली है. न ही एसओ (विनय कुमार तिवारी) के खिलाफ कोई अन्य रिपोर्ट दर्ज पाई गई है. लेकिन चिट्ठी की सत्यता मालूम करने के लिए जांच आगे बढ़ाई जा रही है, जिसके आधार पर पुलिस कार्रवाई करेगी.

अनंत देव.
ददुआ और ठोकिया के एनकाउंटर के बाद अनंत देव का पूरे यूपी में नाम हुआ.

लेकिन चिट्ठी को लेकर हंगामा नहीं थमा है. अनंत देव का कहना है कि चिट्ठी उनतक पहुंची नहीं थी. पुलिस भी अबतक अपने दफ्तरों इसे ढूंढ नहीं पाई है. चिट्ठी गायब करने का आरोप लगने लगा तो पुलिस के आला अधिकारियों को जांच में लगाया गया. लखनऊ आईजी लक्ष्मी सिंह 7 जुलाई को सीओ ऑफिस बिल्हौर पहुंचीं. अब कंप्यूटर की हार्डड्राइव लखनऊ ले जाई जाएगी, जहां रिपोर्ट तैयार होगी.

चिट्ठी में जिनका ज़िक्र है, उनका क्या हुआ?

चौबेपुर थाना अध्यक्ष विनय कुमार तिवारी – इनपर पुलिस मूवमेंट की मुखबिरी करने का शक जताया गया है. दबिश में शामिल रहे बिठूर के थानाध्यक्ष कौशलेंद्र सिंह कह चुके हैं कि विनय तिवारी ने टीम को अच्छी तरह ब्रीफ नहीं किया था. तो तिवारी ससपेंड किए गए हैं और जांच चल रही है.

अनंत देव – अनंत देव डीआईजी एसटीएफ की हैसियत से बिकरू कांड की जांच करने पहुंचे थे. लेकिन चिट्ठी का ज़िक्र आने के बाद से वो खुद सवालों के घेरे में हैं. ये पूछा जा रहा है कि देवेंद्र मिश्र की चिट्ठी के बाद उन्होंने विकास दुबे और विनय तिवारी पर क्या कार्रवाई की. अब उन तस्वीरों को लेकर भी बवाल हो रहा है जिनमें अनंत देव विकास दुबे के सहयोगी जय वाजपेयी के साथ नज़र आ रहे हैं. योगी आदित्यनाथ सरकार ने पहले उनके खिलाफ जांच बिठाई, फिर उन्हें पद से हटा दिया. अनंत देव को मुरादाबाद भेजा गया है जहां वो पीएसी में डीआईजी होंगे. इसी तरह के तबादलों को ‘शंट’ करना कहा जाता है.

***

पुनश्चः

विकास दुबे को पकड़ने में यूपी पुलिस ने ज़रूरत से कम उत्साह दिखाया, अब इस बात का कोई प्रमाण देना ज़रूरी नहीं रह गया है. उत्साह क्या होता है, ये जानने के लिए यूपी पुलिस को वो बयान सुनना चाहिए जो बिहार पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडे ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिया है. विकास दुबे पर डीजीपी पांडे कहते हैं,

” बिहार पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस अलग-अलग हैं क्या? पूरे देश की पुलिस एक है. यूपी में 8 पुलिस कर्मियों की हत्या करके (विकास दुबे) बिहार में घुस आएगा और यहां से सुरक्षित निकल जाएगा, ऐसे कैसे हो सकता है?”


वीडियो देखें : हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की बहू, पड़ोसी और डोमेस्टिक हेल्प को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया

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