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पुलिस के विरोध में घुटने पर बैठे ये लोग क्या साबित करना चाहते हैं?

बीती 25 मई को जॉर्ज फ्लॉयड नाम के एक ब्लैक व्यक्ति की हत्या हुई. मिनियापॉलिस शहर की पुलिस के हाथों निर्मम हत्या. जॉर्ज फ्लॉयड 2009 में लूट के एक मामले में गिरफ्तार हुआ था. अपनी सज़ा काटकर आम लोगों के बीच लौट आया था. सिक्योरिटी गार्ड का काम करता था. एक दिन सिगरेट खरीदने गया. दुकानदार ने आरोप लगाया कि जिस नोट से वो सिगरेट खरीद रहा था, वो जाली था. पुलिस को बुलाया. पुलिस वाले आए और फ्लॉयड को दबोचा. उसके बाद जो हुआ उसका वीडियो वायरल हो गया. वो कहता रहा कि ‘मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं’ मगर पुलिस वाला घुटने से उसकी गर्दन दबाता गया. फ्लॉयड की मौत हो गई.

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जॉर्ज फ्लॉयड. जिसकी छह साल की बेटी ने कहा, मेरे पिता ने दुनिया बदल दी.

इसके बाद से ही अमेरिका सहित पूरी दुनिया के कई देशों में पुलिस की इस हरकत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी हैं. इन विरोध प्रदर्शनों में एक बहुत ही अनोखी चीज हुई. कई प्रोटेस्ट करने वाले लोग घुटनों पर बैठकर विरोध जताने लगे. घुटनों पर बैठकर क्यों? इसके पीछे एक कहानी है.

सबसे पहले चलते हैं इतिहास में.

एक व्यक्ति हुए थे. मार्टिन लूथर किंग जूनियर. साल 1965 में नागरिक अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ने को जूनियर एक प्रोटेस्ट में निकले. जगह थी सेलमा, एलाबामा. ये अमेरिका का एक राज्य है. यहां लोगों का एक समूह इकठ्ठा हुआ. और सभी एक साथ, एक घुटने पर बैठ गए. इसके बाद जूनियर को जेल भेज दिया गया. मार्टिन लूथर किंग जूनियर को आज भी ब्लैक लोगों के अधिकारों, और अमेरिकी समाज में उनके सम्मान की लड़ाई के लिए याद किया जाता है.

इस घटना के 51 साल बाद, अमेरिका में एक और ब्लैक व्यक्ति ने ठीक वही किया. जो मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने उस दिन किया था. एक घुटने पर बैठ गया. अंतर बस ये था कि इस ब्लैक व्यक्ति को लाखों लोग एक साथ स्क्रीन पर देख रहे थे. उस एक आदमी की इस हरकत ने अमेरिका में भूचाल ला दिया. मौक़ा था नेशनल फुटबॉल लीग का मैच. 1 सितम्बर 2016. सबके सामने वो व्यक्ति राष्ट्रगान के समय एक घुटने पर बैठा, और उसकी तस्वीर और वीडियो वायरल होने लगे. आने वाले दिनों में उसके साथी खिलाड़ी भी उसके साथ जुट गए. ये व्यक्ति था कॉलिन कैपरनिक. अमेरिका का मशहूर फुटबॉल खिलाड़ी.

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कैपरनिक बीच में हैं. (तस्वीर: ट्विटर)

इस तरह के विरोध को अंग्रेजी में ‘टेकिंग अ नी’ कहा जाता है. नी यानी घुटना हैशटैग भी चलने शुरू हो गए.

क्या है इसका महत्त्व?

हाल के समय में इस पर ज्यादा बहस तभी शुरू हुई जब कॉलिन ने 2016 में अमेरिकी राष्ट्रगान के दौरान घुटने पर बैठ कर अपना प्रोटेस्ट जताया. जबकि आम तौर पर राष्ट्रगान के दौरान सभी सावधान की मुद्रा में खड़े रहते हैं. कॉलिन ने ऐसा क्यों किया? उन्होंने अपने मैच के बाद प्रेस कांफ्रेंस में बताया,

मैं किसी ऐसे देश के झंडे पर गर्व करने के लिए खड़ा नहीं होऊंगा जो ब्लैक लोगों और पीपल ऑफ कलर (श्वेत लोगों के अलावा जितनी भी नस्लों के लोग हैं) का दमन करता है. मेरे लिए ये फुटबॉल से बड़ा है, और अगर मैं नज़र फेर लेता हूं तो ये स्वार्थीपन कहा जाएगा. सड़कों पर लाशें पड़ी हैं, और लोगों को पेड लीव मिल रही है. वो मर्डर कर के भी बच जा रहे हैं.

कॉलिन का ये गुस्सा इसलिए फूटा था क्योंकि लगातार कई सालों से पुलिस फ़ोर्स द्वारा ब्लैक लोगों की जान ली जा रही थी. एक ब्लैक व्यक्ति को सरेआम इसलिए मार दिया गया क्योंकि वो हुडी (सिर ढंकने वाली जैकेट) पहनकर कहीं जा रहा था. एक ब्लैक किशोर को इसलिए मार दिया गया क्योंकि वो टॉय गन से खेल रहा था. माइकल ब्राउन, लक्वान मैकडॉनल्ड, फिलांदो कास्टील, तामीर राइस, एरिक गार्नर, सैन्ड्रा ब्लैंड. ये केवल चंद नाम हैं जो पुलिसिया बर्बरता की वजह से जान गंवा बैठे. ये सभी ब्लैक थे. अमेरिका में ब्लैक समुदाय के लिए आवाज़ उठाने को कॉलिन ने ये तरीका चुना. कई दूसरे स्पोर्ट्स खिलाड़ियों ने भी उनका समर्थन किया.

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अमेरिकी महिला फुटबॉल टीम की स्टार खिलाड़ी मेगन रैपिनो ने भी कॉलिन के समर्थन में एक घुटने पर बैठने का निर्णय लिया. (तस्वीर साभार: AFP)

उस समय बराक ओबामा प्रेसिडेंट थे. अमेरिका के पहले ब्लैक राष्ट्रपति. उन्होंने भी इसका समर्थन किया. हालांकि उनके बाद चुने गए प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप ने इसकी आलोचना की. उन्होंने कहा, कि खेल के मैदान पर कोई खिलाड़ी अगर ऐसा करता है, तो उसे फायर कर देना चाहिए. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि ये प्रोटेस्ट करने का सही तरीका नहीं है. ये पूर्व-सैनिकों और देश के झंडे का अपमान है.

लेकिन 2016 से लेकर अब तक, इस तरह के चैम्पियनशिप खेलों में खिलाड़ी लगातार अमेरिका में नस्लभेद और पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ प्रोटेस्ट करते रहे. 2018 में नेशनल फुटबॉल लीग ने घोषणा की थी कि मैदान पर मौजूद टीमों में से कोई भी अगर राष्ट्रगान के दौरान घुटनों पर बैठेगा, तो उसकी टीम को फाइन किया जाएगा. जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद उन्होंने हाल में ही स्टेटमेंट जारी किया. कहा,

‘हम नेशनल फुटबॉल लीग के लोग ये मानते हैं कि हम गलत थे. हम ये मानते हैं कि ब्लैक लाइव्स मैटर. देश भर में चल रहे विरोध ब्लैक खिलाड़ियों, कोच, फैन्स, और स्टाफ पर थोपी गई सदियों की चुप्पी, गैर बराबरी, और दमन का प्रतीक हैं. हम सुन रहे हैं’.

इस वक़्त जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के खिलाफ जहां भी प्रदर्शन हो रहे हैं, वहां प्रोटेस्ट करने वालों के कम से कम एक समूह ने ज़रूर घुटने पर बैठकर विरोध जताया है. कई जगहों पर पुलिस ने प्रोटेस्ट करने वालों से माफ़ी भी मांगी, और वो उनके सामने एक घुटने पर बैठे. इसकी कई ताकतवर तस्वीरें मीडिया में भी आईं, जिन्हें आप यहां देख सकते हैं.


वीडियो: जॉर्ज फ्लॉयड के लिए मैच के दौरान इंसाफ मांगा, तो फुटबॉलर को रेफरी ने येलो कार्ड दिखा दिया 

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