Submit your post

Follow Us

थाइलैंड के लोग महीनों से सरकार के खिलाफ़ प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?

आज आपको बताएंगे दक्षिणपूर्वी एशिया में बसे थाइलैंड की कहानी. हमारे यहां कई लोग थाइलैंड का नाम सुनकर ही बगलें झांकने लगते हैं. कइयों को थाइलैंड के नाम से केवल मसाज पार्लर याद आते हैं. मगर आज हम आपको थाइलैंड की एक अलग सी कहानी सुना रहे हैं.

ये कहानी है राजा बनाम जनता की. ये कहानी है सेना से आजिज़ आ गई जनता की. ये कहानी है एक ऐसे सिस्टम की, जहां एक कमीज के चलते एक आदमी को पागलखाने भेज दिया जाता है. इस कहानी में एक अरबपति कारोबारी भी है, जो अपना सबकुछ दांव पर लगाकर जनता के साथ खड़ा है. सबसे बढ़कर ये कहानी है आम लोगों की. जो अपने राजा और देश की सेना को उखाड़कर फेंकने पर आमादा हैं. ये क्या मामला है, विस्तार से बताते हैं आपको.

Thailand Map
साल घेरे में थाइलैंड. (गूगल मैप्स)

इस कहानी की शुरुआत करेंगे तीन घटनाओं से.

#1
21 फरवरी, 2020

इस रोज़ थाइलैंड के एक राजनैतिक दल को भंग कर दिया गया. इसका नाम था- फ्यूचर फॉरवर्ड पार्टी. शॉर्ट में, FFP. इस पार्टी के फाउंडर हैं- थानाथोर्न जुआनग्रून ग्रुआंगकिट. थानाथोर्न ‘थाइ समिट ग्रुप’ नाम की एक मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप के मालिक हैं. ये कंपनी थाइलैंड में कार के पार्ट्स बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है. थानाथोर्न ने मार्च 2018 में अपनी पार्टी बनाई थी. इनका मकसद था थाइलैंड में ऐसा भविष्य बनाना, जहां असली ताकत जनता के हाथों में हो.

Thanathorn Juangroongruangkit
थानाथोर्न जुआनग्रून ग्रुआंगकिट.

FFP के गठन के एक साल बाद ही थाइलैंड में आम चुनाव हुए. इसमें FFP को करीब 17 पर्सेंट वोट मिले. इस हिसाब से 750 सीटों की नैशनल असेंबली में उन्हें 81 सांसदों का कोटा मिलना चाहिए था. मगर देश की सत्ता ने ऐसा होने नहीं दिया. उसने फंडिंग में अनियमितता के आरोप लगाकर FFP को भंग कर दिया. अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ के मुताबिक, FFP पर की गई कार्रवाई राजनैतिक मंशा से प्रेरित थी.

#2
4 जून, 2020

38 साल के वांचालेआर्म सतसाकसित पिछले कुछ सालों से कंबोडिया की राजधानी फेनोम फेम में रह रहे थे. इस रोज़ सतसाकसित बाज़ार से कुछ सामान लेने घर से बाहर आए. एकाएक काले रंग की एक SUV उनके बगल में रुकी और उसमें बैठे लोगों ने सतसाकसित को अंदर खींच लिया. उस रोज़ के बाद सतसाकसित को किसी ने नहीं देखा. आशंका है कि उनकी हत्या कर दी गई.

कौन थे सतसाकसित? वो थाइलैंड के रहने वाले थे. एक ‘रेड शर्ट’ नाम की लोकतांत्रिक मुहिम से जुड़े हुए थे. 2014 में उन्हें थाइलैंड छोड़कर कंबोडिया आना पड़ा था. वो यहीं रहकर अपनी सरकार की आलोचना करते. इससे चिढ़कर थाइलैंड सरकार ने 2018 में सतसाकसित पर एक ख़ास धारा के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया. ये धारा कहलाती है- सेक्शन 112. इसके तहत, थाइ राजशाही की आलोचना करने वाले को 15 साल की जेल हो सकती है. सतसाकसित की ही तरह निर्वासन में रह रहे 29 थाइ ऐक्टिविस्ट्स पर ये केस दर्ज किया गया था. इनमें से कम-से-कम आठ लोग गायब कर दिए गए. कुछ की लाश मिली, कुछ की नहीं मिली.

Wanchalearm Satsaksit
वांचालेआर्म सतसाकसित.

#3
9 जुलाई 2020

इस रोज़ थाइलैंड में तिवागोर्न नाम के एक आदमी को जबरन पागलखाने भेज दिया गया. इसकी वजह थी तिवागोर्न की शर्ट. उनकी कमीज़ पर लिखा था- राजशाही व्यवस्था पर मेरा भरोसा ख़त्म हो गया है. तिवागोर्न ने ये शर्ट पहनकर अपनी कुछ तस्वीरें फेसबुक पर डालीं. इसके बाद पुलिस के कुछ अधिकारी उनके घर पहुंचे और उन्होंने तिवागोर्न को ले जाकर पागलखाने में पटक दिया.

ये तीनों घटनाएं थाइलैंड के हालात का आईना दिखाती हैं. इन्हीं हालात से आजिज़ आकर थाइलैंड की जनता ने बग़ावत कर दी है. जुलाई से ही वहां ख़ूब प्रोटेस्ट हो रहे हैं. इन प्रोटेस्ट्स की शुरुआत हुई बैंकॉक स्थित थम्मासात यूनिवर्सिटी से. देखते-ही-देखते बाकी कॉलेजों के छात्र भी इससे जुड़ गए. इस मुहिम ने एक बड़े जनविद्रोह का रूप ले लिया है.

Tiwagorn Withiton
तिवागोर्न.

क्या चाहते हैं ये प्रदर्शनकारी?

इनकी 10 मुख्य मांगें हैं. हम ये टेन-पॉइंट मेनिफेस्टो ब्रीफ में बता देते हैं आपको-

1. 2017 के संविधान से आर्टिकल 6 ख़त्म किया जाए. ये क़ानून राजा पर आरोप लगाने की इजाज़त नहीं देता. इसकी जगह एक नया क़ानून लाया जाए, जिसके तहत संसद को राजा द्वारा किए गए ग़लत कामों की जांच का अधिकार हो.

2. क्रिमिनल कोड का सेक्शन 112 ख़त्म हो. लोगों को अभिव्यक्ति की आज़ादी मिले. जनता को राजा की आलोचना का भी अधिकार हो. जिनको भी राजशाही की आलोचना के कारण निशाना बनाया गया, उनपर लगे केस वापस लिए जाएं.

3. 2018 में पास हुए क्राउन प्रॉपर्टी ऐक्ट को ख़त्म किया जाए. राजा की निजी संपत्ति और वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाली राजकीय संपत्ति में स्पष्ट बंटवारा किया जाए.

4. राष्ट्रीय बजट में राजा को दी जाने वाली रकम घटाई जाए. देश की आर्थिक हालत के मुताबिक ये रकम तय की जाए.

5. राजकीय दफ़्तरों की परंपरा ख़त्म की जाए. राजशाही से जुड़े ज़रूरी ऑफ़िसेज़ को संसद के अधीन लाया जाए. ग़ैर-ज़रूरी महकमों को भंग किया जाए.

6. राजशाही की समूची संपत्ति का ऑडिट हो. शाही चैरिटी फंड्स से डोनेशन्स का लेन-देन भी पूरी तरह ख़त्म किया जाए.

7. जनता द्वारा अपनी राजनैतिक राय देने, राजनैतिक मसलों पर अपनी अभिव्यक्ति जताने के खिलाफ़ राजपरिवार को जो विशेषाधिकार मिला हुआ है, उसे भी ख़त्म किया जाए.

8. राजशाही को बस एकतरफ़ा ग्लोरीफ़ाई करने वाले विज्ञापनों की परंपरा ख़त्म की जाए. एज़ुकेशन पॉलिसी में भी इससे जुड़ी जो चीजें हैं, वो भी ख़त्म हों.

9. राजशाही की आलोचना करने पर मारे गए लोगों के केस की निष्पक्ष जांच हो. ऐसी हत्याएं, जिनका संबंध किसी न किसी तरह से राजघराने के साथ जुड़ा है, उनकी भी जांच हो.

10. राजा अब किसी और सैन्य तख़्तापलट को वैधता न दे. वो किसी तख़्तापलट का समर्थन न करे.

Thailand Protest
प्रदर्शनकारियों ने टेन-पॉइंट मेनिफेस्टो के जरिए सरकार के सामने अपनी मुख्य मांगे रखीं हैं. (एपी)

अब इन डिमांड्स का थोड़ा बैकग्राउंड भी जान लेते हैं

थाइलैंड का पुराना नाम था- सिआम. कहते हैं, ये नाम संस्कृत भाषा के ‘श्याम’ शब्द से पड़ा था. यहां पहले एब्स्ल्यूट मोनार्की वाला सिस्टम था. माने, राजा ही सर्वेसर्वा है. 1932 में इस निरंकुश सिस्टम के खिलाफ़ तख़्तापलट हुआ. इसके बाद थाइलैंड में आई कॉन्स्टिट्यूशनल मोनार्की. माने सत्ता चलाने का काम संसद का होगा और राजा होंगे इस सत्ता के सांकेतिक मुखिया. इसके बाद सिआम में अपनी मूल संस्कृति को तवज्ज़ो देने की लहर चली. इसी लहर में 1939 में देश का नाम बदलकर रखा गया- थाइलैंड. थाइ भाषा में इसका मतलब होता है- आज़ाद लोगों का मुल्क.

नाम में भले आज़ादी हो, मगर थाइलैंड में आज़ादी वाला सिस्टम कभी रहा ही नहीं. 1932 वाले उस पहले सैन्य तख़्तापलट के बाद अब तक यहां 19 तख़्तापलट हुए. सबसे रीसेंट तख़्तापलट हुआ मई 2014 में. मिलिटरी कू के साथ-साथ यहां संविधान बदले जाने की भी रवायत रही है. 1932 से अबतक कुल 20 संविधान लागू किए जा चुके हैं यहां. सबसे रीसेंट कॉन्स्टिट्यूशन आया 2017 में.

देश की इस राजनैतिक अस्थिरता के पीछे सबसे बड़ा कारण है- सेना और मोनार्की की मिलीभगत. इस नेक्सस में दोनों पार्टियां अकूत पैसा कमाती आई हैं. यहां मिलिटरी के पास बहुत बड़ा बिज़नस अंपायर है. इसमें स्टेडियम्स से लेकर होटेल, गोल्फ कोर्स, हॉर्स रेसिंग ट्रैक्स, टीवी और रेडियो स्टेशन सब शामिल हैं. देश के बजट में सेना को ग़ुमनाम मद में अरबों रुपये मिलते हैं. कितनी रकम पता है? 2019 के बजट में ये रकम थी करीब 4,000 करोड़ रुपए. सेना ने कहां पैसे ख़र्च किए, इसका हिसाब लेने का अधिकार किसी को नहीं.

King Maha Vajiralongkorn
थाइलैंड के राजा महा वजिरालोंगकोर्न (एएफपी)

और राजा? उन्हें क्या मिलता है?

एक उदाहरण से समझिए. 2014 में तख़्तापलट करते हुए थाइलैंड की सेना ने एक वायदा किया. कहा कि अबकि ऐसा सिस्टम बनाएंगे कि दोबारा तख़्तापलट की ज़रूरत ही नहीं रहेगी. फिर सैन्य हुकूमत ने नया संविधान लाने की बात कही. इसपर रेफरेंडम हुआ. जनता ने नए संविधान को मंज़ूरी दे दी. ये सब होने के बाद आख़िरी समय में पता चला कि थाइलैंड के राजा ‘महा वजिरालोंगकोर्न’ ने संविधान में अपने मुताबिक कुछ क़ानून जुड़वा दिए हैं. इनमें से दो-तीन क़ानूनों के बारे में थोड़ा बता देते हैं आपको-

1. आर्टिकल 6- इसके तहत राजा पर किसी तरह का आरोप नहीं लग सकता.
2. सेक्शन 112- राजा की आलोचना करने पर 15 साल की क़ैद.
3. राजनैतिक संकट के समय शासन चलाने के लिए प्रतिनिधि अपॉइंट करने की पावर
4. राजपरिवार से जुड़ी सारी संपत्ति का समूचा कंट्रोल राजा के पास.

2019 का चुनाव विवादों में रहा

संविधान लागू होने के बाद मांग उठी चुनाव की. काफी हीला-हवाला देने के बाद 2019 में यहां आम चुनाव हुए. सैन्य सरकार के मुखिया थे जनरल प्रयुत चान-ओचा. 2014 में ओचा के नेतृत्व में ही तख़्तापलट हुआ था. इसके बाद से ही वो प्रधानमंत्री पद पर बने हुए थे. ओचा ने निष्पक्ष चुनाव का वायदा किया. इस वादे पर भरोसा करके थाइलैंड में दर्ज़नों नई पार्टियां बनीं. इनमें से ही एक थी फ्यूचर फॉरवर्ड पार्टी, जिसके बारे में हमने एपिसोड की शुरुआत में बताया था आपको. जनता ने इन पार्टियों को हाथोहाथ भी लिया.

Prayut Chan O Cha 3
सैन्य सरकार के मुखिया जनरल प्रयुत चान-ओचा. (एएफपी)

मगर फिर जब चुनाव की बारी आई तो वही पुराना ढर्रा. बड़े स्तर पर वोटर फ्रॉड और बोगस वोटिंग की शिकायतें आईं. इसके बावजूद संसद के निचले सदन में प्रो-डेमोक्रैटिक पार्टियों को बहुमत मिल गया. ऐसे में अपना रास्ता साफ करने के लिए सेना ने विपक्षी नेताओं पर मनमाने आरोप लगाए. कई नेताओं को डिस्क्वॉलिफाई कर दिया गया. उनकी पार्टियां भी भंग कर दी गईं.

रही-सही कसर पूरी की सेना द्वारा बनाए गए संविधान ने. इसमें सेना को कई विशेषाधिकार दिए गए थे. मसलन, संसद के ऊपरी सदन में 250 सांसदों की सीधी नियुक्ति सेना ही करेगी. ये ही सांसद प्रधानमंत्री को चुनेंगे. इस सिस्टम ने जनरल प्रयुत चान-ओचा को फिर से प्रधानमंत्री चुन लिया. इस तरह सेना और मोनार्की, दोनों ने एकबार फिर अपने हित सुरक्षित कर लिए.

ये सारी स्थितियां बताने के बाद दोबारा लौटते हैं थाइलैंड में हो रहे प्रोटेस्ट्स पर

इन प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे हैं थाइलैंड के छात्र और युवा. उनका कहना है कि थाइलैंड में लोकतांत्रिक बदलाव लाए बिना वो शांत नहीं बैठेंगे. इसके अलावा समलैंगिक और महिला अधिकार, कोरोना के चलते बिगड़ी इकॉनमी भी इन प्रोटेस्ट्स के अहम मुद्दों में शामिल है. लोगों का कहना है कि सिस्टम की क्रूरता के डर से अब और चुप नहीं बैठा जा सकता. भविष्य बचाने के लिए अब आर या पार का ज़ोर लगाना ही होगा. 20 सितंबर को इन प्रदर्शनकारियों ने शाही महल के बाहर एक तख़्ती भी गाड़ दी. इसपर लिखा था-

ये देश यहां की जनता का है. ये मुल्क किसी राजा की संपत्ति नहीं है. राजाओं ने हमेशा ही जनता को छला है.

बाद में प्रशासन ने ये तख़्ती हटा दी. अब ये प्रदर्शनकारी 14 अक्टूबर को हड़ताल बुलाने की अपील कर रहे हैं. ये हड़ताल 1973 में हुए एक छात्र आंदोलन की सालगिरह पर बुलाई जा रही है.

This Country Belongs To The People And Is Not The Property Of The Monarch As They Have Deceived Us.
शाही महल के बाहर तख़्ती. (एपी)

प्रदर्शनकारी शांति से विरोध कर रहे हैं और सरकार ने इमरजेंसी लगा दी है

इन प्रदर्शनों की सबसे सुंदर बात है इनका शांतिपूर्ण स्वभाव. लोग क्रिएटिव तरीकों से मोनार्की की बेअदबी कर रहे हैं. मसलन, थाइलैंड में सार्वजनिक स्थानों पर दिन में दो बार राष्ट्रगान बजाने की परंपरा है. जब भी ऐंथम बजता है, तब प्रदर्शनकारी जहां होते हैं वहीं रुक जाते हैं. वो तीन उंगली से सैल्यूट देते हुए राष्ट्रगान गाते हैं. ये मुद्रा वहां राजनैतिक विरोध जताने का सबसे बड़ा प्रतीक बन गई है. इसके अलावा जिन बैंकों में राजा की हिस्सेदारी है, उनका भी बहिष्कार कर रहे हैं लोग.

इन प्रदर्शनों में शामिल कई लोगों पर राजद्रोह का केस दर्ज किया गया है. विद्रोह कुचलने के लिए देश में इमरजेंसी लगा दी गई है. सैकड़ों प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए हैं. मगर इसके बावजूद प्रोटेस्टर्स पीछे नहीं हट रहे. बीते कई दशकों से यहां मोनार्की और सेना के आगे इतना बड़ा चेलैंज नहीं आया.


विडियो- चीन की मदद से परमाणु हथियार बना सकता है सऊदी अरब

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

करीना कपूर के फैन हो तो इ वाला क्विज खेल के दिखाओ जरा

बेबो वो बेबो. क्विज उसकी खेलो. सवाल हम लिख लाए. गलत जवाब देकर डांट झेलो.

रवनीत सिंह बिट्टू, कांग्रेस का वो सांसद जिसने एक केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे का प्लॉट तैयार कर दिया!

17 सितंबर को किसानों के मुद्दे पर बिट्टू ऐसा बोल गए कि सियासत में हलचल मच गई.

मोदी जी का बड्डे मना लिया? अब क्विज़ खेलकर देखो उनको कितना जानते हो मितरों

अच्छे नंबर चइये कि नइ चइये?

KBC में करोड़पति बनाने वाले इन सवालों का जवाब जानते हो कि नहीं, यहां चेक कर लो

करोड़पति बनने का हुनर चेक कल्लो.

विधायक विजय मिश्रा, जिन्हें यूपी पुलिस लाने लगी तो बेटियां बोलीं- गाड़ी नहीं पलटनी चाहिए

चलिए, विधायक जी की कन्नी-काटी जानते हैं.

नेशनल हैंडलूम डे: और ये है चित्र देखो, साड़ी पहचानो वाली क्विज

कभी सोचा नहीं होगा कि लल्लन साड़ियों पर भी क्विज बना सकता है. खेलो औऱ स्कोर करो.

सौरव गांगुली पर क्विज़!

सौरव गांगुली पर क्विज़. अपना ज्ञान यहां चेक कल्लो!

कॉन्ट्रोवर्सियल पेंटर एमएफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एमएफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद के बारे में तो गूगल करके आपने खूब जान लिया. अब ज़रा यहां कलाकारी दिखाइए.

'हिटमैन' रोहित शर्मा को आप कितना जानते हैं, ये क्विज़ खेलकर बताइए

आज 33 साल के हो गए हैं रोहित शर्मा.

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.