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वो तीन लोग, जिन्हें शामिल करने की रवि शास्त्री ने ज़िद पकड़ ली थी

रवि शास्त्री को मनमाफिक सपोर्ट स्टाफ मिल गया है. राहुल द्रविड़ और जहीर खान के नामों की चर्चा के बीच, शास्त्री ने अपने भरोसेमंद लोगों को जगह दी है. मगर ये शास्त्री का कॉन्फिडेंस भी है कि वो अगले दो साल का रोडमैप कुछ इसी तरह बनाना चाह रहे हैं कि बड़े मौकों पर मिलने वाली सक्सेस का सारा क्रेडिट उन्हें और कोहली को ही मिले. साथ ही ये भी फैक्ट है कि शास्त्री के सपोर्टिंग स्टाफ में सब वो लोग हैं, जो मीडिया के सामने बेहद कम आते हैं. भारत अरुण को बॉलिंग कोच, संजय बांगड़ को बैटिंग और आर श्रीधर को फील्डिंग कोच की जिम्मेदारी के साथ शास्त्री ने 2019 के वर्ल्ड कप पर निशाना साध लिया है. जानिए कौन हैं ये लोग और क्यों है शास्त्री को इन पर इतना भरोसा?

 

भारत अरुण

 

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श्रीलंका दौरे से पहले 19 जुलाई को कोहली और शास्त्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कई सवालों के जवाब दिए. बॉलिंग कोच पर भारत अरुण के बारे में वो बोले, “इस इंसान का 15 साल का एक्सपीरियंस है कोचिंग का. इस टीम का लगभग हर खिलाड़ी अरुण को जानता है कि वो कितनी मेहनत करता है हर खिलाड़ी पर. बाकी आगे आने वाला टाइम बताएगा वो कौन है.”

घरेलू क्रिकेट में बतौर मीडियम पेसर और लोअर ऑर्डर बैट्समैन रहे अरुण इंटरनेशनल क्रिकेट में कुछ खास नहीं कर पाए.आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में पैदा हुए अरुण के नाम इंटरनेशनल किक्रेट में सिर्फ 5 विकेट हैं. दो टेस्ट खेले और चार वनडे. 80 के दशक में कपिल देव के साथ इन्हें आजमाया गया. अरुण को टीम इंडिया में खेलने का मौका मिला साल 1986 में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में. पहले मैच में 76 रन देकर 3 विकेट लेकर थोड़ा चर्चा में आए थे. वहीं वनडे में भी इंडिया की तरफ से खेलते हुए शारजाह में तीन मैच खेले जिसमें कुछ खास नहीं कर पाए. तमिलनाडु प्रीमियर लीग में भी एक टीम के बॉलिंग कोच रहे. साल 1986-87 में दिलीप ट्रॉफी में साउथ जोन के लिए खेलते हुए अरुण ने छठे विकेट के लिए वीवी रमण के साथ रिकॉर्ड 221 रन की पार्टनरशिप भी की. इसमें अरुण ने 149 रन बनाए. फिर तमिलनाडु के लिए खेलते हुए रणजी ट्रॉफी भी 1987-88 में जीती.

रवि शास्त्री के फेवरेट

ये पहली बार नहीं है कि भारत अरुण को टीम के साथ जोड़ा गया है. पिछली बार 2014 में जब रवि शास्त्री टीम डायरेक्टर बने, भारत अरुण को बतौर बॉलिंग कोच चुना गया. 2019 वर्ल्ड कप को ध्यान में रख कर रवि शास्त्री ने अरुण को चुना है. प्लेयर्स के बीच फ्रेंडली माहौल बनाने के लिए पॉपुलर अरुण श्रीलंका टुअर से वापसी करेंगे जो 26 जुलाई को शुरू हो रहा है. अरुण ने टीम में  उमेश यादव, वरुण एरॉन, मोहम्मद शमी, भुवनेश्वर कुमार और रविंद्र जडेजा की बॉलिंग पर खूब काम किया है.

कोचिंग एक्सपीरियंस

  • साल 2002 में पहली बार तमिलनाडु के कोच बने और अगले चार साल में दो बार तमिलनाडु की टीम (2003 और 2004) में रणजी फाइनल में पहुंची.
  • साल 2008 में नेशनल क्रिकेट अकेडमी में चीफ बॉलिंग कोच बने और इंडिया-ए ने ऑस्ट्रेलिया में हुई चार देशों की सीरिज में अच्छा परफॉर्म किया.
  • फिर अंडर-19 टीम के कोच बने और 2012 के अंडर-19 वर्ल्ड कप समेत 8 सीरिज में लगातार जीत हासिल की.

रामकृष्णन श्रीधर

 

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ये टीम इंडिया का वो चेहरा है जो हमेशा कैमरे के पीछे ही रहता है. खूब मेहनत करता है टीम की फील्डिंग पर. टीम के साथ प्रैक्टिस ड्रिल्स में नई इनोवेटिव आइडियाज के साथ फील्डिंग की ट्रेनिंग करवाते हैं. पिछले तीन साल से टीम इंडिया के साथ जुड़े हैं और रवि शास्त्री के साथ-साथ अनिल कुंबले के साथ भी काम करने का एक्सपीरियंस है. इन्हें पहली बार अगस्त 2014 में रवि शास्त्री ने अपनी टीम में शामिल किया था और मार्च 2016 तक ये जिम्मेदारी संभाली. फिर कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के दौरों से दूर रहे. उस दौरान अभय शर्मा को फील्डिंग कोच की जिम्मेदारी दी गई थी. मगर जैसे ही अनिल कुंबले को हेड कोच बने,  आर श्रीधर को वापस लाया गया.

अपने दौर में बेहतरीन फील्डर रहे श्रीधर लेफ्ट हैंड स्पिनर रहे हैं. हैदराबाद के लिए 35 फर्स्ट क्लास मैच खेल चुके श्रीधर ने 1989 से 2001 के बीच साउथ जोन की तरफ से क्रिकेट खेला. टीम इंडिया के साथ पिछले तीन सालों से काम करते हुए श्रीधर ने फील्डिंग लेवल को काफी ऊपर उठाया है. टीम में यंग खिलाड़ियों के साथ श्रीधर ने खूब एक्सपेरिमेंट किए हैं जिसके चलते इंडियन टीम ने विदेशी दौरों के साथ साथ घरेलू मैदानों पर भी जबरदस्त फील्डिंग की है. इससे पहले नेशनल क्रिकेट अकेडमी में भी कुंबले की डायरेक्टरशिप में भी काम कर चुके हैं.

कोचिंग एक्सपीरियंस

  • 2001 में अपना कोचिंग करियर शुरू किया और बतौर असिस्टेंट कोच अंडर-19 टीम को 2014 वर्ल्ड कप में जिताया.
  • इंडिया-ए के भी फील्डिंग कोच रहे हैं.
  • 2010 में किंग्स इलेवन पंजाब के फील्डिंग कोच बने.

 

संजय बांगड़

 

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रवि शास्त्री के साथ जो टीम 2014 में आई थी उसी का हिस्सा थे संजय बांगड़. ये भी उसी तरह का इंसान है जो कैमरे के पीछे अहम रोल अदा करता है. अच्छे रिकॉर्ड और रैपो के चलते कुंबले के टाइम भी इन्हें टीम के साथ बतौर बैटिंग कोच रखा गया और अब शास्त्री के वापस आने के बाद भी उन्हें बतौर असिस्टेंट कोच रखा गया है.

इंडिया के लिए 12 टेस्ट और 15 वनडे मैच खेले बांगड़ ऑलराउंडर रहे हैं और आईपीएल में भी 12 मैच खेले थे. महाराष्ट्र में पैदा हुए बांगड़ ने रेलवे के लिए अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की और 2001 में मोहाली में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट में डेब्यू किया. साल 2004-05 में बतौर कैप्टन रेलवे को रणजी चैंपियन बनाया. IPL के पहले ही सीजन में बांगड़ डेकन चार्जर्स और फिर कोलकाता नाइटराइडर्स के लिए खेले. बतौर बैटिंग कोच टीम के साथ रहे बांगड़ महाराष्ट्र के किसान परिवार से आते हैं और आज भी इनके दो खेत हैं. लाइमटाइट से दूर रहकर मैदान पर खिलाड़ियों के साथ पसीना बहाने वाले बांगड़ शांत रहते हैं. खिलाड़ियों में रैपो भी अच्छी है. मगर अब अगले दो सालों में टीम के साथ विदेशी दौरों पर परफॉर्मेंस पर सबकी नजर रहेगी. साथ ही बांगड़ को खुद की पोजिशन को भी जस्टिफाई करना है.

रवि शास्त्री ने सचिन तेंडुलकर को बतौर टीम कंसल्टेंट शामिल करने की भी बात कही है. मगर इसकी उम्मीद कम है कि सचिन ये ऑफर स्वीकार करें. बोर्ड की नई पॉलिसी के अनुसार एक टाइम पर एक ही पोजिशन संभाली जा सकती है. और सचिन मुंबई इंडियंस के मैंटॉर हैं.

कोचिंग एक्सपीरियंस

  • कोच के तौर पर शुरुआत इंडिया-ए से की.
  • फिर 2010 में IPL की कोच्चि टस्कर्स के कोच बनाए गए.
  • फिर 2014 में किंग्स इलेवन पंजाब के कोच की जिम्मेदारी मिली और टीम IPL-7 के फाइनल में पहुंची.

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