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युवराज सिंह वो गर्लफ्रेंड है जो छोड़कर चली गई है और अब सपने में आती है

युवराज सिंह ने आईपीएल ऑक्शन पर खुलकर बात की है.

फाइनली ये तय हो गया कि इंडियन क्रिकेट टीम 1 जून से शुरू होने वाली आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी में खेलेगी. इंडिया ने अपनी टीम डिक्लेयर कर दी है और आईपीएल के बाद सोनी छोड़कर स्टार स्पोर्ट्स चैनल रीचार्ज करवाने का इंतज़ाम कर लेना ही समझदारी का परिचय होगा.

चैम्पियंस ट्रॉफी को मिनी-वर्ल्ड कप कहा जा सकता है और वर्ल्ड कप की ही तर्ज पर ये टूर्नामेंट भी हर चार साल पर खेला जाता है. हालांकि ये 4 साल वाली बात 2008 से लागू हुई. जब पिछले ही साल (2007 में) खेले गए टी-20 वर्ल्ड कप की वजह से आईसीसी टूर्नामेंट्स में आई बाढ़ की वजह से 2006 के बाद इसे 2009 में करवाया गया. 2006 तक इसे हर दो साल पर करवाया जाता था. 2009 में इसे ऑस्ट्रेलिया ने जीता. 2013 में इंडिया ने. इंडिया की टीम इस बार नई कप्तानी में ट्रॉफी डिफेंड करने उतरेगी. 4 जून को इंडिया का मैच पाकिस्तान से होना तय हुआ है.

टीम में जो लोग शामिल किये गए हैं और जो इंग्लैंड के वीज़ा पर मुहर लगवा कर पौने दस घंटे की फ्लाइट में बैठेंगे वो नाम हैं:

इसके अलावा ऋषभ पन्त, दिनेश कार्तिक, सुरेश रैना, कुलदीप यादव और शारदुल ठाकुर स्टैंड-बाय पर रखे गए हैं. इन सभी को नेशनल क्रिकेट अकेडमी में ट्रेनिंग करवाई जाएगी और बीसीसीआई इनके वीज़ा अप्लिकेशन पर भी काम करवा लेगी जिससे अंतिम समय में किसी प्लेयर के रिप्लेसमेंट के लिए ज़रुरत पड़ती है तो इन 5 में से जो ज़रूरी हो उसे भेजा जा सके.

खैर, अच्छी बात ये है कि आईपीएल के दम पर टीम में सेलेक्शन नहीं किये गए हैं. 20 ओवेर के ताबड़तोड़ खेल और 50 ओवर के खेल में बहुत फ़र्क होता है. केदार जाधव को बस बढ़िया आईपीएल परफॉरमेंस का फ़ायदा मिला है जो कि इससे पहले टीम इंडिया में इंग्लैंड के खिलाफ़ सीरीज़ में बढ़िया खेलकर अपनी पोज़ीशन बनाये रखने की जद्दोजहद में लगे हुए थे. 15 मैचों में जाधव ने 58.50 के ऐवरेज से रन बनाये हैं.

लेकिन अभी भी जो बात नहीं समझ में आती है, वो है युवराज सिंह. युवराज सिंह की टीम में अभी भी जगह है तो कैसे है, ये बात समझ में आनी काफी मुश्किल है. ये बात तब और अपचनीय हो जाती है जब गौतम गंभीर को टीम में जगह नहीं दी जाती है. गौतम गंभीर इस वक़्त वो प्लेयर है जिसने हर फॉर्मैट में खुद को साबित किया हुआ है. एकमात्र चीज जो गंभीर के ख़िलाफ़ जाती है वो है उनका हालिया वन-डे डोमेस्टिक रिकॉर्ड. 5 मैचों में 166 रन. इसके साथ ही दिल्ली के कोच के साथ हुआ झगड़ा जिसमें ये तक कहा गया कि गंभीर ने उन्हें गालियां भी दी थी. हालांकि इसे गंभीर ने सिरे से नकार दिया था और एक इन्डिपेपेंडेंट इन्क्वायरी की मांग की थी.

गौतम गंभीर आईपीएल में चरम पर खेल रहे हैं. गंभीर के मामले में ये साबित होता है कि वो बढ़िया फॉर्म में हैं. नए खिलाड़ियों को आईपीएल की परफॉरमेंस पर वन-डे साइड में ले लेना घातक हो सकता है लेकिन गंभीर एक भयानक तरीके से मांजे जा चुके प्लेयर हैं. उनका आईपीएल में फॉर्म में होना ये सूचक है कि उनमें क्रिकेट ज़िन्दा है और बाकायदे चिंघाड़ रहा है. ऐसे में उन्हें टीम से बाहर रखा जाना उतना ही लॉजिकल लग रहा है जितना बाहुबली फ़िल्म में फ़िज़िक्स के सिद्धांत.

वहीं युवराज सिंह को टीम का हिस्सा बनाया गया है. एक बार फिर. युवराज सिंह उस एक्स-गर्लफ्रेंड की तरह है जिसे हम भूल ही नहीं पाते हैं. उसके मोहल्ले का भी नाम कोई ले दे तो ऐसे रोंगटे खड़े होते हैं जैसे उस मोहल्ले की चौकीदारी की वेकेंसी में आप के ही नाम की पर्ची निकली हो.

 

युवराज सिंह ने 2013 में 18 मैच खेले. 276 रन बनाये. जिसमें एक भी सेंचुरी नहीं. 61 रन का हाई स्कोर. 19.71 का ऐवरेज और 2 विकेट लिए. इसके बाद 2014, 2015, 2016 में कोई मैच नहीं खेला. एक भी नहीं. इसलिए एक्सपीरियंस के कॉलम में कट्टम ही लगता दिखता है. इसके बाद 2017 में 3 मैच खेले. इसमें एक मैच में युवराज के बल्ले से 150 रन निकले. धोनी, जिसे इनके बाप ने भूखे मरने की (बद)दुआएं दी थीं, के साथ एक बड़ी पार्टनरशिप बनाई. मैच के साथ दिल भी जीता. लेकिन बाकी दो मैचों में फिर से 15 और 45 का स्कोर. दोनों ही लो-स्कोरिंग (युवराज के लिए) मैचों में कुछ एक शॉट्स को हटा दें तो वो कतई कॉन्फिडेंट नहीं लग रहे थे. न स्पिन के खिलाफ़ और न ही पेस के खिलाफ़. इसके ऊपर उन्हें इंग्लैंड में खेलना होगा. जहां गेंद ज़्यादा स्विंग होती है और कान के बगल से सट्ट की आवाज़ के साथ निकलती है.

युवराज सिंह को हमने लपेट रखा है. और युवराज के लिए ये बात दिल पर पत्थर रख कर कहनी पड़ती है. ये वही इंसान है जिसने खून की उल्टियां करते हुए हमें वर्ल्ड कप जिताया था. जिसने वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ़ मारी सेंचुरी में बीच मैदान में अपने पेट के अन्दर मौजूद बीमारी को उलट दिया था. साल भीतर युवराज सिंह ने अपने जीवन का सबसे बड़ा टूर्नामेंट खेला – कैंसर के खिलाफ़. वन-ऑन-वन. बाल झड़ गए. लेकिन युवराज आज घुंघराले बालों के साथ आज नारंगी और काली जर्सी में पॉइंट्स में मौजूद दीखते हैं. अंतर बस इतना है कि सवा मील हवा में उठ कर कैच पकड़ लेने वाला युवराज आज गेंद को पकड़ने में हिचकता है, फ़म्बल करता है. वो युवराज जिसकी लम्बाई की डेढ़ गुनी रेडियस से गेंद के किसी भी हालत में न जा पाने की गारंटी ली जाती थी, आज कॉन्फिडेंट नहीं दिखता है. स्टंप्स पर कवर करने के लिए आता है और कीपर का थ्रो पकड़ने में गड़बड़ी कर देता है. हम ये न भूलें कि हमने फॉर्म में चल रहे सहवाग, सचिन और गंभीर को रोटेशन पॉलिसी के नीचे ला खड़ा किया था क्यूंकि ऑस्ट्रेलिया के बड़े मैदानों में वो सामने वाली टीम को एक के दो कर लेने की परमीशन दे देते थे. आईपीएल 2017 में भी युवराज ने जिन टीमों के ख़िलाफ़ बड़ा स्कोर बनाया है वो उन टीमों की लिस्ट में हैं जिन्हें काफी पीटा गया है.

अब ऐसा हो गया कि युवराज के मोह को त्यागना होगा. थोड़ा रियल सोचना होगा. 6 गेंदों पर 6 छक्कों के रिपीट टेलीकास्ट की चाह छोडनी होगी. यूट्यूब पर मौजूद है, उसे ही देखकर संतोष किया जाए तो बेहतर है. एक्स-गर्लफ्रेंड के सपने भले ही काफी रोशनाई छोड़कर जाते हों लेकिन आंखें खुलने पर हमें असलियत मालूम चल ही जाती है.

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