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तस्वीर: विस्थापित मज़दूरों की तस्वीरों के बीच इन मांओं की तस्वीरें तो और जड़ कर देती हैं

होंगे दुनिया के पास आवाज़ से तेज़ चलने वाले हवाई जहाज़. मछलियों से तेज़ तैरने वाली पनडुब्बियां. चांद तक पहुंच जाने वाले रॉकेट. लेकिन मेरी मां को नहीं मालूम. मुझे कोख में लिए पैदल निकल पड़ी घर के लिए. मौत को हराने की तरक़ीबें खोजते आपके अनगिनत अस्पताल, हम दोनों खोजते रहे. दर्द उठा, तो मां बैठ गई सड़क किनारे. आपकी तमाम खोजों-आविष्कारों से दूर, वहीं सड़क किनारे मां ने मुझे पहली दफ़े हथेलियों पर उठाया. मुझे गोद में लेकर मां फिर चल पड़ी. वो जानती है रुके रहने पर भी कोई नहीं आएगा. मैं ईश्वर को चिट्ठी लिख रहा हूं, ‘तुम्हारी दुनिया वैसी नहीं, जैसा तुम बताते थे’

होंगे दुनिया के पास आवाज़ से तेज़ चलने वाले हवाई जहाज़.
होंगे दुनिया के पास आवाज़ से तेज़ चलने वाले हवाई जहाज़.

नींद और होश की सरहद पर सपनों की तस्करी करती मेरी मां अकेली नहीं है. और भी माएं हैं. जिनकी चप्पलें घिस गईं, पैरों में छाले पड़ गए. लेकिन वो अपने बच्चों के साथ लौट रही हैं घर.

‘तुम्हारी दुनिया वैसी नहीं, जैसा तुम बताते थे’
‘तुम्हारी दुनिया वैसी नहीं, जैसा तुम बताते थे’

मुंबई से विदर्भ, हैदराबाद से ओडिशा, दिल्ली से बनारस … सड़कें हैं कि ख़त्म होने का नाम नहीं लेतीं. अपने-अपने गांवों, क़स्बों से जब थाली, हाथ वाले पंखे और बक्से लेकर चली थीं ये माएं, तो सड़कें और पटरियां इतनी लंबी नहीं थीं क्या?

संगमरमर पे चलते, मशीन पर भागते पैर.
संगमरमर पे चलते, मशीन पर भागते पैर.

धीरे-धीरे आगे बढ़ रही इन औरतों के पांव भारी हैं. रोटी हाथ में हो तो हवा से हल्की, और ना हो तो सारी धरती से भारी होती है. पांव में उन्हीं ग़ायब हो चुकी रोटियों का भार लिए ये माएं कब तक चलती रहेंगी?

मुंबई से विदर्भ, हैदराबाद से ओडिशा, दिल्ली से बनारस ... सड़कें हैं कि ख़त्म होने का नाम नहीं लेतीं.
मुंबई से विदर्भ, हैदराबाद से ओडिशा, दिल्ली से बनारस … सड़कें हैं कि ख़त्म होने का नाम नहीं लेतीं.

इंसान ने बना ली हैं वो घड़ियां, जो मापती हैं क़दम. संगमरमर पे चलते, मशीन पर भागते पैर. इन औरतों के हाथ में बांध कर तो देखो, रो पड़ेंगी वो घड़ियां. पंखा अपनी उम्र भर चलता है, लेकिन पहुंचता कहां है? कहीं नहीं. बस यूं समझ लीजिए कि सरकार बहादुर के सिर पर बंधा पंखा हैं ये मजदूर औरतें. उम्र भर चलें तो भी कहां पहुंचेंगी? कहीं नहीं.

मुझे गोद में लेकर मां फिर चल पड़ी. वो जानती है रुके रहने पर भी कोई नहीं आएगा.
मुझे गोद में लेकर मां फिर चल पड़ी. वो जानती है रुके रहने पर भी कोई नहीं आएगा.

Tasveer: Migrant Labours के बीच इन मांओं की तस्वीरें तो और जड़ कर देती हैं-

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